Wednesday, May 24, 2017

फैशन आइकॉन हैं प्रियंका चोपड़ा

प्रिंयका चोपड़ा से जानिए उनकी खूबसूरती का क्या है राज़


प्रियंका चोपड़ा की खूबसूरती के दीवाने लड़के ही नहीं, लड़कियां भी हैं। वह उनके लिए फैशन आइकॉन हैं। हर कोई जानना चाहता है पीसी की सुंदरता का राज़, तो आइए आज हम प्रियंका से ही जानते हैं कि उनकी खूबसूरती का राज़ क्या है...

 प्रियंका कहती हैं, 'क्लीन एंड क्लीयर स्किन के लिए मैं घर का बना हुआ योगर्ट फेशियल इस्तेमाल करती हूं। योगर्ट और ओटमील को बराबर मात्रा में मिक्स करके स्किन पर लगाती हूं और फिर आधे घंटे के बाद इसे हल्के गर्म पानी से धो लेती हूं। योगर्ट से स्किन में चमक आती है और डलनेस खतम हो जाती है।'

प्रियंका कहती हैं, 'मैं इतना ज्यादा बिजी रहती हूं कि हेयर सैलून जाकर अपने बालों की देखभाल पर घंटों बिता सकूं, ऐसा संभव नहीं है। मैं रोज़ाना अपने बालों को शैंपू करती हूं और कंडीशनर का इस्तेमाल करती हूं ताकि ये मजबूत बने रहें। हैल्दी हेयर आपकी पर्सनेलिटी को एन्हांस करते हैं।'

प्रियंका खुद को फिट एंड स्लिम रखने के लिए एक सट्रिक्ट रूटीन फॉलो करती हैं। प्रियंका कहती हैं कि वह योगाभ्‍यास करती हैं। लिफ्ट की बजाय सीढ़ियों का इस्तेमाल करती हैं और ड्राइविंग की जगह वॉक करना पसंद करती हैंI वह कहती हैं, 'मैं रोज़ाना जिम भी जाना चाहती हूं लेकिन 15 घंटे काम करने के बाद थक जाती हूं।सच कहूं तो वर्कआउट तभी करती हूं जब मुझे इसकी जरूरत होती है।'

प्रियंका खुद को इस मामले में लकी मानती हैं कि उनका वज़न जल्दी नहीं बढ़ता। वह कहती हैं, 'मैं पंजाबी हूं और खाने की बेहद शौकीन। मैं खूब जमकर खाती हूं।' लेकिन वह हैल्दी खाना खाती हैं, जिसमें रोटी, चावल, दाल, सब्‍ज़ी, सूप, सलाद, और फल शामिल होते हैं। प्रिंयका कहती हैं, 'चूंकि मैं चाह कर भी रोज़ाना 8 घंटे की नींद नहीं ले पाती, इसलिए पानी मैं खूब पीती हूं, इससे स्किन मॉइश्चराइज़्ड रहती है।'

अपने पिता की ही तरह प्रिंयका को भी म्यूज़िक का शौक है। वह कहती हैं कि जब भी मुझे तनाव महसूस होता है या मूड खराब होता है, तब म्यूजिक मुझे डी-स्ट्रैस करवाता है। रिलैक्स होने के लिए लॉन्‍ग ड्राइव पर चली जाती हूं या सो जाती हूं। छुट्टी के दिन घर पर रहना, परिवार के साथ टाइम स्पेंड करना और मूवी देखना भी मुझे खुशी देता है।

Saturday, May 13, 2017

मदर्स डे: भगवान का दूसरा नाम ‘मां’

मदर्स डे: भगवान का दूसरा नाम ‘मां’

‘उसको नहीं देखा हमने कभी, पर उसकी जरूरत क्या होगी,
ए मां तेरी सूरत से अलग भगवान की मूरत क्या होगी’



कहते हैं ईश्वर सभी जगह उपस्थित नहीं रह सकता इसीलिए उसने धरती पर मां को भेजा जो हर मुश्किल की घड़ी में हमारे साथ रहती है। ऐसी ही माताओं को समर्पित है मदर्स डे, हालांकि मां के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए एक दिन तो क्या एक सदी भी कम है। उन्हें हर पल यह अहसास दिलाएं कि वह हमारे जीवन में बेहद सम्माननीय हैं, बेहद खास हैं।

मां के स्नेह भरे अहसास के इज़हार के लिए आपने भी यकीनन उनके लिए कुछ स्पेशल प्लान किया होगा, अगर नहीं किया, तो अभी कर लें। मां कभी अपने बच्चों से अपने प्यार के बदले किसी भी चीज़ की ख्वाहिश नहीं रखती, लेकिन अपने प्यार और उनके प्रति अपने अहसास को अभिवयक्त करने के लिए आप मदर्स डे पर अपनी मां को कोई ऐसा गिफ्ट दें जिसे कभी भुलाया न जा सके।

स्पेशल ट्रीटमेंट दें

आज उन्हें किसी रानी-महारानी जैसे फील करवाएं। वह जो भी चाहें या कहें उसे बस तुरंत कर दो। मां को उनकी पसंद चीजों जैसे परफ्यूम, साड़ी, सूट, गोल्ड या डायमंड ज्यूलरी, मनपसंद चॉकलेट्स, फूल इत्यादि से सजी बास्केट भी गिफ्ट कर सकते हैं।

खुद खिलाएं खाना

मदर्स डे पर उन्हें थोड़ा देर तक सोने दें और किचन व घर के कामों से उन्हें पूरी तरह आराम दे दें। अगर आपको अपनी मां की मनपसंद डिश बनानी आती है, तो आप उन्हें इसे बनाकर अपने हाथों से खिला सकते हैं, जैसे बचपन में मां आपको खिलाया करती थीं। अगर खाना बनाना नहीं आता, तो कहीं किसी रेस्तरां में ले जाकर भी आप उनको उनकी पसंद की लजीज डिशेज टेस्ट करवा सकते हैं।

पूरा दिन साथ बिताएं

मां के साथ आज पूरा दिन बिताएं और अपने बचपन की मीठी यादें उनके साथ ताजा करें। बचपन में मां के साथ जो इनडोर गेम्स खेलते थे, आज वो दोबारा वैसे ही चीटिंग करते हुए खेलें। उनसे उनके बचपन की कुछ ऐसी बातें बताने को कहें जो उन्हें आज भी रोमांचित करती हैं। आपके साथ अपने बचपन की बातें शेयर करके वो भी अपने बचपन की खूबसूरत दुनिया में खो जाएंगी। ऐसे में उनके चेहरे पर जो खुशी की चमक होगी, वह  मदर्स डे का बेहतरीन गिफ्ट होगी।

डे आऊट प्लान करें

जो माएं सारा दिन घर पर ही रहती हैं, इस स्पेशल दिन उन्हें बाहर ले जाएं। उनके फेवरिट सैलून में स्पा की अपॉयंटमेंट ले सकते हैं। वहां आप बता दें कि आपकी मां को खूब पैंपर करें। मां को लंच पर ले जाएं और वहां उनकी खास सहेलियों को भी इन्वाइट करें। आप उन्हें शॉपिंग पर भी ले जा सकते हैं। फिल्म देखने का प्रोग्राम भी उन्हें अच्छा लगेगा।

लिख कर करें प्यार का इजहार

एक खत में लिखें कि आप अपनी मां से इतना प्यार क्यों करते हैं। खत में उन बातों का जिक्र भी जरूर करें जिनके लिए आप उनके शुक्रगुजार हैं। ग्रीटिंग कार्ड्स और उनकी तस्वीरों वाले मग भी गिफ्ट कर सकते हैं। उनके मनपसंद गानों को एक सीडी में रिकॉर्ड करके उन्हें गीतों का तोहफा दे सकते हैं। अपनी और मां की कुछ चुनिंदा तस्वीरों का कोलार्ज बनाकर भी मां को एक ममताभरा तोहफा दे सकते हैं।

अपने बच्चों को भी साथ ले जाएं

शादीशुदा लड़कियां शादी के बाद अपनी मां को ही सबसे ज्यादा मिस करती हैं। मां की याद अक्सर उन्हें रूला जाती है। अगर आप भी शादीशुदा हैं तो मदर्स डे पर अपने बच्चों को भी साथ लेकर जाएं, ताकि नाती/नातिन का सुख भी उन्हें मिल सके। मां के चेहरे पर खुशी देखकर आपको बहुत अच्छा लगेगा। अगर मां के पास जाना संभव न हो तो  वीडियो कॉल कर लें।
  • मीनाक्षी गांधी

‘मदर्स डे’ यानी मां को थैंक्स कहने का दिन

‘मदर्स डे’ यानी मां को थैंक्स कहने का दिन


मदर्स डे हमारी संस्कृति का हिस्सा तो नहीं है क्योंकि हमारे यहां तो मां को वो जगह दी जाती रही है जो भगवान से भी ऊपर है। मां के प्यार और उसके अहसास को किसी खास दिन से बांधा नहीं जा सकता है, लेकिन हमारे देश में भी पश्चिमी देशों का असर बढ़ता जा रहा है, जिसके चलते युवा मदर्स डे पर अपनी मां को अपने प्यार का अहसास करवाना नहीं भूलते।

कुछ साल पहले तक 'मदर्स डे' भारतीयों के लिए कोई खास अर्थ नहीं रखता था क्योंकि हमारे यहां संयुक्त परिवार थे। जब हमारे माता-पिता अधिकतर हमारे साथ ही रहा करते थे,  तो ऐसे में भला हमें क्या आवश्यकता होती साल में एक दिन मां या पिता को समर्पित करने की। लेकिन आजकल बहुत से बच्चों को  पढ़ाई या नौकरी के लिए मां से दूर रहना पड़ रहा है। किसी भी बच्चे के लिए अपनी मां के प्यार और दुलार को नजरअंदाज कर पाना आसान नहीं है, इसलिए कम से कम मदर्स डे को ही वे मां के लिए खास बनाना चाहते हैं।

रविवार को ‘मदर्स डे’ है। मदर्स डे यानी एक ऐसा दिन जब मां को यह अहसास कराया जाएगा कि हम उनसे कितना प्यार करते हैं। मां के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त करने का इससे बेहतर अवसर और क्या हो सकता है। अमेरिका में पीएचडी कर रहे रौनक महेश्वरी कहते हैं कि दूर रह कर मां के प्यार और उनके बनाए खाने को बहुत ज्यादा मिस करता हूं, हालांकि उनसे रोज़ाना वीडियो चैट और वीडियो कॉलिंग करता हूं, लेकिन इससे उनके दुलार और प्यार की कमी पूरी नहीं होती। इस बार मदर्स डे पर मैं उनका पसंदीदा खाना खुद बनाऊंगा और फिर वीडियो कॉल करके उनके साथ खाऊंगा। जानता हूं कि यह हम दोनों के लिए बेहद भावुक पल होंगे।

काफी सालों तक घर से बाहर नौकरी करने वाले अनूप लूथरा की ट्रांसफर मई में उनके अपने शहर चंडीगढ़ में हो गई है। उम्र चाहे उनकी 45 को पार कर चुकी है, पर हर बच्चे के लिए उसकी मां लाइफलाइन होती है। अनूप कहते हैं कि जब भी कभी घर आता था तो मां से अपनी पसंद का खाना बनवा कर खाता था। इस बार बहुत बरसों के बाद यह दिन मां के साथ बिता रहा हूं। पिता जी की मृत्यु के बाद मां काफी सालों से अकेली रह रही हैं। इस संडे पूरा दिन हम मां-बेटा एंजॉय करेंगे, और बचपन की यादों को ताजा करेंगे।

शालिनी सोनी चौहान जो अब खुद दो बेटियों की मां है, अपनी मां को अपना आइडियल मानती है। वह कहती हैं, ‘कौन-सी ऐसी चीज है जो यहां नहीं मिलती, सब कुछ मिल जाता है पर दुबारा मां नहीं मिलती। मेरी मम्मी मेरी बेस्ट फ्रेंड भी है। मैं अपनी हर बात मम्मी के साथ शेयर करती हूं। मां ने मुझे हर परिस्थिति में खुश रहना सिखाया है। हर गम को हंसते-हंसते सहना सिखाया है। मैं हर साल मदर्स डे सेलिब्रेट करती हूं। इस बार भी मैंने मम्मी के लिए कुछ सरप्राइज प्लान किया है, जिसे मैं अभी आपको नहीं बता सकती।’

  • मीनाक्षी गांधी

माई मॉम माई बेस्ट फ्रेंड

माई मॉम माई बेस्ट फ्रेंड

लड़कियां अपनी मां से बेहद प्रभावित होती हैं। उनके लिए उनकी मां की अहमियत दुनिया में सबसे अधिक होती है। मां ही उनके लिए सबसे बड़ी प्रेरणा और पथप्रदर्शक होती है। वह अपनी कामयाबी का सारा श्रेय मां को ही देती हैं। मां का नाम सुनकर शादीशुदा लड़कियों के चेहरे पर बिखरी खूबसूरत मुस्कान को सभी ने महसूस किया होगा। अपनी मां के साथ कुछ पल बिताने की चाहत और खुद मां होने के कारण बच्चों की जिम्मेदारियों का अहसास, हर शादीशुदा लड़की की ज़िंदगी में यह जदोजहद चलती रहती है।

शादी के बाद कनाडा में सैटल हो चुकी तरुणदीप अपनी मां कुलवंत के साथ अपने रिश्तों के बारे में बात करते हुए काफी भावुक हो गईं। उन्होंने बताया, ‘पापा की जब डेथ हुई, तब मैं बहुत छोटी थी। मेरी मां मेरा भगवान है, जो सुकून मुझे  उनके साथ रहने पर महसूस होता है वह और कहीं नहीं मिलता।’ मां से मिलने की ख्वाहिश ऐसी कि पंख होते तो तुरंत उड़ कर मां के पास आ जाती। शादी के बाद विदेश में बस चुकी सभी बेटियों की लगभग ऐसी ही इच्छा है।

सीमा वत्स की दो बेटियां हैं, एक की शादी देश में ही हुई है और दूसरी बेटी अॉस्ट्रेलिया में है। एक बेटी से मिलना-जुलना तो हो जाता है लेकिन विदेश में रहने वाली बेटी से मिले काफी वक्त निकल जाता है। विदेश के बिज़ी लाइफ स्टाइल के चलते अब वह अपने पति के साथ अॉस्ट्रेलिया गई हुई हैं। सीमा कहती हैं कि बेटियां साथ हों तो हर दिन मदर्स डे है, लेकिन इस बार यह दिन जरूर खास बन गया है क्योंकि अॉस्ट्रेलिया में मदर्स डे खूब जोर शोर से मनाया जाता है और इस बार वह भी इस पाश्चात्य त्योहार को इंजॉय करेंगे।

सर्बजीत संधु अपनी बेटी इरा से मिलने अमेरिका गई हुई हैं। सर्बजीत कहती हैं कि अपनी बेटी को पालने का अहसास जितना सुखद था उससे भी ज्यादा मज़ा उन्हें अपने ग्रैंड चिल्ड्रंस की परवरिश में आता है। मां के रहते दो बच्चों की मां उनकी बेटी इरा भी निश्चिंत रहती है। वह कहती हैं, ‘मां के बगैर मैं कुछ भी नहीं हूं। जब मैं घर जाती हूं अगर मां नहीं दिखतीं तो बेचैनी-सी लगी रहती है, मां के आते ही सब दुःख, थकान गायब हो जाती है।काम से जब थकी हुई घर लौटती हूं तो मां की गोद में सिर रखते ही सारी थकान मिट जाती है। शादी के बाद भी मां का साथ मिलना, यह भगवान के आशीर्वाद जैसा है। मदर्स डे पर मां, मैं और मेरी बेटी पूरा दिन साथ सपेंड करेंगे। मेरी बेटी ने मां के लिए ‘बंच अॉफ लैटर्स’ बनाया है जिसमें उसने उन सब बातों का जिक्र किया है, जिनसे प्रेरणा लेकर उसने अपनी ज़िंदगी को और बेहतर बनाया है।’

  • मीनाक्षी गांधी

Saturday, March 11, 2017




रंगों की गीतमाला


बालम पिचकारी जो तूने मुझे मारी 
तो सीधी साधी छोरी शराबी हो गयी

हां जीन्स पहन के जो तूने मारा ठुमका
तो लट्टू पड़ोसन की भाभी हो गयी

बिना रंग और भांग के तो होली होती ही नहीं और जब होली के जोश, उमंग, हुड़दंग और अबीर-गुलाल में फिल्मी गानों का रस घुल जाता है  तो यह और भी रंगीन हो जाती है। हिन्दी फिल्मों में होली गानों की भरमार है। याद करते जाएं तो खूब सारे गाने याद आ जाएंगे। आज भी कुछ ऐसे गीत हैं जो होली पर जरूर बजते हैं, जिनकी ताल पर लाल-पीले-हरे-नीले-गुलाबी रंगों में रंगे लोग जब नाचते हैं तो होली का मजा कई गुना बढ़ जाता है। रूपहले पर्दे पर रंग और उमंग के त्योहार होली के गीतों ने सिने प्रेमियों के दिलों पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। आईए, याद करते हैं होली के अवसर पर उन गानों को।

1. होली के गीतों में लीजेंड ऑफ हिंदी सिनेमा शोले के गीत ‘होली के दिन दिल खिल जाते हैं रंगों में रंग मिल जाते हैं ..’ के बिना कोई होली पूरी नहीं होती। जिसमे धर्मेंद्र-हेमा समेत पूरा गांव मस्ती में झूमते हुए गाते हैं। इस गाने की धुन और बोल आज भी लोगों को काफी लोकप्रिय हैं।

होली के दिन दिल खिल जाते हैं रंगों में रंग मिल जाते हैं
गिले शिकवे भूल के दोस्तो दुश्मन भी गले मिल जाते हैं।
गोरी तेरे रंग जैसा थोड़ा सा रंग मिला लूं
आ तेरे गुलाबी गालों से थोड़ा सा गुलाल चुरा लूं
जा रे जा दीवाने तू होली के बहाने तू छेड़ न मुझे बेशरम
पूछ ले जमाने से ऐसे ही बहाने से लिए और दिए दिल जाते हैं
होली के दिन दिल ...

फिल्म: शोले (1975)

2. 
 फिल्मों में होली का रंग बिखेरने वाले अभिनेताओं में बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन का नाम कोई कैसे भूल सकता है। अमिताभ बच्चन और रेखा पर फिल्माए फिल्म ‘सिलसिला’ के गीत ‘रंग बरसे भीगे चुनरवाली रंग बरसे...’ के बगैर होली के त्यौहार का मजा पूरा नहीं हो पाता। इसमें अमिताभ ने भांग का इतना नशा भरा कि लोग आज भी इसे बड़े चाव से सुनते हैं। 

रंग बरसे भीगे चुनरवाली, रंग बरसे
अरे कैने मारी पिचकारी तोरी भीगी अंगिया
ओ रंगरसिया रंगरसिया, हो
रंग बरसे भीगे चुनरवाली, रंग बरसे ...
सोने की थाली में जोना परोसा
अरे, सोने की थाली में, जोना परोसा
हाँ, सोने की थाली में जोना परोसा
अरे खाए गोरी का यार, बलम तरसे रंग बरसे
होली है!
ओ रंग बरसे भीगे चुनरवाली, रंग बरसे ...

फिल्म: सिलसिला (1981)

3 . अमिताभ बच्चन और हेमा मालिनी पर फिल्म ‘बागवान’ में फिल्माया गीत ‘होली खेलें रघुवीरा अवध में...’ होली गीतों में अपना विशिष्ट मुकाम रखता है।

ताल से ताल मिले मोरे बबुआ, बाजे ढोल मृदंग
मन से मन का मेल जो हो तो, रंग से मिल जाए रंग
हो ओ ओ ओ.... होली खेलें रघुवीरा
होली खेलें रघुवीरा अवध में होली खेलें रघुवीरा
होली खेलें रघुवीरा अवध में होली खेलें रघुवीरा
अरे, होली खेलें रघुवीरा अवध में होली खेलें रघुवीरा
होली खेलें रघुवीरा अवध में होली खेलें रघुवीरा

फिल्म: बागवान (2003)

4. 
फिल्मी पर्दे पर छेड़-छाड़ वाली होली को लोग खासा पसंद करते हैं। फिल्म ‘डर’ का गीत जिसमें शाहरुख खान होली के रंगों से चेहरा छिपाए ढोल बजाते हुए होली समारोह में बिन बुलाए चले आते हैं, आज भी लोगों को गुदगुदाता है। इस गाने के बोल हैं ‘अंग से अंग लगाना पिया हमें ऐसे रंग लगाना’।

अरे जो जी में आए, तुम आज कर लो
चाहो जिसे इन बांहों में भर लो
अंग से अंग लगाना सजन हमें ऐसे रंग लगाना
गालों से ये गाल लगा के, नैनों से ये नैन मिला के
होली आज मनाना सजन हमें ऐसे रंग लगाना
अंग से अंग लगाना...

फिल्म: डर (1993)

5.
 होली पर एक गाना जो हर चौराहे, गली-मोहल्ले में बजता सुनाई है वह है फिल्म ‘कटी पतंग’  में राजेश खन्ना और आशा पारेख पर फिल्माया गीत ‘आज ना छोड़ेंगे बस हमजोली, खेलेंगे हम होली...’। यह गीत लोगों को प्रेमरस में डूबने को मजबूर कर देता है।

हे...
आज न छोड़ेंगे...
आज न छोड़ेंगे बस हमजोल...
खेलेंगे हम होली...खेलेंगे हम होली...
चाहे भीगे रे तेरी चुनरिया चाहे भीगे रे चोली...
खेलेंगे हम होली...
होली है...

फिल्म: कटी पतंग (1970)

6.
 फिल्म ‘फाल्गुन’ का गीत ‘फागुन आयो रे...’ ने जिस कलात्मकता से होली को पेश किया, वह बेजोड़ है। यह एक ऐसा गीत है, जिसने कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं।  यह गीत आज भी होली की मस्ती में चार चांद लगा देता है।

पिया संग खेलूं होली
पिया संग खेलूं होली ,फागुन आयो रे
चुनरिया भिगो रे गोरी
फागुन आयो रे
हो फागुन आयो रे

फिल्म: फाल्गुन (1973)


7. होली का किाक्र हो और महबूब खान की फिल्म ‘मदर इंडिया’ के गीत ‘होली आई रे कन्हाई रंग छलके सुना दे बांसुरी’ की बात ना हो, ऐसा कभी नहीं हो सकता। सुनील दत्त, नरगिस, राजकुमार, हीरालाल और अन्य कलाकारों के साथ फिल्माया गया था। इस गाने की धुन और बोल आज भी लोगों को अच्छे लगते हैं। 

होली आई रे कन्हाई,रंग छलके सुना दे बासुरी
होली आई रे होली आई रे..
बरसे गुलाल,रंग मोरे अंगनावा
अपने ही रंग में रंग दे मोहे साजनवा
हो देखो नाचे मोरा मनवा
होली आई रे कन्हाई,रंग छलके सुना दे बासुरी

फिल्म: मदर इंडिया (1957)

8. वी शांताराम की फिल्म ‘नवरंग’ में भी होली का एक बेहद खूबसूरत गीत था, ‘जा रे नटखट ना खोल मेरा घूंघट पलट के दूंगी आज तुझे गाली रे, मोहे समझो ना तुम भोली भाली रे’। इसमें संध्या ने पर्दे पर नायक और नायिका दोनों का किरदार इतनी खूबसूरती से निभाया था कि आज भी यह गीत जब भी बजता है तो सारा नकाारा आंखों के सामने आ जाता है। 

अरे जा रे हट नटखट,ना खोल मेरा घूंघट,पलट के दूंगी आज तुझे गाली रे।
मुझे समझो ना तुम भोली-भाली रे।
सारा रा रा...
आया होली का त्योहार,उड़े रंग की बौछार
तू है नार नखरेदार मतवाली रे
आज मीठी लगे है तेरी गाली रे...

फिल्म: नवरंग (1959)

9. फिल्म ‘कोहिनूर’ में ट्रेजिडी किंग दिलीप कुमार और मीना कुमारी ने जब ‘तन रंग लो जी आज मन रंग लो’ गाया तो लगा होली को एक नयी अभिव्यक्ति मिली। इस गीत के बिना होली गीत की कल्पना ही नहीं की जा सकती है।

तन रंग लो जी अजी मन रंग लो तन रंग लो...
तन रंग लो जी अजी मन रंग लो तन रंग लो...
खेलो खेलो उमंग भरे रंग प्यार के ले लो...
खेलो खेलो उमंग भरे रंग प्यार के ले लो...
रंग लो रंग लो जी अजी मन रंग लो तन रंग लो...
तन रंग लो जी अजी मन रंग लो तन रंग लो...

फिल्म: कोहिनूर (1960)

10. विपुल शाह की फिल्म ‘वक्त’ में अक्षय कमार व प्रियंका चोपड़ा के चुलबुले अभिनय और अमिताभ बच्चन के धमाल से ‘डू मी ए फेवर, लेट्स प्ले होली’ गीत यादगार बन गया। यह गीत होली पर युवाओं की खास पसंद रहता है और इसकी धुन पर होली पर वे खूब नाचते हैं।

डू मी ए फेवर लेट्स प्ले होली,
रंगों में है प्यार की बोली
हो मेरे पीछे-पीछे क्यों आये,
मेरा जिया-जिया क्यों धड़काये
जा रे जा रे डॉन्ट टच माई चोली
उफ ये होली,आई ये होली
डू मी ए फेवर लेट्स प्ले होली...

फिल्म: वक्त (रेस अगेंस्ट टाइम) (2005)

Monday, November 30, 2015

विश्व एड्स दिवस : जानकारी ही बचाव है

विश्व एड्स दिवस :  सावधानी ही बचाव का एकमात्र उपाय

आज विश्व एड्स दिवस है। एड्स का पूरा नाम है 'एक्वायर्ड इम्यूनो डिफिशिएंसी सिंड्रोम।'  ए यानी एक्वायर्ड यानी यह रोग किसी दूसरे व्यक्ति से लगता है। आईडी यानी इम्यूनो डिफिशिएंसी यानी यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता समाप्त कर देता है। एस यानी सिण्ड्रोम यानी यह बीमारी कई तरह के लक्षणों से पहचानी जाती है।

न्यूयॉर्क में 1981 में इसके बारे में पहली बार पता चला, जब कुछ ''समलिंगी यौन क्रिया'' के शौकीन अपना इलाज कराने डॉक्टर के पास गए। इलाज के बाद भी रोग ज्यों का त्यों रहा और रोगी बच नहीं पाए, तो डॉक्टरों ने परीक्षण कर देखा कि इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता खत्म हो चुकी थी। फिर इसके ऊपर शोध हुए, तब तक यह कई देशों में जबरदस्त रूप से फैल चुकी थी।

हर साल इस बीमारी से करीब 2 करोड़ लोग जिंदगी की जंग हार जाते हैं। करोड़ों अभी इसके प्रभाव में हैं। अफ्रीका पहले नम्बर पर है, जहां एड्स रोगी सबसे ज्यादा हैं। भारत दूसरे स्थान पर है और प्रतिदिन इनकी संख्या बढ़ती जा रही है। भारत में पहला एड्स मरीज 1986 में मद्रास में पाया गया। यदि कहीं पता चलता है कि फलाँ व्यक्ति एड्स रोगी है तो उससे परहेज करते हैं, भेदभाव करते हैं।

भारत में यह बीमारी असुरक्षित यौन संबंधों के कारण फैल रही है। भारत में गाड़ियों के ड्राइवर इसे तेजी से फैलाने का काम कर रहे हैं। अमेरिका में समलैंगिकता के कारण यह तेजी से फैली।

कई लोगों को इसकी जानकारी नहीं है कि यह किस तरह फैलती है और इससे बचने के लिए क्या उपाय करना चाहिए। पुरुष की अपेक्षा स्त्री में 20 गुना ज्यादा संक्रमण होने की आशंका होती है। योनि मैथुन की बनिस्बत गुदा मैथुन इसे फैलाने में ज्यादा सहायक होता है। इसका कारण यह है कि गुदा की म्यूकोजा यानी झिल्ली अत्यंत नाजुक होती है और झिल्ली क्षतिग्रस्त होने पर वायरस खून में शीघ्र पहुँच जाते हैं।

क्या है एड्स


* यह रेट्रो वायरस ग्रुप का एक विचित्र वायरस है, यह आरएनए के दो स्टैंडों से युक्त होता है, जो रिवर्स टासक्रिपटेज की सहायता है डबल स्टैंड डीएनए में परिवर्तित हो जाता है और फिर कोशिकाओं के डीएनए में हमेशा के लिए सुप्तावस्था में पड़ा रहता है।

* एचआईवी वायरस के शरीर में प्रवेश करने, शरीर में सुप्तावस्था में रहने की क्रिया, एचआईवी संक्रमण कहलाती है, इस अवस्था में इंफेक्शन तो होता है, किन्तु बीमारी के लक्षण नहीं होते। संक्रमण को बीमारी की अवस्था में पहुंचने में 15 से 20 वर्ष लगते हैं।

* कई वर्षों तक यह मानव शरीर में पड़ा रहता है और अपनी संख्या बढ़ाता रहता है, दूसरी ओर मावन शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति खत्म करता जाता है।

* जब रोग प्रतिरोधक शक्ति खत्म हो जाती है तो फिर यह जागता है और अपना आक्रमण शुरू करता है। साथ ही शुरू होता है वह समय, जब मरीज धीरे-धीरे मौत की ओर जाने लगता है। मरीज की मौत के साथ ही यह संबंधित के शरीर से समाप्त होता है।

एड्स फैलने के कारण 


* असुरक्षित यौन संबंध इसका सबसे प्रमुख कारण है, इससे एड्स के वायरस एड्स ग्रस्त व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति में तुरंत प्रवेश कर जाते हैं।

* बिना जांच का खून मरीज को देना भी एड्स फैलाने का माध्य होता है। खून के द्वारा इसके वायरस सीधे खून में पहुंच जाते हैं और बीमारी जल्दी घेर लेती है।

* नशीले पदार्थ लेने वाले लोग भी एड्स ग्रस्त होते हैं, वे एक-दूसरे की सिरींज-निडिल इस्तेमाल करते हैं, उनमें कई एड्स पीड़ित होते हैं और बीमारी फैलाते हैं।

* यदि मां एड्स से संक्रमित है, तो होने वाला शिशु भी संक्रमित ही पैदा होता है। इस प्रकार ट्रांसप्लांटेशन संक्रमण से भी एड्स लगभग 60 प्रतिशत तक फैलता है। बाकी बचा 40 प्रतिशत मां के दूध से शिशु में पहुंच जाता है।

एड्स के लक्षण 


एड्स के कोई खास लक्षण नहीं होते, सामान्यतः अन्य बीमारियों में होने वाले लक्षण ही होते हैं, जैसे- वजन में कमी होना, 30-35 दिन से ज्यादा डायरिया रहना, लगातार बुखार बना रहना।

एचआईवी नामक विषाणु सीधे श्वेत कोशिकाओं पर आक्रमण कर शरीर के अंतस्थ में उपस्थित आनुवंशिक तत्व डीएनए में प्रवेश कर जाता है, जहाँ इनमें गुणात्मक वृद्धि होती है। इन विषाणुओं की बढ़ी हुई संख्या दूसरी श्वेत कणिकाओं पर आक्रमण करती है। इससे धीरे-धीरे इन श्वेत कोशिकाओं की संख्या घटती जाती है। इसके फलस्वरूप शरीर का प्रतिरोधी तंत्र नष्ट हो जाता है और दूसरे संक्रामक रोगों से बचाव की क्षमता भी क्षीण हो जाती है।

एड्स की जांच

* एलीसा टेस्ट
* वेस्टर्न ब्लॉट टेस्ट
* एचआईवी पी-24 ऐंटीजेन (पी.सी.आर.)
* सीडी-4 काउंट

एड्स का उपचार

* एचआईवी संक्रमित लोगों के लिए आशावान होना अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे भी लोग हैं जो एचआईवी/एड्स से पीड़ित होने के बावजूद पिछले 10 सालों से जी रहे हैं। अपने डॉक्टरों के निर्देशों पर पूरा अमल करें। दवाओं को सही तरीके से लेते रहना और एक स्वस्थ जीवनचर्या बनाए रखने से आप इस रोग को नियंत्रित कर सकते हैं।
* एच.ए.ए.आर.टी. (हाइली एक्टिव ऐंटी रेट्रो वायरस थेरैपी) एड्स सेंटर पर नि:शुल्क उपलब्ध है। यह एक नया साधारण व सुरक्षित उपचार है।

एड्स को लेकर भ्रम

कई लोग सोचते हैं कि एड्स रोगी के साथ उठने बैठने से यह रोग फैलता है तो यह गलत है। यह बीमारी छुआछूत की नहीं है। एड्स का फैलाव छूने, हाथ से हाथ का स्पर्श, साथ-साथ खाने, उठने और बैठने, एक-दूसरे का कपड़ा इस्तेमाल करने से नहीं होता है। एड्स एक रोग नहीं बल्कि एक अवस्था है। इस बीमारी को लेकर समाज में कई भ्रम हैं जिन्हें दूर करना बहुत जरूरी है. जैसे:

एड्स इन सब कारणों से नहीं फैलता

* घर या ऑफिस में साथ-साथ रहने से.
* हाथ मिलाने से.
* कमोड, फोन या किसी के कपड़े से.
* मच्छर के काटने से.

एड्स पीड़ित व्यक्ति के साथ नम्र व्यवहार जरुरी है ताकि वह आम आदमी का जीवन जी सके। कल एड्स का मतलब था जिंदगी का अंत, पर आज इसे एक स्थाई संक्रमण समझा जाता है, जिसे नियंत्रित किया जा सकता है। भविष्य में हो सकता है एड्स का इलाज संभव हो जाए। फिलहाल सावधानी ही इस रोग से बचाव का एकमात्र उपाय है।

Tuesday, November 24, 2015

ऐसे बनाएं अपनी सर्दियों को हॉट

स्टाइल और पर्सनैलिटी का परफेक्ट तालमेल बनाए सर्दियों को हॉट

मौसम के करवट लेने के साथ ही लोगों के ड्रैसिंग स्टाइल में भी चेंज दिखना शुरू हो गया है। बदलते मौसम के साथ ही फैशन के अनुसार चलने वाले लोगों को यह जानने की इच्छा जरूर होगी कि इस बार सर्दियों का फैशन क्या होगा। भीड़ से अलग खुद की पहचान बनाने के लिए स्टाइल और पर्सनैलिटी का बढि़या तालमेल बेहद जरूरी है। अगर आप सिर्फ स्टाइल के पीछे भागेंगी और फैशन काॅपी करती रहेंगी, तो जरुरी नहीं कि आप दूसरों को इंप्रेस कर पाएं। स्टाइल और पर्सनैलिटी का परफेक्ट तालमेल बनाने के लिए और सर्दियों को स्टाइलिश तरीके से बिताने के लिए आपकी वाॅर्डरोब में कौन-सी ड्रैसिस होनी जरूरी हैं, यह आज हम आपको बता रहे हैं।

स्वेटशर्ट्सः 

अपनी वॉर्डरोब में स्वेटशर्ट्स को जरूर शामिल करें। स्वेटशर्ट में आपको कई स्टाइलिश ऑप्शंस मिल जाएंगे। इस बार कुछ नया स्टाइल और ट्रेंड फॉलो करें। डिजिटल प्रिंट्स और पैटर्न ट्राई करें। स्पोर्टी लुक काफी ट्रेंड में है। यह लुक सद्रियों में  आपकी फैशन स्पिरिट को भी बरकरार रखेगा। 


कार्डिगनः 

ढीले पुलोवर और ओवरसाइज़ वाले स्वेटर को बाय बोलें। इसकी बजाय फिटेड कार्डिगन पहनें जो आपके कर्व्स को हाई लाइट करें। कार्डिगन की सबसे अच्छी बात यह है कि यह बेहद वर्सटाइल होता है। यह आपके लुक को स्पेशल और यूनिक बनाता है। काफी हल्के होने के कारण ये पहनने में भी बेहद आरामदायक हैं और इन्हें पहनने के बाद खुद को ज्यादा कपड़ों में पैक करने की जरूरत नहीं है।


स्टोलः 

फैशन ट्रेंड बन चुका स्टोल ईज़ी टू कैरी है और साथ ही यह एथनिक, वेस्टर्न और फ्यूज़न ड्रेसिस के साथ बखूबी मैच हो जाता है, इसलिए सलवार सूट हो, साड़ी या जींस, सबके साथ आप इसे कैरी कर सकती हैं। सर्दी में भी कम बल्की लेयर्स ज्यादा अच्छी लगती हैं और स्टोल इसके लिए बेहतरीन अॉप्शन है। 


क्रॉप्ड जैकेट्स:

एक और स्टाइलिश ऑप्शन जिसे इन सर्दियों में आपके वॉर्डरोब का हिस्सा बनना चाहिए वो हैं क्रॉप जैकट। इनसे आप अपना स्टाइल स्टेटमेंट बरकरार रख सकती हैं। बोल्ड स्टेटमेंट लुक के लिए हाफ-स्लीव्स वाले क्राप जैकेट पहनें। ये टी-शर्ट और ड्रेसेज़, दोनों के साथ बेहद कमाल का लगेगा।

 

केप्सः 

जैकेट या ब्लेज़र पहन कर बोर हो गई हैं तो केप्स ट्राई करें। इसके बिना सर्दियों का आपका वॉर्डरोब अधूरा है। इसमें आप स्टाइलिश तो दिखती ही हैं साथ ही आपकी फेमेनिटी, ग्रेस और एलिगेंस साफ-साफ नज़र आती है।  इन्हें स्किन-टाइट जींस या स्किनी के साथ टाईअप करिए। इसके साथ हाई-हील्स या स्टिलेटोज़ बहुत सुंदर दिखेंगे।   


स्कार्फः 

स्कार्फ एक ज़रूरी फैशन एक्सेसरी बन चुका है। इसकी मदद से आप कई अलग-अलग लुक्स पा सकती हैं। इसलिए अपने वॉर्डरोब में ढेर सारे बुने हुए और प्रिंटेड स्कार्फ शामिल करें। इन्हें अलग अंदाज में वियर करके आप बेहद स्टाइलिश दिख सकती हैं। 


एंकल बूट्सः 

सर्द मौसम में लॉन्ग बूट्स पैरों को सुरक्षा देने के साथ-साथ पर्सनैलिटी को एक स्टाइल स्टेटमेंट भी देते हैं। इसीलिए अगर आपके पास अब तक एंकल बूट्स का कोई भी पेयर नहीं है तो आज इन्हें खरीदने जाएं। स्वेड लेदर से बने क्लासिक लुक वाले एंकल बूट्स से आपको स्पोर्टी और क्लासिक लुक मिलेगा। 

-मीनाक्षी गांधी