Friday, May 3, 2013

हॉटैस्ट फैशन वियर खादी की साड़ी

हॉटैस्ट फैशन वियर
खादी की साड़ी

खादी यानी स्वदेशी। खादी यानी भारतीयता की पहचान।
खादी की साड़ी आज कल हॉटैस्ट फैशन वियर है और स्टेटस सिंबल बनती जा रही है। यह  छह गज की साड़ी आर्ट वर्क की तरह है, जो ट्रैडिशनल तो है पर मॉडर्न भी है। यहां तक कि इंटलैक्चुअल दिखने की चाहत में आम लड़कियां भी खादी की साड़ी पहने इतरा रही हैं...

टैक्नीकली हम कितनी भी तरक्की कर लें, पर हाथ से बनी चीज का महत्व कभी कम नहीं हो सकता। यही हाल टैक्सटाइल्स का भी है। ट्रैडिशनल टैक्सटाइल अब स्टेट्स सिंबल बनता जा रहा है। फैशन की दुनिया में अगर फैब्रिक्स की बात करें तो खादी की अपनी अलग जगह है। फैशन डिजाइनरों ने खादी को काफी स्टाइलिश कर दिया है। खादी ने अपना रंग-रूप तो बदला है, लेकिन उसके चाहने वालों में कमी नहीं आई है। खादी की शुरूआत तो अंग्रेजों की नीतियों का विरोध करने के लिए हुई थी लेकिन आज यह एक फैशन ट्रैंड बन चुकी है। हथकरघे से बने वस्त्र अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भी अपनी चमक बिखेर रहे हैं।

भारतीय संस्कृति में सादगी व सुंदरता की प्रतीक साडिय़ां आज फैशन स्टेटमेंट बन गई हैं, जिसे हॉट और ग्लैमरस लुक पाने के लिए भी पहना जाता है। आज भले ही डैनिम और वैस्टर्न ड्रैसेज का दौर हो, लेकिन खादी की साड़ी बड़ा ट्रैंड बनती जा रही है। खादी की साड़ी हर फैशन पसंद महिला की वार्डरोब का अहम हिस्सा बन चुकी है। साड़ी एक ऐसा परिधान है जो हर उम्र व कद-काठी की महिला पर फबता है। इसे पहनने के अंदाज से मोटे से पतला व पतले से मोटा लगा जा सकता है। इसमें हर महिला की खूबसूरती में चार चांद लग जाते हैं। इसी के चलते आधुनिक फैशनपरस्त महिलाएं भी अपनी वार्डरोब में परिवर्तन कर रही हैं और आधुनिक पोशाकों के साथ-साथ साडिय़ों को भी इसमें सजा रही है। कुछ महिलाएं खादी की साड़ी पहनने को अपनी परंपरा और पर्यावरण से जुडऩा मानती हैं, तो कुछ इसके क्लासिक लुक की तारीफ करती नहीं थकतीं।
 
डिजाइनर हुआ हैंडलूम
यूं तो एलिगेंट और इंडियन लुक के लिए खादी हमेशा ही प्रिफर की जाती रही है, लेकिन हैंडलूम बाजार ने अपने महत्व को बरकरार रखने के लिए काफी मेहनत भी की है। यही कारण है कि खादी का जादू आज भी कायम है। खादी अब डिजाइनर हो चुकी है। खादी की बढ़ती लोकप्रियता का ही कमाल है कि देशभर के फैशन डिजाइनर हैंडलूम में नए एक्सपेरिमेंट्स कर रहे हैं, खादी के नए-नए कलैक्शंस लान्च कर रहे हैं। डिजाइनरों ने फिर से इसे फैशन में ला दिया है और इसी के चलते खादी की साड़ी फैशन वर्ल्ड में अपना असर दिखाने लगी है।
वार्डरोब का अहम हिस्सा
कहते हैं कि अगर किसी महिला की वार्डरोब में साड़ी नहीं तो समझो वह अभी अधूरा है। खादी की ढेरों किस्में आने से खादी की साड़ी और खादी से बने परिधान अब महिलाओं की पहली पसंद बनते जा रहे हैं। हर फैशन पसंद महिला खादी की साड़ी को अपनी वॉर्डरोब में शामिल कर रही है। हैंडलूम साडिय़ों को न सिर्फ क्लासी, बल्कि एलीगेंट और स्टेटस सिंबल भी माना जाता है।
 
फिगर फ्रैंडली साड़ी
सुरुचिपूर्ण ड्रैस पहनना एक टाइमलैस टेस्ट है। हैंडलूम का नाम लेते ही मोटे कपड़ों की तस्वीर कोहन में उभरती थी और आमतौर पर यंग गल्र्स को लगता था कि हैंडलूम की साडिय़ों को पहनने के बाद वे मोटी लगेंगी। लेकिन ऐसा नहीं है। हैंडलूम साडिय़ों में ढेरों वैरायटी और डिजाइंस उपलब्ध हैं। इनमें हल्का फैब्रिक इस्तेमाल किया जाता है और ये सभी फिगर फ्रैंडली हैं।
 
एलीट क्लास की पसंद
खादी की साडिय़ों का क्रेज महिलाओं और लड़कियों में बहुत अधिक है। एलीट क्लास में खादी की साडिय़ों को हमेशा ही बेहद पसंद किया जाता रहा है। अब आधुनिक फैशनपरस्त लड़कियां भी खादी की साड़ी की ओर आकर्षित हो रही हैं। इसे पहनकर भारतीय महिलाएं अपनी परंपराओं को सहेजने के साथ-साथ कुछ अलग दिखाई देने में भी सक्षम हुई हैं। जो गल्र्स सोशलाइट या इंटलैक्चुअल इलीट क्लास में अपनी पहचान बनाना चाहती हैं, खादी की साड़ी पहनने को खूब तवज्जो देती हैं।
 
दिखेंगी सबसे जुदा
अगर आप किसी पार्टी में सबसे डिफरेंट और एलिगेंट लुक में दिखना दिखना चाहती हैं, तो हैंडलूम की साड़ी से बेहतर कुछ नहीं हो सकता। खास मौकों पर खादी की साड़ी बेहद ग्रेसफुल लुक देती है। किसी भी पार्टी में चमकीली-चटक रंग वाली साडिय़ां पहने महिलाओं के बीच खादी की साड़ी आपको भीड़ से अलग दिखाती है। आपको चाहे सादगी पसंद हो या आप स्टाइलिश महिला हों, हैंडलूम में हर टेस्ट के अनुसार साड़ी उपलब्ध होती है।
 
बेहतरीन डिजाइनिंग के लिए
खादी की साडिय़ों के लिए आप अपने शहर के शोरूम में जा सकती हैं, लेकिन अगर आपको कुछ खास डिजाइन खरीदना हो तो हैंडलूम एक्सपो या एक्जीबिशंस में जरूर जाएं। यहां बुनकर डायरैक्ट आते हैं, इसलिए यहां मिलने वाली साडिय़ों की डिजाइनिंग भी काफी हटकर होती है। इसके अलावा शोरूम की अपेक्षा यहां खादी की साड़ी में आपको काफी रीजनेबल रेट में एंटीक डिजाइन और हैंड वर्क पैटन्र्स भी मिल जाएंगे। 
 
युवाओं का स्टाइल मंत्र
खादी और हाथ से बुने डिजाइंस आज का स्टाइल मंत्र बन गए हैं। खादी जितनी स्टाइलिश है, उतनी ही आरामदायक भी। खादी स्किन फ्रैंडली है और बेहद कम्फर्टेबल भी। खादी हल्की बुनी होने के कारण ठंडी रहती है। खादी के बने कपड़े गर्मी और सर्दी दोनों ही मौसम के अनुकूल होते हैं। गर्मी के मौसम में ये पसीने को सोख लेते हैं। इसे पहनने के बाद आप स्टाइलिश दिखने के साथ-साथ कंफर्ट भी महसूस करती हैं। इसके चलते भी युवा वर्ग खादी को खासी तवज्जो देने लगा है।
 
अलग फैब्रिक बेस
साड़ी में वैरायटी का कोई अंत नहीं है। खादी की साडिय़ों में क्रेप, कॉटन, जॉर्जेट, नैट, सिल्क-कॉटन और सिल्क फैब्रिक का बेस पसंद किया जाता है। साथ ही इन साडिय़ों पर किए वर्क और जहां यह वर्क किया जाता है, वहां के नाम से ये साडिय़ां मशहूर होती हैं। जैसे कांचीपुरम में पाए जाने वाले सिल्क की बनी साड़ी कांचीपुरम कहलाती है। मध्यप्रदेश की चंदेरी और माहेश्वरी आदि जगहों की साडिय़ां भी इसी नाम से जानी जाती हैं। 
 
कलर्स में भी एक्सपेरिमेंट
खादी के परंपरागत अवतार में सुंदरता और स्टाइल पर अधिक जोर नहीं दिया गया, यहां तक कि कपड़े को डाई भी नहीं किया जाता था। पर अब खादी की साडिय़ों के कलर्स में भी एक्सपेरिमेंट्स हो रहे हैं। टीनएजर्स से लेकर युवाओं में इकोफ्रैंडली होने के बढ़ते क्रेज के चलते भी खादी फैशन का पैमाना बनकर उभर रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि खादी में ईको फ्रैंडली कलर्स का उपयोग किया जाता है। खादी के आकर्षण को बढ़ावा देने के मद्देनजर कपड़े की डाई के लिए अच्छे ऑर्गेनिक रंगों के इस्तेमाल से लेकर मुलायम और एक समान फिनिशिंग पर ध्यान दिया जा रहा है। खादी की साड़ी अब बेहतरीन डिजाइंस के साथ-साथ कंट्रास और लाइट व पेस्टल कलर्स में भी उपलब्ध हो रही है, जिससे ये डीसेंट व फैशनेबल दोनों ही लुक देती है।
-मीनाक्षी गांधी
http://epaper.punjabkesari.in/magazine/fullstory/30100902_324489

जादुई गोली की भयानक मार

 जादुई गोली की भयानक मार

दर्द से राहत पाने के लिए अक्सर हम पेनकिलर्स का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन दर्द में तुरंत राहत देने वाली इन जादुई गोलियों की मार बड़ी भयानक होती है। आप पेन किलर का मनमाना प्रयोग कर रहे हैं तो मानकर चलिए आप एक बड़े दर्द को न्यौता दे रहे हैं। इसलिए आइंदा इन्हें लेने से पहले इसके फायदे-नुकसान पर भी गौर कर लें...

दर्द होने पर हम बिना सोचे-समझे तुरंत पेनकिलर ले लेते हैं लेकिन यह नहीं सोचते कि इसके दुष्प्रभाव खतरनाक हो सकते हैं। दर्दनिवारक दवा के इस्तेमाल से दर्द में तात्कालिक लाभ तो मिल जाता है लेकिन इसका शरीर पर विपरीत प्रभाव पड़ता है और मूल कारण उसी तरह से बरकरार रहता है।

रासायनिक बनावट के आधार पर कई तरह की पेनकिलर्स बाजार में उपलब्ध हैं। कुछ पेनकिलर्स नशीली नहीं होतीं, यानी उनको लेने से हम उनके आदी नहीं होते। लेकिन कुछ ऐसी पेनकिलर्स भी हैं, जिनका लगातार सेवन करने से दिमाग व शरीर इन पर निर्भर करने लगते हैं और हम उनके गुलाम बन जाते हैं। दोनों तरह की पेनकिलर्स खतरनाक हो सकती हैं, अगर इनका सेवन डक्टर की सलाह के बगैर किया जाए या डाक्टरी सलाह से कहीं अधिक समय के लिए किया जाए।

पेनकिलर्स के बार-बार सेवन करने से व्यक्ति इनका आदी हो जाता है। नतीजा यह होता है कि एक साधारण दर्द को ठीक करते-करते व्यक्ति इन गोलियों के एडिक्शन की खतरनाक बीमारी के चंगुल में फंस जाता है। कुछ समय तक लगातार पेनकिलर्स लेने के पश्चात अगर इन्हें एकदम बंद कर दिया जाए, तो भी सेहत संबंधी कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं, जैसे सारे शरीर में असहनीय दर्द, घबराहट, बेचैनी, गुस्सा, दस्त, लगातार छींकें आना, नींद न आना, आंखों और नाक से पानी निकलना इत्यादि।

क्या हैं इसके नुक्सान?

लोग तुरंत राहत के लिए घर में रखी पेनकिलर का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन यह तुरंत राहत के साथ अन्य कई बीमारियों को भी तेजी से बढ़ावा दे रही है। पेनकिलर्स का ज्यादा इस्तेमाल दर्द की दवा बनने के बजाय किसी बड़ी बीमारी का कारण बन सकता है। कुछ लोग जरूरत से अधिक मात्रा में दर्द निवारक दवाइयों का सेवन करने लगते हैं। ऐसे में स्थिति सुधरने की जगह और खराब होती जाती है। इसके साइड इफैक्ट इतने ज्यादा हैं कि लगातार इसका इस्तेमाल घातक साबित हो सकता है। हाई ब्लड प्रैशर- ब्लड प्रैशर बढऩे का खतरा रहता है, जो हृदयाघात तथा अन्य समस्याओं का कारण बनता है।

गैसट्राइटिस (पेट में सूजन)- पेन किलर यानी दर्द निवारक दवा पेट के अल्सर की बड़ी वजह बन रही है। पेट के अंदर जख्म बनना, उनसे खून का रिसाव, कयादा एसिड बनना, छाती में जलन जैसी परेशानियां हो जाती हैं। इनके चलते पेट में दर्द, खट्टे डकार, उल्टियां जैसे लक्षण पैदा हो जाते हैं।

जिगर की सूजन- जिगर (लिवर) के सैल्स का खत्म होना, इसके चलते भूख का कम होना, खाना हकाम न कर पाना जैसी परेशानियां।

किडनी प्रॉब्लम्स- पेनकिलर्स किडनी को बहुत नुक्सान पहुंचाती हैं। जिंदगी  में एक हजार से कयादा पेनकिलर्स खाने से किडनी खराब हो सकती है। किडनी के सैल्स को नुक्सान पहुंचता है, जिससे धीरे-धीरे किडनी का फंक्शन कमजोर होता जाता है। इसे एनलजैसिक नैफरोपैथी कहा जाता है।

ब्लड डिस्क्रेसिया- कुछ पेनकिलर्स से खून की रचना में बदलाव आने लगते हैं, जिसे ब्लड डिस्क्रेसिया कहा जाता है। यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।

दमा पर असर- कुछ पेनकिलर्स दमा भी बढ़ा सकती हैं।

मानसिक रोग- मानसिक रोग हो जाते हैं, जैसे मन की उदासी, याददाशत  कमजोर  होना, वहम व शक की बीमारी। कई बार कन्फ्यूकान और भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है।

सिर दर्द और माइग्रेन- दर्दनिवारक गोलियां सिरदर्द और माइग्रेन की समस्या से निजात दिलाने की जगह चीजों को और खराब कर देती हैं।

क्या सावधानी बरतें?
जहां तक संभव हो, बिना डॉक्टर की सलाह के पेनकिलर्स न लें और न ही इनकी ओवरडोका ही लें। डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही किसी दवा का इस्तेमाल करना चाहिए। पेनकिलर्स तब ही लें, जब बेहद कारूरी हो। थोड़ा-सा दर्द होने पर मैडीसन लेने की आदत को छोड़ दें। पेनकिलर्स से बचने के लिए दर्द वाले हिस्से पर ठंडी या गर्म सिकाई की जा सकती है। पेनकिलर के स्प्रे या जैल से भी दर्द में राहत मिल जाती है। सिर दर्द में बाम लगाएं। दर्द अगर गैस की वजह से है, तो गैस का चूर्ण ले लें।
♦ ब्लड प्रैशर, डायबिटीका, किडनी और दिल के मरीजो को डॉक्टर की सलाह के बगैर कभी कोई भी पेनकिलर अपनी मर्जी से नहीं लेनी चाहिए।
♦  पेनकिलर्स खाली पेट बिलकुल न लें। नॉन नारकोटिक्स पेनकिलर्स खाली पेट लेने से किडनी, लिवर और पेट को नुक्सान पहुंच सकती हैं।
♦  पेनकिलर लेने के कारण अगर पेट दर्द होता है, तो सबसे पहले उस पेनकिलर का इस्तेमाल बंद कर दें और डॉक्टर से सलाह लें।
♦  पेनकिलर्स जब भी खानी हो, इसे हमेशा पानी से ही लें।

क्या है डॉक्टर की सलाह?
♦  अगर किसी व्यक्ति को पेनकिलर्स लेने की लत लग जाए, तो उसे मनोचिकित्सक के पास ले जाएं।
♦  मरीका को दवाओं के कोर्स के कारिए नशामुक्त किया जाता है। इस कोर्स को बिना अस्पताल में दाखिल हुए भी लिया जा सकता है।
♦  मरीका को दोबारा नशे का सेवन करने से हटाने के लिए कुछ दवाएं देनी पड़ती हैं और साथ ही काऊंसलिंग के लिए भी जाना पड़ता है।
♦  नशे के सेवन से हुए नुक्सानों को ठीक करने के लिए 4-6 महीने तक दवा लेनी पड़ती है।
♦  इसलिए अगली बार पेनकिलर खाने से पहले सोचें। साथ ही डॉक्टरी सलाह के बगैर भी पेनकिलर न खाएं।

- मीनाक्षी गांधी

http://epaper.punjabkesari.in/magazine/fullstory/30036802_327479

क्या है एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स की सच्चाई?

क्या है एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स की सच्चाई?

विवाह के समय पवित्र अग्नि के फेरे लेते हुए नवदंपति सात जन्मों तक साथ निभाने की शपथ लेते हैं, लेकिन फिर भी कुछ विवाहित महिला एवं पुरुष एक्सट्रा मैरिटल अफेयर्स में रुचि लेने लगते हैं। लेकिन क्या यह स्वतंत्रता के नाम पर स्वच्छंदता या उच्छृंखलता नहीं है...

पहली नजर में तो एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर बहुत रोमांटिक लगते हैं। इसे एक ऐसा रिश्ता माना जाता है जिससे एक उबाऊ वैवाहिक जीवन को नया जीवनदान मिलता है। विवाहित पुरुष या स्त्री की किसी दूसरे से भेंट होती है, सामने वाले की कोई अदा अच्छी लगती है और उसके लिए चाहत पैदा हो जाती है। यही चाहत एक दिन प्यार बन जाती है और फिर गुपचुप अफेयर शुरू हो जाता है। जल्दी ही वे इस निष्कर्ष पर भी पहुंच जाते हैं कि यही व्यक्ति उनका सच्चा प्यार है। इन मामलों में कई बार यह अफेयर गुपचुप तरीके से चलता रहता है तो कई बार वे उसी के साथ रहने का फैसला कर लेते हैं। जब अफेयर उन दो व्यक्तियों के बीच हो, जो पहले से ही विवाहित हों और उसके बावजूद भी एक-दूसरे के प्रेम में गिरफ्तार हो जाएं, तो मामला और भी अधिक जटिल हो जाता है।

क्यों बनते हैं ये रिश्ते?
शादीशुदा होने के बावजूद अगर कोई व्यक्ति एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर में दिलचस्पी लेता है और किसी दूसरे के प्रेम में पड़ जाता है, तो इसके लिए कई कारण जिम्मेदार हैं। आम तौर पर लोग एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर में वह सब कुछ पाने की कोशिश में रहते हैं जिनकी उनकी शादीशुदा जिंदगी में कमी रहती है।

घरेलू समस्याएं : कुछ लोग रोज-रोज की किच-किच और घरेलू परेशानियों की वजह से होने वाले तनाव को बर्दाश्त नहीं कर पाते। वे तनाव को दूर करने और मानसिक शांति पाने के लिए अपने लिए बाहर प्यार की तलाश कर रहे होते हैं।

पार्टनर की आदतें: कुछ लोग अपने साथी को जलाने के लिए या उसकी किसी आदत से तंग आकर बाहर अपने लिए प्यार खोजने लगते हैं। अगर पति या पत्नी में से कोई एक बहुत अधिक शक करता है या बात-बात पर गुस्सा होने लगता है या गुस्से में ङ्क्षहसक हो जाता है तो ऐसे में दोनों के बीच भावनात्मक लगाव खत्म हो जाता है और रिश्तों में दूरियां पनपने लगती हैं। कुछ लोग तो अपने पार्टनर से प्यार करना ही बंद कर चुके होते हैं।

भावनात्मक लगाव : जब एक महिला और पुरुष भावनात्मक स्तर पर करीब आने लगते हैं, तो निकटता बढ़ जाने के कारण रूमानी संबंधों का भी उदय होने लगता है। महिलाओं के बारे में कहा जाता है कि जब उन्हें सामने वाले से भावनात्मक लगाव मिलता है तब वे उस व्यक्ति से आकर्षित होती हैं।

सच्चे प्रेम का अनुभव :
कई बार शादी के बावजूद पति या पत्नी के लिए किसी प्रकार की कोई भावना नहीं होती, अपने पार्टनर से प्यार नहीं होता और वे जबरदस्ती रिश्ता निभा रहे होते हैं। ऐसे में अगर शादी के बाद किसी अन्य व्यक्ति के लिए दिल में प्रेम जाग उठे तो विवाहित संबंध का निर्वाह करना कठिन हो जाता है।

बदलाव की जरूरत :
कुछ लोग रूटीन से जल्दी ही ऊब जाते हैं। उनके लिए एक व्यक्ति के साथ रहना बहुत बोरिंग होता है और उन्हें बदलाव चाहिए होता है। लाइफ में एक्साइटमैंट बनाए रखने, नए अनुभव लेने और रिलेशनशिप को रोमांचक बनाने की यही चाहत उन्हें नया पार्टनर खोजने की जरूरत महसूस करवाती है।

बोरिंग सैक्स लाइफ:
आम तौर पर पति या पत्नी के साथ सैक्स लाइफ एंज्वाय न कर पाने के कारण लोग एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर की ओर आकर्षित होते हैं।  दरअसल लंबा समय साथ बिताने के बाद पति-पत्नी के संबंधों में नीरसता और एकरसता आने लगती है। रोमांस में गर्माहट कम होने पर लोग बोरिंग सैक्स लाइफ से ऊब जाते हैं और बाहर की तरफ रुख करने लगते हैं। अक्सर पुरुष बच्चा पैदा होने के बाद इस तरह का धोखा करते हैं। उन्हें तब सैक्स की चाहत होती है और उनकी पार्टनर इस चाहत को पूरा करने में असफल रहती हैं।

क्या हैं इसके साइड इफैक्ट्स?
विश्वास की कमी: एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स की शुरूआत धोखे से होती है, इसलिए इस रिश्ते में विश्वास पनपना मुश्किल होता है। सच यह है कि धोखा देने वाले पर कोई विश्वास नहीं करता, न वह जो उसे प्यार करता है और न वह जिसे वह प्यार करता है। दोनों में से कोई भी अपने पार्टनर से धोखा करने के अपराध बोध से बाहर नहीं आ पाता है। दूसरा, मन में यह तनाव बना रहता है कि अगर आपका नया साथी आपके लिए अपने पति या पत्नी को छोड़ सकता है तो क्या कल वह किसी और के लिए आपको भी नहीं छोड़ देगा? अंदर ही अंदर अपने टूटे परिवार का अफसोस भी सताता रहता है।
सामाजिक स्वीकार्यता नहीं: कुछ लोग सोचते हैं कि शादी के बाद ऐसे मामलों में सब कुछ ठीक हो जाता है, लेकिन हकीकत में ऐसा हो नहीं पाता। आम तौर पर आस-पड़ोस के लोग, रिश्तेदार और यहां तक कि दोस्त भी इस नए रिश्ते को स्वीकार नहीं कर पाते क्योंकि इस तरह की शादी से कई लोग प्रभावित होते हैं। जिस तरह अपनों का दिल तोड़ कर वे एक-दूसरे को अपनाते हैं, समाज उसे स्वीकार नहीं कर पाता।
बोरियत यहां भी होती है: हकीकत यह है कि हर शादी एक वक्त के बाद रूटीन हो जाती है। शादी के कुछ समय बाद वे दोनों एक-दूसरे को उतना समय नहीं दे पाते जितना अफेयर या शादी के शुरूआती दिनों में दे पाते थे। एक-दूसरे के नखरे उठाना भी बंद कर देते हैं। पहले जिस अदा पर फिदा होकर रिश्ता बनाया था, अब वही असहनीय हो जाती है। हालात बदतर होते चले जाते हैं और उसके बाद शुरू हो जाती है खिटपिट। एक स्थिति ऐसी भी आती है जब दोनों एक-दूसरे की शक्ल तक देखना पसंद नहीं करते।
बच्चों पर बुरा असर: एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर होने पर पूरे परिवार को भावनात्मक आघात से रू-ब-रू होना पड़ता है। सबसे ज्यादा बुरा असर बच्चों पर पड़ता है क्योंकि जब भी किसी कपल का रिश्ता टूटने की कगार पर होता है तो सबसे ज्यादा परेशान बच्चे ही होते हैं। बाल मनोविश्लेषकों का मानना है कि जब बच्चों को उनके माता या पिता के एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के बारे में पता चलता है तो वे शारीरिक व मानसिक दोनों ही रूप में बेचैन हो जाते हैं। उनका मासूम और नासमझ मन यही सोचता है कि कहीं उनके माता-पिता उन्हें अकेला तो नहीं छोड़ देंगे।


स्वीकार करें या अस्वीकार?
अगर विवाह के बाद आप किसी अन्य के प्रति आकर्षित होते हैं तो निश्चित तौर पर आप अपने पार्टनर के साथ विश्वासघात कर रहे हैं। इससे भी बड़ी गलती आप तब करते हैं जब अपने विवाहित रिश्ते को तोड़ कर अपने नए संबंध को विवाह में तबदील करते हैं। बेहतर होगा ऐसा करने से पहले सोचें कि आप किसी के पति या पत्नी हैं, किसी के माता-पिता हैं, उनके प्रति आपकी कुछ जिम्मेदारियां हैं।
आम तौर पर बिना किसी अपराधबोध के तब तक एक्स्ट्रा  मैरिटल रिलेशन बने रहते हैं जब तक सब कुछ सेफ चलता है यानी घरेलू स्तर पर कोई असर नहीं पड़ता। एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर चाहे मन को सुकून देने के लिए हो या सैक्सुअल प्लैज़र के लिए, आखिर में सब अपने ही घर लौटते हैं।
कारण कुछ भी हो लेकिन इस तथ्य से इंकार नहीं किया जा सकता कि आज भी हमारे समाज में एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर को कोई सम्मानजनक स्थान नहीं दिया जाता। कुछ लोग चाहे यह दलील दें कि हर उस शख्स से शादी तो नहीं कर सकते जिस-जिस से आप प्यार करते हैं, लेकिन पति-पत्नी के रिश्तों में मर्यादा बहुत जरूरी है।
                                                                                                                                                           —मीनाक्षी गांधी, जालंधर
http://epaper.punjabkesari.in/magazine/fullstory/30016152_327478

Thursday, May 2, 2013

‘मैं पापा की बेटी हूं’

‘मैं पापा की बेटी हूं’

बच्चों का पेरैंट्स के लिए लगाव होता ही है पर जब यह लगाव एक पेरैंट के साथ ज्यादा हो, तो कई बार दूसरे पेरैंट को दिक्कत हो सकती है। हालांकि इसके लिए कहीं न कहीं वही दोषी होता है। छोटे बच्चों से अक्सर पूछा जाता है कि वह मम्मी का बच्चा है या पापा का तब बेटी कहती है ‘मैं पापा की बेटी हूं’ और कभी-कभार बेटा कहते है ‘मैं मम्मी का बेटा हूं।’ कई बार बच्चे अपने फायदे के लिए एक पेरैंट के साथ ज्यादा अटैचमैंट बना लेते हैं। कई एक पेरैंट का उपेक्षात्मक  रवैया भी इसका कारण हो सकता है।

♦  बच्चे को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए ऐसे तरीके न अपनाएं, जिनसे बच्चे को गलत संदेश जाए। पेरैंट्स को आपस में बातचीत करके तय करना चाहिए कि बच्चे के लिए क्या सही है और क्या गलत, न कि एक-दूसरे को गलत कहना चाहिए।
♦  यदि बच्चे की डिमांड सही हो, तो दोनों पेरैंट्स मिलकर उसे पूरा करें। इससे बच्चे को यह मैसेज जाता है कि वे दोनों ही उसे बहुत प्यार करते हैं।
♦  जब एक पेरैंट बच्चे को किसी बात से रोकता है, तो दूसरे को भी वही करना चाहिए। इससे बच्चा महसूस करता है कि वह जो कर रहा है, वह गलत है।
♦ बच्चे से पढ़ाई, खेल, मनोरंजन, कार्टून की बात करें। हमेशा पढऩे पर ही जोर न दें। केवल पढऩे से ही बच्चे की डिवैल्पमैंट नहीं हो सकती।
♦   बच्चों के सामने फैमिली प्रॉब्लम डिसकस न करें। बच्चे पेरैंट्स को देख कर व्यवहार सीखते हैं। आपकी बातों से वे परिवार के अन्य सदस्यों के बारे में इम्प्रैशन बना लेते हैं।
♦  अपने व्यवहार और घर के माहौल पर जरूर नजऱ डालें। बच्चे के सामने वाद-विवाद से बचें क्योंकि यदि घर कलह का माहौल होगा, तो कई बार बच्चा हमदर्दी के चलते एक पेरैंट के कयादा नकादीक हो जाता है।
♦  पेरैंट्स बच्चों का मनोभाव समझें। कई बार डर के कारण बच्चे किसी एक पेरैंट से सवाल करते घबराते हैं। ऐसे तनावपूर्ण वातावरण में वे अपने प्रिय पेरैंट के पास राहत तलाशते हैं।
♦  बच्चा घर पर कयादा सीखता है। इसलिए घर का माहौल हैल्दी रखें और अपना व्यवहार पॉजीटिव। उसे उपदेश नहीं, सलाह दें।
♦  पेरैंट्स बच्चों के लिए रोल मॉडल बनें। जैसी अपेक्षाएं वे बच्चों से रखते हैं, उन्हें भी वैसा ही व्यवहार आपस में और बच्चों के साथ करना चाहिए।
♦  बच्चों में तुलना न करें, खास कर जिन परिवारों में लड़का और लड़की दोनों हैं, ताकि लड़की के मन में इंफीरियारिटी काम्प्लैक्स न आए।
♦  दोस्तों से मिलने, साथ घूमने पर नकार हो, पाबंदी नहीं।
♦  अक्सर ग्रैंड पेरैंट्स बच्चों को प्रोटैक्ट करते हैं। वे चाहते हैं कि बच्चों की हर जिद पूरी हो, लेकिन यदि पेरैंट्स बच्चे को किसी बात के लिए रोक रहे हैं, तो वे यह जान लें कि वे ऐसा बच्चे के फायदे के लिए ही कर रहे हैं।

बच्चों के साथ प्यार भरा व्यवहार करें। उनके मन में यह कभी न आए कि माता या पिता में से कोई एक उनसे प्यार नहीं करता। यदि फिर भी बच्चा अपनी अटैचमैंट किसी एक के साथ दिखाए, तो भी घबराने की कारूरत नहीं है। बच्चे जब बड़े हो जाते हैं, तब उनका व्यवहार दोनों के साथ बराबर हो जाता है।
- मीनाक्षी गांधी
 http://epaper.punjabkesari.in/magazine/fullstory/133168484_327484

प्रैग्नैंसी में भी खूबसूरती रहे बरकरार

 प्रैग्नैंसी में भी खूबसूरती रहे बरकरार

एक महिला के जीवन में प्रेग्नेंसी से खूबसूरत अहसास और कोई नहीं होता। यह आपकी जिंदगी का सबसे खूबसूरत  दौर है। इसलिए आप इसे इंजॉय जरूर करें और इसलिए हमेशा खुश रहने की कोशिश भी करें और साथ ही अपनी खूबसूरती की भी हिफाजत करें...

प्रैग्नैंसी  के नौ महीने एक ऐसा मुश्किल दौर होता है जब हर महिला के मन में यह दुविधा बनी रहती है कि वह इस दौरान ब्यूटी ट्रीटमैंट लें या नहीं। उन्हें हरदम यही डर सताता रहता है कि कहीं अपनी खूबसूरती बनाए रखने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सौंदर्य प्रसाधनों से उनके होने वाले शिशु को कोई नुक्सान तो नहीं पहुंचेगा।  प्रैग्नैंसी और ब्यूटी से जुड़े कई मिथक हैं, जिन्हें दूर करना बहुत जरूरी है।

फेशियल
कुछ महिलाओं का मानना है कि प्रैग्नैंसी  में स्किन बेहद सैंसिटिव हो जाती है, इसलिए इस दौरान फेशियल नहीं करवाना चाहिए लेकिन प्रैग्नैंसी के दौरान भी चेहरे के रंग-रूप को निखारने के लिए फेशियल कराने में कोई नुक्सान नहीं है। महीने में एक बार फेशियल करवाएं। इससे स्किन क्लीन दिखेगी और ग्लो करेगी लेकिन अगर आप चाहती हैं कि आपकी स्किन को सभी न्यूट्रिशंस मिलें, तो बेहतर होगा कि फेशियल में इस्तेमाल होने वाली क्रीम अच्छी कंपनी की होनी चाहिए। आपके नॉर्मल प्रोडक्ट्स जरूरी नहीं कि प्रैग्नैंसी के दौरान भी आपको सूट करें। इसलिए प्रैग्नैंसी में अपनी स्किन को सूट करने वाले प्रोडक्ट्स फाइंड करें।

हेयर कलर

आपने कई बुजुर्गों को कहते सुना होगा कि अगर प्रैग्नैंट हैं, तो हेयर कलर इस्तेमाल न करें। अगर आप बालों को कलर करवाती हैं, तो प्रैग्नैंसी  में भी आप हेयर कलर इस्तेमाल कर सकती हैं और इसका असर बच्चे की ग्रोथ पर नहीं पड़ता लेकिन प्रैग्नैंसी  में हेयर कलर कराने में विशेष सावधानी बरतें। यदि आपको इससे एलर्जी की शिकायत हो तो इस दौरान हेयर कलर न कराएं। वैसे बेहतर तो यही रहेगा यदि आप इस दौरान कैमिकल रहित हेयर कलर का इस्तेमाल करें। हेयर कलर इस्तेमाल करने से पहले अपने फिजिशियन की राय जरूर ले लें। दरअसल, वह आपको सही हेयर कलर के बारे में गाइड कर देंगी।

अरोमा थैरेपी
मिथक है कि प्रैग्नैंसी में मसाज करवाने से दर्द बढ़ सकता है लेकिन यह सही नहीं है। मसाज से थकान और बॉडी पेन दोनों से राहत मिलती है।  प्रैग्नैंसी  के दौरान स्किन पर काफी प्रैशर होता है खासकर पेट और उसके आसपास का हिस्सा। किसी जैल या सॉफ्ट क्रीम से नाभि के आसपास मसाज करें। इससे स्किन से प्रैशर रिलीज होगा और स्ट्रैच माक्र्स से भी बचाव होगा। प्रैग्नैंसी  के दौरान अरोमा थैरेपी लेने से कोई नुक्सान नहीं है। प्रैग्नैंसी  के दौरान भी मसाज करवाई जा सकती है। आप केरला आयुर्वेदिक मसाज भी करवा सकती हैं, लेकिन मसाज करवाते समय इस बात का विशेष ख्याल रखें कि मसाज हेतु ताकत व दबाव का बहुत कम इस्तेमाल किया जाए अर्थात हल्के हाथों से मसाज की जाए। आप स्पा में जाकर अपनी पसंद का बॉडी रैप भी ले सकती हैं। इससे आप रिलैक्स हो जाएंगी। गर्मियों के लिए चॉकलेट या जिंजर रैप अच्छे माने जाते हैं।

मैनीक्योर-पैडीक्योर
प्रैग्नैंसी  में अमूमन पैरों में दर्द और सूजन हो जाती  है। इसलिए जब भी ज्यादा  थकान महसूस करें तब आप मैनीक्योर और पैडीक्योर करवा सकती हैं। इससे थकान और दर्द से राहत मिलेगी। आप चाहें तो स्पा मैनीक्योर-पैडीक्योर भी करवा सकती हैं। इसमें आम मैनीक्योर-पैडीक्योर की तरह फाइलिंग, स्क्रबिंग और डैड क्यूटिकल्स को हटाने के अलावा पैरों और हाथों के लिए मास्क स्क्रब और स्प्रे भी दिया जाता है।
 
स्ट्रैच मार्क्स से बचाव

प्रैग्नैंसी के बाद कमर और पेट पर स्ट्रैच मार्क्स पड़ जाते हैं। स्ट्रैच मार्क्स का कारण है उन टिश्यू का फट जाना जो त्वचा को  खिंचने में मदद करते हैं। कई बार हार्मोनल इंबैलेंस की वजह से भी स्ट्रैच मार्क्स होने लगते हैं। कई महिलाओं को वातावरण में आए बदलावों के चलते रिएक्शन के रूप में स्ट्रैच मार्क्स होते हैं। जिन महिलाओं की त्वचा रूखी व बेजान होती है, उन्हें स्ट्रैच मार्क्स होने के चांसेज ज्यादा होते हैं। इसलिए ऐसी डाइट का सेवन करें जिसमें विटामिन ई और विटामिन सी भरपूर मात्रा में हों क्योंकि ये कोशिका निर्माण की प्रक्रिया को तेज करते हैं। स्ट्रैच मार्क्स वाले हिस्से में हर रोज विटामिन ई युक्त तेल से अच्छी तरह मसाज करें। अगर इन सब उपायों और इलाज के बावजूद भी आपके स्ट्रैच मार्क्स ठीक नहीं हो रहे हों तो आप लेजर ट्रीटमैंट करवा सकती हैं, मगर इससे पहले डॉक्टर्र से कंसल्ट जरूर करें।

अपनाएं ये टिप्स
♦ प्रैग्नैंसी में स्किन सैल्स में बदलाव की वजह से जरूरी है कि स्किन को नॉर्मल से ज्यादा नरिश और मॉइश्चराइज करें। इससे स्किन को हैल्दी रखा जा सकता है। रैगुलर स्किन केयर रूटीन को फॉलो करें। रोजाना सुबह चेहरा धोने के बाद हल्का-सा मॉइश्चराजर लगाएं, फिर मेकअप करें। रात को सोने से पहले मेकअप साफ करना कभी न भूलें। जब भी चेहरा धोएं तो अच्छे मॉइश्चराइजिंग बॉडी लोशन का इस्तेमाल करें। इससे ड्राई इफैक्ट से बचाव होगा।
♦ स्किन के नैचुरल ऑयल को प्रोटैक्ट करने के लिए परफ्यूम्ड सोप का इस्तेमाल अवॉइड करें। साबुन स्किन से नैचुरल ऑयल चुरा लेता है। इसकी बजाय क्लींजर यूज करें, जो डीप क्लीजिंग करें। यह जरूरी ऑयल्स को मेंटेन रखता है, जिससे आपकी स्किन ग्लोइंग बनी रहती है।
♦  प्रैग्नैंसी के वक्त कई महिलाओं की स्किन काफी ऑयली हो जाती है। इसके लिए हाई क्वालिटी का फेशियल क्लींजर का इस्तेमाल करें।
♦  फेस की स्किन बहुत डैलीकेट होती है इसलिए इसे रगड़ कर कभी साफ न करें। रब करने से हाइपर-पिग्मैंटेशन हो सकता है। पोंछते समय भी हल्के हाथ से पोंछें।
♦  प्रैग्नैंसी के दौरान स्किन पिग्मैंटेशन में बदलाव हो जाता है जिसकी वजह से सनबर्न और टैनिंग आसानी से हो जाता है। यूवी (अल्ट्रा वॉयलैट) फिल्टर वाले प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करें। अपने चेहरे, बांहों, हाथों और पैरों का खास ख्याल रखें।
♦  पानी के कॉन्टैक्ट में ज्यादा समय तक न रहें। पानी स्किन को डिहाइड्रेट कर देता है, जिससे स्किन डल लगने लगती है। इसलिए नहाने में ज्यादा वक्त न लगाएं।
♦  प्रैग्नैंसी के दौरान कई बार ज्यादा लंबे बालों की केयर करनी मुश्किल हो जाती है। लंबे बालों के खराब होने का चांस ज्यादा होता है, जैसे बालों का सफेद होना, झडऩा या फिर उनका दोमुंहा होना। इसलिए बालों की सही ग्रोथ के लिए इनकी ट्रिमिंग कराती रहें।
♦  अच्छा खान-पान भी आपकी लुक्स को प्रभावित करता है। चूंकि प्रैग्नैंसी  के शुरूआती दौर में नॉजिया की समस्या ज्यादा होती है। इसलिए जो पसंद हो वही खाएं। हर दो घंटे के अंतराल पर थोड़ा-थोड़ा खाएं। बाहर की चीजें खाने से बचें। प्रैग्नैंसी  के दूसरे चरण में अपने खान-पान में प्रोटीन युक्त चीजों जैसे दाल, पनीर, अंडा और हरी सब्जियों की मात्रा बढ़ा दें।
♦  डॉक्टर द्वारा बताई गई सभी दवाएं एक निश्चित स्थान पर रखें। सिर दर्द और जुकाम जैसी समस्याओं के लिए खुद ही कोई दवा न लें। कोई भी दवा लेने से पहले डॉक्टर से कंसल्ट जरूर करें।
♦  अगर आप जॉब करती हैं तो लगातार एक ही मुद्रा में न बैठें। दो-तीन घंटे के अंतराल पर अपनी सीट से उठ कर थोड़ी देर के लिए टहलें।
♦  हैल्थ और चाइल्ड केयर से जुड़ी अच्छी किताबें पढ़ें। मनपसंद म्यूजिक सुनें। इससे मन प्रसन्न रहता है और यही खुशी के भाव चेहरे पर झलकते हैं।

ये हैं फायदे
► प्रैग्नैंसी के दौरान स्त्री का एक्टिव  रहना न केवल मां और बच्चे दोनों की सेहत के लिए अच्छा होता है, बल्कि इससे डिलीवरी में भी आसानी होती है। 
► प्रैग्नैंसी  के दौरान अगर आप खुश और एक्टिव रहेंगी तो नॉजिया, थकान और पैरों के दर्द जैसी समस्याओं की ओर आपका ध्यान नहीं जाएगा। इससे आपको तनावमुक्त रहने में मदद मिलेगी।
- मीनाक्षी गांधी
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Monday, April 1, 2013

डिजाइनर ज्यूल्ड मेहंदी के रंग...

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डिजाइनर ज्यूल्ड मेहंदी के रंग...

सदियों से सजने-संवरने के लिए लड़कियां मेहंदी का इस्तेमाल करती आ रही हैं। हालांकि समय के साथ मेहंदी फैशन की वस्तु बन गई और इसमें कई नए ट्रैंडस आ गए, जिस कारण इसकी डिमांड भी बढ़ गई है। इन दिनों हाथ के अलावा, गर्दन, पीठ और पेट पर भी मेहंदी लगाई जाने लगी है। लेटैस्ट ट्रैंड के रूप में उभरती ज्यूल्ड मेहंदी की तो बात ही कुछ और है...

हिंदू परंपरा में मेहंदी को धन, धान्य और सौभाग्य की देवी मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। गहरी लाली रची मेहंदी और चूडिय़ों से भरे हाथों की शोभा ही निराली होती है। मेहंदी सिर्फ शृंगार ही नहीं, जीवन में प्यार व खुशियों का उपहार मानी जाती है। लड़कियां मेहंदी लगवाने के लिए काफी क्रेजी रहती हैं। बाजार में कहीं भी मेहंदी वाला दिख जाए, इनका मन हाथों पर सुंदर डिजाइन बनवाने को लालायित हो जाता है। मेहंदी के पारंपरिक डिजाइनों का आकर्षण तो सदाबहार है परंतु बदलते वक्त के साथ इसमें कुछ नए स्टाइल्स का भी समावेश हुआ है, जो आपके हाथों की खूबसूरती निखारने के साथ आपको एक अलग ही लुक देते हैं। मेहंदी में तरह-तरह के एक्सपैरीमैंट्स हो रहे हैं।

ऐसे बनाएं मेहंदी का पेस्ट

बढिय़ा क्वालिटी के मेहंदी पाऊडर को मलमल के बारीक कपड़े से दो-तीन बार छानें। मेहंदी में कुछ बूंदें नींबू का रस, आठ-दस बूंदें नीलगिरी का तेल और जरूरत के हिसाब से पानी मिला कर गाढ़ा पेस्ट बना लें। मेहंदी गहरी रचाने के लिए कुछ बूंदें मेहंदी का तेल व चुटकी भर कत्था भी मिला सकती हैं। परफैक्ट टैक्सचर पाने के लिए कटी हुई ङ्क्षभडी का पानी लें। उस पानी में मेहंदी को तकरीबन दो घंटे के लिए भिगो दें। इसे लगाएं। फिर देखिए मेहंदी कैसे खिलकर आती है। इमली और चाय की पत्ती को पानी में उबाल लें और बाद में इसी पानी में मेहंदी पाऊडर को मिलाने से मेहंदी का रंग बहुत गहरा आता है।

 
अरेबियन मेहंदी
अरेबियन स्टाइल में मोटे-मोटे फूल-पत्तियों वाले डिजाइन खूब चलन में हैं। अरेबियन मेहंदी में ब्लैक कैमिकल से आऊटलाइन की जाती है और फिर बीच में हरी मेहंदी से शेडिंग कर दी जाती है या उसे पूरा भर दिया जाता है। इससे डिजाइन उभर कर तो आता ही है मेहंदी भी खूब अच्छी तरह रचती है। काले और सुर्ख लाल रंग लिए इस मेहंदी पर भी आप अपनी ड्रैस के रंग व डिजाइन से मैच करते रंग-बिरंगे स्टोंस और कुंदन लगवा सकते हैं। इन दिनों अरेबियन मेहंदी को अलग रंग से आऊटलाइन करके अलग स्टाइल भी दिया जा रहा है। इसके अलावा अरेबियन विदाऊट लाइन भी ट्रैंड में है।
जरदोजी मेहंदी
जरदोजी मेहंदी आपके हाथों की खूबसूरती निखारने के साथ आपको एक अलग ही लुक देगी। किसी विशेष पार्टी, फैस्टिवल या शादी के मौके पर लड़कियां हाथों और पैरों के अलावा पीठ, बाजू और यहां तक कि नाभि पर जरदोजी मेहंदी का डिजाइन बनवाती हैं। जरदोजी मेहंदी सिल्वर या गोल्डन शेड लिए होती है। मेहंदी रचे हाथों में सिल्वर या गोल्डन ग्लिटर से डिजाइन बनाया जाता है। इससे मेहंदी की सुंदरता और भी कई गुणा बढ़ जाती है और उसमें चमक भी आ जाती है। इसके बाद ब्लैक और रैड कलर लिए इस मेहंदी पर आप रंग-बिरंगे स्टोन या कुंदन भी लगवा सकती हैं। आप मोर, फूल-पत्तियां, ट्राइबल, कराची या अफगानी डिजाइन भी बनवा सकती हैं। जितनी बढिय़ा आर्टिस्ट की कल्पना होगी, उतना ही सुंदर आपके हाथ पर मेहंदी का डिजाइन उभरेगा। 
टैटू मेहंदी
परमानैंट टैटू धीरे-धीरे फैशन से आऊट होने लगे हैं और युवा यूज एंड थ्रो टैटूज पसंद करने लगे हैं। आजकल लड़कियों में ड्रैस के अनुसार मेहंदी टैटू का क्रेज बहुत ज्यादा है। लड़कियों में बाजुओं, पेट और पीठ पर स्माल फिगर्स जैसे कलरफुल बटरफ्लाई, एंजिल फेस, डंक मारते बिच्छु, ड्रैगन आदि टैटू बनवाने का चलन काफी है। ये टैटू सोबर और स्मार्ट लुक तो देते ही हैं, साथ ही आपको स्टाइलिश लोगों की कैटेगरी में भी ला देते हैं। लड़कियां ज्यूल्ड मेहंदी को टैटू की तरह लगवाना पसंद कर रही हैं और इसमें ड्रैस के अनुसार रेड, मैरून, ग्रीन, ब्लू जैसे ब्राइट कलर अपना जादू चला रहे हैं।
मारवाड़ी मेहंदी
दुनियाभर में राजस्थानी मारवाड़ी मेहंदी को बेहद पसंद किया जाता है। इसमें मेहंदी के डिजाइन को बहुत खूबसूरती से उकेरा जाता है। ये डिजाइंस बहुत महीन और घने होते हैं। यही वजह है ब्राइड्स में यह मेहंदी बेहद पसंद की जाती है। परंपरागत मेहंदी पसंद करने वालों को मारवाड़ी मेहंदी के डिजाइन बहुत पसंद आते हैं। राजस्थानी मेहंदी की खासियत यह है कि दोनों हाथों की मेहंदी हू-ब-हू एक जैसी होती है। यही कारण है कि इसे लगाना आसान नहीं होता। इसके विभिन्न प्रकार की डिजाइंस में शहनाई, ढोलक, बैंडबाजे, मोर आदि मंगल-सूचक पक्षी, आसमान में घिरे बादलों जैसी कलाकृतियां शामिल हैं, जो राजस्थान की संस्कृति, सभ्यता और खूबसूरती को दर्शाती हैं। इनमें मेहंदी में बाजुओं पर कड़े के स्टाइल में डिजाइन बनाया जाता है।
कलरफुल फैंटेसी मेहंदी 
कलरफुल मेहंदी के लोकप्रिय होने का एक प्रमुख कारण है इसका आम मेहंदी के मुकाबले ज्यादा स्टाइलिश व कलरफुल होना। अगर आप अपने हाथों पर एक ही मेहंदी का डिजाइन बनवा-बनवा कर बोर हो गई हैं, तो कलरफुल मेहंदी को आजमा सकती हैं। आज कल मैचिंग का जमाना है। ज्यूलरी, फुटवियर, एक्सैसरीज सब ड्रैस से मैच करके खरीदे जाते हैं, ऐसे में मेहंदी कैसे पीछे रह सकती है। अब तो मेहंदी भी ड्रैस की मैचिंग के हिसाब से ही लगाई जाने लगी है। आप भी अपनी ड्रैस और ज्यूलरी के अनुसार अपने हाथों पर मैच करते कलर्स से मेहंदी का डिजाइन बनवा सकती हैं। यह मेहंदी देखने में काफी खूबसूरत लगती है। आजकल मार्कीट में कलरफुल मेहंदी के कोन्स भी मिलने लगे हैं। इसमें डिजाइन के ऊपर शेडिंग का चलन भी जोरों पर है।
ज्यूल्ड मेहंदी
मेहंदी का एक नया रूप है ज्यूल्ड मेहंदी। इसमें मेहंदी के साथ क्रिस्टल, कुंदन, स्वरोस्की, नग, स्पार्कल डस्ट, कलर्स, सितारे, मोतियों और फर आदि ज्यूलरी का इस्तेमाल किया जाता है। ज्यूल्ड मेहंदी के डिजाइन ऐसे लगते हैं जैसे वाकई आपने ज्यूलरी पहनी हुई हो। लड़कियां हैवी ज्यूलरी की जगह ज्यूल्ड मेहंदी के नैकलेस और बाजूबंद पसंद करने लगी हैं। आप हाथों पर खूबसूरत चूडिय़ां व कड़े डिजाइन करवा सकती हैं। इन दिनों ज्यूल्ड मेहंदी में हाथ फूल, करघनी, ब्रेसलैट व पाजेब डिजाइन करवाना भी ट्रैंड में है।


रंग निखरेगा मेहंदी का
  • आपके हाथों में मेहंदी कितने बेहतर तरीके से रचेगी यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि आपके शरीर का सामान्य तापमान कितना है। जिन लड़कियों का सामान्य तापमान ज्यादा होता है, उनकी मेहंदी ज्यादा रचती है।
  • मेहंदी लगाने से पहले हाथों को अच्छी तरह धो लें और हथेलियों में मेहंदी के तेल की कुछ बूंदें लगा लें।
  • मेहंदी लगाते समय कोन को हल्के हाथों से दबाएं न कि जोर से। मेहंदी का प्रयोग नाखूनों पर नहीं करें।
  • मेहंदी लगानी न आती हो तो पहले पैंसिल से हाथ पर डिजाइन बना लें।
  • कटोरी में नींबू के रस में चीनी मिलाकर रखें। जब मेहंदी सूखने लगे, तो रूई के फाहे से यह मिश्रण मेहंदी पर लगाएं। इससे मेहंदी ज्यादा देर तक टिकेगी और मेहंदी का रंग त्वचा में और बेहतर तरीके से जाएगा।
  • मेहंदी को 3-4 घंटे तक हाथों पर लगी रहने दें।
  • मेहंदी उतारने के लिए क्रैडिट कार्ड या बिना धार वाले चाकू का इस्तेमाल कर सकती हैं।
  • मेहंदी उखाडऩे के बाद हाथों में सरसों का तेल लगा लें और कोशिश करें कि 12 से 13 घंटे तक मेहंदी वाले स्थान पर पानी न लगे।
  • मेहंदी लगाने के बाद उस पर पॉलिथीन न लपेटें। ऐसा करने से हाथ या पैर से ज्यादा पसीना निकलने लगेगा और मेहंदी का डिजाइन बिगड़ जाएगा।
  • कई लोग काली मेहंदी का भी इस्तेमाल हाथों पर कर लेते हैं, पर ऐसा करना आपकी त्वचा के लिए नुक्सानदेह साबित हो सकता है। काली मेहंदी में पी.पी.डी. नामक कैमिकल होता है, जिसकी वजह से त्वचा में खुजली आदि हो सकती है।   

खूबसूरती की दुश्मन ‘गलतियां’

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खूबसूरती की दुश्मन ‘गलतियां’

सुंदर दिखना सबका हक है, पर खूबसूरती को बढ़ाने और खुद को स्टाइलिश लुक देने के चक्कर में कई बार हम कुछ ऐसी गलतियां कर जाते हैं जो खूबसूरत चेहरे पर बदनुमा धब्बा बन कर सुंदरता को हर लेती हैं। सही जानकारी के अभाव में गलतियां किसी से भी हो सकती हैं। आपसे ऐसी कोई गलती न हो, इसलिए हम आपको स्मार्ट तराके बता रहे हैं खूबसूरती को कायम रखने के...

टैटूज : टैटू पर्सनल स्टेटमेंट बन चुके हैं। यही वजह है कि यंगस्टर्स के बीच टैटू गुदवाने का क्रेज बढ़ गया है। टैटूज को यदि सही सामग्री तथा हाईजीन से न गुदवाया जाए तो इससे गंभीर संक्रमण तथा एलॢजक रिएक्शन हो सकता है। इसका कारण यह है कि टैटू बनाने के लिए उपयोग में लाए जाने वाले ज्यादातर रसायन औद्योगिक रसायन होते हैं जिनका उपयोग वाहनों के पेंट या फिर स्याही बनाने में होता है। इन रासायनों का उपयोग शरीर के किसी भी हिस्से में करना कतई सुरक्षित नहीं है। समुद्र तटों पर किए जाने वाले अस्थायी हिना टैटूज में पैरा-फिनाइलेने डायामाइन (पी.पी.डी.) हो सकती है। यह एक प्रकार की स्थायी डाई है जो आसानी से एलॢजक रिएक्शन कर सकती है और इससे सूजन पैदा हो सकती है। शोध रिपोर्ट में कहा गया है कि जो लोग बिना हाईजीन का ध्यान रखे टैटू गुदवा रहे हैं उन्हें हैपेटाइटिस, एचआईवी, त्वचा के संक्रमण और यहां तक कि त्वचा के कैंसर का खतरा भी हो सकता है। इसलिए इस बात को यकीनी बनाएं कि टैटू किसी मान्यता प्राप्त कलाकार से ही गुदवाएं।

बॉडी पियरसिंग : युवाओं का नया फैशन स्टेटमेंट हैं बॉडी पियरसिंग। पियरसिंग से युवतियां खुद को थोड़ा सैक्सी लुक देना चाहती हैं। वहीं युवा अपने आप को रॉक-स्टार जैसा महसूस करते हैं। अब युवा न सिर्फ कान, नाक बल्कि होंठ ,जीभ और यहां तक नाभि पर भी छेद करवाकर बालियां या छोटी सी कील डालने लगे हैं। आइब्रो पर छेद करवाना तो आम बात हो गई है। पियरसिंग यदि हाईजीनिक तरीके से नहीं हुई तो तो इससे लोकल इंफैक्शन तथा कैलोइड्स इत्यादि हो सकते हैं। ऐसे संक्रमणों से बचने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि पियरसिंग के बाद साफ-सफाई का हमेशा पूरा ध्यान रखा जाए। किसी अच्छे प्रोफैशनल से ही बॉडी पियरसिंग कराएं। सुरक्षित और बिना इस्तेमाल की हुई सुई का प्रयोग करने के लिए कहें। अगर आप अपनी जीभ पर छेद करवा रहे हैं तो उस दिन सिर्फ तरल पदार्थ का ही सेवन करें। यह भी सलाह दी जाती है कि किसी भी अंग की पियरसिंग कराने के 2 से 3 हफ्ते के बाद तक कच्चे फल और सब्जियां न खाएं। शरीर के पियर्स किए गए हिस्सों में कृत्रिम ज्यूलरी पहनना भी सही नहीं है। जख्म होने की स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। इसमें लापरवाही न बरतें।

हैवी मेकअप : सुंदर या प्रेजेंटेबल दिखना किसी के भी व्यक्तित्व का प्लस पॉइंट हो सकता है, बशर्ते उसने मेकअप को सही तरीके से अप्लाई किया हो। खूबसूरती निखारने के लिए यह जरूरी नहीं कि बहुत सारे मेकअप प्रोडक्ड्स को यूज किया जाए। आप चाहें तो कम मेकअप से भी अपनी खूबसूरती में दुगुना निखार ला सकती हैं। हमेशा नैचुरल लुक को ही तवज्जो दें यानी ब्राइट मेकअप की जगह लाइट मेकअप को अपनाएं। दिन के समय आप एकदम हल्का मेकअप रखें और केवल आंख, होंठ आदि फीचर्स को हाईलाइट करने पर ध्यान दें। मेकअप के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले समान में लेड यानी सीसा की मात्रा होती है जो सीधा आपके मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा सकती है। कई महिलाएं अक्सर चेहरे पर से डार्क स्पाट्स  पिगमैंटेशन को छुपाने के लिए ढेर सारा मेकअप थोप लेती हैं। हैवी मेकअप त्वचा के रोम छिद्रों को बाधित कर देता है जिस कारण मुहांसे पैदा होते हैं। इसके साथ ही इससे त्वचा समय से पहले ही झुर्रीदार हो जाती है। रात को सोते समय चेहरे के रोम छिद्रों को खुला छोड़ देना चाहिए, ताकि वे भी खुलकर सांस ले सकें। रातभर चेहरे पर मेकअप लगा रहने से भी त्वचा को भारी नुकसान पहुंच सकता है। रात को सोने से पहले त्वचा को सही ढंग से साफ करना बहुत जरूरी है, इससे चेहरे का मेकअप तो हटता ही है साथ ही धूल, प्रदूषण, चिपचिपापन आदि भी दूर होता है।

एक्सपायर्ड सौंदर्य उत्पाद : महिलाएं अक्सर महंगे सौंदर्य उत्पादों को खरीद तो लेती हैं लेकिन फिर उन्हें कीमती खजाने की तरह संभाल कर रखने की इच्छुक रहती हैं। इस तरह कई बार मेकअप के कई सामान बिना इस्तेमाल के ही खराब हो जाते हैं। इन उत्पादों में कुछ ऐसी सामग्री तथा प्रिजर्वेटिव मौजूद होते हैं जो एक्सपायरी डेट के बाद आपकी त्वचा तथा सेहत के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। एक्सपायर होने पर मेकअप के सामान में हानिकारक पदार्थ और बैक्टीरिया उत्पन्न हो जाते हैं, जिससे पिग्मेंटेशन और रैशेज होने की आशंका बढ़ जाती है।  कट या चोट लगी जगह पर एक्सपायर्ड सौंदर्य उत्पादों का इस्तेमाल आपकी त्वचा के लिए हानिकारक हो जाता है। अगर आप एक्सपायर्ड आईलाइनर का इस्तेमाल करती हैं तो इससे आपकी आंखों में संक्रमण हो सकता है। एक्सपायर्ड कॉम्पैक्ट पाऊडर के प्रयोग से चेहरे पर दाग-धब्बे पड़ जाते हैं। इसके अलावा चेहरे पर दाने निकलना, त्वचा का लाल हो जाना और एलर्जी की समस्या भी हो सकती है। तथ्य यह है कि आपको हमेशा सौंदर्य उत्पादों की शैल्फ लाइफ के बारे में जानकारी होना आवश्यक है।

कलर्ड लैंसिंज : यूथ के बीच स्टाइलिश लुक के लिए कलरफुल लैंसिज का चलन आजकल खूब देखा जा रहा है। खासतौर पर गल्र्स तो इसकी दीवानी हैं। लेकिन अपनी स्टाइलिश आंखों से दूसरों को दीवाना बनाने के चक्कर में अक्सर वे अपनी आइ सेफ्टी का ध्यान रखना भूल जाती हैं। फैशन के साथ आंखों की सेफ्टी का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है, क्योंकि आंखें आपकी बॉडी के सबसे इम्पोर्टेंट पाट्र्स में से एक हैं। लैंस पहनने से पहले यह महत्वपूर्ण है कि उन्हें स्टरलाइज कर लिया जाए क्योंकि  कम गुणवत्ता वाले कांटैक्ट लैंसिंज आंखों को प्रभावित कर सकते हैं। इसके साथ ही इस बात को भी यकीनी बनाएं कि लैंस का  आकार या डायामीटर कोॢनया को कवर करता हो। आपको किसी भी तरह का आई इंफेक्शन हो, कंजंक्टिवाइटिस, आई रेडनेस, अल्सर, ड्राईनेस, वॉटरी आईज या फिर हाल ही में कोई आई सर्जरी हुई हो, तो लैंस हरगिज न पहनें। बेहतर होगा कि आप लगातार छह घंटे से ज्यादा कलर्ड लैंंस न पहनें। अगर इससे ज्यादा पहनने की जरूरत हो, तो इन्हें निकालकर क्लीन कर लें। फिर उन्हें 20 मिनट तक रिहाइड्रेट करें। इसके बाद वापस इन्हें छह घंटे के लिए पहना जा सकता है। जिन लोगों को किसी तरह की आई एलर्जी है, वे किसी भी कंडीशन में छह घंटे से ज्यादा लैंस न पहनें। अगर आप डस्टी या स्मोकी एरिया में जा रहे हैं, तो आपको और भी ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। अगर आप डायबिटीक हैं, तो भी केयरफुल रहें। अगर आपकी आंखों में वाइट स्पॉट अपीयर होता है, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। यह विजन के लिए खतरनाक हो सकता है। लैंस पहनकर कभी न सोएं। किसी के साथ लैंस शेयर न करें। इससे माइक्रो ऑर्गनिज्म इंफैक्शन हो सकता है।

मेकअप शेयरिंग : महिलाएं अक्सर अपने मेकअप प्रोडक्ट्स अपनी सहेलियों के साथ शेयर कर लेती हैं। माना कि दोस्ती के नाते शेयरिंग की आदत बहुत अच्छी है लेकिन कभी-कभार यही अच्छी आदत आपकी सेहत के साथ खिलवाड़ भी कर सकती है। अगर आप अपना आई लाइनर, मस्कारा, फेस क्रीम या लिपस्टिक शेयर करती हैं तो सामने वाले की स्किन के बैक्टीरिया व जम्र्स आपके प्रोडक्ट के जरिए आप तक पहुंच कर आपको भी संक्रमित कर सकते हैं। लिपस्टिक, आई मेकअप इत्यादि की शेयरिंग से हर्पीज वायरस फैलने का खतरा अधिक होता है। लिपस्टिक शेयर करने का मतलब है किसी दूसरे की बीमारी को अपने पास बुलाना। किसी दूसरे की कंघी का इस्तेमाल न करें। इससे डैंड्रफ और बाल गिरने जैसी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। आई लाइनर, काजल, मस्कारा इत्यादि शेयर करने से आंखों में कई तरह की इंफैक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है, जैसे-आंखों से पानी आना, लाल होना। सबसे ज्यादा जोखिम कंजक्टिवाइटिस का होता है। कीटाणुओं से भरे हाथों से कॉस्मैटिक का इस्तेमाल करने से संक्रामक रोगों के फैलने की संभावना बहुत बढ़ जाती है। मेकअप करने से पहले साबुन-पानी या हैंड सैनीटाइजर से अपने हाथ जरूर धो लें।