Tuesday, August 18, 2015

बोल्ड लुक वाले स्टाइलिश ब्राइडल सैंडल्स

हाई हील से ग्लैमरस लुक

जब किसी लड़की की सगाई होती है, तब शादी की तैयारियों का सबसे पहला पहला और एक्साइटिंग काम होता है वैडिंग ड्रैस का चुनाव। कई बार देखा गया है कि ब्राइडल सैंडल्स की अनदेखी कर दी जाती है। वैडिंग सैंडल्स की सिलेक्शन के लिए अलग से टाइम निकालें। इसे लास्ट मिनट शॉपिंग के लिए न छोड़ दें। याद रखें जूते कितने भी खूबसूरत और बढ़िया क्यों न हों अगर उनकी फिटिंग सही नहीं है और उन्हें पहनने में परेशानी होती है, तो वो सिर्फ पैसों की बर्बादी ही है।

आप भीतर से जैसा महसूस करती हैं, वही भाव आपके चेहरे पर झलकता है। अगर आपकी सैंडल की फिटिंग ठीक नहीं है या यह आपके पैरों को काट रही है, तो कितनी भी कोशिश कर लें, आपकी स्माइल में सब झलक जाएगा। स्टाइलिश दिखने की चाह में कई बार ब्राइड्स ऐसे ब्राइडल सैंडल्स का चुनाव कर बैठती हैं जो उनकी फैशन स्टेटमेंट को खत्म कर देते हैं और उन्हें परेशानी अलग से झेलनी पड़ती है। अगर आप अपने ब्राइडल सैंडल्स में कंफर्टेबल फील करेंगी तो आप बेहद आकर्षक दिखेंगी। आपका स्पैशल डे खूबसूरत यादों से भरा रहे इसलिए अपनाएं ये टिप्सः

1. हाई हील आपको ग्लैमरस लुक देती है और वैडिंग ड्रैस के साथ परफैक्ट दिखती है।लेकिन स्टाइल के लिए कंफर्ट का त्याग न करें। हील उतनी ही हो जितनी आपको पहनने की आदत हो।
2. जूतों का साइज़ गलत होने से पहनने से दिक्कत होती है। इसलिए बढ़िया फिटिंग के लिए सैंडल्स की शॉपिंग शाम को करें।
3. जब सैंडल्स की शॉपिंग के लिए जाएं, तो अपनी मम्मी, बहन या सहेली को साथ ले जाएं, ताकि वो आपको सही सलाह दे सकें और गाइड कर सकें।
4. ब्राइडल ड्रैस की फिटिंग चैक करने जाएं तो ये सैंडल्स साथ लेकर जाएं, ताकि लहंगे की हैंमलाइन की लंबाई बिलकुल सही बने।
5. शादी पर पहनने से पहले इन सैंडल्स को घर में पहन कर अच्छी तरह घूमें, ताकि ये आपके पैरों के अनुसार एडजस्ट हो जाएं और अपने स्पैशल डे में इन्हें पहन कर आपको कोई प्रॉब्लम न हो। अगर आप इन्हें पहनकर डांस भी करना चाहती हैं, तो इसकी प्रैक्टिस भी कर लें।
6. नई सैंडल स्लिपरी हो सकती है, इसलिए इसके सोल्स को सैंडपेपर से हल्का-सा रगड़ लें।
7. हाई हील्स पहनकर ज्यादा देर तक खड़े रहना मुश्किल होता है, इसलिए मौका मिले तो बैठकर पांवों को आराम देने में संकोच न करें।

Saturday, August 15, 2015

जानें कैसा हो वर्किंग वूमेन का डाइट चार्ट

कामकाजी महिलाओं को अपनी सेहत और खान-पान की ज्यादा केयर करने की जरूरत होती है। उनका खान-पान आम महिलाओं की अपेक्षा और भी न्यूट्रीशियस और स्वास्थ्यवर्धक होना चाहिए, नहीं तो उनका अॉफिस का काम और घर-परिवार सभी प्रभावित होंगे। कामकाजी महिलाओं को अपनी डाइट में विटामिन, जिंक, प्रोटीन और कैल्शियम युक्त चीजें शामिल करनी चाहिए। उन्हे अपना डाइट चार्ट बनाना चाहिए और उसी के हिसाब से डाइट लेनी चाहिए।

प्रोटीनयुक्त करें ब्रेकफास्ट 

सुबह का नाश्ता पौष्टिकता से परिपूर्ण होना चाहिए। यह हैल्दी वेट मेनटेन करने में प्रमुख भूमिका निभाता है। ब्रेकफास्ट में प्रोटीन शामिल करके अपने मैटाबॉलिज़म को बूस्ट करें। सलिए आप अपने दिन की शुरुआत लो फैट दूध, अंडे, सालमन, दलिया, कॉर्नफ्लेक्स इत्यादि से करें। कार्बोहाइड्रेट्स की अपेक्षा प्रोटीन युक्त ब्रेकफास्ट करने से ज्यादा कैलोरीज़ बर्न होती हैं। प्रोटीन युक्त खाना आपको लंबे समय तक पेट के भरे होने का अहसास करवाता है और इस तरह आप दिनभर कम कैलोरीज़ का ही सेवन करते हैं। सुबह चाय की जगह आप लस्सी, ब्लैक टी या ग्रीन टी लें तो बेहतर रहेगा। नाश्ते में कभी-कभार बदलाव के लिए आप ब्राउन ब्रेड या मल्टी ग्रेन ब्रेड से बना सेंडविच भी खा सकती हैं।

हैल्दी मिड-मॉर्निंग स्नैक

थोड़ा-थोड़ा खाते रहना आपके ब्लड शुगर लैवल को मैनेज करने का सबसे बढ़िया तरीका है। इसका मतलब यह नहीं है कि आप ज्यादा खाएं। इस टाइम पर आप फल जरूर खाएं। कोशिश करें कि लाल, पीले या नारंगी रंग के फल खाएं, जैसे स्ट्रॉबेरी, सेब, पपीता या आडू आदि। इनमें विटामिन-ए की मात्रा मिलती है। आप स्प्राउट्स या  ड्राई फ्रूट्स भी ले सकती हैं।

लंच में ले कार्ब

ब्रेकफास्ट और लंच के बीच सिर्फ 4-5 घंटे का ही गैप होना चाहिए। कामकाजी महिलाओं को लंच में ऐसी चीजें खानी चाहिए जिनमें जिंक और कार्बोहाइड्रेट्स की मात्रा अधिक हो। कार्ब रिच फूड्स से एनर्जी मिलती है। सलाद का सेवन जरूर करें। लंच में पालक या ब्रोकली जैसी हरी सब्जियों को शामिल करें। गेहूं की रोटी की जगह बेसन या गेहूं और बेसन मिक्स रोटी भी खा सकती हैं। खाने में एक कटोरी दाल जरूर खाएं। अधिक प्रोटीन के लिए आप पंच मेल दाल यानी पांच तरह की दालों को एक साथ बनाकर खाएं।

मिड आफ्टरनून स्नैक

शाम तक थकान महसूस होने लगती है इसलिए इस समय आप एनर्जी के लिए फल लें। एक मुट्ठी ड्राइ फ्रूट्स आपको प्रोटीन तो देते ही हैं, साथ ही डिनर तक आपको भूख भी नहीं लगने देते। ध्यान रखें ये नट्स नमकीन न हों। शाम को कई बार मीठा खाने का मन करता है, लेकिन बिस्कुट या पेसट्री खाने से बचें।

डिनर में शामिल करें फाइबर 

रात के समय हल्का खाना ही बेस्ट रहता है। हल्के खाने का यह मतलब बिल्कुल भी नहीं है कि आप कुछ खाएं ही न। आपकी आधी पलेट सब्जियों की कलरफुल वैरायटी औस सलाद से भरी होनी चाहिए। पराठें की जगह रोटी और कम मसाले वाली सब्जी खाएं। हल्के खाने में आप पोहा, चीला, सलाद, अंडे की सफेदी का ऑमलेट, उबला हुआ अंडा, कॉर्नफ्लेक्स भी खा सकती हैं। डिनर में फाइबर्स फूड्स शामिल करें, इससे फैट नहीं बढ़ता और स्किन व बाल भी हैल्दी रहते हैं। सर्दियों के इस मौसम में आप सब्जियों का सूप भी पी सकती हैं।

Friday, August 14, 2015

स्वतंत्रता दिवस पर पहनें कुछ खास

 ट्राई कलर थीम के साथ सेलिब्रेट करें आज़ादी दिवस




आज हमारे लिए बहुत गर्व का दिन है क्योंकि आज भारत का स्वतंत्रता दिवस है। इस दिन हम अपने स्वतंत्रता सैनानियों का शुक्रिया अदा करते हैं जिनकी बदौलत हम आज आजाद हवा में सांस ले रहे हैं...

स्वतंत्रता दिवस पर इस बार हमें कुछ नया करने का प्लान करें। नए दिन की शुरुआत नई ऊर्जा और नई सोच के साथ करें। स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में जा रहे हैं या अपने दोस्तों के साथ शहीदों को श्रद्धांजलि देने जा रहे हैं तो घर से बाहर निकलते समय सबसे पहले अपनी ड्रैस पर ध्यान दें। आपकी ड्रैस ऐसी हो जो आज के महत्वपूर्ण दिन आपकी पर्सनैलिटी को कॉम्पलीमेंट करे और आपके दिल में भरा देश भक्ति का जज्बा दूसरों के लिए भी प्रेरणा का स्त्रोत बने। 

इस बार हमारा 69वां स्वतंत्रता दिवस है। इस दिन को सभी लोग ट्राई कलर थीम के साथ समारोह सेलिब्रेट करना पसंद करते हैं। कुछ लोग ऐसी ड्रेस पसंद करते हैं जिसमें तिरंगे के सभी तीनों रंग हों तो कुछ सिर्फ सफेद रंग पहनना ही पसंद करते हैं। इस ड्रैस कोड के साथ भी आप स्टाइलिश और एलिगेंट दिख सकते हैं।

लिलेन की सफेद साड़ी में पारम्परिक लुक आपको भारतीय होने पर गर्व का अहसास करवाएगा। इसके साथ आप मल्टीकलर या केसरिया रंग का ब्लाउज पहन सकती हैं।अगर आप नियोन ट्रैंड फॉलो करती हैं तो देश के आज़ादी दिवस को सेलिब्रेट करने के लिए आप नियोन ग्रीन या केसरिया साड़ी को कंट्रास्ट ब्लाउज के साथ टीम करें। साड़ी के साथ ट्राई कलर एक्सेसरीज़ आपके लुक को और भी एक्ट्रैक्टिव बना देगी।

हरे और केसरिया दुपट्टे के साथ कढ़ाई वाला सफेद सलवार सूट आप पर बेहद सुंदर दिखेगा और देखने वाले को भी भगत सिंह के बोल- मेरा रंग दे बसंती चोला, माए रंग दे ....याद आ जाएंगे। अगर आप थोड़ा कलरफुल ट्राई करना चाहते हैं तो सफेद कुर्ता और केसरिया या हरी सलवार पहन सकती हैं। साथ में मल्टीकलर दुपट्टा बेहतरीन अॉप्शन है।

पारम्परिक गोटा पट्टी के साथ मल्टीकलर जैकेट आजकल ट्रैंड में है। आप सफेद कुर्ता केसरिया जैकेट के साथ पहनें या अपनी मनपसंद डेनिम की जैकेट के साथ भी आप पहन सकती हैं। केसरिया कुर्ती के साथ हरी पटियाला सलवार और शीशों से जड़ी जैकेट आपको भीड़ में सबसे अलग दिखाएगी।

युवक नेहरू कॉलर के कुर्ते या पठानी सूट के साथ ग्रीन या अॉरेंज कलर की जैकेट पहन सकते हैं। ट्राईकलर ब्रेसलेट्स या पगड़ी पहन कर वे भी वे अपना इंडिपेंडेस डे लुक पा सकते हैं। आपकी कुछ भी च्वाइस हो, ध्यान रखें आप जो भी पहनें वो कम्फर्टेबल हो।

Thursday, May 21, 2015

घरेलू स्क्रब से पाएं सन टेनिंग से छुटकारा



गर्मीयों में सूर्य से निकले वाली अल्ट्रावायलेट किरणों से त्वचा को हानि पहुंचती है जिसे आप टेनिंग भी कह सकते हैं। इससे चेहरे पर धब्बे पड़़ने लगते हैं। अधिक देर तक धूप में रहने से त्वचा का रंग फीका पड़ जाता है। कई बार देखा गया है कि टेनिंग को छुपाने के लिए आप मेकअप का सहारा लेते हैं जिससे थोड़ी देर के लिए राहत मिल सकती है लेकिन इसके आपकी त्वचा में दूसरी समस्याएं हो सकती हैं। 

टेनिंग से प्रभावित त्वचा को घरेलू नुस्खों (Home Remedies) से कुदरती तौर पर खत्म कर सकते हैं।  दूध, दही, हल्‍दी, शहद, चीनी, नींबू, आलू, ओट्स और एलो वेरा के रस से आप सन टेनिंग हटाने वाला स्‍क्रब बना सकते हैं। ये सन टेनिंग स्‍क्रब सभी प्रकार की त्‍वचा पर अपना अच्‍छा असर दिखाते हैं। इन्‍हें नियमित रूप से लगाने पर आप अपने आप ही असर देखने लगेंगे। इससे आप स्किन की मृत कोशिकाओं से छुटकारा पा लेते हैं और ब्लड सर्कुलेशन इंप्रूव होता है। इससे स्किन टोन होती है और उसे पोषण मिलता है। तो चलिये बनाते हैं सन टेनिंग को हटाने के लिये स्‍क्रब...


  • बादाम टेनिंग को हटाने में कारगर भूमिका निभाता है। बादाम के तेल में दूध का पाउडर और साथ में शहद और नींबू का रस मिलकार चेहरे पर लगाएं। इस मि़श्रण को 20 मिनट तक चेहरे पर लगा कर रखें।फिर ठंडे पानी से चेहरा धोएं। सप्ताह में दो से तीन दिन इस पेस्ट का नियमित प्रयोग करें। यह टेनिंग के साथ आपके चेहरे की रंगत को भी बढ़ाएगा।

  • केसर चेहरे को निखारता है। केसर को दूध की मलाई के साथ मिला लें और उसमें दो से तीन बूंदे नींबू का रस डालकर चेहरे लगाएं। 15 मिनट के बाद चेहरा धो लें। टेनिंग कम होगी।

  • प्राकृतिक सुंदरता के लिए आप चंदन से ले सकते हैं। चेहरे को सुंदर और आकर्षक बनाने के लिए चंदन बेहद महत्वपूर्ण होता है। यह चेहरे की रौनक को बढ़ाता है।  एक कप कच्‍चा दूध लेकर उसमें एक चम्‍मच चंदन पाउडर डालकर पेस्ट बनाएं और  टेनिंग वाली जगह पर लगाइये। सूख जाने के बाद इसे पानी से धो लीजिये। 

  • बराबर मात्रा में मिल्‍क पाउडर, नींबू का रस, शहद और बादाम का तेल मिलाइये। इसे चेहरे पर लगा कर 15 मिनट के लिये छोड़ दीजिये। अच्‍छा रिजल्‍ट पाने के लिये इस स्‍क्रब को हफ्ते में तीन बार लगाइये।

  • चीनी और नींबू के रस को एक साथ मिक्‍स करें और मोटा पेस्‍ट बनाएं। इसे शरीर और चेहरे पर लगाएं और फिर 20 मिनट तक सूखने दें। इसके बाद ठंडे पानी से धो लें।

  • टेनिंग को हटाने के लिए सबसे प्रभावशाली और कारगर नुस्खा है शहद और नींबू। इन्हें मिक्स करके  टेनिंग से प्रभावित जगह पर लगाएं। कुछ मिनट रखने के बाद इसे सादे पानी से धो लें। आपको फर्क महसूस होने लगेगा। कुछ ही दिनों में आपके चेहरे से दाग और धब्बे हट जाएंगे।  

  • हल्‍दी पाउडर और दूध को जरुरत अनुसार मिलाइये और उसमें नींबू का रस भी डाल लीजिये। फिर इस मिश्रण को चेहरे और अन्‍य भाग पर लगाएं। जब यह सूख जाए तब इसे ठंडे पानी से धो लें। यह बहुत ही प्रभावशाली स्‍क्रब है। 
  • टेनिंग को हटाने के लिए आप आलू के पेस्ट का प्रयोग भी कर सकते हैं। आलू के पेस्ट को तैयार करें और इसे टैनिंग वाली जगह पर 20 मिनट तक लगाए रखें और फिर चेहरा धो लें। दो से तीन दिनों तक लगाने से फर्क नजर आने लगेगा। इससे स्‍किन एक दम साफ हो जाएगी।

  • पपीते के गूदे को अच्छी तरह से मैश करके चेहरे पर लगाने से त्वचा बहुत ही सॉफ्ट होकर ग्लो करने है और साथ ही साथ सन टैनिंग की समस्या भी धीरे-धीरे कम होने लगती है।

  • टमाटर के गूदे को चेहरे पर करीब 15 मिनट तक के लिए लगा रहने दें और फिर इसे ठंडे पानी से धो लें। इससे त्वेचा एकदम फ्रेश हो जाएगी और गर्मी से भी राहत मिलेगी।

  • आप एलो वेरा जैल को रोज लगा सकती हैं। एलोवेरा अधिक मात्रा में विटामिन E पाया जाता है जो त्वचा के लिये बहुत ही लाभकारी होता है, इसलिए सभी लोगों को एलो वेरा का प्रयोग करना चाहिये।


इन घरेलू उपायों के जरिए आप सूर्य कि किरणों से होने वाली स्कीन टेनिगं से बच सकते हो। लेकिन इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि टैनिग रातों रात ठीक नही हो सकती है। इसके लिए थोड़ा वक्त लगता है। टेनिंग से बचने के लिए आप जब भी घर से बाहर जाएं तो सनस्क्रीरन को लगाएं बिना न निकलें। और अपने साथ हमेंशा छाता जरूर रखें। टेनिंग को हटाने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि आप विटामिन सी युक्त फलों का सेवन अधिक से अधिक करें। साथ ही जितना हो सकता है 2 से 4 लीटर पानी का सेवन हर दिन करें। पानी टैनिंग को धीरे-धीरे और पूरी तरह से खत्म कर देती है।



Tuesday, January 20, 2015

खतरनाक है शुगर की मिठास

खतरनाक है शुगर की मिठास


डायबिटीज एक गंभीर बीमारी है जिसे धीमी मौत (साइलेंट किलर ) भी कहा जाता है। संसार भर में डायबिटीज के रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है विशेष रूप से भारत में, लेकिन इसके बावजूद अब भी इसके ज्यादातर मरीजों को ठंड में डायबिटीज के कारण होने वाली परेशानियों से बचने के तरीके नहीं पता। यही कारण है कि सर्दियों में मरीजों के लिए अपने शुगर लेवल पर कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है और उनकी बीमारी बढ़ती चली जाती है। दरअसल, डायबिटीज के मरीजों के लिए सर्दियों में ग्लूकोज स्तर को नियंत्रित रखना अधिक जरूरी हो जाता है, क्योंकि सर्दियों में व्यायाम की कमी और मेटाबॉलिक प्रक्रिया बदलने की वजह से ग्लूकोज अनियंत्रित हो जाता है। डायबिटीज में ब्लड शुगर लेवल बढ़ने के कारण पूरे शरीर को नुकसान पहुंचता है। यही नहीं सर्दियों में डायबिटीज के मरीजों में हार्ट अटैक और दूसरी दिल की बीमारियां होने की संभावना चार गुणा तक बढ़ जाती है।  

डायबिटीज को पूरी तरह से खत्म तो नहीं किया जा सकता, लेकिन इसे कंट्रोल में रखा जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि मौसम बदलने से पहले डॉक्टर से सलाह लें और सर्दियों में डायबिटीज के किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें। समय-समय पर शुगर लेवल का चेकअप करवाते रहें। नहीं तो यह जिंदगी से खिलवाड़ करने जैसा साबित हो सकता है। रक्त में ग्लूकोज की मात्रा सामान्य से ज्यादा तथा सामान्य से कम होना दोनों ही स्थितियां घातक सिद्ध होती हैं। सर्दियों में  थोड़ी सी सावधानी आपको डायबिटीज की पीड़ा से दूर रख सकती है।

कैसे करें बचाव: 


डायबिटीज के कारण पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है। पाचन तंत्र कमजोर होने से यह भोजन को भी नहीं पचा पाता है। पाचन शक्ति नहीं होने से रोगी को कब्ज, गैसइटिस और कमजोरी की समस्या हो जाती है। इस मौसम में खान-पान में जरा सी लापरवाही परेशानी का सबब बन सकती है। इसलिए खान-पान का तो बहुत ही ध्यान रखें। हरी सब्जियां, फाइबर और एंटी ऑक्सीडेंट का सेवन अधिक करें। तीन बार भारी भोजन करने की बजाय 4-5 बार हल्का खाना खाएं। कैलोरी पर ध्यान रखें। जंक फूड बिल्कुल न खाएं। सोने से करीब दो घंटे पहले कुछ न खाएं।

डायबिटीज रोगियों का इम्यून सिस्टम भी कमजोर होता है। मौसम बदलते ही बार-बार बीमार होना, चोट-घाव ठीक न होना जैसी समस्याएं भी होती हैं। इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए सर्दी के मौसम में आंवला, हल्दी, काली मिर्च, तुलसी जैसी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली वस्तुओं का उपयोग लाभकारी है।
  
ग्लूकोज से ही शरीर को ऊर्जा मिलती है. लेकिन डायबिटीज रोगियों के शरीर में ग्लूकोज का पाचन नहीं होता है, बल्कि इसकी जगह प्रोटीन का पाचन होने लगता है। इससे रोगी दुबला हो जाता है। इसी कारण डायबिटीज के रोगियों में प्रोटीन की जरूरत अधिक होती है। डायबिटीज के मरीज ठंड के मौसम में प्रोटीन की कमी को आसानी से पूरा कर सकते हैं। इस मौसम में प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थो के सेवन से विशेष लाभ प्राप्त होते हैं। इसके लिए सभी प्रकार की दालें, सूखे मेवे जैसे- काजू, बादाम, अखरोट, मूंगफली, मौसमी फल और सब्जियां आदि कई पदार्थ हैं। इनके ठंड में उचित सेवन से शरीर को अनेक लाभ होते हैं।

डायबिटीज में नर्वस सिस्टम को भी नुकसान पहुंचता है। डायबिटीज में पैरों की नसों पर असर होता है, जिससे पैरों की संवेदना खत्म हो जाती है। इससे हाथ-पैर की उंगलियों में सूनेपन का आभास होता है। ऐसे में मरीज को दर्द, चुभन, सर्द - गर्म का पता नहीं लगता। यही कारण है कि जब भी कोई चोट लगती है, गर्म पानी की बोतल या आग से सेंकते हैं, तो फफोला हो जाता है, जो आगे चलकर गैंगरीन में बदल सकता है और कई मामलों में पैर काटने की नौबत आ सकती है। कई मरीजों के पैरों में सुन्नपन इस कदर होता है कि उन्हें चप्पल पैर से बाहर निकल जाने या चप्पल के साथ सो जाने का भी एहसास नहीं होता। ऐसे लोग अक्सर नहाने जाने पर गर्म पानी सीधे पैरों पर डाल लेते हैं या ब्लोअर के सामने सीधे पैर रख लेते हैं और जल जाते हैं। अत: हाथ पैर में डायरेक्ट वूलन न पहनें। डायरेक्ट हीटर के सामने न जाएं। गुनगुना पानी इस्तेमाल करें।  हाथों व पैरों की उंगलियों को हिलाने या उंगलियों का व्यायाम करने से नर्व्स में शक्ति आती है, इससे ब्लड सरकुलेशन भी सुधरता है।

ठंड में चिल ब्लेन की सबसे ज्यादा दिक्कत डायबिटीज के मरीजों को होती है। सर्दी में डायबिटीज मरीजों को एक बड़ी दिक्कत पैरों की सूजन की भी होती है। यदि खून में ग्लूकोज की मात्रा 250 एमजीडीएल से अधिक आ रही है तो पेशाब में कीटोन्स की जांच अवश्य कराएं, इस स्थिति में तेजी से पैरों में सूजन बढ़ती है। इसलिए पैरों का ज्यादा ध्यान रखना चाहिए। ऐसे में पैरों की सफाई रखें। पैर धोने के बाद उंगलियां अच्छी तरह सुखाएं,  रूखे पैरों पर मॉइश्चराइजर लगाएं। थोड़े लूज जूते व जुराबें पहनें। नंगे पैर न घूमें। पैरों की रेग्युलर एक्सरसाइज जरूर करें। कीटोन्स आने पर दवाओं के साथ ही डाइट पर भी ध्यान दें। हरी सब्जियां और रेशेदार फल फायदेमंद हो सकते हैं। पैरों का ध्यान रखें। 

डायबिटीज के मरीज कंधों के जोड़ों में जकड़न की वजह से  भी परेशान रहते हैं। ब्लड ग्लूकोज लेवल को सामान्य रखकर और रेग्युलर एक्सरसाइज से ठीक हो सकने वाली इस समस्या के लिए कई लोग स्टेरॉयड का इंजेक्शन भी लगवा लेते हैं , जो दिक्कतों और बढ़ा रहा है। जॉइंट के कोलेजन टिश्यू में प्रोटीन जमा होने से ऐसी दिक्कतें आती हैं, क्योंकि ठंड के कारण लोग एक्सरसाइज आदि बंद कर देते हैं। दर्द की वजह से बढ़े तनाव के कारण ब्लड शुगर लेवल भी गड़बड़ हो जाता है, जो दूसरी परेशानियां खड़ी कर सकता है। ऐसे में डायबिटीज के मरीज खान-पान का ध्यान रखें और रेग्युलर एक्सरसाइज करें। नियमित व्यायाम और टहलने से शरीर पुष्ट होता है और कमजोरी दूर होती है। सर्दियों में सैर पर अवश्य जाएं, लेकिन अत्यधिक ठंड में न जाएं और धुंध हटने के बाद ही घऱ से जाएं। 

डायबिटीज आंखों के लिए भी नुकसानदेह है। डायबिटिक रैटिनोपैथी के मरीजों में  आंख के पर्दे की रक्त कोशिकाओं पर भी असर पड़ता है। डायबिटीज से पर्दे में सूजन, रक्त का रिसाव, पर्दे पर खिंचाव आदि हो सकता है। आंखों का यह रोग होने की आशंका उस समय और भी बढ़ जाती है, जब रक्त में शुगर की मात्रा नियंत्रण में न रहे या उसे कम उम्र में शुरू होने वाला डायबिटीज (इंसुलिन डिपेंडेंट डायबिटीज) हो। हालांकि शुरूआत में पर्दे में सूजन, खिंचाव जैसे कारणों से आंखों की रोशनी पर कोई खास फर्क नहीं पड़ता, लेकिन धीरे-धीरे डायबिटीज बढ़ने से रोशनी प्रभावित होने लगती है और आगे चलकर यह लाइलाज हो जाती है। इसके मरीज साल में दो बार पुतली फैलाने की दवा डालकर फंडोस्कोपी कराएं। खून की नसों में होने वाले परिवर्तनों का पता लगाने के लिए एंजियोग्राफी व ओसीटी कराएं। आंख में खून भरने या खिंचाव से पर्दा फटने पर सर्जरी ही एकमात्र उपाय है। इसके अलावा अपने ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखें। 

Monday, January 19, 2015

दिल पर भारी कड़ाके की ठंड

दिल पर भारी कड़ाके की ठंड


सर्दी का मौसम अपने साथ सेहत से जुड़ी कई समस्याएं भी साथ लेकर आता है। सर्दी के दिनों में शरीर के तापमान को सामान्य बनाने के लिए दिल को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है। दरअसल, सर्दियों के मौसम में शरीर को गर्मी देने के लिए नसें सिकुड़ने लगती हैं, जिससे ब्लड सर्कुलेशन कम हो जाता है और पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाने के कारण हार्ट को आम दिनों की तुलना में कहीं ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। यही कारण है कि सर्दी में दिल की बीमारी के 40% मरीजों को दिल का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ जाता है। सर्दियों में दिल का दौरा पड़ने की प्रमुख वजह गर्मियों की अपेक्षा सर्दी में वसा का इस्तेमाल अधिक और व्यायाम की कमी को भी माना जाता है।

अगर आप डायबीटीज या हाई ब्लड प्रेशर के मरीज हैं, तब तो इस मौसम में आपको अपने दिल का और भी खास ध्यान रखना होगा। डायबिटीज के मरीजों के लिए सर्दियों में ग्लूकोज स्तर को नियंत्रित रखना अधिक जरूरी हो जाता है। गर्मी की अपेक्षा सर्दी में डायबीटीज मरीजों को आंख और पैरों का ज्यादा ध्यान रखना चाहिए। सर्दियों के दौरान डायबीटीज के मरीजों में दिल और मस्तिष्क आघात का खतरा बढ़ जाता है। डायबीटीज  के मरीज में घुटन और सीने में दर्द जैसे चेतावनी संकेतों को गंभीरता से लेना चाहिए, क्योंकि ये दिल के दौरे के लक्षण हो सकते हैं।

यह मौसम स्वस्थ लोगों के लिए भी चेतावनी लेकर आता है। हर किसी को दिल की बीमारी के लक्षणों के लिए चौकन्ना रहना चाहिए। सांस फूलना और सीने के बीच के हिस्से में दर्द - दिल की बीमारी के दो महत्वपूर्ण लक्षण होते हैं। लेकिन इन दोनों की सही पहचान करना ज़रूरी है।

सांस फूलना अक्सर अस्थमा या दमे की बीमारी का सूचक होता है। इसलिए ध्यान रखें अगर आपकी सांस तेज़ चलने और एक्सरसाइज़ करते समय फूलती है तो यह दिल की बीमारी की वजह से है। इसी तरह गैस होने की वजह से लोगों को पेट के ऊपरी हिस्से में अक्सर दर्द होता है और वो उसे एन्जाइना का दर्द समझ लेते हैं। या फिर एन्जाइना के दर्द को गैस की वजह से होने वाला दर्द समझ कर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। इसलिए आपको सतर्क रहना चाहिए ताकि सीने के दर्द और पेट के दर्द की पहचान और उपचार में आप गलती ना कर दें। अगर ऐसा कोई भी दर्द आपको पहली बार हुआ हो तो फौरन डॉक्टरी जांच करवाएं।

इसलिए बढ़ता है दिल के दौरे का जोखिम

सर्दी में हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिये सबसे बड़ी परेशानी यह है कि ठंड की वजह से पसीना नहीं निकलता है और शरीर में नमक का स्तर बढ़ जाता है जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। सर्दियों में रक्तवाहिनी सिकुड़ जाती हैं इसलिए खून की सामान्य आपूर्ति बाधित होती है और ब्लड प्रेशर भी बढ़ जाता है। सर्दी में शारीरिक गतिविधियां कम होने के कारण अतिरिक्त कैलोरी बर्न नहीं हो पाती और कोलेस्ट्राल तेजी से धमनियों में जमने लगता है। इससे भी ब्लड प्रेशर बढ़ने की आशंका बढ़ जाती है और ब्लड प्रेशर बढ़ने से दिल के दौरे का जोखिम बढ़ जाता है। कड़ाके की ठंड दिल की सेहत के लिए भारी हो सकती है, ऐसे में दिल के मरीजों को अपने दिल को सेहतमंद बनाए रखने के लिए खास एहतियात बरतने की जरूरत होती है।

मिथ है यह

लोगों के मन में एक गलतफहमी है कि सर्दी के दिनों में गर्म चीजें जैसे गुड़ से बनी गजक, तिल के लडडू आदि खाने से या व्हिस्की या रम के दो पैग गुनगुने पानी से लेने से सर्दी भाग जाएगी, लेकिन दरअसल ऐसा नहीं है क्योंकि ऐसा करने से आपको फौरी तौर पर भले ही सर्दी से राहत मिले, लेकिन बाद में ब्लड प्रेशर और ब्लड शूगर बढ़ सकता है, जो नुकसानदेह साबित हो सकता है। शराब का सेवन करने के बाद ठंड में बाहर न निकलें। इससे आपकी रक्तवाहिनी सिकुड़ सकती हैं, जिससे फेफड़ों की समस्या हो सकती है।  दिल के मरीज़ों को सिगरेट से दूर रहना चाहिए।

ऎसा हो खानपान

खान पान पर भी ध्यान दें। पौष्टिक खाना खाकर रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाएं।  खाने में फाइबर और एंटी ऑक्सीडेंट की मात्रा बढ़ाएं। खाने में ओमेगा थ्री की मात्रा बढ़ाएं। तेल और मक्खन से बने खाद्य पदार्थों से पूरी तरह बचें। सर्दी की शुरुआत से ही बाजरे का सेवन शुरू कर लें। बाजरा न केवल शरीर को ऊष्मा देता है बल्कि पौष्टिक आहार भी है। बाजरे की खिचड़ी, रोटी, उत्पम, ढोकला इत्यादि आप कई डिशिज़ बना सकते हैं। जौ में घुलनशील फाइबर काफी मात्रा में पाया जाता है। यह रक्त में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करता है। इसके अलावा यह रक्त में ग्लूकोज के स्तर को भी संतुलित रखता है। इसमें वसा की मात्रा न के बराबर होती है। जौ से बने बिस्किट और बेकरी की अन्य चीजों का प्रयोग करें। ज्वार में विटामिन बी और विटामिन ई, मैगनीशियम, फाइबर, आयरन काफी मात्रा में पाया जाता है। इसके अलावा इसमें कई प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट भी पाए जाते हैं। यह दिल की बीमारियों से भी बचाता है। ज्वार की रोटी सर्दी में फायदा देती है। डायबिटीज में मक्का भी फायदेमंद होता है। इसमें विटामिन ए, विटामिन बी व अन्य पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में होते हैं। मक्के की रोटी, ढोकला, सब्जी खा सकते हैं। स्वीट कॉर्न भी स्नैक्स के रूप में ले सकते हैं।

सर्दियों में अक्सर लोग कम पानी पीने लगते हैं, जिससे डिहाइड्रेशन की समस्या तो होती ही है, साथ ही त्वचा भी रूखी होने लगती है। रोजाना 8-10 गिलास पानी पीना चाहिए। चाय के स्थान पर लौंग, इलायची, अदरक, तुलसी, काली मिर्च का काढ़ा पीएं, चीनी के स्थान पर गुड़ लें।  विटामिन ‘सी’ युक्त फल सहित जूस, पानी, सूप का ज्यादा प्रयोग करें।


दिल की सेहत के लिए इन्हें आजमाएं  


  • सुबह के वक्त गर्म बिस्तर से उठकर एकदम खुली हवा में न जाएं, बल्कि थोड़ा इंतजार करें। सर्दी सबसे ज्यादा सिर, कान और पैरों के जरिए शरीर में प्रवेश करती है। इसलिए अपने शरीर के इन हिस्सों को ठंडी हवाओं से बचाकर रखें। 

  • खुद को ठंड के प्रकोप से बचाने के लिए पर्याप्त गर्म कपड़े जरूर पहनें। अगर शरीर का कोई हिस्सा सुन्न पड़ जाए, तो उसे कुछ देर तक गुनगुने पानी में रखने से आराम हो सकता है।

  • शरीर के रक्त संचार को सही स्तर पर रखने के लिए हर रोज व्यायाम करें। व्यायाम की गर्मी आपको सेहतमंद बनाए रखती है, लेकिन धुंध हटने के बाद। ठंड में हाई ब्लड प्रेशर और दिल के मरीज सुबह की सैर से बचें और हो सके तो शाम को टहल लें या व्यायाम कर लें जिन्हें करने पर शरीर से थोड़ा-बहुत पसीना जरूर निकले। इसके लिये खुले मैदान में जाना जरूरी नहीं, किसी हेल्थ क्लब या घर में ही व्यायाम कर अपने को चुस्त दुरूस्त रखा जा सकता है।

  • यदि हल्की सी भी धूप हो तो उसमें बैठना फायदेमंद हो सकता है। रोजाना कुछ देर धूप सेकने से दिल के रोगियों में हार्ट अटैक का खतरा कम होता है और ब्लड प्रेशर भी काबू में रहता है। मधुमेह रोगियों और हड्डी के लिए भी धूप से विटामिन डी की कमी पूरी होती है।

  • सफाई पर विशेष ध्यान दें, डिस्पोजल सामान का प्रयोग करें। गुनगुने पानी से ही नहाएं। ठंडे पानी से नहाने पर हार्ट अटैक का खतरा रहता है। 

  • सबसे ज़रूरी है तनाव कम करना क्योंकि तनाव दिल की बीमारी को खुला आमंत्रण है। हाई ब्लड प्रेशर और दिल के मरीज सात-आठ घंटे की नींद लें, ताकि तनाव से बचे रहें। 

  • ब्लड प्रेशर पर भी नज़र रखें। नियमित रूप से खून में कोलेस्ट्राल के स्तर की जांच कराएं और हार्ट के मरीज अपनी दवाएं नियमित लें। दिक्कत होने पर डॉक्टर के पास चेकअप को जाएं।

Tuesday, January 13, 2015

रब की मेहर होती हैं बेटियां

रब की मेहर होती हैं बेटियां

हमारे समाज में बेटे की बहुत अहमियत है। उनके जन्म पर ढेरों खुशियां मनाई जाती हैं। यहां तक कि कुछ त्योहार विशेष रूप से लड़कों के सम्मान में ही मनाए जाते हैं। लड़के के जन्म की पहली लोहड़ी हो या बेटे की शादी की पहली लोहड़ी, लोग लोहड़ी का त्यौहार दुगने उत्साह के साथ मनाते हैं जबकि प्रचलित लोककथा के अनुसार यह त्यौहार दो गरीब लड़कियों की शादी से संबंधित है। हमारी रूढ़िवादी मानसिकता देखिये कि हम रिश्तों में मधुरता एवं प्रेम के प्रतीक लोहड़ी के इस त्यौहार को सिर्फ़ लड़को के जन्म और शादी की खुशी में ही मनाते हैं। लड़कियों के जन्म की खुशी यहां नहीं मनाई जाती है, क्योंकि लड़कियों को लड़कों से कम आंका जाता है। हालांकि प्राचीन शास्त्रों में नारी को पूजनीय कहा गया है, मगर समाज ने उसे कभी वो दर्जा नहीं दिया। क्रूरता की हद तो यह कि लड़की को जन्म लेने से पहले कोख में ही खत्म कर दिया जाता है।


बेटे को वंश का वाहक माना जाता है। सदियों से पुत्र ही माता-पिता की देखभाल करता रहा है और आज भी स्थिति लगभग ऐसी ही है। इसी कारण अपने बुढ़ापे को सुरक्षित रखने के लिए लोगों में पुत्र की चाहना रहती है। बेटी के प्रति भेदभाव समाज के विकास को प्रभावित करता है। बेटों की चाहत में कोख में ही कन्या भ्रूण हत्या करने वाले मां बाप से पूछ कर देखें कि क्या उनके सपूत बुढ़ापे में उनका सहारा बनते हैं। क्या मां बाप के बाद सभी बहनों के लिए उनके मायके के दरवाज़े हमेशा खुले रहते हैं? अगर इस बारे में सर्वे कराया जाए तो परिणाम उन महिलाओं के लिए निराशाजनक  ही होंगे जो बेटों के लिए बेटियों को पैदा होने से पहले ही मार देती हैं या उनके जन्म के बाद उन्हें मरने के लिए सड़कों पर या कूड़े के ढ़ेर में फेंक देती हैं। इसके अनेक उदाहरण आप सबके पास भी होंगे जब बूढ़े मां-बाप का साथ बेटियों ने ही दिया जबकि बेहद लाड-प्यार से पाले-पलोसे उनके बेटों ने उन्हें दर-दर भटकने के लिए घर से बाहर कर दिया।


सामाजिक बदलाव और जागरुकता के चलते अब लोगों की सोच में भी बदलाव आ रहा है। वे अब बेटी के महत्व को समझने लगे हैं। बेटियों के बिना घर और समाज अधूरा है। बेटी ना हो केवल बेटे ही हों यह सोच बदल रही है। अब पुत्रियां माता-पिता की सेवा कर रही हैं। पुत्री के रूप में बहू ही सेवा करती है। अब बेटी के जन्म पर भी लोग जश्न मनाने लगे हैं। समाज में भ्रूण हत्या जैसी कुरीति को खत्म करने के मकसद से लोहड़ी को एक अलहदा ढंग से मनाया जाने लगा है। अब धीयां दी लोहड़ी उत्सव के तौर पर मनाई जाने लगी है। आज आलम यह है कि लोग लड़कों की लोहड़ी कम व लड़कियों की लोहड़ी सामूहिक तौर पर ज्यादा मनाने लगे हैं।  इस तरह के प्रयत्न लड़कियों को समाज में बनता सम्मान दिलाने के लिए कारगार सिद्ध होंगे, वहीं दूसरी तरफ कन्या भ्रूण हत्या व दहेज जैसी सामाजिक बुराईयों को भी खत्म करेंगे।


 "धीयां दी लोहड़ी" उन लोगों को शीशा दिखाती है, जो आज भी बेटी और बेटे के जन्म में फर्क समझते हैं। लड़का-लड़की में भेद करना खुद को धोखा देना है, क्योंकि आज लड़कियां  हर क्षेत्र में अपनी काबलियत का लोहा मनवा चुकी हैं, वे लड़कों को हर क्षेत्र में पछाड़ रहीं हैं। भ्रूण हत्या रोकनी है तो कन्यायों को समाज में लड़के से बढ़कर सम्मान देना होगा। बेटे के लिए बहू बन कर किसी दूसरे की बेटी आपके घर में आएगी और आपकी बेटी किसी के घर दुल्हन बन कर जाएगी। इसलिए कन्या भ्रूण की कोख में ही हत्या ना करें उसे दुनिया का उजाला देखने दें, वो आज आपके घर की रौनक तो कल किसी के घर के आंगन की शोभा बनेगी।