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Saturday, May 13, 2017

मदर्स डे: भगवान का दूसरा नाम ‘मां’

मदर्स डे: भगवान का दूसरा नाम ‘मां’

‘उसको नहीं देखा हमने कभी, पर उसकी जरूरत क्या होगी,
ए मां तेरी सूरत से अलग भगवान की मूरत क्या होगी’



कहते हैं ईश्वर सभी जगह उपस्थित नहीं रह सकता इसीलिए उसने धरती पर मां को भेजा जो हर मुश्किल की घड़ी में हमारे साथ रहती है। ऐसी ही माताओं को समर्पित है मदर्स डे, हालांकि मां के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए एक दिन तो क्या एक सदी भी कम है। उन्हें हर पल यह अहसास दिलाएं कि वह हमारे जीवन में बेहद सम्माननीय हैं, बेहद खास हैं।

मां के स्नेह भरे अहसास के इज़हार के लिए आपने भी यकीनन उनके लिए कुछ स्पेशल प्लान किया होगा, अगर नहीं किया, तो अभी कर लें। मां कभी अपने बच्चों से अपने प्यार के बदले किसी भी चीज़ की ख्वाहिश नहीं रखती, लेकिन अपने प्यार और उनके प्रति अपने अहसास को अभिवयक्त करने के लिए आप मदर्स डे पर अपनी मां को कोई ऐसा गिफ्ट दें जिसे कभी भुलाया न जा सके।

स्पेशल ट्रीटमेंट दें

आज उन्हें किसी रानी-महारानी जैसे फील करवाएं। वह जो भी चाहें या कहें उसे बस तुरंत कर दो। मां को उनकी पसंद चीजों जैसे परफ्यूम, साड़ी, सूट, गोल्ड या डायमंड ज्यूलरी, मनपसंद चॉकलेट्स, फूल इत्यादि से सजी बास्केट भी गिफ्ट कर सकते हैं।

खुद खिलाएं खाना

मदर्स डे पर उन्हें थोड़ा देर तक सोने दें और किचन व घर के कामों से उन्हें पूरी तरह आराम दे दें। अगर आपको अपनी मां की मनपसंद डिश बनानी आती है, तो आप उन्हें इसे बनाकर अपने हाथों से खिला सकते हैं, जैसे बचपन में मां आपको खिलाया करती थीं। अगर खाना बनाना नहीं आता, तो कहीं किसी रेस्तरां में ले जाकर भी आप उनको उनकी पसंद की लजीज डिशेज टेस्ट करवा सकते हैं।

पूरा दिन साथ बिताएं

मां के साथ आज पूरा दिन बिताएं और अपने बचपन की मीठी यादें उनके साथ ताजा करें। बचपन में मां के साथ जो इनडोर गेम्स खेलते थे, आज वो दोबारा वैसे ही चीटिंग करते हुए खेलें। उनसे उनके बचपन की कुछ ऐसी बातें बताने को कहें जो उन्हें आज भी रोमांचित करती हैं। आपके साथ अपने बचपन की बातें शेयर करके वो भी अपने बचपन की खूबसूरत दुनिया में खो जाएंगी। ऐसे में उनके चेहरे पर जो खुशी की चमक होगी, वह  मदर्स डे का बेहतरीन गिफ्ट होगी।

डे आऊट प्लान करें

जो माएं सारा दिन घर पर ही रहती हैं, इस स्पेशल दिन उन्हें बाहर ले जाएं। उनके फेवरिट सैलून में स्पा की अपॉयंटमेंट ले सकते हैं। वहां आप बता दें कि आपकी मां को खूब पैंपर करें। मां को लंच पर ले जाएं और वहां उनकी खास सहेलियों को भी इन्वाइट करें। आप उन्हें शॉपिंग पर भी ले जा सकते हैं। फिल्म देखने का प्रोग्राम भी उन्हें अच्छा लगेगा।

लिख कर करें प्यार का इजहार

एक खत में लिखें कि आप अपनी मां से इतना प्यार क्यों करते हैं। खत में उन बातों का जिक्र भी जरूर करें जिनके लिए आप उनके शुक्रगुजार हैं। ग्रीटिंग कार्ड्स और उनकी तस्वीरों वाले मग भी गिफ्ट कर सकते हैं। उनके मनपसंद गानों को एक सीडी में रिकॉर्ड करके उन्हें गीतों का तोहफा दे सकते हैं। अपनी और मां की कुछ चुनिंदा तस्वीरों का कोलार्ज बनाकर भी मां को एक ममताभरा तोहफा दे सकते हैं।

अपने बच्चों को भी साथ ले जाएं

शादीशुदा लड़कियां शादी के बाद अपनी मां को ही सबसे ज्यादा मिस करती हैं। मां की याद अक्सर उन्हें रूला जाती है। अगर आप भी शादीशुदा हैं तो मदर्स डे पर अपने बच्चों को भी साथ लेकर जाएं, ताकि नाती/नातिन का सुख भी उन्हें मिल सके। मां के चेहरे पर खुशी देखकर आपको बहुत अच्छा लगेगा। अगर मां के पास जाना संभव न हो तो  वीडियो कॉल कर लें।
  • मीनाक्षी गांधी

‘मदर्स डे’ यानी मां को थैंक्स कहने का दिन

‘मदर्स डे’ यानी मां को थैंक्स कहने का दिन


मदर्स डे हमारी संस्कृति का हिस्सा तो नहीं है क्योंकि हमारे यहां तो मां को वो जगह दी जाती रही है जो भगवान से भी ऊपर है। मां के प्यार और उसके अहसास को किसी खास दिन से बांधा नहीं जा सकता है, लेकिन हमारे देश में भी पश्चिमी देशों का असर बढ़ता जा रहा है, जिसके चलते युवा मदर्स डे पर अपनी मां को अपने प्यार का अहसास करवाना नहीं भूलते।

कुछ साल पहले तक 'मदर्स डे' भारतीयों के लिए कोई खास अर्थ नहीं रखता था क्योंकि हमारे यहां संयुक्त परिवार थे। जब हमारे माता-पिता अधिकतर हमारे साथ ही रहा करते थे,  तो ऐसे में भला हमें क्या आवश्यकता होती साल में एक दिन मां या पिता को समर्पित करने की। लेकिन आजकल बहुत से बच्चों को  पढ़ाई या नौकरी के लिए मां से दूर रहना पड़ रहा है। किसी भी बच्चे के लिए अपनी मां के प्यार और दुलार को नजरअंदाज कर पाना आसान नहीं है, इसलिए कम से कम मदर्स डे को ही वे मां के लिए खास बनाना चाहते हैं।

रविवार को ‘मदर्स डे’ है। मदर्स डे यानी एक ऐसा दिन जब मां को यह अहसास कराया जाएगा कि हम उनसे कितना प्यार करते हैं। मां के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त करने का इससे बेहतर अवसर और क्या हो सकता है। अमेरिका में पीएचडी कर रहे रौनक महेश्वरी कहते हैं कि दूर रह कर मां के प्यार और उनके बनाए खाने को बहुत ज्यादा मिस करता हूं, हालांकि उनसे रोज़ाना वीडियो चैट और वीडियो कॉलिंग करता हूं, लेकिन इससे उनके दुलार और प्यार की कमी पूरी नहीं होती। इस बार मदर्स डे पर मैं उनका पसंदीदा खाना खुद बनाऊंगा और फिर वीडियो कॉल करके उनके साथ खाऊंगा। जानता हूं कि यह हम दोनों के लिए बेहद भावुक पल होंगे।

काफी सालों तक घर से बाहर नौकरी करने वाले अनूप लूथरा की ट्रांसफर मई में उनके अपने शहर चंडीगढ़ में हो गई है। उम्र चाहे उनकी 45 को पार कर चुकी है, पर हर बच्चे के लिए उसकी मां लाइफलाइन होती है। अनूप कहते हैं कि जब भी कभी घर आता था तो मां से अपनी पसंद का खाना बनवा कर खाता था। इस बार बहुत बरसों के बाद यह दिन मां के साथ बिता रहा हूं। पिता जी की मृत्यु के बाद मां काफी सालों से अकेली रह रही हैं। इस संडे पूरा दिन हम मां-बेटा एंजॉय करेंगे, और बचपन की यादों को ताजा करेंगे।

शालिनी सोनी चौहान जो अब खुद दो बेटियों की मां है, अपनी मां को अपना आइडियल मानती है। वह कहती हैं, ‘कौन-सी ऐसी चीज है जो यहां नहीं मिलती, सब कुछ मिल जाता है पर दुबारा मां नहीं मिलती। मेरी मम्मी मेरी बेस्ट फ्रेंड भी है। मैं अपनी हर बात मम्मी के साथ शेयर करती हूं। मां ने मुझे हर परिस्थिति में खुश रहना सिखाया है। हर गम को हंसते-हंसते सहना सिखाया है। मैं हर साल मदर्स डे सेलिब्रेट करती हूं। इस बार भी मैंने मम्मी के लिए कुछ सरप्राइज प्लान किया है, जिसे मैं अभी आपको नहीं बता सकती।’

  • मीनाक्षी गांधी

माई मॉम माई बेस्ट फ्रेंड

माई मॉम माई बेस्ट फ्रेंड

लड़कियां अपनी मां से बेहद प्रभावित होती हैं। उनके लिए उनकी मां की अहमियत दुनिया में सबसे अधिक होती है। मां ही उनके लिए सबसे बड़ी प्रेरणा और पथप्रदर्शक होती है। वह अपनी कामयाबी का सारा श्रेय मां को ही देती हैं। मां का नाम सुनकर शादीशुदा लड़कियों के चेहरे पर बिखरी खूबसूरत मुस्कान को सभी ने महसूस किया होगा। अपनी मां के साथ कुछ पल बिताने की चाहत और खुद मां होने के कारण बच्चों की जिम्मेदारियों का अहसास, हर शादीशुदा लड़की की ज़िंदगी में यह जदोजहद चलती रहती है।

शादी के बाद कनाडा में सैटल हो चुकी तरुणदीप अपनी मां कुलवंत के साथ अपने रिश्तों के बारे में बात करते हुए काफी भावुक हो गईं। उन्होंने बताया, ‘पापा की जब डेथ हुई, तब मैं बहुत छोटी थी। मेरी मां मेरा भगवान है, जो सुकून मुझे  उनके साथ रहने पर महसूस होता है वह और कहीं नहीं मिलता।’ मां से मिलने की ख्वाहिश ऐसी कि पंख होते तो तुरंत उड़ कर मां के पास आ जाती। शादी के बाद विदेश में बस चुकी सभी बेटियों की लगभग ऐसी ही इच्छा है।

सीमा वत्स की दो बेटियां हैं, एक की शादी देश में ही हुई है और दूसरी बेटी अॉस्ट्रेलिया में है। एक बेटी से मिलना-जुलना तो हो जाता है लेकिन विदेश में रहने वाली बेटी से मिले काफी वक्त निकल जाता है। विदेश के बिज़ी लाइफ स्टाइल के चलते अब वह अपने पति के साथ अॉस्ट्रेलिया गई हुई हैं। सीमा कहती हैं कि बेटियां साथ हों तो हर दिन मदर्स डे है, लेकिन इस बार यह दिन जरूर खास बन गया है क्योंकि अॉस्ट्रेलिया में मदर्स डे खूब जोर शोर से मनाया जाता है और इस बार वह भी इस पाश्चात्य त्योहार को इंजॉय करेंगे।

सर्बजीत संधु अपनी बेटी इरा से मिलने अमेरिका गई हुई हैं। सर्बजीत कहती हैं कि अपनी बेटी को पालने का अहसास जितना सुखद था उससे भी ज्यादा मज़ा उन्हें अपने ग्रैंड चिल्ड्रंस की परवरिश में आता है। मां के रहते दो बच्चों की मां उनकी बेटी इरा भी निश्चिंत रहती है। वह कहती हैं, ‘मां के बगैर मैं कुछ भी नहीं हूं। जब मैं घर जाती हूं अगर मां नहीं दिखतीं तो बेचैनी-सी लगी रहती है, मां के आते ही सब दुःख, थकान गायब हो जाती है।काम से जब थकी हुई घर लौटती हूं तो मां की गोद में सिर रखते ही सारी थकान मिट जाती है। शादी के बाद भी मां का साथ मिलना, यह भगवान के आशीर्वाद जैसा है। मदर्स डे पर मां, मैं और मेरी बेटी पूरा दिन साथ सपेंड करेंगे। मेरी बेटी ने मां के लिए ‘बंच अॉफ लैटर्स’ बनाया है जिसमें उसने उन सब बातों का जिक्र किया है, जिनसे प्रेरणा लेकर उसने अपनी ज़िंदगी को और बेहतर बनाया है।’

  • मीनाक्षी गांधी

Thursday, October 15, 2015

फेस्टिव सीज़न में बढ़ा टेम्परेरी टैटूज़ का क्रेज़


फेस्टिव सीज़न का स्टाइल स्टेटमेंट रहेगा टेम्परेरी टैटू

फेस्टिव सीज़न आ रहा है इसलिए ज्यादा से ज्यादा युवा टेम्परेरी टैटू बनवा रहे हैं। परमानेंट टैटू को आम तौर पर टेम्परेरी टैटू की अपेक्षाज्यादा केयर और प्रोटैक्शन की जरूरत होती है। यही कारण है कि त्योहारों के मौसम में टेम्परेरी टैटू बेहद डिमांड में रहते हैं...


नवरात्रि फेस्टिवल में आउटफिट के अलावा टैटू को लेकर भी युवा इस बार एक्सपेरिमेंट कर रहे हैं। बहुत से युवा टैटू के माध्यम से अपने प्यार को अमर कर देना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि प्यार दर्शाने का यह सबसे बढ़िया तरीका है। डांडिया के लिए वे अपने ब्वॉय फ्रैंड या गर्ल फ्रैंड की पसंद या उसके नाम या नाम के फर्स्ट लैटर का टेम्परेरी टैटू डिजाइन करवा रहे हैं। डांडिया नाइट पर इस टैटू से वे अपने पार्टनर को सरप्राइज़ देकर न सिर्फ उसके प्रति अपने प्यार के इज़हार करेंगे, बल्कि यह उनका स्टाइल स्टेटमेंट भी रहेगा। 

आम तौर पर 16 से 25 साल के आयु वर्ग में युवा टैटू के लिए ज्यादा क्रेज़ी होते हैं। लेकिन समय के साथ अब बड़ी उम्र के लोगों में भी टैटू बनवाने का ट्रेंड बड़ा है। हालांकि लोग परमानेट टैटू बनवाना पसंद करते हैं लेकिन इन दिनों यूथ टेम्परेरी टैटू को लेकर ज्यादा प्रैक्टिकल हैं। इनके कई फायदे हैं जैसे ये बन जल्दी जाते हैं, इन्हें ऑकेजन के आधार पर बनवाया जा सकता है, इन्हें रिमूव करना भी आसान है। यदि आपने पहले कोई डिजाइन बनवाया होगा तो उसके मिटने के बाद कोई और दूसरा डिजाइन बनवा सकती हैं। हर महीने डिफरेंट डिजाइन के साथ आप स्मार्ट और फैशनेबल लगेंगी। 

टेम्परेरी टैटू की खास बात भी है कि ये नुकसान नहीं करते। इन्हें बनाने के लिए हर्बल कलर्स का यूज होता है। भीड में डिफरेंट लुक पाने के लिए गरबा के लिए ट्रेडिशनल लुक वाले टैटू जैसे गरबे की रंगोली, घाघरा-चोली की डिजाइन, डांडिया स्टिक, कलश, गणेश-दुर्गा की फोटो, तितली, ड्रैगन, चाइनीज सिंबल फेवरेट हैं। टैटू और उनमें डिजाइन को स्टाइल आइकन माना जा रहा है। कुछ गरबा ग्रुप्स अपनी थीम के अनुसार टैटू बनवा रहे हैं।

स्किन बेस, फिगर बेस तथा कलर स्टोन बेस टैटू चल रहे हैं। स्किन बेस टैटू लिक्विड फॉर्म में आता है, जो वाटर कलर का बना रहता है। दो दिन तक यह बॉडी पर फिक्स रहता है। फिगर बेस टैटू का क्रेज लड़कियों में ज्यादा हैं, क्योंकि वह हर बार टैटू बदलना चाहती हैं। फिगर बेस टैटू सिर्फ बॉडी में चिपका देते हैं, जिसे खुद भी आसानी से लगाया जा सकता है। कलरफुल टैटू के लिए लोग कलर स्टोन वाले टैटू पसंद कर रहे हैं, जिसमें टैटू को स्पार्कल, कलर तथा स्टोन से सजाया जाता है। लोग इसे ड्रेस से मैच करता हुआ लगाना पसंद करते हैं।

टेंपरेरी टैटू में लेटेस्ट ट्रेंड छोटे और सिंपल टैटू का है जिसे छुपाया जा सकता है या जरूरत महसूस होने पर फ्लॉन्ट किया जा सकता है। युवा उंगलियों और हाथों पर छोटे लेकिन नोटिसेबल टैटू बनवा रहे हैं। वन फिंगर टैटू को लड़कियां ज्यादा पसंद करती हैं, हालांकि लड़कों में भी अब वन फिंगर टैटू का ट्रेंड बढ़ने लगा है। इसका एक कारण यह भी है कि उंगली पर बना टैटू शरीर के दूसरे हिस्सों पर बने टैटू से ज्यादा अटैंशन पाता है। दूर से देखने पर अक्सर यह एक रिंग जैसा ही लगता है जबकि नज़दीक आने पर टैटू विज़िबल हो जाता है।

जो लड़कियां टैटू नीडल से डरती हैं, लेकिन टैटू बनवाना चाहती हैं, वे भी नवरात्रि पर डांडिया से रिलेटिड टेम्परेरी टैटू बनवा कर इतरा रही हैं। डांडिया से रिलेटिड थ्रीडी टेम्परेरी टैटू में गरबा करता हुआ ‘डांडिया कपल’ और गरबे के स्टेप्स के साथ पीकॉक स्टाइल यूथ ज्यादा पसंद कर रहे हैं। वहीं, ज्वैलरी के साथ डिवोशनल और रिलीजियस टैटू की खास डिमांड है जो सिंपल भी हैं और सुंदर भी।

पीरियड्स से जुड़े मिथ और उनकी सच्चाई

पीरियड्स से जुड़े मिथ और उनकी सच्चाई

पीरियड्स, हर फीमेल की जिंदगी में हर महीने के पांच ऐसे दिन होते हैं, जब उनके शरीर में कई परिवर्तन होते हैं। इनके बारे में हम अक्सर कुछ न कुछ सुनते रहते हैं, कि इस दौरान एेसा करना चाहिए या ये काम नहीं करने चाहिए। लेकिन इस पर बात करने से आम तौर पर गुरेज़ किया जाता है और सही जानकारी न होने के बावजूद ज्यादातर महिलाएं उन पर यूं ही यकीन भी कर लेती हैं। 


माना जाता है कि महिलाएं इस दौरान अपवित्र, बीमार और अभिशप्त होती हैं। यह एक ऐसा विषय है जिसने महिलाओं के स्वास्थ्य और स्वच्छता के मसले को बेहद प्रभावित किया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार गर्भाशय के मुंह के कैंसर के कुल मामलों में से 27 फ़ीसदी भारत में होते हैं और डॉक्टरों के अनुसार पीरियड्स के दौरान साफ़-सफाई की कमी इसकी बड़ी वजह है। जबकि वास्तविकता यह है कि पीरियड्स पूरी तरह नैचुरल हैं और इनके बारे में अगर आपके मन में भी कुछ मिथ हैं तो जान लीजिए उनकी सच्चाई क्या है।

अगर आप  टैम्पॉन का इस्तेमाल करती हैं तो आप वर्जिन नहीं है

सैनिटरी पैड्स या टैम्पॉन का आपकी वर्जिनिटी से कोई लेना-देना नहीं है। ये पीरियड्स के दौरान होने वाली ब्लीडिंग को सोखते हैं। टैम्पॉन को क्योंकि वेजाइना में डाला जाता है, इसलिए शायद इसके बारे में यह मिथ है। आप बेझिझक इनका इस्तेमाल कर सकती हैं। वर्जिनिटी का हाइमन से कोई लेना-देना नहीं है। सेक्स के अलावा भी बहुत सारे तरीके हैं जिनसे हाइमन फट सकती है। पीरियड्स के दौरान यह बहुत जरूरी है कि आप समय पर इन्हें बदलती रहें। इससे आप संक्रमण से सुरक्षित रहेंगी। साथ ही दुर्गंध की समस्या भी नहीं होगी।

अगर आप अपना पीरियड मिस करती हैं तो आप प्रेग्नेंट हैं

पीरियड्स न आने का सिर्फ यही अर्थ नहीं होता कि आप प्रेग्नेंट हो गई हैं, जान लें कि पीरियड्स न आने के और भी कई कारण हो सकते हैं जैसे – स्ट्रैस, खराब डाइट, वेट-लॉस और हॉर्मोनल चेंजेज़ इत्यादि। लेकिन अगर आपने असुरक्षित सैक्स किया है और आपको पीरियड्स नहीं आए, तो प्रेग्नेंसी टैस्ट जरूर कर लें।

प्रीमैंस्ट्रुअल सिंड्रोम (PMS) जैसी कोई चीज़ होती ही नहीं

कई लोग सोचते हैं कि प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम जैसा कुछ भी नहीं होता। यह दिमाग का वहम है जबकि पीरियड से पहले थकान, स्ट्रेस, कमर-दर्द वगैरह नॉर्मल है। मासिक चक्र न केवल महिलाओं में हार्मोनल बदलाव करता है बल्कि उनकी आदतों को बदलने में भी इनकी भूमिका है। इसे प्रीमैंस्ट्रुअल सिंड्रोम (पीएमएस) कहा जाता है। 

पीरियड्स के दौरान महिला गंदी और अशुद्ध हो जाती है

इसमें गंदगी और अशुद्धता जैसा कुछ भी नहीं है बल्कि यह तो इस बात का सबूत है कि आप में रीप्रॉड्यूस करने की क्षमता है। चूंकि आपका एग अनफर्टिलाइज़्ड है इसलिए आप उसे अपने शरीर से अलग कर रही हैं। इस दौरान आपको अपने शरीर की साफ-सफाई का थोड़ा ज्यादा ध्यान रखना चाहिए, इन दिनों में भी आप वैसे ही रह सकती हैं जैसे बाकी पूरे महीने रहती हैं। 

पीरियड के दौरान सेक्स करने से प्रेग्नेंट नहीं हो सकते

ऐसा भूलकर भी नहीं सोचना चाहिए कि पीरियड्स के दिनों में आप प्रेग्नेंट नहीं हो सकती हैं। इस दौरान भी गभर्वती होने की संभावना होती हैं। बिना प्रोटेक्शन के सेक्स सेफ नहीं हो सकता है, फिर चाहे वो पीरियड्स के दौरान ही क्यों न किया जाए, क्योंकि स्पर्म आपके शरीर में पांच दिन तक जीवित रह सकते हैं। इतने में अगर आपको पीरियड से मुक्ति मिल गई तो ये पहुंच जाएंगे सीधे आपके ओवा के पास और आपको प्रेग्नेंट कर सकते हैं। इसके अलावा इन दिनों बिना प्रीकॉशन के सेक्स करने से इंफैक्शन का खतरा भी बना रहता है।

उस वक्त अचार छूने से वो खराब हो जाएगा

इस बात पर आपको जरूर अपनी दादी-नानी की याद आई होगी। आपके पीरियड्स से अचार का कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन आपका हाईजीनिक होना ज़रूरी है। इसलिए आप पीरियड के वक्त अचार का जार छू भी सकती हैं और इसका मज़े से स्वाद भी ले सकती हैं।

पीरियड में किचन और मंदिर में नहीं जाना चाहिए

यह बात बिल्कुल निराधार  है..पर हमारे देश में लोग इसे मानते आ रहे हैं। अगर पीरियड में कुछ भी गंदा नहीं है तो आप किचन में जाएं या मंदिर में, इससे कुछ फर्क नहीं पड़ता। यह प्रोसेस जब भगवान की ही देन है तो इन दिनों में वे आपकी पूजा क्यों स्वीकार नहीं करेंगे। 

पीरियड्स के दौरान सेक्स करने से बचना चाहिए

माहवारी के समय गर्भाशय और उसका मुंह काफी संवेदनशील होता है और ऎसी अवस्था में सेक्स करने से गर्भाशय के मुंह पर आघात हो सकता है, इसे "सर्वाइकल इरोजन" कहते हैं। इसका इलाज न करने की स्थिति में कैंसर तक होने की संभावना हो सकती है, लेकिन यदि दोनों पार्टनर सहमत हों और हाइजीन का ख्याल रखते हुए सावधानी बरती जाए तो पीरियड्स के दौरान भी सेक्स किया जा सकता है।

Wednesday, September 2, 2015

बोल्ड प्रिंट्स और सॉलिड कलर्स वाला इंडियन और मॉडर्न फैशन का संगम

इंडियन और वैस्टर्न फैशन का फ्यूजन है यह

बॉलीवुड की बेहतरीन एक्ट्रेस नीना गुप्ता और महान क्रिकेटर विवियन रिचर्ड्स की बेटी हैं मसाबा गुप्ता। सितंबर 2009 में लक्मे फैशन वीक में अपनी उपस्थिति दर्ज करने वाली मसाबा गुप्ता सबसे युवा फैशन डिज़ाइनर बनीं। यहां उन्हें इंटरनैशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन डिज़ाइनिंग की ओर से 'मोस्ट प्रॉमिसिंग डिज़ाइनर' का अवॉर्ड मिला, जिस ने मसाबा के लिए फैशन डिजाइनिंग में कामयाबी के दरवाजे खोल दिए। बोल्ड प्रिंट्स और सॉलिड कलर्स वाला इनका पहला कलैक्शन जबरदस्त हिट रहा। इसने उन्हें फैशन की दुनिया में एक झटके में पहचान दिला दी। 

2011 में मसाबा को फैशन जगत में इंटरनैशनल लैवल पर पहचान मिली जब कांस फिल्म फैस्टिवल में सोनम ने उनकी डिजाइन की हुई पोल्का डॉट्स वाली साड़ी पहनी। मसाबा की डिज़ाइनिंग में इंडियन और मॉडर्न फैशन का संगम है। वह साडि़यों के कई कलैक्शन लॉन्च कर चुकी हैं। वह भारतीय महिलाओं को ध्यान में रख कर ही अपना कलैक्शन तैयार करती हैं। इंडियन और वैस्टर्न फैशन का फ्यूजन पेश करने में माहिर मसाबा खुद सादगी से रहना पसंद करती हैं। साड़ी उनका मनपसंद पहनावा है।

मसाबा कहती हैं कि उनके पेरेंट्स ने कभी उन पर प्रोफेशन को लेकर कोई दबाव नहीं डाला। कभी टैनिस खिलाड़ी, कभी डांसर तो कभी संगीतकार बनने की मंशा रखने वाली मसाबा को आखिर फैशन डिजाइनिंग से पहचान मिली। ग्लैमर इंडस्ट्री से ताल्लुक रखने वाली मसाबा अनोखे डिज़ाइंस क्रिएट करने के लिए जानी जाती हैं। उनके डिज़ाइन परम्परागत नियमों को तोड़ती हुए नज़र आते हैं। उनके डिज़ाइंस में कई तरह के अटपटे करैक्टर्ज़ होते हैं। यही कारण रहा कि  2012 में मसाबा सत्या पॉल की साड़ियों को अनोखे ट्विस्ट देने के लिए उनकी क्रिएटिव डायरैक्टर बन गईं।

इंस्टाग्राम पर अपनी स्प्रिंग-समर कलैक्शन डैब्यू करने वाली पहली भारतीय डिज़ाइनर बन गईं। मसाबा ने मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में हुए 16वें इंटरनैशनल इंडियन फिल्म एकैडमी (आईफा) के लिए एक खास परिधान संग्रह भी तैयार किया था, जो आईफा की सुनहरी एवं काली ट्रॉफी से प्रेरित है। वूमेंस इंटरनैशनल क्रिकेट लीग  (WICL) ने महिला क्रिकेट टीम की ड्रैस के डिज़ाइन और फैशन में ट्विस्ट लाने के लिए मसाबा को ही चुना था।

उन्होंने 2010 में अपना स्टोर शुरू किया और अपना ब्रांड 'मसाबा' के नाम से लांच कर दिया। फैब्रिक के बारे में मसाबा की च्वाइस स्कूबा, सैटिन, जर्सी और क्रेप है।उनकी कस्टरमर लिस्ट में अभिनेत्री सोनम कपूर, जैकलीन फर्नाडीज, मंदिरा बेदी शामिल हैं। जब से मसाबा कंगना रनाउत, शिल्पा शैट्टी और करीना कपूर इत्यादि सेलिब्रिटीज़ की फेवरिट बनी हैं, तब से ये सभी इनकी ही डिज़ाइन की गई साड़ियां पहनती हैं।  

मसाबा मानती हैं कि आम लोग फैशन को ले कर काफी कन्फ्यूज़ होते हैं। वे बॉलीवुड के पहनावे को ही फैशन समझ कर आंख मूंद कर उसकी नकल करने की कोशिश करते हैं। हिंदी फिल्मों ने फैशन को आम लोगोंं तक पहुंचा दिया है। मसाबा ऐश्वर्य राय बच्चन और काजोल को स्टाइल करना चाहती है। इसके अलावा करण जौहर भी मसाबा की विश लिस्ट में शामिल हैं जिन्हें वह स्टाइल करना चाहती हैं।

मसाबा कहती हैं, कम हाइट के लोगों को हॉरिजैंटल टाइप की ड्रैस पहननी चाहिए। ज्यादा मोटे लोगों को यह ध्यान रखना चाहिए कि वे डार्क और ज्यादा प्रिंटेड कलर न पहनें। इससे उनका शरीर और ज्यादा हाईलाइट हो जाता है। मोटे लोगों को हैवी कपड़े पहनने से भी परहेज़ करना चाहिए। दुबले-पतले लोगों को ढीले कपड़े पहनने के बजाय स्मार्ट फिटिंग वाली ड्रैस पहननी चाहिए।

फैशन के चलन और उस में बदलाव के बारे में मसाबा का मानना है कि कोई भी फैशन कभी पुराना नहीं होता है। कुछ समय बाद वह दोबारा आता है। मिसाल के तौर पर कुछ साल पहले बैलबॉटम को आउट अॉफ फैशन करार दे दिया गया था, पर वह फिर से फैशन में आ रहा है। फैशन एक सर्किल की तरह होता है, जो तय समय के बाद वापसी करता है। अब 80 और 90 के दशक का रैट्रो फैशन दोबारा फैशन के दरवाज़े पर दस्तक दे रहा है।

Sunday, August 30, 2015

पेरेंटिंग टिप्‍स : अपने बच्‍चे के मन की बात को जानें

वाकई मददगार 5 स्मार्ट पेरेंटिंग टिप्स

माता-पिता की जिम्मेदारियां बहुत कठिन हैं क्‍योंकि उनके मन में हमेशा बच्चे को अच्छी परवरिश देने की टैंशन रहती है और साथ ही बच्चे के मन की बातें जानने के लिए कई तरह के जतन भी करने पड़ते हैं। कई बार पेरेंट्स के लिए यह काम बेहद मुश्किल साबित होता है। कारण होता है माता-पिता और बच्चों के बीच दोस्ताना रिश्ते न होना। लेकिन कई बार देखा गया है कि जब पेरेंट्स और बच्चे के बीच बहुत अच्छे संबंध होते हैं तब भी वह अपने मन की बात खुल कर अपने पेरेंट्स से नहीं कह पाता है।

आज हम आपको कुछ पेरेंटिंग टिप्‍स बताएंगे जिससे आप अपने बच्‍चे के मन की बात को जान सकते हैं और उन्‍हें सही परवरिश देकर उन्हें इस सोसाइटी का एक अच्‍छा नागरिक बना सकते हैं। अगर आपने बचपन से ही अपने बच्‍चों पर ध्‍यान  दिया तो आगे चल कर आपकी जिंदगी में सुकून और खुशियां भर जाएंगी।

1. बच्चों के व्यवहार पर नज़र रखें
बच्चों में इतनी समझ नहीं होती है कि वे यह जान सकें कि उनके साथ जो हो रहा है उसमें बुरा क्या है। अगर आपका बच्चा कई दिनों से शांत या खोया-खोया नजर आ रहा है तो पेरेंट होने के नाते आप तुरंत इस बात का अंदाजा लगा सकते हैं कि आपके बच्चे के मन में कुछ हलचल चल रही है। आप समझ जाएं कि अब आपको उसके मन की व्यथा जानने के लिए उसके साथ बात करनी चाहिेए और इसके लिए सही वातावरण बनाना चाहिए ताकि वह अपने मन की बात खुल कर आपको बता सके।

2. बच्चे की टीचर से इनटच रहेंः आपका बच्चा स्कूल में काफी समय बिताता है। हो सकता है कि वह कुछ जरूरी बातें अपनी टीचर से शेयर करता हो और आपको ना बताता हो, लेकिन वो बातें आपके लिए जानना बहुत जरूरी है। इसलिए बेहतर यही होगा कि आप उसकी टीचर के साथ इनटच रहें और अपने बच्चे की प्रोग्रेस के बारे में जानती रहें। बच्चे की गलती पर कभी भी टीचर को दोषी ना ठहराएं बल्कि उसके साथ बात करके समस्या का समाधान निकालने की कोशिश करें।

3. बच्चे को सामाजिक बनाएंः अपने बच्चे को उसके दोस्तों या उसकी उम्र के आपकी कामवाली के बच्चों से मिलने से ना रोकें। अगर बच्चे के काफी दोस्त हैं तो उसे उनसे अलग ना करें। बच्चे अपने दोस्तों के साथ रहते हुए बहुत कुछ सीखते हैं, जो वे स्कूल या घर पर नहीं सीख सकते। बच्चे को पढाई के साथ-साथ सामाजिक गतिविधियों में भी हिस्सा लेने दें, इससे वह लोगों के साथ मेल-मिलाप और शेयर करना सीखेगा।

4. उसे स्वतंत्र बनाएंः बच्चे को इतनी आजादी जरूर दें कि वह कम से कम अपने छोटे-छोटे फैसले खुद कर सके। इससे उसमें आत्मविश्वास आएगा। हां, आप उसे गाइड कर सकती हैं, पर अपने फैसले उस पर न थोपें। अगर वो गलती करेगा तो अपनी गलती से सीखेगा और तब उसका आप पर विश्वास भी बढ़ेगा। याद रखें, बच्चे पर जितनी ज्यादा बंदिशें लगाएंगे बच्चा उतना ज्यादा बिगडे़गा।

5. तुलना न करेंः जाने-अनजाने हम बच्चों की उपस्थिति में ही उनकी कमियों-खूबियों की तुलना करने लगते हैं। इससे बचना चाहिए। यह एक नकारात्मक तरीका है। ऐसा करने से कमतर उपलब्धि हासिल करने वाले बच्चे के मन में हीन भावना आती है। उसका मनोबल गिरता है। मैं कभी औरों की बराबरी नहीं कर सकता जैसी धारणा उसके मन में सदा के लिए घर कर जाती है। इस तरह दिन-ब-दिन जटिलताएं बढ़ती जाती हैं।

रोमांटिक रिश्ता जवां रखने के स्पाइसी टिप्स

रिश्ता समझौते पर नहीं, प्यार पर टिकेगा

आप जिसे प्यार करते हैं उसकी बेहद केयर करते हैं ताकि वह हमेशा नई बनी रहे। प्यार का रिश्ता भी एेसा ही है। अगर आप रोजाना इसकी केयर नहीं करेंगे तो जल्दी ही यह पुराना हो जाएगा। प्यार के रिश्ते में नयापन बना रहे, प्यार की गर्माहट कम न हो, इसके लिए हम आपको बता रहे हैं कुछ स्पाइसी टिप्स, जिन्हें अजमाने से आपके प्यार की खुशबू कभी मद्धम नहीं पड़ेगी और स्पाइस का तड़का इन्हें हमेशा जवां बनाए रखेगा...


1. अगर आप दोनों में कोई दूरी आ गई हो तो सबसे पहले उसे कम करें। रिश्ते की गर्माहट बरकरार रखने के लिए बहुत जरूरी है कि शारीरिक और मानसकि रूप से आप दोनों के बीच कोई दूरी नहीं रहें, लेकिन कई बार एक ही घर में रहते हुए भी  दोनों में इतनी दूरियां बढ जाती हैं कि दोनों बात तक भी नहीं करते। इससे रिश्ते में दरार बढ़ने लगती है।

2. प्रेम की भाषा समझें-समझाएं। आई लव यू सिर्फ तीन शब्द ही नहीं हैं यह फैविकॉल का वो जोड़ है जो आपके रिश्तों को जोड़ कर रखता है। लेकिन अगर आप शब्दों में मन की बातें नहीं बता पाते तो इशारों या गिफ्ट्स का सहारा लें। बॉडी लैंग्वेज बता देती है कि आप अपने पार्टनर के कितने करीब हैं। एक सहज प्यारी-सी मुस्कान भी वह सब कह देती है, जो हजार शब्द नहीं कह पाते। किसी प्यारी से डेट के बाद उनकी पौकेट में थैंक यू नोट लिख दें। पूर दिन प्यार में गुजरेगा।

3. बेस्ट फ्रैंड बनें। पार्टनर के गुणों को सराहें, लेकिन गलतियों की ओर भी इशारा करें। गुस्सा करने या मुंह बनाने से बात बनती नहीं, बल्कि बिगड़ती है। पार्टनर की सच्ची आलोचना व सुझावों को भी स्वाकारें।

4. प्यार बेशकीमती है, लेकिन आपके पास इसका बड़ा खजाना है, जिसे आप जितना अपने पार्टनर पर लुटाएंगे, बदले में आपके प्यार का खजाना बढे़गा। इसे रोज सजाने संवारने की जरूरत है, ताकि नयापन बना रहे।

5. हम हमेशा काम में बिज़ी रहते हैं, जो पल साथ बिताते हैं उसमें भी टीवी, मोबाइल, लैपटॉप हमारे बीच ही रहते हैं। सप्ताह में एक दिन सिर्फ एक-दूजे के लिए जीएं। इस दौरान कोई भी आप दोनों के बीच नहीं होना चाहिए, फिर चाहे वो टीवी, कम्प्यूटर या आप दोनों के स्मार्ट फोन ही क्यों न हों। एक दिन इनसे दूर होकर आपस में साथ समय बिताएं।

6. कभी किसी लव बर्ड्स को देखा है। लगता है, जैसे बातें ही खत्म नहीं होती उनकी। मौन को लाइफ में कभी पसरने न दें। बातचीत का सिलसिला कभी खत्म नहीं होना चाहिए। प्यारभरी बातों की याद आपके होंठों पर अचानक ही मुस्कान का कारण बन जाती है। शेयरिंग के कुछ पल बेडरूम में बिताए पलों से भी ज्यादा प्यारे होते हैं।

7. प्यार किसी एक की नहीं, बल्कि दोनों की इच्छा व जरूरत है। आप अपने पार्टनर की इच्छा को महत्व दें। उसे स्पेशल फील करवाएं। हर रिश्ते में अटेंशन की बहुत जरूरत होती है। दोनों इस नियम का पालन करेंगे तो रिश्ता समझौते पर नहीं, प्यार पर टिकेगा।

Thursday, August 27, 2015

कच्चे धागे का मजबूत रिश्ता

कच्चे धागे का मजबूत रिश्ता

राखी बहन के पवित्र प्रेम और रक्षा की डोरी है। रक्षाबंधन स्नेह का वह अमूल्य बंधन है जिसका बदला धन तो क्या सर्वस्व देकर भी नहीं चुकाया जा सकता। यह त्यौहार भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक है। राखी के जरिये बहनें भाई की सलामती की दुआ मांगती हैं तो भाई ताउम्र बहन की हिफाजत का बीड़ा उठाते हैं, फिर चाहे रिश्ता खून का हो या सिर्फ कच्चे धागे का। 

राखी पर बहनें थाली में फल, फूल, मिठाइयां, रोली, चावल तथा राखियां रखकर भाई का स्वागत करती हैं। रोली-चावल से भाई का तिलक करती हैं तथा उसकी दाहिने कलाई पर राखी बांधती हैं। राखी बांधते समय सौ-सौ मनौतियां मनाती हैं। इसके पश्चात भाइयों को कुछ मीठा खिलाया जाता है। भाई अपनी हैसियत के हिसाब से अपनी बहन को शगुन के तौर पर भेंट देता है। 

एक वक्त था जब राखी के धागे कच्चे होते थे और प्यार के रिश्ते मजबूत, लेकिन समय बदलने के साथ-साथ भाई-बहन के इस प्यार भरे त्यौहार में दिखावा भारी पड़ने लगा है। पहले बहनें मिठाई का छोटा-सा डिब्बा और राखी का धागा लेकर मायके अपने भाई को राखी बांधने जाती थीं, पर अब यह रस्म भी बदल गई है। 

समाज की रीत कुछ ऐसी बन गई है कि बहनें अब भाई के घर जाते समय मिठाई और राखी के साथ-साथ कई गिफ्ट्स भी ले जाती हैं। इसके पीछे उसकी सोच होती है कि कहीं भाभी के दिमाग में यह न आए कि हर साल बहन थोड़ी-सी मिठाई देकर राखी पर महंगा गिफ्ट ले जाती है। राखी पर भाई के लिए गिफ्ट खरीदते समय उनके मन में एक ही चिंता रहती है कि कहां उनका गिफ्ट भाई या उनकी दूसरी बहनों के गिफ्ट्स की तुलना में सस्ता  न हो।

हालांकि बहनों को ऐसा सोचना नहीं चाहिए और भाई के प्यार को पैसे के तराजू पर तोलना नहीं चाहिए। सामाजिक रीति रिवाज़ों का निर्वाह उसी सीमा तक ठीक रहता है जब तक कि वो बोझ न बन जाएं। भाई-बहन के निश्छल प्यार के रिश्ते में भावनाएं ज्यादा अहम हैं नाकि समाजिक रीति-रिवाज। गिफ्ट के महंगे या सस्ते होने से उनके रिश्ते पर कोई असर नहीं पड़ना चाहिए।

राखी पर प्यारी बहन को गिफ्ट करें कुछ खास

राखी पर प्यारी बहन को गिफ्ट करें कुछ खास

रक्षाबंधन के पावन पर्व पर हर बहन को अपने भाई से विशेष उपहार मिलने का इंतजार होता है। रक्षाबंधन पर हर बहन यही सोचती है कि इस बार उनका भाई उन्हें क्या खास उपहार देगा और भाई भी यही सोचतें हैं कि वे अपनी प्यारी बहना को ऐसा क्या उपहार दें जिससे उनकी बहन का चेहरा भी खुशी से खिल उठे। उपहार कुछ ऐसा होना चाहिए जिसमें आपकी भावनाएं झलकें और साथ ही वह चीज आपकी बहन की जरूरत की भी हो। आइए जानते हैं कुछ ऎसे उपहारों के बारे में जो आप अपनी बहन को दे सकते हैं और उसे पाकर वह भी खुशी से फूली नहीं समाएगी।

  • अगर आपकी बहन किसी दूर शहर में रहती है और राखी पर वह आपके पास नहीं आ सकती तो आप वेबसाइट की मदद ले सकते हैं। आप अॉन लाइन गिफ्ट खरीद कर भेज सकते हैं।
  • बहन की पसंद की कोई भी ऎसी चीज जिसे वह खरीदना चाहती हो लेकिन किसी कारण से नहीं खरीद पाई हो। बहन की पसंद के लेखक की किताबें या स्टाइलिश घड़ी या ज्यूलरी या एथनिक ज्यूलरी बॉक्स भी दे सकते हैं। आर्टिफिशियल और स्टोन ज्यूलरी आजकल ट्रैंड में भी है। 
  • लड़कियों खुशबुओं की दीवानी होती हैं, आप भी अपनी बहन के मनपसंद ब्रांड की परफ्यूम गिफ्ट करके राखी के त्योहार को महका सकते हैं। 
  • गैजेट्स की शौकीन है या स्टूडैंट है तो उसकी पसंद और जेब के अनुसार आई-पॉड या स्मार्ट फोन दे सकते हैं। 
  • लड़कियों को कपड़ों का शौक तो होता ही है। अच्छी-सी ड्रैस या पारम्परिक सूट भी अच्छा अॉप्शन हो सकता है। स्टॉल या मल्टीकलर दुपट्टा या स्कार्फ जो भी आपकी बहन का मनपसंद हो, आप उसे तोहफे में दे सकते हैं। 
  • शादी के लड़कियों की प्राथमिकताएं बदल जाती हैं इसलिए आप उसे जरूरत की यूनीक चीजें तोहफे में दे सकते हैं। बैडशीट, कुशन, पेंटिंग, क्रॉकरी, साड़ी या कोई डैकोरेशन पीस दें।  ज्यूलरी या  परफ्यूम भी दे सकते हैं। 
  • बहन अगर खाने-पीने की शैकीन है तो उसे किसी अच्छे रेस्त्रां का फूड वाउचर भी गिफ्ट कर सकते हैं।  शॉपिंग वाउचर भी गिफ्ट कर सकते हैं जिससे वह अपनी पसंद से शापिंग कर सके। ब्यूटी कांशियस है तो ब्यूटी पैकेज या स्पा वाउचर भी आपकी बहन को खासा पसंद आएगा।आपकी बहन घूमने की शौकीन है तो उसे एक हॉलिडे पैकेज भी गिफ्ट कर सकते हैं। अपनी पसंद की जगह घूमने जाना आपकी बहन को जरूर पसंद आएगा।

कच्चे धागे पर भारी पड़ रही सोने-चांदी और रत्नों की चमक

कच्चे धागे पर भारी पड़ रही सोने-चांदी और रत्नों की चमक 

राखी एक कच्चे धागे की डोर है जो भाई-बहन के बीच प्रेम व स्नेह का प्रतीक है। इसे बहन अपने भाई की कलाई पर बांधती है। यह कच्चा धागा बहन-भाई के रिश्ते को प्रेम में बांधे रखता है। राखी का पवित्र धागा भाई के वादे का भी प्रतीक है जो बहन की रक्षा के लिए लिया जाता है। सूत्र (धागा)  क्योंकि बिखरे हुए मोतियों को अपने में पिरोकर एक माला के रूप में एकाकार बनाता है। माला के सूत्र की ही तरह रक्षा-सूत्र (राखी) भी भाई-बहन को जोड़ता है। 

समय के हिसाब से सबकुछ बदल रहा है। त्यौहार भी और उनसे जुड़ी परंपराएं भी। रक्षाबंधन के त्यौहार में भी बहुत बदलाव आए हैं। एक वक्त था जब नज़दीकी ही नहीं. दूर के रिश्तों में भी बहुत प्यार होता था। सिर्फ सगे भाई को ही नहीं, बल्कि चचेरे , ममेरे , मौसेरे , फ़ुफ़ेरे और जितने भी भाई होते, उन सबको राखियां भेजी जाती थीं। ध्यान रखा जाता था कि कहीं कोई छूटे न और फ़िर जो जितनी दूर रहता होता, उसे उतना पहले ही राखी भेजने की तैयारी की जाती। इसके लिए राखी से काफी दिन पहले ही सबके नाम पते लिफाफों पर लिख कर रख रख लिए जाते। पोस्ट आफ़िस में सब जगह रखियों से भरे हुए, फ़ूले हुए लिफ़ाफ़े दिखाई देते। आजकल ई-राखी का प्रचलन बढ़ रहा है और भाई-बहन वाट्स एप्प और फ़ेसबुक के जरिए राखी का त्यौहार मना रहे हैं।

कपास से बना वह पवित्र धागा पुराने जमाने की बात हो चली है। राखी का बाजार अब पूरी तरह से हाईटेक हो गया है। मार्केट में अब ब्रांडेड राखियां आ गई हैं। परंपरागत राखियों की जगह अब सोने-चांदी के धागे की बेशकीमती रत्न जड़ित राखियों ने ले ली है, जिनकी कीमत कई हजार से लाखों रूपए तक है। बहनें अब राशियों के अनुसार कीमती पत्‍थरों से जड़ी राखियां अपने भाई को बांध रही हैं। राखी पर इन कीमती रत्नों का करोड़ों रुपए का कारोबार होने लगा है। हालांकि राखी का परंपरागत बाज़ार जस का तस बरकरार है। हां, इसमें इतना फर्क आया है कि समय और मांग के हिसाब से राखियों का लुक अब बदल गया है।

बच्चे राखी के त्यौहार पर भी अपने लिए खुशियों और मस्ती की तलाश कर लेते हैं। पहले मोटी-मोटी राखियों से उनकी पूरी बांह भर जाती थी, पर अब उन्हें राखी पर भी अपने फेवरिट कार्टून कैरेक्टर चाहिए। जहां-तहां मार्केट में ‘कार्टूनमेनिया’ छाया है। डोरेमॉन, पोकेमॉन, बेटमैन, बेन टेन, छोटा भीम, स्पाइडर मैन, सुपरमैन, बाल हनुमान, हैरी पॉटर की राखियां बच्चों के लिए सेंटर ऑफ अट्रैक्शन बनी हुई हैं। स्वीट्स और चॉकलेट युक्त राखी को भी बच्चे खूब पसंद कर रहे हैं।

भईया मेरे राखी के बंधन को निभाना

राखी के लोकप्रिय गीत जो गुनगुनाने के लिये कर देंगे मजबूर

भाई-बहन के अटूट प्यार को दर्शाने वाले त्योहार रक्षाबंधन के गीतों ने लोगों के दिलों पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। पचास और साठ के दशक में रक्षाबंधन हिंदी फिल्मों का लोकप्रिय विषय बना रहा। इस दौरान रक्षाबंधन पर बनी फिल्मों के कुछ के गीत तो मानों अमर हो गए हैं। बरसों बाद भी इनकी लोकप्रियता जस की तस बनी हुई है। आज भी जब हम ये गीत सुनते हैं तो इन गीतों को गुनगुनाने के लिये मजबूर हो जाते हैं। इन सभी गीतों में स्नेह के धागे को शब्दों में पिरोया गया है।

बहन-भाई के प्यार भरे अटूट रिश्ते पर बनी सबसे पुरानी और लोकप्रिय फिल्मों में से एक है 1959 में बनी "छोटी बहन", जिसका लता मंगेशकर द्वारा गाया गीत, "भइया मेरे राखी के बंधन को निभाना....", आज भी बहनें गाती हैं जब वे अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं। यह गीत नंदा और रहमान पर फ़िल्‍माया गया है।

1971 में  रिलीज देव आनंद और जीनत अमान की फिल्म "हरे रामा हरे कृष्णा" भी भाई-बहन के प्यार पर आधारित थी। इस फिल्म का गीत, "फूलों का तारों का सबका कहना है, एक हजारों में मेरी बहना है.." सदाबहार गीतों में शामिल है। आज भी भाई अपनी बहन को खुश करने के लिए गुनगुनाते हैं। 
  
1974 में प्रदर्शित धर्मेद्र की सुपरहिट फिल्म "रेशम की डोर" में सुमन कल्याणपुर द्वारा गाया गया गाना, "बहना ने भाई की कलाई पे प्यार बांधा है, प्यार के दो तार से संसार बांधा है... ", आज भी जब बहनें सुनती हैं तो भावुक हो जाती हैं।

"चंबल की कसम" का गीत "चंदा रे मेरे भइया से कहना, बहना याद करे....", आज तक याद किया जाता है। रक्षाबंधन के दिन भाई से दूर दूसरे शहर में रहने वाली बहनें इस गीत के बोल सुन आंखें भर लेती हैं।

1962 में प्रदर्शित "अनपढ" फिल्म का माला सिन्हा पर लता मंगेशकर की आवाज में फिल्माया गीत "रंग-बिरंगी राखी लेकर आई बहना...", सुनकर हंसती-मुस्कुराती बहन का चेहरा भाई के जेहन में आ जाता है जो हर साल बड़े प्यार से अपने भाई के लिए राखी लेकर आती है। 

विमल राय की "बंदिनी" में भी एक बेहद मार्मिक गीत था, जिसमें बहन अपने पिता से भाई को सावन में भेजने का अनुरोध करती है। "अब के बरस भेज भइया को बाबुल सावन में दीजो बुलाय रे...।" बहन की व्यथा को बतलाने वाले शैलेन्द्र के लिखे और एसडी बर्मन के स्वरबद्ध किए इस गीत को आशा भोंसले ने गाया है।

"काजल" का मीना कुमारी पर फिल्माया आशा भोंसले द्वारा गाया गीत "मेरे भइया मेरे चंदा मेरे अनमोल रतन, तेरे बदले मैं ज़माने की कोई चीज़ ना लूँ...", का रक्षा बंधन के गीतों में विशिष्ट स्थान आज भी बरकरार है।

Discover your Fragrance

भीनी-भीनी खुशबू की महक

खुशबू से ज्यादा विचारोत्तेजक और कुछ भी नहीं है। भीनी-भीनी खुशबू की तरफ सहज ही आपका खिंचाव हो जाता है। इसकी खासियत है कि वह आपके उखड़े हुए मूड को भी ठीक कर देती है। इससे तन-मन दोनों को खुशी मिलती है। आप सुकून महसूस करती हैं। आप तरोता़ज़ा महसूस करती हैं। दिन भर की सारी थकावट दूर हो जाती है। खुद से ही आती खुशबू कॉन्फिडैंस लैवल भी बढ़ा देती है...


नारी के सोलह श्रृंगारों में खुशबू भी एक है। बाज़ार में परफ्यूम की ढेरों वैरायटी और ब्रांड्स उपलब्ध हैं। कुछ परफ्यूम बोल्ड, कुछ फूलों की ताजगी भरी महक वाले तो कुछ मिठास वाले होते हैं। लेडीज़ परफ्यूम आम तौर पर फूलों जैसे रोका, ऑरेंज ब्लॉसम्स, जैस्मिन, गॉर्डेनिया और कार्नेशंस की खुशबू से बनाए जाते हैं, जबकि पुरुषों को ज़्यादा तेज़ और बोल्ड खुशबू वाले परफ्यूम पसंद आते हैं।

दिन भर महकने की ख्वाहिश के चलते परफ्यूम एक्सैसरी बन चुके हैं। सही फ्रेगरेंस किसी भी आउटफिट को कॉम्पलीमेंट कर सकती है। फैशन पसंद महिलाओं को सभी अवसरों के लिए बढ़िया फ्रेगरेंस का चुनाव करना चाहिए। सही खुशबू दोस्तों, परिवार के सदस्यों और बिजनस एसोसिएट्स पर बढ़िया प्रभाव डालती है। सही खुशबू का चुनाव जितना महत्वपूर्ण है उतना ही जरूरी है इसे अप्लाई करने का सही तरीका।

ड्राई स्किन पर लगाएं

गीली की अपेक्षा ड्राई स्किन ज्यादा परफ्यूम को अॉब्जॉर्ब करती है। इसलिए नहाने के बाद ही अपने शरीर पर परफ्यूम स्प्रे करें।

पल्स प्वाइंट पर लगाएं

पल्स प्वाइंट्स पर परफ्यूम लगाएं। पल्स प्वाइंट्स में कलई का अंदरूनी हिस्सा, कोहनी के भीतर, गर्दन के पीछे, घुटनों के पीछे और टखनों के पीछे के भाग शामिल हैं। यह लोशन या तो सुगंध रहित हो या इसकी खुशबू आपकी परफ्यूम से मिलती हो। लोशन के सूखने तक एक-दो मिनट के लिए रुकें।

हेयरब्रश पर करें परफ्यूम स्प्रे

बाल खुशबू के लिए बेहतरीन स्पॉट हैं। खास अवसरों पर अपनी गर्दन के पीछे परफ्यूम स्प्रे करें। आपके शरीर की गर्मी और आपके बालों की मूवमेंट खुशबू को फैला देंगे। आपके बालों का तेल भी आपकी खुशबू को बनाए रखता है। हेयर ब्रेश पर परफ्यूम स्प्रे करने से बालों में खुशबू समा जाती है और जब भी आपका सिर मूव करता है, बाल खुशबू बिखेरते रहते हैं। लेकिन एेसा रोजाना न करें, क्योंकि एल्कोहल से आपके बाल ड्राई हो जाएंगे।

पूरे शरीर पर न करें छिड़काव

परफ्यूम केवल पल्स प्वाइंट्स पर स्प्रे करना चाहिए। अगर परफ्यूम बहुत लाइट हो तो ऐसा करना बढ़िया रहता है। पूरे शरीर पर परफ्यूम स्प्रे करना फूहड़ता झलकाता है। खुशबू से नहाकर आए हुए लगना अच्छा नहीं लगता। कानों और गर्दन के पीछे परफ्यूम लगाकर आप अपने साथी को अपनी ओर आकर्षित कर सकती हैं। इससे आप फ्रैश भी स्मैल करेंगी।

खुशबू और मिथ

लोगों में एक मिथ है कि यदि आप अपने पार्टनर को परफ्यूम गिफ्ट करते हैं तो आपकी उससे लड़ाई हो जाती है। इसीलिए कुछ लोग अपने रिश्ते को प्यार से खत्म करने के लिए भी परफ्यूम का सहारा लेते हैं। वहीं कुछ लोग अपने प्यारभरे रिश्ते को महकाने के लिए भी परफ्यूम को ही अज़माते हैं।

सही परफ्यूम का चुनाव

परफ्यूम का चयन भी एक आर्ट है। सिर्फ यही सोचकर कोई परफ्यूम नहीं खरीदनी चाहिए कि वह डिज़ाइनर है, या आपकी दोस्त इसे यूज़ करती है। जो परफ्यूम आपकी दोस्त पर महकता है, वही अाप पर ठीक इसके विपरीत प्रभाव दिखा सकता है। दरअसल, परफ्यूम की खुशबू जब आपकी स्किन की नैचुरल खुशबू से मिलती है तब उस परफ्यूम की असल महक थोड़ी सी बदल जाती है। आपको हमेशा वही परफ्यूम खरीदना चाहिए जिसकी खुशबू आपके शरीर के नैचुरल कैमिकल्स से मेल खाए यानी वो आपके शरीर की नैसर्गिक गंध को बढ़ाए या आपके शरीर की गंध के साथ घुल-मिल जाए।
आपके लिए कौन सा परफ्यूम बैस्ट है इसकी जांच के लिए आप इसे कलाई के पीछे स्प्रे करें और 10-15 मिनट तक इंतज़ार करें। यदि इसके बाद भी आप परफ्यूम की महक को अच्छी तरह महसूस कर रही हैं तो आपको वह परफ्यूम तुरंत खरीद लेना चाहिए। इस दौरान आप जान जाएंगे कि यह आपके शरीर के नैचुरल कैमिकल्स के साथ कैसे रिएक्ट करता है। एक वक्त में दो-तीन से ज़्यादा परफ्यूम टैस्ट न करें, नहीं तो आपके लिए सही खुशबू का चुनाव करना मुश्किल हो जाएगा।

Tuesday, August 18, 2015

बोल्ड लुक वाले स्टाइलिश ब्राइडल सैंडल्स

हाई हील से ग्लैमरस लुक

जब किसी लड़की की सगाई होती है, तब शादी की तैयारियों का सबसे पहला पहला और एक्साइटिंग काम होता है वैडिंग ड्रैस का चुनाव। कई बार देखा गया है कि ब्राइडल सैंडल्स की अनदेखी कर दी जाती है। वैडिंग सैंडल्स की सिलेक्शन के लिए अलग से टाइम निकालें। इसे लास्ट मिनट शॉपिंग के लिए न छोड़ दें। याद रखें जूते कितने भी खूबसूरत और बढ़िया क्यों न हों अगर उनकी फिटिंग सही नहीं है और उन्हें पहनने में परेशानी होती है, तो वो सिर्फ पैसों की बर्बादी ही है।

आप भीतर से जैसा महसूस करती हैं, वही भाव आपके चेहरे पर झलकता है। अगर आपकी सैंडल की फिटिंग ठीक नहीं है या यह आपके पैरों को काट रही है, तो कितनी भी कोशिश कर लें, आपकी स्माइल में सब झलक जाएगा। स्टाइलिश दिखने की चाह में कई बार ब्राइड्स ऐसे ब्राइडल सैंडल्स का चुनाव कर बैठती हैं जो उनकी फैशन स्टेटमेंट को खत्म कर देते हैं और उन्हें परेशानी अलग से झेलनी पड़ती है। अगर आप अपने ब्राइडल सैंडल्स में कंफर्टेबल फील करेंगी तो आप बेहद आकर्षक दिखेंगी। आपका स्पैशल डे खूबसूरत यादों से भरा रहे इसलिए अपनाएं ये टिप्सः

1. हाई हील आपको ग्लैमरस लुक देती है और वैडिंग ड्रैस के साथ परफैक्ट दिखती है।लेकिन स्टाइल के लिए कंफर्ट का त्याग न करें। हील उतनी ही हो जितनी आपको पहनने की आदत हो।
2. जूतों का साइज़ गलत होने से पहनने से दिक्कत होती है। इसलिए बढ़िया फिटिंग के लिए सैंडल्स की शॉपिंग शाम को करें।
3. जब सैंडल्स की शॉपिंग के लिए जाएं, तो अपनी मम्मी, बहन या सहेली को साथ ले जाएं, ताकि वो आपको सही सलाह दे सकें और गाइड कर सकें।
4. ब्राइडल ड्रैस की फिटिंग चैक करने जाएं तो ये सैंडल्स साथ लेकर जाएं, ताकि लहंगे की हैंमलाइन की लंबाई बिलकुल सही बने।
5. शादी पर पहनने से पहले इन सैंडल्स को घर में पहन कर अच्छी तरह घूमें, ताकि ये आपके पैरों के अनुसार एडजस्ट हो जाएं और अपने स्पैशल डे में इन्हें पहन कर आपको कोई प्रॉब्लम न हो। अगर आप इन्हें पहनकर डांस भी करना चाहती हैं, तो इसकी प्रैक्टिस भी कर लें।
6. नई सैंडल स्लिपरी हो सकती है, इसलिए इसके सोल्स को सैंडपेपर से हल्का-सा रगड़ लें।
7. हाई हील्स पहनकर ज्यादा देर तक खड़े रहना मुश्किल होता है, इसलिए मौका मिले तो बैठकर पांवों को आराम देने में संकोच न करें।

Saturday, August 15, 2015

जानें कैसा हो वर्किंग वूमेन का डाइट चार्ट

कामकाजी महिलाओं को अपनी सेहत और खान-पान की ज्यादा केयर करने की जरूरत होती है। उनका खान-पान आम महिलाओं की अपेक्षा और भी न्यूट्रीशियस और स्वास्थ्यवर्धक होना चाहिए, नहीं तो उनका अॉफिस का काम और घर-परिवार सभी प्रभावित होंगे। कामकाजी महिलाओं को अपनी डाइट में विटामिन, जिंक, प्रोटीन और कैल्शियम युक्त चीजें शामिल करनी चाहिए। उन्हे अपना डाइट चार्ट बनाना चाहिए और उसी के हिसाब से डाइट लेनी चाहिए।

प्रोटीनयुक्त करें ब्रेकफास्ट 

सुबह का नाश्ता पौष्टिकता से परिपूर्ण होना चाहिए। यह हैल्दी वेट मेनटेन करने में प्रमुख भूमिका निभाता है। ब्रेकफास्ट में प्रोटीन शामिल करके अपने मैटाबॉलिज़म को बूस्ट करें। सलिए आप अपने दिन की शुरुआत लो फैट दूध, अंडे, सालमन, दलिया, कॉर्नफ्लेक्स इत्यादि से करें। कार्बोहाइड्रेट्स की अपेक्षा प्रोटीन युक्त ब्रेकफास्ट करने से ज्यादा कैलोरीज़ बर्न होती हैं। प्रोटीन युक्त खाना आपको लंबे समय तक पेट के भरे होने का अहसास करवाता है और इस तरह आप दिनभर कम कैलोरीज़ का ही सेवन करते हैं। सुबह चाय की जगह आप लस्सी, ब्लैक टी या ग्रीन टी लें तो बेहतर रहेगा। नाश्ते में कभी-कभार बदलाव के लिए आप ब्राउन ब्रेड या मल्टी ग्रेन ब्रेड से बना सेंडविच भी खा सकती हैं।

हैल्दी मिड-मॉर्निंग स्नैक

थोड़ा-थोड़ा खाते रहना आपके ब्लड शुगर लैवल को मैनेज करने का सबसे बढ़िया तरीका है। इसका मतलब यह नहीं है कि आप ज्यादा खाएं। इस टाइम पर आप फल जरूर खाएं। कोशिश करें कि लाल, पीले या नारंगी रंग के फल खाएं, जैसे स्ट्रॉबेरी, सेब, पपीता या आडू आदि। इनमें विटामिन-ए की मात्रा मिलती है। आप स्प्राउट्स या  ड्राई फ्रूट्स भी ले सकती हैं।

लंच में ले कार्ब

ब्रेकफास्ट और लंच के बीच सिर्फ 4-5 घंटे का ही गैप होना चाहिए। कामकाजी महिलाओं को लंच में ऐसी चीजें खानी चाहिए जिनमें जिंक और कार्बोहाइड्रेट्स की मात्रा अधिक हो। कार्ब रिच फूड्स से एनर्जी मिलती है। सलाद का सेवन जरूर करें। लंच में पालक या ब्रोकली जैसी हरी सब्जियों को शामिल करें। गेहूं की रोटी की जगह बेसन या गेहूं और बेसन मिक्स रोटी भी खा सकती हैं। खाने में एक कटोरी दाल जरूर खाएं। अधिक प्रोटीन के लिए आप पंच मेल दाल यानी पांच तरह की दालों को एक साथ बनाकर खाएं।

मिड आफ्टरनून स्नैक

शाम तक थकान महसूस होने लगती है इसलिए इस समय आप एनर्जी के लिए फल लें। एक मुट्ठी ड्राइ फ्रूट्स आपको प्रोटीन तो देते ही हैं, साथ ही डिनर तक आपको भूख भी नहीं लगने देते। ध्यान रखें ये नट्स नमकीन न हों। शाम को कई बार मीठा खाने का मन करता है, लेकिन बिस्कुट या पेसट्री खाने से बचें।

डिनर में शामिल करें फाइबर 

रात के समय हल्का खाना ही बेस्ट रहता है। हल्के खाने का यह मतलब बिल्कुल भी नहीं है कि आप कुछ खाएं ही न। आपकी आधी पलेट सब्जियों की कलरफुल वैरायटी औस सलाद से भरी होनी चाहिए। पराठें की जगह रोटी और कम मसाले वाली सब्जी खाएं। हल्के खाने में आप पोहा, चीला, सलाद, अंडे की सफेदी का ऑमलेट, उबला हुआ अंडा, कॉर्नफ्लेक्स भी खा सकती हैं। डिनर में फाइबर्स फूड्स शामिल करें, इससे फैट नहीं बढ़ता और स्किन व बाल भी हैल्दी रहते हैं। सर्दियों के इस मौसम में आप सब्जियों का सूप भी पी सकती हैं।

Friday, August 14, 2015

स्वतंत्रता दिवस पर पहनें कुछ खास

 ट्राई कलर थीम के साथ सेलिब्रेट करें आज़ादी दिवस




आज हमारे लिए बहुत गर्व का दिन है क्योंकि आज भारत का स्वतंत्रता दिवस है। इस दिन हम अपने स्वतंत्रता सैनानियों का शुक्रिया अदा करते हैं जिनकी बदौलत हम आज आजाद हवा में सांस ले रहे हैं...

स्वतंत्रता दिवस पर इस बार हमें कुछ नया करने का प्लान करें। नए दिन की शुरुआत नई ऊर्जा और नई सोच के साथ करें। स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में जा रहे हैं या अपने दोस्तों के साथ शहीदों को श्रद्धांजलि देने जा रहे हैं तो घर से बाहर निकलते समय सबसे पहले अपनी ड्रैस पर ध्यान दें। आपकी ड्रैस ऐसी हो जो आज के महत्वपूर्ण दिन आपकी पर्सनैलिटी को कॉम्पलीमेंट करे और आपके दिल में भरा देश भक्ति का जज्बा दूसरों के लिए भी प्रेरणा का स्त्रोत बने। 

इस बार हमारा 69वां स्वतंत्रता दिवस है। इस दिन को सभी लोग ट्राई कलर थीम के साथ समारोह सेलिब्रेट करना पसंद करते हैं। कुछ लोग ऐसी ड्रेस पसंद करते हैं जिसमें तिरंगे के सभी तीनों रंग हों तो कुछ सिर्फ सफेद रंग पहनना ही पसंद करते हैं। इस ड्रैस कोड के साथ भी आप स्टाइलिश और एलिगेंट दिख सकते हैं।

लिलेन की सफेद साड़ी में पारम्परिक लुक आपको भारतीय होने पर गर्व का अहसास करवाएगा। इसके साथ आप मल्टीकलर या केसरिया रंग का ब्लाउज पहन सकती हैं।अगर आप नियोन ट्रैंड फॉलो करती हैं तो देश के आज़ादी दिवस को सेलिब्रेट करने के लिए आप नियोन ग्रीन या केसरिया साड़ी को कंट्रास्ट ब्लाउज के साथ टीम करें। साड़ी के साथ ट्राई कलर एक्सेसरीज़ आपके लुक को और भी एक्ट्रैक्टिव बना देगी।

हरे और केसरिया दुपट्टे के साथ कढ़ाई वाला सफेद सलवार सूट आप पर बेहद सुंदर दिखेगा और देखने वाले को भी भगत सिंह के बोल- मेरा रंग दे बसंती चोला, माए रंग दे ....याद आ जाएंगे। अगर आप थोड़ा कलरफुल ट्राई करना चाहते हैं तो सफेद कुर्ता और केसरिया या हरी सलवार पहन सकती हैं। साथ में मल्टीकलर दुपट्टा बेहतरीन अॉप्शन है।

पारम्परिक गोटा पट्टी के साथ मल्टीकलर जैकेट आजकल ट्रैंड में है। आप सफेद कुर्ता केसरिया जैकेट के साथ पहनें या अपनी मनपसंद डेनिम की जैकेट के साथ भी आप पहन सकती हैं। केसरिया कुर्ती के साथ हरी पटियाला सलवार और शीशों से जड़ी जैकेट आपको भीड़ में सबसे अलग दिखाएगी।

युवक नेहरू कॉलर के कुर्ते या पठानी सूट के साथ ग्रीन या अॉरेंज कलर की जैकेट पहन सकते हैं। ट्राईकलर ब्रेसलेट्स या पगड़ी पहन कर वे भी वे अपना इंडिपेंडेस डे लुक पा सकते हैं। आपकी कुछ भी च्वाइस हो, ध्यान रखें आप जो भी पहनें वो कम्फर्टेबल हो।

Tuesday, January 20, 2015

खतरनाक है शुगर की मिठास

खतरनाक है शुगर की मिठास


डायबिटीज एक गंभीर बीमारी है जिसे धीमी मौत (साइलेंट किलर ) भी कहा जाता है। संसार भर में डायबिटीज के रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है विशेष रूप से भारत में, लेकिन इसके बावजूद अब भी इसके ज्यादातर मरीजों को ठंड में डायबिटीज के कारण होने वाली परेशानियों से बचने के तरीके नहीं पता। यही कारण है कि सर्दियों में मरीजों के लिए अपने शुगर लेवल पर कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है और उनकी बीमारी बढ़ती चली जाती है। दरअसल, डायबिटीज के मरीजों के लिए सर्दियों में ग्लूकोज स्तर को नियंत्रित रखना अधिक जरूरी हो जाता है, क्योंकि सर्दियों में व्यायाम की कमी और मेटाबॉलिक प्रक्रिया बदलने की वजह से ग्लूकोज अनियंत्रित हो जाता है। डायबिटीज में ब्लड शुगर लेवल बढ़ने के कारण पूरे शरीर को नुकसान पहुंचता है। यही नहीं सर्दियों में डायबिटीज के मरीजों में हार्ट अटैक और दूसरी दिल की बीमारियां होने की संभावना चार गुणा तक बढ़ जाती है।  

डायबिटीज को पूरी तरह से खत्म तो नहीं किया जा सकता, लेकिन इसे कंट्रोल में रखा जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि मौसम बदलने से पहले डॉक्टर से सलाह लें और सर्दियों में डायबिटीज के किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें। समय-समय पर शुगर लेवल का चेकअप करवाते रहें। नहीं तो यह जिंदगी से खिलवाड़ करने जैसा साबित हो सकता है। रक्त में ग्लूकोज की मात्रा सामान्य से ज्यादा तथा सामान्य से कम होना दोनों ही स्थितियां घातक सिद्ध होती हैं। सर्दियों में  थोड़ी सी सावधानी आपको डायबिटीज की पीड़ा से दूर रख सकती है।

कैसे करें बचाव: 


डायबिटीज के कारण पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है। पाचन तंत्र कमजोर होने से यह भोजन को भी नहीं पचा पाता है। पाचन शक्ति नहीं होने से रोगी को कब्ज, गैसइटिस और कमजोरी की समस्या हो जाती है। इस मौसम में खान-पान में जरा सी लापरवाही परेशानी का सबब बन सकती है। इसलिए खान-पान का तो बहुत ही ध्यान रखें। हरी सब्जियां, फाइबर और एंटी ऑक्सीडेंट का सेवन अधिक करें। तीन बार भारी भोजन करने की बजाय 4-5 बार हल्का खाना खाएं। कैलोरी पर ध्यान रखें। जंक फूड बिल्कुल न खाएं। सोने से करीब दो घंटे पहले कुछ न खाएं।

डायबिटीज रोगियों का इम्यून सिस्टम भी कमजोर होता है। मौसम बदलते ही बार-बार बीमार होना, चोट-घाव ठीक न होना जैसी समस्याएं भी होती हैं। इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए सर्दी के मौसम में आंवला, हल्दी, काली मिर्च, तुलसी जैसी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली वस्तुओं का उपयोग लाभकारी है।
  
ग्लूकोज से ही शरीर को ऊर्जा मिलती है. लेकिन डायबिटीज रोगियों के शरीर में ग्लूकोज का पाचन नहीं होता है, बल्कि इसकी जगह प्रोटीन का पाचन होने लगता है। इससे रोगी दुबला हो जाता है। इसी कारण डायबिटीज के रोगियों में प्रोटीन की जरूरत अधिक होती है। डायबिटीज के मरीज ठंड के मौसम में प्रोटीन की कमी को आसानी से पूरा कर सकते हैं। इस मौसम में प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थो के सेवन से विशेष लाभ प्राप्त होते हैं। इसके लिए सभी प्रकार की दालें, सूखे मेवे जैसे- काजू, बादाम, अखरोट, मूंगफली, मौसमी फल और सब्जियां आदि कई पदार्थ हैं। इनके ठंड में उचित सेवन से शरीर को अनेक लाभ होते हैं।

डायबिटीज में नर्वस सिस्टम को भी नुकसान पहुंचता है। डायबिटीज में पैरों की नसों पर असर होता है, जिससे पैरों की संवेदना खत्म हो जाती है। इससे हाथ-पैर की उंगलियों में सूनेपन का आभास होता है। ऐसे में मरीज को दर्द, चुभन, सर्द - गर्म का पता नहीं लगता। यही कारण है कि जब भी कोई चोट लगती है, गर्म पानी की बोतल या आग से सेंकते हैं, तो फफोला हो जाता है, जो आगे चलकर गैंगरीन में बदल सकता है और कई मामलों में पैर काटने की नौबत आ सकती है। कई मरीजों के पैरों में सुन्नपन इस कदर होता है कि उन्हें चप्पल पैर से बाहर निकल जाने या चप्पल के साथ सो जाने का भी एहसास नहीं होता। ऐसे लोग अक्सर नहाने जाने पर गर्म पानी सीधे पैरों पर डाल लेते हैं या ब्लोअर के सामने सीधे पैर रख लेते हैं और जल जाते हैं। अत: हाथ पैर में डायरेक्ट वूलन न पहनें। डायरेक्ट हीटर के सामने न जाएं। गुनगुना पानी इस्तेमाल करें।  हाथों व पैरों की उंगलियों को हिलाने या उंगलियों का व्यायाम करने से नर्व्स में शक्ति आती है, इससे ब्लड सरकुलेशन भी सुधरता है।

ठंड में चिल ब्लेन की सबसे ज्यादा दिक्कत डायबिटीज के मरीजों को होती है। सर्दी में डायबिटीज मरीजों को एक बड़ी दिक्कत पैरों की सूजन की भी होती है। यदि खून में ग्लूकोज की मात्रा 250 एमजीडीएल से अधिक आ रही है तो पेशाब में कीटोन्स की जांच अवश्य कराएं, इस स्थिति में तेजी से पैरों में सूजन बढ़ती है। इसलिए पैरों का ज्यादा ध्यान रखना चाहिए। ऐसे में पैरों की सफाई रखें। पैर धोने के बाद उंगलियां अच्छी तरह सुखाएं,  रूखे पैरों पर मॉइश्चराइजर लगाएं। थोड़े लूज जूते व जुराबें पहनें। नंगे पैर न घूमें। पैरों की रेग्युलर एक्सरसाइज जरूर करें। कीटोन्स आने पर दवाओं के साथ ही डाइट पर भी ध्यान दें। हरी सब्जियां और रेशेदार फल फायदेमंद हो सकते हैं। पैरों का ध्यान रखें। 

डायबिटीज के मरीज कंधों के जोड़ों में जकड़न की वजह से  भी परेशान रहते हैं। ब्लड ग्लूकोज लेवल को सामान्य रखकर और रेग्युलर एक्सरसाइज से ठीक हो सकने वाली इस समस्या के लिए कई लोग स्टेरॉयड का इंजेक्शन भी लगवा लेते हैं , जो दिक्कतों और बढ़ा रहा है। जॉइंट के कोलेजन टिश्यू में प्रोटीन जमा होने से ऐसी दिक्कतें आती हैं, क्योंकि ठंड के कारण लोग एक्सरसाइज आदि बंद कर देते हैं। दर्द की वजह से बढ़े तनाव के कारण ब्लड शुगर लेवल भी गड़बड़ हो जाता है, जो दूसरी परेशानियां खड़ी कर सकता है। ऐसे में डायबिटीज के मरीज खान-पान का ध्यान रखें और रेग्युलर एक्सरसाइज करें। नियमित व्यायाम और टहलने से शरीर पुष्ट होता है और कमजोरी दूर होती है। सर्दियों में सैर पर अवश्य जाएं, लेकिन अत्यधिक ठंड में न जाएं और धुंध हटने के बाद ही घऱ से जाएं। 

डायबिटीज आंखों के लिए भी नुकसानदेह है। डायबिटिक रैटिनोपैथी के मरीजों में  आंख के पर्दे की रक्त कोशिकाओं पर भी असर पड़ता है। डायबिटीज से पर्दे में सूजन, रक्त का रिसाव, पर्दे पर खिंचाव आदि हो सकता है। आंखों का यह रोग होने की आशंका उस समय और भी बढ़ जाती है, जब रक्त में शुगर की मात्रा नियंत्रण में न रहे या उसे कम उम्र में शुरू होने वाला डायबिटीज (इंसुलिन डिपेंडेंट डायबिटीज) हो। हालांकि शुरूआत में पर्दे में सूजन, खिंचाव जैसे कारणों से आंखों की रोशनी पर कोई खास फर्क नहीं पड़ता, लेकिन धीरे-धीरे डायबिटीज बढ़ने से रोशनी प्रभावित होने लगती है और आगे चलकर यह लाइलाज हो जाती है। इसके मरीज साल में दो बार पुतली फैलाने की दवा डालकर फंडोस्कोपी कराएं। खून की नसों में होने वाले परिवर्तनों का पता लगाने के लिए एंजियोग्राफी व ओसीटी कराएं। आंख में खून भरने या खिंचाव से पर्दा फटने पर सर्जरी ही एकमात्र उपाय है। इसके अलावा अपने ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखें। 

Monday, January 19, 2015

दिल पर भारी कड़ाके की ठंड

दिल पर भारी कड़ाके की ठंड


सर्दी का मौसम अपने साथ सेहत से जुड़ी कई समस्याएं भी साथ लेकर आता है। सर्दी के दिनों में शरीर के तापमान को सामान्य बनाने के लिए दिल को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है। दरअसल, सर्दियों के मौसम में शरीर को गर्मी देने के लिए नसें सिकुड़ने लगती हैं, जिससे ब्लड सर्कुलेशन कम हो जाता है और पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाने के कारण हार्ट को आम दिनों की तुलना में कहीं ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। यही कारण है कि सर्दी में दिल की बीमारी के 40% मरीजों को दिल का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ जाता है। सर्दियों में दिल का दौरा पड़ने की प्रमुख वजह गर्मियों की अपेक्षा सर्दी में वसा का इस्तेमाल अधिक और व्यायाम की कमी को भी माना जाता है।

अगर आप डायबीटीज या हाई ब्लड प्रेशर के मरीज हैं, तब तो इस मौसम में आपको अपने दिल का और भी खास ध्यान रखना होगा। डायबिटीज के मरीजों के लिए सर्दियों में ग्लूकोज स्तर को नियंत्रित रखना अधिक जरूरी हो जाता है। गर्मी की अपेक्षा सर्दी में डायबीटीज मरीजों को आंख और पैरों का ज्यादा ध्यान रखना चाहिए। सर्दियों के दौरान डायबीटीज के मरीजों में दिल और मस्तिष्क आघात का खतरा बढ़ जाता है। डायबीटीज  के मरीज में घुटन और सीने में दर्द जैसे चेतावनी संकेतों को गंभीरता से लेना चाहिए, क्योंकि ये दिल के दौरे के लक्षण हो सकते हैं।

यह मौसम स्वस्थ लोगों के लिए भी चेतावनी लेकर आता है। हर किसी को दिल की बीमारी के लक्षणों के लिए चौकन्ना रहना चाहिए। सांस फूलना और सीने के बीच के हिस्से में दर्द - दिल की बीमारी के दो महत्वपूर्ण लक्षण होते हैं। लेकिन इन दोनों की सही पहचान करना ज़रूरी है।

सांस फूलना अक्सर अस्थमा या दमे की बीमारी का सूचक होता है। इसलिए ध्यान रखें अगर आपकी सांस तेज़ चलने और एक्सरसाइज़ करते समय फूलती है तो यह दिल की बीमारी की वजह से है। इसी तरह गैस होने की वजह से लोगों को पेट के ऊपरी हिस्से में अक्सर दर्द होता है और वो उसे एन्जाइना का दर्द समझ लेते हैं। या फिर एन्जाइना के दर्द को गैस की वजह से होने वाला दर्द समझ कर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। इसलिए आपको सतर्क रहना चाहिए ताकि सीने के दर्द और पेट के दर्द की पहचान और उपचार में आप गलती ना कर दें। अगर ऐसा कोई भी दर्द आपको पहली बार हुआ हो तो फौरन डॉक्टरी जांच करवाएं।

इसलिए बढ़ता है दिल के दौरे का जोखिम

सर्दी में हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिये सबसे बड़ी परेशानी यह है कि ठंड की वजह से पसीना नहीं निकलता है और शरीर में नमक का स्तर बढ़ जाता है जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। सर्दियों में रक्तवाहिनी सिकुड़ जाती हैं इसलिए खून की सामान्य आपूर्ति बाधित होती है और ब्लड प्रेशर भी बढ़ जाता है। सर्दी में शारीरिक गतिविधियां कम होने के कारण अतिरिक्त कैलोरी बर्न नहीं हो पाती और कोलेस्ट्राल तेजी से धमनियों में जमने लगता है। इससे भी ब्लड प्रेशर बढ़ने की आशंका बढ़ जाती है और ब्लड प्रेशर बढ़ने से दिल के दौरे का जोखिम बढ़ जाता है। कड़ाके की ठंड दिल की सेहत के लिए भारी हो सकती है, ऐसे में दिल के मरीजों को अपने दिल को सेहतमंद बनाए रखने के लिए खास एहतियात बरतने की जरूरत होती है।

मिथ है यह

लोगों के मन में एक गलतफहमी है कि सर्दी के दिनों में गर्म चीजें जैसे गुड़ से बनी गजक, तिल के लडडू आदि खाने से या व्हिस्की या रम के दो पैग गुनगुने पानी से लेने से सर्दी भाग जाएगी, लेकिन दरअसल ऐसा नहीं है क्योंकि ऐसा करने से आपको फौरी तौर पर भले ही सर्दी से राहत मिले, लेकिन बाद में ब्लड प्रेशर और ब्लड शूगर बढ़ सकता है, जो नुकसानदेह साबित हो सकता है। शराब का सेवन करने के बाद ठंड में बाहर न निकलें। इससे आपकी रक्तवाहिनी सिकुड़ सकती हैं, जिससे फेफड़ों की समस्या हो सकती है।  दिल के मरीज़ों को सिगरेट से दूर रहना चाहिए।

ऎसा हो खानपान

खान पान पर भी ध्यान दें। पौष्टिक खाना खाकर रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाएं।  खाने में फाइबर और एंटी ऑक्सीडेंट की मात्रा बढ़ाएं। खाने में ओमेगा थ्री की मात्रा बढ़ाएं। तेल और मक्खन से बने खाद्य पदार्थों से पूरी तरह बचें। सर्दी की शुरुआत से ही बाजरे का सेवन शुरू कर लें। बाजरा न केवल शरीर को ऊष्मा देता है बल्कि पौष्टिक आहार भी है। बाजरे की खिचड़ी, रोटी, उत्पम, ढोकला इत्यादि आप कई डिशिज़ बना सकते हैं। जौ में घुलनशील फाइबर काफी मात्रा में पाया जाता है। यह रक्त में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करता है। इसके अलावा यह रक्त में ग्लूकोज के स्तर को भी संतुलित रखता है। इसमें वसा की मात्रा न के बराबर होती है। जौ से बने बिस्किट और बेकरी की अन्य चीजों का प्रयोग करें। ज्वार में विटामिन बी और विटामिन ई, मैगनीशियम, फाइबर, आयरन काफी मात्रा में पाया जाता है। इसके अलावा इसमें कई प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट भी पाए जाते हैं। यह दिल की बीमारियों से भी बचाता है। ज्वार की रोटी सर्दी में फायदा देती है। डायबिटीज में मक्का भी फायदेमंद होता है। इसमें विटामिन ए, विटामिन बी व अन्य पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में होते हैं। मक्के की रोटी, ढोकला, सब्जी खा सकते हैं। स्वीट कॉर्न भी स्नैक्स के रूप में ले सकते हैं।

सर्दियों में अक्सर लोग कम पानी पीने लगते हैं, जिससे डिहाइड्रेशन की समस्या तो होती ही है, साथ ही त्वचा भी रूखी होने लगती है। रोजाना 8-10 गिलास पानी पीना चाहिए। चाय के स्थान पर लौंग, इलायची, अदरक, तुलसी, काली मिर्च का काढ़ा पीएं, चीनी के स्थान पर गुड़ लें।  विटामिन ‘सी’ युक्त फल सहित जूस, पानी, सूप का ज्यादा प्रयोग करें।


दिल की सेहत के लिए इन्हें आजमाएं  


  • सुबह के वक्त गर्म बिस्तर से उठकर एकदम खुली हवा में न जाएं, बल्कि थोड़ा इंतजार करें। सर्दी सबसे ज्यादा सिर, कान और पैरों के जरिए शरीर में प्रवेश करती है। इसलिए अपने शरीर के इन हिस्सों को ठंडी हवाओं से बचाकर रखें। 

  • खुद को ठंड के प्रकोप से बचाने के लिए पर्याप्त गर्म कपड़े जरूर पहनें। अगर शरीर का कोई हिस्सा सुन्न पड़ जाए, तो उसे कुछ देर तक गुनगुने पानी में रखने से आराम हो सकता है।

  • शरीर के रक्त संचार को सही स्तर पर रखने के लिए हर रोज व्यायाम करें। व्यायाम की गर्मी आपको सेहतमंद बनाए रखती है, लेकिन धुंध हटने के बाद। ठंड में हाई ब्लड प्रेशर और दिल के मरीज सुबह की सैर से बचें और हो सके तो शाम को टहल लें या व्यायाम कर लें जिन्हें करने पर शरीर से थोड़ा-बहुत पसीना जरूर निकले। इसके लिये खुले मैदान में जाना जरूरी नहीं, किसी हेल्थ क्लब या घर में ही व्यायाम कर अपने को चुस्त दुरूस्त रखा जा सकता है।

  • यदि हल्की सी भी धूप हो तो उसमें बैठना फायदेमंद हो सकता है। रोजाना कुछ देर धूप सेकने से दिल के रोगियों में हार्ट अटैक का खतरा कम होता है और ब्लड प्रेशर भी काबू में रहता है। मधुमेह रोगियों और हड्डी के लिए भी धूप से विटामिन डी की कमी पूरी होती है।

  • सफाई पर विशेष ध्यान दें, डिस्पोजल सामान का प्रयोग करें। गुनगुने पानी से ही नहाएं। ठंडे पानी से नहाने पर हार्ट अटैक का खतरा रहता है। 

  • सबसे ज़रूरी है तनाव कम करना क्योंकि तनाव दिल की बीमारी को खुला आमंत्रण है। हाई ब्लड प्रेशर और दिल के मरीज सात-आठ घंटे की नींद लें, ताकि तनाव से बचे रहें। 

  • ब्लड प्रेशर पर भी नज़र रखें। नियमित रूप से खून में कोलेस्ट्राल के स्तर की जांच कराएं और हार्ट के मरीज अपनी दवाएं नियमित लें। दिक्कत होने पर डॉक्टर के पास चेकअप को जाएं।

Tuesday, January 13, 2015

रब की मेहर होती हैं बेटियां

रब की मेहर होती हैं बेटियां

हमारे समाज में बेटे की बहुत अहमियत है। उनके जन्म पर ढेरों खुशियां मनाई जाती हैं। यहां तक कि कुछ त्योहार विशेष रूप से लड़कों के सम्मान में ही मनाए जाते हैं। लड़के के जन्म की पहली लोहड़ी हो या बेटे की शादी की पहली लोहड़ी, लोग लोहड़ी का त्यौहार दुगने उत्साह के साथ मनाते हैं जबकि प्रचलित लोककथा के अनुसार यह त्यौहार दो गरीब लड़कियों की शादी से संबंधित है। हमारी रूढ़िवादी मानसिकता देखिये कि हम रिश्तों में मधुरता एवं प्रेम के प्रतीक लोहड़ी के इस त्यौहार को सिर्फ़ लड़को के जन्म और शादी की खुशी में ही मनाते हैं। लड़कियों के जन्म की खुशी यहां नहीं मनाई जाती है, क्योंकि लड़कियों को लड़कों से कम आंका जाता है। हालांकि प्राचीन शास्त्रों में नारी को पूजनीय कहा गया है, मगर समाज ने उसे कभी वो दर्जा नहीं दिया। क्रूरता की हद तो यह कि लड़की को जन्म लेने से पहले कोख में ही खत्म कर दिया जाता है।


बेटे को वंश का वाहक माना जाता है। सदियों से पुत्र ही माता-पिता की देखभाल करता रहा है और आज भी स्थिति लगभग ऐसी ही है। इसी कारण अपने बुढ़ापे को सुरक्षित रखने के लिए लोगों में पुत्र की चाहना रहती है। बेटी के प्रति भेदभाव समाज के विकास को प्रभावित करता है। बेटों की चाहत में कोख में ही कन्या भ्रूण हत्या करने वाले मां बाप से पूछ कर देखें कि क्या उनके सपूत बुढ़ापे में उनका सहारा बनते हैं। क्या मां बाप के बाद सभी बहनों के लिए उनके मायके के दरवाज़े हमेशा खुले रहते हैं? अगर इस बारे में सर्वे कराया जाए तो परिणाम उन महिलाओं के लिए निराशाजनक  ही होंगे जो बेटों के लिए बेटियों को पैदा होने से पहले ही मार देती हैं या उनके जन्म के बाद उन्हें मरने के लिए सड़कों पर या कूड़े के ढ़ेर में फेंक देती हैं। इसके अनेक उदाहरण आप सबके पास भी होंगे जब बूढ़े मां-बाप का साथ बेटियों ने ही दिया जबकि बेहद लाड-प्यार से पाले-पलोसे उनके बेटों ने उन्हें दर-दर भटकने के लिए घर से बाहर कर दिया।


सामाजिक बदलाव और जागरुकता के चलते अब लोगों की सोच में भी बदलाव आ रहा है। वे अब बेटी के महत्व को समझने लगे हैं। बेटियों के बिना घर और समाज अधूरा है। बेटी ना हो केवल बेटे ही हों यह सोच बदल रही है। अब पुत्रियां माता-पिता की सेवा कर रही हैं। पुत्री के रूप में बहू ही सेवा करती है। अब बेटी के जन्म पर भी लोग जश्न मनाने लगे हैं। समाज में भ्रूण हत्या जैसी कुरीति को खत्म करने के मकसद से लोहड़ी को एक अलहदा ढंग से मनाया जाने लगा है। अब धीयां दी लोहड़ी उत्सव के तौर पर मनाई जाने लगी है। आज आलम यह है कि लोग लड़कों की लोहड़ी कम व लड़कियों की लोहड़ी सामूहिक तौर पर ज्यादा मनाने लगे हैं।  इस तरह के प्रयत्न लड़कियों को समाज में बनता सम्मान दिलाने के लिए कारगार सिद्ध होंगे, वहीं दूसरी तरफ कन्या भ्रूण हत्या व दहेज जैसी सामाजिक बुराईयों को भी खत्म करेंगे।


 "धीयां दी लोहड़ी" उन लोगों को शीशा दिखाती है, जो आज भी बेटी और बेटे के जन्म में फर्क समझते हैं। लड़का-लड़की में भेद करना खुद को धोखा देना है, क्योंकि आज लड़कियां  हर क्षेत्र में अपनी काबलियत का लोहा मनवा चुकी हैं, वे लड़कों को हर क्षेत्र में पछाड़ रहीं हैं। भ्रूण हत्या रोकनी है तो कन्यायों को समाज में लड़के से बढ़कर सम्मान देना होगा। बेटे के लिए बहू बन कर किसी दूसरे की बेटी आपके घर में आएगी और आपकी बेटी किसी के घर दुल्हन बन कर जाएगी। इसलिए कन्या भ्रूण की कोख में ही हत्या ना करें उसे दुनिया का उजाला देखने दें, वो आज आपके घर की रौनक तो कल किसी के घर के आंगन की शोभा बनेगी।

Thursday, September 18, 2014

गरबा के मौज-मस्ती वाले रंग

गरबा के मौज-मस्ती वाले रंग



नवरात्र के नौ दिन के उत्सव के दौरान हर तरफ गरबा और डांडिया डांस की धूम होती है। गरबा सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। गुजरात का यह पारंपरिक लोक नृत्य कभी सिर्फ गुजरात तक ही सीमित था, लेकिन अब यह देश के कई हिस्सों में अपनी धूम मचा रहा है। इसकी बड़ी वजह है, धार्मिक महत्व के अलावा इसके मौज-मस्ती वाले रंग। इसलिए इससे जुड़े आयोजनों में सभी आयु वर्ग के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। युवाओं के लिए अपने संस्कृति से जुड़ने का सुनहरा अवसर होता है।  वे पूरी रात डांडिया और गरबे की मस्ती में झूमते हैं। चौतरफा सिर्फ उत्सव का माहौल रहता है।

शक्ति की साधना और आराधना के पर्व शारदीय नवरात्रों को गरबा नृत्योत्सव के रूप में मनाया जाता है। गरबा और डांडिया नृत्य दुनिया भर के बड़े नृत्य त्योहारों में से एक हैं। नवरात्रों में शाम को डांडिया और गरबा नृत्य के जरिए मां दुर्गा की पूजा की जाती है। नवरात्रों की पहली रात्रि को कच्चे मिट्टी के सछिद्र घड़े, जिसे 'गरबो' कहते हैं, की स्थापना होती है। फिर उसके अंदर दीपक को प्रज्वलित किया जाता है, जो ज्ञान रूपी प्रकाश का अज्ञान रूपी अंधेरे के भीतर फैलाने प्रतीक माना जाता है।

महिलाएं कलश के चारों ओर एक लय व ताल के साथ गोलाकार में घूमते हुए झुकती, मुड़ती, तालियां या  चुटकियां बजाती हुई नृत्य करती हैं। इस नृत्य के साथ देवी की स्तुति की जाती है और कृष्णलीला संबंधी गीत भी गाए जाते हैं। साथ में ढोलक या तबला बजाने वाले संगीत देते हैं। आरती से पहले सभी रसिक-जन गरबा के रंग में रंग जाते हैं। देवी के सम्मान में भक्ति प्रदर्शन के रूप में गरबा, 'आरती' से पहले किया जाता है और डांडिया समारोह उसके बाद। यह रात भर चलता है।

आरंभ में देवी के निकट सछिद्र घट में दीप ले जाने के क्रम में गरबा नृत्य होता था। यह घट दीपगर्भ कहलाता था। वर्णलोप से यही शब्द गरबा बन गया। डांडिया रास की शुरूआत के संबंध में एक किंवदंती प्रसिद्ध है। वर्षों पहले गुजरात में महिषासुर नामक राक्षस राज करता था। उसने अपने क्रूर व्यवहार से सारी जनता की नाक में दम कर रखा  था। उसके आतंक से त्रस्त होकर आखिर सभी लोगों ने ब्रह्मा, विष्णु और महेश की सामूहिक आराधना की। देवताओं के प्रकोप से तब देवी जगदंबा प्रकट हुर्इं और उन्होंने उस राक्षस का वध किया। तभी से नवरात्रि के दौरान भक्तगण नौ दिन तक उपवास करने लगे और देवी के सम्मान में गरबा करने लगे। समय के साथ इसमें डांडिया भी जुड़ा और डांडिया-रास के रूप में इस लोकप्रिय नृत्य का उदय हुआ।

नौ दिन तक माता का पंडाल सजाया जाता है। युवक- युवतियां पारंपरिक वेशभूषा में गानों पर थिरकते हैं औरव डांडिया व  गरबा खेलते है। गरबा में पहने जाने वाली इस पारंपरिक पोशाक को केडिया (बड़ा कुर्ता) कहते हैं। इसे सिर्फ लड़के पहनते हैं। केडिया के साथ पहने जाने वाले आभूषण को हसदी कहा जाता हैं। गरबा खेलने आईं लड़कियां पारंपरिक चनिया चोली पहनती हैं। इस विशेष परिधान का वज़न क़रीब पांच किलो होता है और यह पोशाक कई सजावटी चीज़ों से बनती हैं। इस कारण आधुनिक युवतियां चनिया चोली की जगह जींस के साथ शार्ट कुर्ती, डिजाइनर साड़ियां और लड़के जींस के साथ शार्ट कुर्ता, लॉग कुर्ते के साथ चूड़ीदार या पाजामा-कुर्ता ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

बदलते समय के साथ-साथ गरबे में भी बहुत बदलाव आया है। आज इन नृत्यों के व्यावसायीकरण हो जाने के कारण इस नृत्य की वास्तविकता, पारंपरिकता और नाजुक लय, वैकल्पिक रूपों में गुम होती जा रही है। ढोल के धमाके और ढोलक की थापों का स्थान अब ड्रम और कांगों ने ले लिया है। हारमोनियम की मस्ती, शहनाई की गूंज और बांसुरी की मधुर धुन का स्थान इलेक्ट्रॉनिक सिंथेसाइजर ले चुके हैं।