Thursday, September 18, 2014

दुर्गा के नौ रूपों की आराधना से शांत हो जाते हैं नवग्रहों के प्रकोप

दुर्गा के नौ रूपों की आराधना से शांत हो जाते हैं नवग्रहों के प्रकोप 


आश्विन माह में आने वाले इन नवरात्रों को ‘शारदीय नवरात्र’ कहा जाता है। शारदीय नवरात्र की महिमा सर्वोपरि है। शरदकाले महापूजा क्रियते या च वाष्रेकी। दुर्गा सप्तशती के इस वचन के अनुसार शारदीय नवरात्र की पूजा वार्षिक पूजा होने के कारण महापूजा कहलाती है। यह भक्तों की आस्था और विश्वास का प्रतीक है। नौ दिनों तक चलने नवरात्र पर्व में मां दुर्गा के नौ रूपों क्रमशः शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धदात्री देवी की पूजा का विधान है। 


नवरात्र के इन प्रमुख नौ दिनों में लोग नियमित रूप से पूजा-पाठ और व्रत का पालन करते हैं। अनेक पौराणिक कथाओं में शक्ति की अराधना का महत्व व्यक्त किया गया है। एक पौराणिक कथानुसार महाराक्षस रावण का वध करने के लिए भगवान मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने शारदीय नवरात्र का व्रत किया था और तभी जाकर उन्हें विजयश्री की प्राप्ति हुई थी। दुर्गा पूजा के नौ दिन तक देवी दुर्गा का पूजन, दुर्गा सप्तशती का पाठ इत्यादि धार्मिक क्रिया कलाप संपन्न किए जाते हैं।

मां दुर्गा की उपासना करने से स्वर्ग जैसे भोग और मोक्ष जैसी शान्ति मिलती है। भगवती दुर्गा अपने भक्तों का वात्सल्य भाव से कल्याण करती है।  नवरात्र के दिनों में चोरी, झूठ, क्रोध, ईष्र्या, राग, द्वेष एवं किसी भी प्रकार का छल नहीं करना चाहिए। तात्पर्य यह है कि मन, वचन एवं कर्म से किसी का दिल दु:खाना नहीं चाहिए। जहां तक सम्भव हो, दूसरों का भला करना चाहिए। मान्यता है कि नवरात्री में नौ दिनों तक माता दुर्गा के नौ रूपों की आराधना करने वाले पर से नवग्रहों के प्रकोप शांत हो जाते हैं और जीवन में सुख, शांति, यश और समृद्धि की प्राप्ति होती है।


शैलपुत्री – सूर्य
चंद्रघंटा – केतु
कुष्माण्डा – चंद्रमा
स्कन्दमाता – मंगल
कात्यायनी – बुध
महागौरी – गुरु
सिद्धिदात्री – शुक्र
कालरात्रि – शनि
ब्रह्मचारिणी – राहु

नवरात्र तिथि

पहला नवरात्र, प्रथमा तिथि, 25 सितंबर 2014, दिन बृहस्पतिवार
दूसरा नवरात्र, द्वितीया तिथि, 26 सितंबर 2014, दिन शुक्रवार.
तीसरा नवरात्र, तृतीया तिथि, 27 सितंबर 2014, दिन शनिवार.
चौथा नवरात्र, चतुर्थी तिथि, 28 सितंबर 2014, रविवार.
पांचवां नवरात्र , पंचमी तिथि , 29 सितंबर 2014, सोमवार.
छठा नवरात्र, षष्ठी तिथि, 30 सितंबर 2014, मंगलवार.
सातवां नवरात्र, सप्तमी तिथि, 1 अक्तूबर 2014, बुधवार
आठवां नवरात्र, अष्टमी तिथि, 2 अक्तूबर 2014, गुरूवार,
नौवां नवरात्र, नवमी तिथि, 3 अक्तूबर 2014, शुक्रवार
दशहरा, दशमी तिथि, 3 अक्तूबर 2014, शुक्रवार से प्रारंभ होकर शनिवार प्रात:काल तक रहेगी.


नवरात्र के नौ रंग

नवरात्र के नौ रंग

रंगों में तीन रंग सबसे प्रमुख हैं- लाल, हरा और नीला। इस जगत में मौजूद बाकी सारे रंग इन्हीं तीन रंगों से पैदा किए जा सकते हैं। हर रंग का आपके ऊपर एक खास प्रभाव होता है। नौ देवियों को समर्पित नवरात्र के पर्व में हर दिन के लिए एक रंग है। जानें किस दिन का है कौन सा रंग ताकि उस दिन उसी रंग के कपड़े पहन कर मां की पूजा करें और जानें उस रंग का अर्थ...


25 सितंबर (वीरवार) पीला : पहले दिन की शुरुआत करें चटकीले पीले रंग से। पीला रंग ऊर्जा का संवाहक है। यह रंग हमें गर्माहट का अहसास देता है। पीला सुकून  देने वाला रंग है। जिन्हें पीला रंग आकर्षित करता है, उनको सूझ-बूझ और जिज्ञासुवृत्ति से सम्पन्न व्यक्ति माना जाता है।

26 सितंबर (शुक्रवार) हरा: हरा रंग इन दिनों काफी चलन में भी है। हरा रंग शांत और संतुलित माना जाता है। यह मन की शान्ति दर्शाता है। हरा रंग पसन्द करने वाले आत्मविश्वासी और शान्त स्वभाव के होते हैं।

27 सितंबर (शनिवार) ग्रे:  ग्रे डल शेड है, इसलिए इसे आप ब्राइट शेड्स के कांबिनेशन में पहन सकती हैं। अगर आप किसी ऐसी जगह हैं, जहां एक विशेष कंपन और शुभ ऊर्जा है तो आपके पहनने के लिए सबसे अच्छा रंग काला और ग्रे है क्योंकि ऐसी जगह से आप शुभ ऊर्जा ज्यादा से ज्यादा आत्मसात करना चाहेंगे।

28 सितंबर (रविवार) केसरियाफेस्टिव सीजन के मूड के हिसाब से नारंगी बेहतरीन रंग है। यह रंग लाल और पीले रंग के समन्वय से बनता है। सुबह-सुबह जब सूर्य निकलता है, तो उसकी किरणों का रंग केसरिया होता है।  केसरिया रंग का मतलब है कि आपके जीवन में एक नया सवेरा हो गया है। केसरिया रंग पसन्द करने वाले कल्पनाशील होते हैं।

29 सितंबर (सोमवार) सफेदव्हाइट या ऑफ व्हाइट बेहद ग्रेसफुल दिखता है।  सफेद यानी श्वेत दरअसल कोई रंग ही नहीं है। कह सकते हैं कि अगर कोई रंग नहीं है तो वह श्वेत है, लेकिन साथ ही श्वेत रंग में सभी रंग होते हैं। श्वेत रंग सुख समृद्धि का प्रतीक है, यह मानसिक शांन्ति प्रदान करता है। सफेद रंग पसन्द करने वाले शान्तिप्रिय होते हैं।

30 सितंबर (मंगलवार) लाल: त्योहारों की चमक-दमक और भी बढ़ जाएगी जब आप लाल लहंगा, सूट या साड़ी पहनेंगे। रक्त का रंग लाल होता है। उगते सूरज का रंग भी लाल होता है। मानवीय चेतना में अधिकतम कंपन लाल रंग ही पैदा करता है। जोश और उल्लास का रंग लाल ही है। लाल को गतिशील, ताकतवर और उत्तेजक रंग माना जाता है। लाल रंग पसन्द करने वाला व्यक्ति दृढ़ स्वभाव का होता है।

1 अक्तूबर (बुधवार) नीला : नीला रंग नवरात्र में आपके लुक को स्टाइलिश और सेक्सी बना देगा। नीला रंग सब को शामिल करने का आधार है। भगवान श्री कृष्ण के शरीर का रंग नीला माना जाता है, उनका स्वभाव सभी को साथ लेकर चलने वाला था। नीला रंग शांति और सुकून का परिचायक है। सरल स्वभाव वाले सौम्य व एकान्त प्रिय लोग नीला रंग पसन्द करते हैं। गहरे नीले रंग में तनाव दूर करने की ताकत होती है।

2 अक्तूबर (वीरवार) गुलाबी: गुलाबी रंग फेस्टीव सीजन में हिट है। खूबसूरती और एलीगेंस का प्रतीक है गुलाबी रंग। गुलाबी रंग हमें सुकून देता है तथा परिवारजनों में आत्मीयता बढ़ाता है। गुलाबी रंग भावनात्मक प्यार का सूचक है।

3 अक्तूबर (शुक्रवार) बैंगनीः पर्पल और वॉयलेट जैसे रंग आपको भीड़ में सबसे अलग कर देंगे। यह रंग धर्म और अध्यात्म का प्रतीक है। नाजुक मिजाज, संवेदनशील और भावुक व्यक्ति बैंगनी रंग पसंद करने वाले होते हैं। इसका हल्का शेड मन में ताजगी जगाता है।

कंजक पूजन से मिलते हैं राजयोग, ऐश्वर्य और सुख-समृद्धि

कंजक पूजन से मिलते हैं राजयोग, ऐश्वर्य और सुख-समृद्धि


नवरात्र के दौरान आठवें दिन सुबह कन्या .यानी कंजक पूजन का विधान है। कुछ लोग नवमी के दिन भी कन्या पूजन करते हैं। मान्यता है कि होम, जप और दान से देवी इतनी प्रसन्न नहीं होतीं, जितनी कन्या पूजन से।  ऐसा कहा जाता है कि विधिवत, सम्मानपूर्वक कन्या पूजन से व्यक्ति के हृदय से भय दूर हो जाता है। साथ ही उसके मार्ग में आने वाली सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं। उस पर मां की कृपा से कोई संकट नहीं आता। मां दुर्गा उस पर अपनी कृपा बरसाती हैं।

नवरात्र में कंजक पूजन के लिए जिन कन्याओं का चयन करें, उनकी आयु दो वर्ष से कम और दस वर्ष से ज्यादा न हो। एक वर्ष या उससे छोटी कन्याओं की पूजा नहीं करनी चाहिए, क्योंकि वे प्रसाद नहीं खा सकतीं। इसका धार्मिक कारण यह है कि दो वर्ष से लेकर दस वर्ष की कन्याएं साक्षात माता का स्वरूप मानी जाती हैं और उन्हें माता के समान ही पवित्र और पूजनीय माना जाता है। कन्याओं के साथ एक लांगूर यानी लड़के को भी जिमाते है। ऐसा कहा जाता है कि लांगूर के बिना पूजन अधूरा रहता है।

दो वर्ष की कन्या (कुमारी) के पूजन से दुख और दरिद्रता मां दूर करती हैं। तीन वर्ष की कन्या त्रिमूर्ति रूप में मानी जाती है। त्रिमूर्ति कन्या के पूजन से धन-धान्‍य आता है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है। चार वर्ष की कन्या को कल्याणी माना जाता है। इसकी पूजा से परिवार का कल्याण होता है। पांच वर्ष की कन्या रोहिणी कहलाती है। रोहिणी को पूजने से व्यक्ति रोगमुक्त हो जाता है। छह वर्ष की कन्या को कालिका रूप कहा गया है। कालिका रूप से विद्या, विजय, राजयोग की प्राप्ति होती है। सात वर्ष की कन्या का रूप चंडिका का है। चंडिका रूप का पूजन करने से ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। आठ वर्ष की कन्या शाम्‍भवी कहलाती है। इसका पूजन करने से वाद-विवाद में विजय प्राप्त होती है। नौ वर्ष की कन्या दुर्गा कहलाती है। इसका पूजन करने से शत्रुओं का नाश होता है तथा असाध्य कार्यपूर्ण होते हैं।दस वर्ष की कन्या सुभद्रा कहलाती है। सुभद्रा अपने भक्तों के सारे मनोरथ पूर्ण करती है।

ऐसे करें कंजक पूजन

नवरात्र में सभी तिथियों को एक-एक और अष्टमी या नवमी को नौ कन्याओं की पूजा होती है। कन्याओं के पैर धो कर उन्हें आसन पर बैठाया जाता है। हाथों में मौली बांधी जाती है और माथे पर रोली से टीका लगाया जाता है। भगवती दुर्गा को उबले हुए चने, हलवा, पूरी, खीर, पूआ व फल आदि का भोग लगाया जाता है। यही प्रसाद कन्याओं को भी दिया जाता है। कन्याओं को कुछ न कुछ दक्षिणा भी दी जाती है। कन्याओं को लाल चुन्नी और चूडि़यां भी चढ़ाई जाती हैं। कन्याओं को घर से विदा करते समय उनसे आशीर्वाद के रूप में थपकी लेने की भी मान्यता है। इस प्रकार महामाया भगवती प्रसन्न होकर मनोरथ पूर्ण करती हैं।

दूरियों को बदलें नजदीकियों में

दूरियों को बदलें नजदीकियों में


वैवाहिक जीवन में मधुरता की कामना कौन नहीं करता, लेकिन किसी भी रिश्ते को  परफैक्ट बनाने के लिए कोशिश करनी पड़ती है। हर रिश्ता उतार-चढ़ाव के दौर से गुजरता है। जब ज़िंदगी में खुशियां रहती हैं तब तो सबकुछ ठीक रहता है लेकिन जब जीवन में मुश्किलों भरे पल आते हैं तो कई बार रिश्ते बिखर भी सकते हैं। यदि आपके रिश्तों में भी दूरियां बन रही हैं या फिर खटपट शुरू हो गई है तो आप फेंगशुई के कुछ टिप्स आजमा कर अपने साथी के साथ खुशियों के पल बिता सकती  हैं...


  • आपका बेड खिड़की से सटा हुआ न हो। कहा जाता है कि इससे पति-पत्नी के रिश्तों में तनाव और दूरियां बढ़ती हैं। लेकिन यदि  आपके पास कोई और आप्शन न हो, और आपको अपना सिराहना खिड़की की तरफ ही रखना पड़ता है तो ध्यान रखें कि खिड़की और सिराहने के बीच पर्दा जरूर लगा हो।

  • छत पर बीम का दिखना भी रिश्तों के बीच दूरियों को बढ़ाता है। यदि इसे हटाना मुश्किल हो तो आप फॉल्स सीलिंग लगवा सकते हैं।

  • अगर आपकी नई-नई शादी हुई है तो कोशिश करें कि आपका बेड भी नया हो। बेहतर होगा अगर बेड की  चादर भी नई हो, लेकिन अगर आप पुरानी चादर इस्तेमाल कर रही हैं  तो ऐसी चादर का इस्तेमाल बिल्कुल भी न करें, जिनमें छेद हो।

  • बेड के नीचे की जगह का खाली होना जरूरी है। आपके बेड के नीचे सामान की मौजूदगी नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती है, जो आखिरकार आप तक ही पहुंचती है।

  • आपको अगर यह एहसास हो रहा हो कि आपका प्यार आपसे दूर होता जा रहा है तो सिरामिक की विंड चाइम्स को बेडरूम में रखना आपसी रिश्तों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

  • अपने बेडरूम में एक खूबसूरत प्लेट में शंख रखें, इससे आपकी दूरियां जल्द ही नजदीकियों में बदल जाएंगी और प्यार भी पनपता हुआ नजर आने लगेगा।

  • यदि आपकी आर्थिक स्थिति की वजह से आपके रिश्तों में खटास आ रही हो तो एक खूबसूरत बाऊल में चावल के दानों के साथ क्रिस्टल रखें। इससे आर्थिक समस्याएं तो दूर होंगी ही आपके रिश्तों में दोबारा प्यार का अंकुर भी फूटेगा।

Tuesday, May 13, 2014

ब्‍यूटी सीक्रेट्स जो रखें आपकी स्किन खूबसूरत

अधिकतर स्किन प्रॉब्लम्स गर्मी में ही होती हैं। दरअसल, गर्मी के मौसम में आपकी त्‍वचा को कुछ एक्‍सट्रा चाहिए होता है। डीहाइड्रेशन, ऑयली स्किन, चेहरे पर पिंपल, एक्ने, पिग्मेंटेशन, पसीने के कारण फंगल इंफेक्शन  सन टैनिंग और सिर में खुजली जैसी समस्‍याओं की संभावना इस मौसम में बढ़ जाती है। अगर आपकी स्किन लंबे समय तक धूप के संपर्क में रहती है, तो इसे एज स्पॉट्स, रिंकल, स्किन कैंसर जैसी प्रॉब्लम्स का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही, अल्ट्रा वायलेट किरणों से सनबर्न, सन टैन और सन डैमेज जैसी तमाम समस्याएं हो जाती हैं। 

पर धूप की वजह से हम बाहर आना-जाना भी तो नहीं छोड़ सकते। तेज धूप  के नकारात्मक असर से आप बिल्‍कुल भी चिंतित न हों क्‍योंकि गर्मी को भगाने के लिए हम आपको बहुत से अच्‍छे तरीके बता रहे हैं। इन्हें आप ब्‍यूटी सीक्रेट भी कह सकती हैं। इन्हें अपनाएंगी, तो आपकी बॉडी कूल और आपकी स्किन खूबसूरत बन जाएगी...


स्किन टाइप चाहे कोई भी हो, अगर क्लींजिंग, टोनिंग और मॉइश्चराइजिंग के प्रॉसेस को रोजाना फॉलो किया जाए तो काफी सारी स्किन प्रॉब्लम्स से बचा जा सकता है। जानिए  क्या है इसका सही प्रॉसेस। 

क्लींजिंग : पहले चेहरे को फेस वॉश से अच्छे से क्लीन करें। जब चेहरा पूरी तरह से ड्राई हो जाए तब फ्रेश मिल्क या फिर क्लेंजिंग मिल्क से कॉटन की मदद से चेहरे को साफ करें। कुछ मिनट्स के बाद चेहरे को पानी से धो लें और अच्छे से सुखा लें।

टोनिंग : अब एक अल्कोहल फ्री टोनर चेहरे पर लगाएं और कॉटन की हेल्प से वाइप करें ताकि स्किन बिल्कुल क्लीन हो जाए। टोनर यूज करने से बची हुई डर्ट साफ हो जाती है। साथ ही टोनर आपकी स्किन के नेचुरल पीएच लेवेल को भी मेंटेन रखता है। आप चाहें तो रोज वॉटर भी यूज कर सकती हैंं।

मॉइश्चराइजिंग :  सबसे लास्ट में एक अच्छा और नरिशिंग मॉइश्चराइजर यूज करें। ड्रॉई स्किन के लिए क्रीम बेस्ड मॉइश्चराइजर और ऑयली स्किन के लिए वॉटर बेस्ट मॉइश्चराइजर सूटेबल रहते हैं।


सनस्‍क्रीन

सूर्य की हानिकारक अल्‍ट्रावॉयलेट (पराबैंगनी) किरणें त्‍वचा पर विपरीत प्रभाव डालती हैं। गर्मियों में इनका असर और भी अधिक बढ़ जाता है। आप जितना अधिक समय सूरज की रोशनी में बिताते हैं आपकी त्‍वचा को उसकी उतनी ही कीमत चुकानी पड़ती है। सूर्य की हानिकारक किरणों के प्रभाव के कारण त्‍वचा समय से पहले ही बूढ़ी लगने लगती है। त्‍वचा पर झुर्रियां, गहरे निशान, और रूखापन आने लगता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकतर मामलों में प्री-मेच्योर एजिंग धूप में ओवर एक्सपोजर के कारण होती है। इससे बचने के लिए घर से बाहर निकलने से आधे घंटे पहले सन स्क्रीन लगाना जरूरी है। कम से कम एसपीएफ 15 या उससे ज्यादा एसपीएफ वाला सनस्क्रीन यूज करना बेहतर होगा।यदि आप सोचते हैं कि सुबह के वक्‍त सनस्‍क्रीन लगाना ही काफी है, तो आप गलत हैं। आपको इसका नियमित और अच्‍छी मात्रा में इस्‍तेमाल करना चाहिए। आपको कम से कम टी-स्‍पून सनस्‍क्रीन हर दो घंटे बाद लगानी चाहिए।


हर्बल पैक

गर्मियों में स्किन प्रॉब्लम से छुटकारा पाने के लिए हर्बल फेस पैक अपनाएं। गर्मियों में धूप की वजह से चेहरे पर रूखापन आ जाता है, अधिक समय तक रूखापन बने रहने से स्किन संबंधी रोगों की संभावनाएं बढ़ जाती हैं और इससे एलर्जी की आशंका सबसे ज्यादा रहती है। ऐसे में हर्बल फेस पैक रूखापन हटाने के साथ ही पोषण भी प्रदान करते हैं। 
  • चेहरे पर ताजगी लाने के लिए दो चम्मच बेसन, हल्दी पावडर, गुलाब जल व शहद मिलाकर लेप बनाएं। इसे चेहरे व हाथ-पैरों और गर्दन पर लगाएं व 10 मिनट बाद धो लें। इससे स्किन सुंदर व स्वस्थ बनी रहेगी। 
  • कच्चे दूध में हल्दी डालकर पेस्ट बनाएं। इसे चेहरे और हाथ-पैरों पर लगाएं। 10 मिनट बाद धो लें।स्किन निखर उठेगी। 
  • गर्मियों में पपीता, खीरा जैसे खूब सारे रिफ्रेशिंग फ्रूट्स अवेलेबल होते हैं जिन्हें आप डायरेक्टली फेस पर अप्लाई कर नेचुरल ग्लो पा सकती हैं। साथ ही दही, बेसन, हनी और लेमन से बने फेस पैक्स भी ट्राई कर सकती हैं।
  • एक टीस्पून बेसन में आधा टीस्पून टमाटर का पेस्ट, आधा टीस्पून खीरे का पेस्ट और थोड़ा दही मिक्स करें इस पेस्ट को चेहरे पर 10-15 मिनट के लिए लगाएं और फिर पानी से धो लें
  • पपीते को मैश करके उसमें थोड़ा मिल्क पाउडर और थोड़ा हनी मिक्स करें इसे डार्क स्पॉट्स पर अप्लाई करें और 10-15 मिनट बाद धो लें.
  • अगर आपकी स्किन ऑयली है या फिर आपको एक्ने और पिंपल्स की प्रॉब्लम है तो ताजे गुलाब की पत्तियों को पानी में भिगोएं फिर इस पानी को आइस ट्रे में डालकर फ्रीज करें। जब इसके आइस क्यूब्स बन जाएं, उन्हे चेहरे पर कुछ देर के लिए रब करें. आपको काफी आराम मिलेगा
  • स्किन को पोषण देने के लिए सप्‍ताह में एक या दो बार एंटी-ऑक्‍सीडेंट्स मास्‍क लगायें।  

रेग्युलर स्क्रब

समर में स्किन को एक्सफॉइलेट करना और भी इंपॉर्टेंट होता है क्योंकि पसीने की वजह से डर्ट आसानी से आ जाती है। हफ्ते में एक बार चेहरे से डेड सेल्स को हटाने के लिए स्क्रब जरूर करें। इससे आप स्किन की मृत कोशिकाओं से छुटकारा पा लेते हैं और ब्लड सर्कुलेशन इंप्रूव होता है। इससे स्किन टोन होती है और उसे पोषण मिलता है। गर्मियों के लिए जोजोबा बीड्स युक्त स्क्रब लगाएं, जो बेहतरीन नतीजे देता है और रोम छिद्रों को नुकसान भी नहीं पहुंचाता है। रेडीमेड स्क्रब्स के अलावा हेाम मेड स्क्रब्स भी ट्राई किए जा सकते हैं। 

मेकअप हो लाइट  

मेकअप से भी कूल रहा जा सकता है। गर्मियों में वाटरप्रूफ मेकअप करें ताकि पसीने के साथ बहकर वह आपके चेहरे का नक्शा न बिगाड़ दे। क्लीजिंग मिल्क से चेहरा साफ करने के बाद पूरे चेहरे पर आइस क्यूब मलें, इससे मेकअप देर तक टिका रहेगा। कूल रहने के लिए मेकअप को हल्का और सौम्य रखें। पर्स में कॉम्पेक्ट हमेशा साथ रखें, ताकि कहीं भी जरूरत पड़ने पर टचिंग की जा सके।

बांधें स्कार्फ

गर्मी चाहे कितनी भी हो, अपनी स्किन और बालों की सेहत की चिंता भी क्यों न सता रही हो, पर बाहर निकले बिना तो रहा नहीं जा सकता है। धूप तेज होने के कारण शरीर के खुले हिस्से और बाल सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। गर्म हवाओं से बचने का एक तरीका स्कार्फ भी है। धूप में बिना स्कार्फ पहने निकलना अवॉयड करें। इसको बांधने से आप अपने बालों और चेहरे को भी धूप से बचा सकती हैं। जब आप इस स्कार्फ को खोलेंगी तो तरोताजा दिखेंगी।  स्कार्फ बांधने से कानों से गर्म हवा शरीर के अंदर प्रवेश नहीं करेगी। हाथों व पैरों को भी खुला न रखें, धूप से स्किन खराब होने के साथ ही धूल की वजह से एलर्जी प्रॉब्लम हो सकती है।

नमी रखें बरकरार 

धूप और धूल भरी हवाएं आपकी त्वचा की नमी चुरा लेती हैं, जिससे आपकी त्वचा बेजान हो जाती है।धूप मे अधिक वक्‍त बिताने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है। वैसे भी गर्मियों में बॉडी बहुत सारा मॉइश्चर लूज करती है इसलिए जरूरी है कि आप खूब सारा पानी और रिफ्रेशिंग लिक्विड्स पीते रहें और हाइड्रेटेड रहें। इससे ना सिर्फ आपकी बॉडी को फायदा होगा बल्कि आपकी स्किन ऑटोमैटिकली मॉइश्चराइज्ड रहेगी। 

टैनिंग से पाएं छुटकारा

टैनिंग भले ही आपको सामान्‍य लगे, लेकिन इसका अर्थ होता है कि आपकी त्‍वचा को नुकसान पहुंचा है। अगर ज्‍यादा धूप में निकलने से सन टैनिंग हो गई है, तो चदंन पाउडर में रोजवॉटर मिला कर पेस्‍ट तैयार कर के लगाएं। इससे शरीर को ठंडक तो मिलती ही है, साथ में सन बर्न जैसी समस्‍या भी दूर हो जाती है। फ्रेश एलोवेरा लीफ को काटकर उसका जूस निकालें। उसमें कुछ ड्रॉप्स लेमन जूस एड करें और टैन्ड एरिया पर अप्लाई करें। कच्चे आलू को अच्छे से पीस लें। अब इस पेस्ट में भी लेमन जूस मिलाकर चेहरे पर अप्लाई करें। खीरे को घिस कर उसका जूस निकालें, उसमें थोड़ा सा दूध मिलाएं और इस मिक्सचर को चेहरे पर लगाएं।

डैमेज्ड स्किन केयर

यदि आप बिना किसी सुरक्षा कवच के धूप में घूमते हैं, तो इससे आपकी स्किन को काफी नुकसान होता है, बल्कि इसके साथ ही यह गहरे निशान, झुर्रियां, जलन और लालिमा का भी कारण बनती हैं। अपनी स्किन के नुकसान को कम करने के लिए एंटी-एजिंग और त्‍वचा उपयोगी उत्‍पादों का इस्‍तेमाल करें और अपनी स्किन को सूर्य की हानिकारक यूवी किरणों से बचायें। 

  • तेज धूप से आपकी स्किन का रंग सांवला हो गया है तो कच्चे टमाटर को कुचलकर छाछ मिलाकर चेहरे और स्किन पर मलने से त्वचा को ठंडक मिलेगी। 
  • अलसी का तेल व नींबू का रस बराबर मात्रा में मिलाकर झुलसी हुई स्किन पर लगाने से काफी फायदा होता है। 
  • चिरौंजी कच्चे दूध में पीसकर मलाई एवं नींबू का रस मिलाकर चेहरे और शरीर में लगाना गर्मियों में बहुत लाभदायक होता है।
  • गर्मी से राहत पाने का असर उपाय है, मुल्‍तानी मिट्टी का फेस पैक लगाना। मिट्टी आपकी स्किन को एक ठंडक के एहसास से भर देगी। सिर्फ यही नहीं, ये आपको पिंपल और तमाम त्‍वचा समस्‍याओं से राहत भी दिलाएगी। आप चाहें तो सिर्फ अपने चेहरे पर या फिर पूरी बॉडी पर इसका पैक लगा सकती हैं।
  • दिन में दो बार जरूर नहाएं। चेहरे की दमक को बरकरार रखने के लिए दिन में 3 बार ठंडे पानी और माइल्ड क्लींजर से चेहरा धोएं।
  • रात को सोने से पहले क्लेंजिंग, टोनिंग, मॉइश्चराइजिंग करना ना भूलें।
  • स्किन को हाइड्रेटेड रखने के लिए मॉइश्चराइजर यूज करना बहुत जरूरी है। गर्मियों में क्रीम बेस्ड मॉइश्चराइजर्स से बेहतर होगा वॉटर बेस मॉइश्चराइजर, स्पेशली तब जब आपकी स्किन बहुत ऑयली हो। 

बीट द हीट: इनका सेवन गर्मी में रखेगा आपको कूल

बीट द हीट: इनका सेवन गर्मी में रखेगा आपको कूल

गर्मी यानी कड़कड़ाती धूप, प्यास, पसीना और थका हुआ शरीर। पसीने के कारण हमारे शरीर से प्राणरक्षक लवण बह जाते हैं। इसलिए जानिए कि गर्मी के मौसम में डाइट में ऐसे कौन से खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए जो आपको ठंडा और कूल रखें ...


खाएं कम, पिएं ज्यादा

गर्मियों में भूख कम हो जाती है और शरीर को ज्यादा से ज्यादा पानी की आवश्यकता होती है। इसलिए गर्मियों में हमेशा हल्का भोजन करें, भूख से कम खाएं और पानी ज्यादा पिएं। पेय पदार्थ गर्मी के प्रकोप को शांत करने में बेहद कारगर होते हैं। नारियल पानी, में सोडियम जैसे कई इलैक्ट्रोलाइट्स मौजूद होते हैं जो पसीने के कारण शरीर से निकल जाते हैं। इसके अलावा लस्सी, छाछ, जलजीरा, फ्रूट जूस, आम पना, ठंडाई, गुलाब व बेल का शर्बत, लीची व तरबूज का जूस, नींबू-पानी आदि का खूब सेवन करें। ये पानी की पूर्ति तो करते ही हैं, पर्याप्त सोडियम भी देते हैं। ये प्यास, स्वाद व एनर्जी तीनों की पूर्ति करते हैं।

ताजे फलों को आहार में करें शामिल

गर्मियों के लिए केला एक आदर्श चुनाव है। इसमें प्राकृतिक एंटीबायोटिक गुण होते हैं और यह अत्यधिक पसीने के कारण शरीर से निकल गए तरलों को नियंत्रित करने में सहायक होता है। तरबूज और खरबूजा आप दिन में कभी भी खा सकते हैं। इनसे पेट भी भरेगा और ये शरीर में पानी की जरूरत की पूर्ति भी होगी। तरबूज में मौजूद पोटाशियम हमारी मांसपेशियों तथा नाड़ियों की कार्यप्रणाली को कुशल रखने में  सहायक होता है। गर्मी में सत्तू का सेवन शरीर को ठंडक देता है। ग्रीन टी, पुदीना, धनिया इत्यादि खाना पचाने की क्षमता को बढ़ाते हैं।

हरी पत्‍तेदार सब्जियों का करें सेवन

हरी और पत्‍तेदार सब्जियां लें। इनमें पानी की मात्रा ज्यादा होती है, जिसके कारण इनको पचाना आसान होता है। ये आपको हाइड्रेटेड रखती हैं, साथ ही बीमारियों से भी बचाती हैं। पालक, शिमला मिर्च, फूलगोभी, ब्रॉक्‍कोली इसके लिए बेहतर विकल्‍प हैं। कच्चे प्याज को भोजन में शामिल करें। टमाटर खायें, इसमें पानी की मात्रा काफी अधिक होती है। ये शरीर को हाइड्रेटेड रखते हैं और पोषण भी प्रदान करते हैं। खीरे में लगभग 97 प्रतिशत पानी होता है। यह आपकी त्वचा को ताजा रखता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट्स तथा कैलोरीज भी बहुत कम होती हैं। इसका प्रयोग सलाद के रूप में किया जा सकता है। मूली में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं तथा लंबे समय तक आपको हाइड्रेटेड रखते हुए रोगों से बचाते हैं।

घर का खाना खाएं

गर्मी के कारण  भोजन में कीटाणुओं की संख्या बढ़ जाती है, जिससे फूड इंफैक्शन व फूड प्वॉइजनिंग बहुत जल्दी हो जाते हैंं, इसलिए बाहर का खाना न खाएं।  हल्का, ताजा और जल्दी पचने वाला भोजन करें। फ्राइड, स्पाइसी, फैटी फूड और चाय, कॉफी का सेवन न करें। चीनी की जगह गुड़ व शक्कर का इस्तेमाल करना बेहतर रहेगा।

बाहर जाने से पहले

गर्मी की मार को झेलना बहुत मुश्किल होता है और ऐसे में अगर दिन के समय आपको घर के बाहर जाना पड़े, तो यह काम बहुत बड़ी मुसीबत की तरह है, क्योंकि पसीना ज्यादा आने के कारण शरीर भी डीहाइड्रेशन हो सकता है। इसलिए बाहर जाने से पहले नींबू-पानी, फ्रूट जूस या स्कवैश पीकर जाएं, ताकि स्वेटिंग के कारण जो लॉस हो, वह बैलेंस हो जाए। गर्मी में बाहर से आने के तुरंत बाद ठंडा पानी न पिएं।

ध्यान रखें

गर्मियों में एल्कोहल का सेवन न करें, क्योंकि इससे शरीर में पानी का लैवल तेजी से कम होता है और इसका पता काफी देर से चलता है, जो आपको नुकसान पहुंचा सकता है। कोक जैसे कोल्ड ड्रिंक्स से बचें, क्योंकि इनमें पाए जाने वाले रंग और फॉस्फोरिक एसिड आपकी हड्डियों में से कैल्शियम निकाल देते हैं और पेट की अंदर की पर्त को खराब कर देते हैं।

खाद्य पदार्थ को गर्म- ठंडे के आधार पर नहीं बल्कि उनकी तासीर के आधार पर पहचानें, जैसे आइसक्रीम, कोल्डड्रिंक और बर्फ का गोला ठंडा होने पर भी शरीर की गर्मी बढ़ाते हैं। 

Tuesday, February 25, 2014

अर्द्धनारीश्वर काठगढ़ महादेवः शिवलिंग के दो भागों का शिवरात्रि पर हो जाता है ‘मिलन’

अर्द्धनारीश्वर काठगढ़ महादेवः

शिवलिंग के दो भागों का शिवरात्रि पर हो जाता है ‘मिलन’ 


धार्मिक दृष्टि से पूरा संसार ही शिव का रूप है। इसलिए शिव के अलग-अलग अद्भुत स्वरूपों के मंदिर और देवालय हर जगह पाए जाते हैं। ऐसा ही एक मंदिर स्थित है - हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित काठगढ़ महादेव। इस मंदिर का शिवलिंग ऐसे स्वरूप के लिए प्रसिद्ध है, जो संभवत: किसी अन्य शिव मंदिर में नहीं दिखाई देता। काठगढ़ महादेव संसार में एकमात्र शिवलिंग माने जाते हैं, जो आधा शंकर और आधा पार्वती का रूप लिए हुए हैं, यानि एक शिवलिंग में दो भाग हैं। शिव और शक्ति के अर्द्धनारीश्वर स्वरुप श्री संगम के दर्शन से मानव जीवन में आने वाले सभी पारिवारिक और मानसिक दु:खों का अंत हो जाता है।

ईशान संहिता के अनुसार इस शिवलिंग का प्रादुर्भाव फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी की रात्रि को हुआ था। यह पावन शिवलिंग अष्टकोणीय है तथा काले-भूरे रंग का है। लगभग 7-8 फुट ऊंचा भगवान शिव आशुतोष का प्रतिमा स्वरूप व लगभग 6-7 फुट ऊंचा इसी के साथ सटा हुआ माता पार्वती का प्रतिमा स्वरूप विराजमान है। दो भागों में विभाजित आदि शिवलिंग का अंतर ग्रहों एवं नक्षत्रों के अनुसार घटता-बढ़ता रहता है और शिवरात्रि पर दोनों का ‘मिलन’ हो जाता है। शिवरात्रि के अवसर पर हर साल यहां पर तीन दिवसीय भारी मेला लगता है। इस दिन भगवान शिव की शादी माता पार्वती के साथ हुई थी। उनकी शादी का उत्सव मनाने के लिए रात में शिव जी की बारात निकाली जाती है। रात में पूजा कर फलाहार किया जाता है। अगले दिन सवेरे जौ, तिल, खीर और बेल पत्र का हवन करके व्रत समाप्त किया जाता है।

काठगढ़ महादेव मंदिर के दक्षिण में ब्यास नदी है। इस धर्मस्थल से दो नदियों का मिलन स्थान है। इस मंदिर के साथ कई पौराणिक किंवदंतियां जुड़ी हुई है। लोगों के कथनानुसार मंदिर में स्थापित शिवलिंग स्वयंभू प्रकट है। कहा जाता है कि व्यास नदी के किनारे स्थित इस मंदिर के बारे में शिव पुराण में भी व्याख्या मिलती है। ब्रह्मा जी और विष्णु जी के बीच श्रेष्ठता का विवाद उत्पन्न हो गया और दोनों महेश्वर और पाशुपात अस्त्रों जैसे दिव्यास्त्र लेकर युद्ध हेतु उन्मुख हो उठे। इससे तीनों लोकों में नाश की आशंका होने लगी और भगवान शिव शंकर महाअग्नि तुल्य स्तंभ के रूप में ब्रह्मा जी और विष्णु जी के बीच में प्रकट हो गए। इससे दोनों देवताओं के दिव्यास्त्र स्वत: ही शांत हो गए और युद्ध खत्म हो गया। यही अग्नि तुल्य स्तंभ, काठगढ़ के रूप में जाना जाने लगा।

कहा जाता है कि त्रेता युग में जब महाराज दशरथ की शादी हुई थी तो उनकी बारात पानी पीने के लिए यहां रुकी थी और यहां एक कुएं का निर्माण किया गया था। यह कुआं आज भी यहां स्थापित हैं। जब भी भरत व शत्रुघ्न अपने ननिहाल कैकेय देश (वर्तमान कश्मीर) जाते थे तो वे व्यास नदी के पवित्र जल से स्नान करके राजपुरोहित व मंत्रियों सहित यहां स्थापित शिवलिंग की पूजा-अर्चना कर आगे बढ़ते थे।

एक किंवदंती में कहा गया है कि सिकंदर महान का विजयी अभियान यहीं आकर रुका था। विश्वविजेता सिकंदर ईसा से 326 वर्ष पूर्व जब पंजाब पहुंचा, तो प्रवेश से पूर्व मीरथल नामक गांव में अपने सैनिकों को खुले मैदान में विश्राम की सलाह दी। इस स्थान पर उसने देखा कि एक फ़कीर शिवलिंग की पूजा में व्यस्त था। उसने फ़कीर से कहा- ‘आप मेरे साथ यूनान चलें। मैं आपको दुनिया का हर ऐश्वर्य दूंगा।’ फ़कीर ने सिकंदर की बात को अनसुना करते हुए कहा- ‘आप थोड़ा पीछे हट जाएं और सूर्य का प्रकाश मेरे तक आने दें।’ फ़कीर की इस बात से प्रभावित होकर सिकंदर ने भोले नाथ के इस अलौकिक स्वरूप की पूजा-अर्चना की और यहां यूनानी सभ्यता की पहचान छोड़ते हुए शिवलिंग के चारों ओर अष्टकोणिय चबूतरों का निर्माण करवाया था। शिवालय की ऐतिहासिक चारदीवारी में यूनानी शिल्पकला का प्रतीक व प्रमाण आज भी मौजूद हैं।

बताया जाता है कि इस मंदिर ने महाराजा रणजीत सिंह के कार्यकाल में सबसे ज्यादा प्रसिद्धि प्राप्त की थी। कहते हैं, महाराजा रणजीत सिंह ने जब गद्दी संभाली, तो पूरे राज्य के धार्मिक स्थलों का भ्रमण किया। वह जब काठगढ़ पहुंचे, तो इतना आनंदित हुए कि उन्होंने आदि शिवलिंग पर सुंदर मंदिर का निर्माण करवाया और शिवलिंग की इस महिमा का गुणगान भी चारों ओर करवाया। मंदिर के पास ही बने एक कुएं का जल उन्हें इतना पसंद था कि वह हर शुभकार्य के लिए यहीं से जल मंगवाते थे।