Thursday, May 2, 2013

‘मैं पापा की बेटी हूं’

‘मैं पापा की बेटी हूं’

बच्चों का पेरैंट्स के लिए लगाव होता ही है पर जब यह लगाव एक पेरैंट के साथ ज्यादा हो, तो कई बार दूसरे पेरैंट को दिक्कत हो सकती है। हालांकि इसके लिए कहीं न कहीं वही दोषी होता है। छोटे बच्चों से अक्सर पूछा जाता है कि वह मम्मी का बच्चा है या पापा का तब बेटी कहती है ‘मैं पापा की बेटी हूं’ और कभी-कभार बेटा कहते है ‘मैं मम्मी का बेटा हूं।’ कई बार बच्चे अपने फायदे के लिए एक पेरैंट के साथ ज्यादा अटैचमैंट बना लेते हैं। कई एक पेरैंट का उपेक्षात्मक  रवैया भी इसका कारण हो सकता है।

♦  बच्चे को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए ऐसे तरीके न अपनाएं, जिनसे बच्चे को गलत संदेश जाए। पेरैंट्स को आपस में बातचीत करके तय करना चाहिए कि बच्चे के लिए क्या सही है और क्या गलत, न कि एक-दूसरे को गलत कहना चाहिए।
♦  यदि बच्चे की डिमांड सही हो, तो दोनों पेरैंट्स मिलकर उसे पूरा करें। इससे बच्चे को यह मैसेज जाता है कि वे दोनों ही उसे बहुत प्यार करते हैं।
♦  जब एक पेरैंट बच्चे को किसी बात से रोकता है, तो दूसरे को भी वही करना चाहिए। इससे बच्चा महसूस करता है कि वह जो कर रहा है, वह गलत है।
♦ बच्चे से पढ़ाई, खेल, मनोरंजन, कार्टून की बात करें। हमेशा पढऩे पर ही जोर न दें। केवल पढऩे से ही बच्चे की डिवैल्पमैंट नहीं हो सकती।
♦   बच्चों के सामने फैमिली प्रॉब्लम डिसकस न करें। बच्चे पेरैंट्स को देख कर व्यवहार सीखते हैं। आपकी बातों से वे परिवार के अन्य सदस्यों के बारे में इम्प्रैशन बना लेते हैं।
♦  अपने व्यवहार और घर के माहौल पर जरूर नजऱ डालें। बच्चे के सामने वाद-विवाद से बचें क्योंकि यदि घर कलह का माहौल होगा, तो कई बार बच्चा हमदर्दी के चलते एक पेरैंट के कयादा नकादीक हो जाता है।
♦  पेरैंट्स बच्चों का मनोभाव समझें। कई बार डर के कारण बच्चे किसी एक पेरैंट से सवाल करते घबराते हैं। ऐसे तनावपूर्ण वातावरण में वे अपने प्रिय पेरैंट के पास राहत तलाशते हैं।
♦  बच्चा घर पर कयादा सीखता है। इसलिए घर का माहौल हैल्दी रखें और अपना व्यवहार पॉजीटिव। उसे उपदेश नहीं, सलाह दें।
♦  पेरैंट्स बच्चों के लिए रोल मॉडल बनें। जैसी अपेक्षाएं वे बच्चों से रखते हैं, उन्हें भी वैसा ही व्यवहार आपस में और बच्चों के साथ करना चाहिए।
♦  बच्चों में तुलना न करें, खास कर जिन परिवारों में लड़का और लड़की दोनों हैं, ताकि लड़की के मन में इंफीरियारिटी काम्प्लैक्स न आए।
♦  दोस्तों से मिलने, साथ घूमने पर नकार हो, पाबंदी नहीं।
♦  अक्सर ग्रैंड पेरैंट्स बच्चों को प्रोटैक्ट करते हैं। वे चाहते हैं कि बच्चों की हर जिद पूरी हो, लेकिन यदि पेरैंट्स बच्चे को किसी बात के लिए रोक रहे हैं, तो वे यह जान लें कि वे ऐसा बच्चे के फायदे के लिए ही कर रहे हैं।

बच्चों के साथ प्यार भरा व्यवहार करें। उनके मन में यह कभी न आए कि माता या पिता में से कोई एक उनसे प्यार नहीं करता। यदि फिर भी बच्चा अपनी अटैचमैंट किसी एक के साथ दिखाए, तो भी घबराने की कारूरत नहीं है। बच्चे जब बड़े हो जाते हैं, तब उनका व्यवहार दोनों के साथ बराबर हो जाता है।
- मीनाक्षी गांधी
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प्रैग्नैंसी में भी खूबसूरती रहे बरकरार

 प्रैग्नैंसी में भी खूबसूरती रहे बरकरार

एक महिला के जीवन में प्रेग्नेंसी से खूबसूरत अहसास और कोई नहीं होता। यह आपकी जिंदगी का सबसे खूबसूरत  दौर है। इसलिए आप इसे इंजॉय जरूर करें और इसलिए हमेशा खुश रहने की कोशिश भी करें और साथ ही अपनी खूबसूरती की भी हिफाजत करें...

प्रैग्नैंसी  के नौ महीने एक ऐसा मुश्किल दौर होता है जब हर महिला के मन में यह दुविधा बनी रहती है कि वह इस दौरान ब्यूटी ट्रीटमैंट लें या नहीं। उन्हें हरदम यही डर सताता रहता है कि कहीं अपनी खूबसूरती बनाए रखने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सौंदर्य प्रसाधनों से उनके होने वाले शिशु को कोई नुक्सान तो नहीं पहुंचेगा।  प्रैग्नैंसी और ब्यूटी से जुड़े कई मिथक हैं, जिन्हें दूर करना बहुत जरूरी है।

फेशियल
कुछ महिलाओं का मानना है कि प्रैग्नैंसी  में स्किन बेहद सैंसिटिव हो जाती है, इसलिए इस दौरान फेशियल नहीं करवाना चाहिए लेकिन प्रैग्नैंसी के दौरान भी चेहरे के रंग-रूप को निखारने के लिए फेशियल कराने में कोई नुक्सान नहीं है। महीने में एक बार फेशियल करवाएं। इससे स्किन क्लीन दिखेगी और ग्लो करेगी लेकिन अगर आप चाहती हैं कि आपकी स्किन को सभी न्यूट्रिशंस मिलें, तो बेहतर होगा कि फेशियल में इस्तेमाल होने वाली क्रीम अच्छी कंपनी की होनी चाहिए। आपके नॉर्मल प्रोडक्ट्स जरूरी नहीं कि प्रैग्नैंसी के दौरान भी आपको सूट करें। इसलिए प्रैग्नैंसी में अपनी स्किन को सूट करने वाले प्रोडक्ट्स फाइंड करें।

हेयर कलर

आपने कई बुजुर्गों को कहते सुना होगा कि अगर प्रैग्नैंट हैं, तो हेयर कलर इस्तेमाल न करें। अगर आप बालों को कलर करवाती हैं, तो प्रैग्नैंसी  में भी आप हेयर कलर इस्तेमाल कर सकती हैं और इसका असर बच्चे की ग्रोथ पर नहीं पड़ता लेकिन प्रैग्नैंसी  में हेयर कलर कराने में विशेष सावधानी बरतें। यदि आपको इससे एलर्जी की शिकायत हो तो इस दौरान हेयर कलर न कराएं। वैसे बेहतर तो यही रहेगा यदि आप इस दौरान कैमिकल रहित हेयर कलर का इस्तेमाल करें। हेयर कलर इस्तेमाल करने से पहले अपने फिजिशियन की राय जरूर ले लें। दरअसल, वह आपको सही हेयर कलर के बारे में गाइड कर देंगी।

अरोमा थैरेपी
मिथक है कि प्रैग्नैंसी में मसाज करवाने से दर्द बढ़ सकता है लेकिन यह सही नहीं है। मसाज से थकान और बॉडी पेन दोनों से राहत मिलती है।  प्रैग्नैंसी  के दौरान स्किन पर काफी प्रैशर होता है खासकर पेट और उसके आसपास का हिस्सा। किसी जैल या सॉफ्ट क्रीम से नाभि के आसपास मसाज करें। इससे स्किन से प्रैशर रिलीज होगा और स्ट्रैच माक्र्स से भी बचाव होगा। प्रैग्नैंसी  के दौरान अरोमा थैरेपी लेने से कोई नुक्सान नहीं है। प्रैग्नैंसी  के दौरान भी मसाज करवाई जा सकती है। आप केरला आयुर्वेदिक मसाज भी करवा सकती हैं, लेकिन मसाज करवाते समय इस बात का विशेष ख्याल रखें कि मसाज हेतु ताकत व दबाव का बहुत कम इस्तेमाल किया जाए अर्थात हल्के हाथों से मसाज की जाए। आप स्पा में जाकर अपनी पसंद का बॉडी रैप भी ले सकती हैं। इससे आप रिलैक्स हो जाएंगी। गर्मियों के लिए चॉकलेट या जिंजर रैप अच्छे माने जाते हैं।

मैनीक्योर-पैडीक्योर
प्रैग्नैंसी  में अमूमन पैरों में दर्द और सूजन हो जाती  है। इसलिए जब भी ज्यादा  थकान महसूस करें तब आप मैनीक्योर और पैडीक्योर करवा सकती हैं। इससे थकान और दर्द से राहत मिलेगी। आप चाहें तो स्पा मैनीक्योर-पैडीक्योर भी करवा सकती हैं। इसमें आम मैनीक्योर-पैडीक्योर की तरह फाइलिंग, स्क्रबिंग और डैड क्यूटिकल्स को हटाने के अलावा पैरों और हाथों के लिए मास्क स्क्रब और स्प्रे भी दिया जाता है।
 
स्ट्रैच मार्क्स से बचाव

प्रैग्नैंसी के बाद कमर और पेट पर स्ट्रैच मार्क्स पड़ जाते हैं। स्ट्रैच मार्क्स का कारण है उन टिश्यू का फट जाना जो त्वचा को  खिंचने में मदद करते हैं। कई बार हार्मोनल इंबैलेंस की वजह से भी स्ट्रैच मार्क्स होने लगते हैं। कई महिलाओं को वातावरण में आए बदलावों के चलते रिएक्शन के रूप में स्ट्रैच मार्क्स होते हैं। जिन महिलाओं की त्वचा रूखी व बेजान होती है, उन्हें स्ट्रैच मार्क्स होने के चांसेज ज्यादा होते हैं। इसलिए ऐसी डाइट का सेवन करें जिसमें विटामिन ई और विटामिन सी भरपूर मात्रा में हों क्योंकि ये कोशिका निर्माण की प्रक्रिया को तेज करते हैं। स्ट्रैच मार्क्स वाले हिस्से में हर रोज विटामिन ई युक्त तेल से अच्छी तरह मसाज करें। अगर इन सब उपायों और इलाज के बावजूद भी आपके स्ट्रैच मार्क्स ठीक नहीं हो रहे हों तो आप लेजर ट्रीटमैंट करवा सकती हैं, मगर इससे पहले डॉक्टर्र से कंसल्ट जरूर करें।

अपनाएं ये टिप्स
♦ प्रैग्नैंसी में स्किन सैल्स में बदलाव की वजह से जरूरी है कि स्किन को नॉर्मल से ज्यादा नरिश और मॉइश्चराइज करें। इससे स्किन को हैल्दी रखा जा सकता है। रैगुलर स्किन केयर रूटीन को फॉलो करें। रोजाना सुबह चेहरा धोने के बाद हल्का-सा मॉइश्चराजर लगाएं, फिर मेकअप करें। रात को सोने से पहले मेकअप साफ करना कभी न भूलें। जब भी चेहरा धोएं तो अच्छे मॉइश्चराइजिंग बॉडी लोशन का इस्तेमाल करें। इससे ड्राई इफैक्ट से बचाव होगा।
♦ स्किन के नैचुरल ऑयल को प्रोटैक्ट करने के लिए परफ्यूम्ड सोप का इस्तेमाल अवॉइड करें। साबुन स्किन से नैचुरल ऑयल चुरा लेता है। इसकी बजाय क्लींजर यूज करें, जो डीप क्लीजिंग करें। यह जरूरी ऑयल्स को मेंटेन रखता है, जिससे आपकी स्किन ग्लोइंग बनी रहती है।
♦  प्रैग्नैंसी के वक्त कई महिलाओं की स्किन काफी ऑयली हो जाती है। इसके लिए हाई क्वालिटी का फेशियल क्लींजर का इस्तेमाल करें।
♦  फेस की स्किन बहुत डैलीकेट होती है इसलिए इसे रगड़ कर कभी साफ न करें। रब करने से हाइपर-पिग्मैंटेशन हो सकता है। पोंछते समय भी हल्के हाथ से पोंछें।
♦  प्रैग्नैंसी के दौरान स्किन पिग्मैंटेशन में बदलाव हो जाता है जिसकी वजह से सनबर्न और टैनिंग आसानी से हो जाता है। यूवी (अल्ट्रा वॉयलैट) फिल्टर वाले प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करें। अपने चेहरे, बांहों, हाथों और पैरों का खास ख्याल रखें।
♦  पानी के कॉन्टैक्ट में ज्यादा समय तक न रहें। पानी स्किन को डिहाइड्रेट कर देता है, जिससे स्किन डल लगने लगती है। इसलिए नहाने में ज्यादा वक्त न लगाएं।
♦  प्रैग्नैंसी के दौरान कई बार ज्यादा लंबे बालों की केयर करनी मुश्किल हो जाती है। लंबे बालों के खराब होने का चांस ज्यादा होता है, जैसे बालों का सफेद होना, झडऩा या फिर उनका दोमुंहा होना। इसलिए बालों की सही ग्रोथ के लिए इनकी ट्रिमिंग कराती रहें।
♦  अच्छा खान-पान भी आपकी लुक्स को प्रभावित करता है। चूंकि प्रैग्नैंसी  के शुरूआती दौर में नॉजिया की समस्या ज्यादा होती है। इसलिए जो पसंद हो वही खाएं। हर दो घंटे के अंतराल पर थोड़ा-थोड़ा खाएं। बाहर की चीजें खाने से बचें। प्रैग्नैंसी  के दूसरे चरण में अपने खान-पान में प्रोटीन युक्त चीजों जैसे दाल, पनीर, अंडा और हरी सब्जियों की मात्रा बढ़ा दें।
♦  डॉक्टर द्वारा बताई गई सभी दवाएं एक निश्चित स्थान पर रखें। सिर दर्द और जुकाम जैसी समस्याओं के लिए खुद ही कोई दवा न लें। कोई भी दवा लेने से पहले डॉक्टर से कंसल्ट जरूर करें।
♦  अगर आप जॉब करती हैं तो लगातार एक ही मुद्रा में न बैठें। दो-तीन घंटे के अंतराल पर अपनी सीट से उठ कर थोड़ी देर के लिए टहलें।
♦  हैल्थ और चाइल्ड केयर से जुड़ी अच्छी किताबें पढ़ें। मनपसंद म्यूजिक सुनें। इससे मन प्रसन्न रहता है और यही खुशी के भाव चेहरे पर झलकते हैं।

ये हैं फायदे
► प्रैग्नैंसी के दौरान स्त्री का एक्टिव  रहना न केवल मां और बच्चे दोनों की सेहत के लिए अच्छा होता है, बल्कि इससे डिलीवरी में भी आसानी होती है। 
► प्रैग्नैंसी  के दौरान अगर आप खुश और एक्टिव रहेंगी तो नॉजिया, थकान और पैरों के दर्द जैसी समस्याओं की ओर आपका ध्यान नहीं जाएगा। इससे आपको तनावमुक्त रहने में मदद मिलेगी।
- मीनाक्षी गांधी
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Monday, April 1, 2013

डिजाइनर ज्यूल्ड मेहंदी के रंग...

 http://epaper.punjabkesari.in/magazine/news/29032013/page/5$

डिजाइनर ज्यूल्ड मेहंदी के रंग...

सदियों से सजने-संवरने के लिए लड़कियां मेहंदी का इस्तेमाल करती आ रही हैं। हालांकि समय के साथ मेहंदी फैशन की वस्तु बन गई और इसमें कई नए ट्रैंडस आ गए, जिस कारण इसकी डिमांड भी बढ़ गई है। इन दिनों हाथ के अलावा, गर्दन, पीठ और पेट पर भी मेहंदी लगाई जाने लगी है। लेटैस्ट ट्रैंड के रूप में उभरती ज्यूल्ड मेहंदी की तो बात ही कुछ और है...

हिंदू परंपरा में मेहंदी को धन, धान्य और सौभाग्य की देवी मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। गहरी लाली रची मेहंदी और चूडिय़ों से भरे हाथों की शोभा ही निराली होती है। मेहंदी सिर्फ शृंगार ही नहीं, जीवन में प्यार व खुशियों का उपहार मानी जाती है। लड़कियां मेहंदी लगवाने के लिए काफी क्रेजी रहती हैं। बाजार में कहीं भी मेहंदी वाला दिख जाए, इनका मन हाथों पर सुंदर डिजाइन बनवाने को लालायित हो जाता है। मेहंदी के पारंपरिक डिजाइनों का आकर्षण तो सदाबहार है परंतु बदलते वक्त के साथ इसमें कुछ नए स्टाइल्स का भी समावेश हुआ है, जो आपके हाथों की खूबसूरती निखारने के साथ आपको एक अलग ही लुक देते हैं। मेहंदी में तरह-तरह के एक्सपैरीमैंट्स हो रहे हैं।

ऐसे बनाएं मेहंदी का पेस्ट

बढिय़ा क्वालिटी के मेहंदी पाऊडर को मलमल के बारीक कपड़े से दो-तीन बार छानें। मेहंदी में कुछ बूंदें नींबू का रस, आठ-दस बूंदें नीलगिरी का तेल और जरूरत के हिसाब से पानी मिला कर गाढ़ा पेस्ट बना लें। मेहंदी गहरी रचाने के लिए कुछ बूंदें मेहंदी का तेल व चुटकी भर कत्था भी मिला सकती हैं। परफैक्ट टैक्सचर पाने के लिए कटी हुई ङ्क्षभडी का पानी लें। उस पानी में मेहंदी को तकरीबन दो घंटे के लिए भिगो दें। इसे लगाएं। फिर देखिए मेहंदी कैसे खिलकर आती है। इमली और चाय की पत्ती को पानी में उबाल लें और बाद में इसी पानी में मेहंदी पाऊडर को मिलाने से मेहंदी का रंग बहुत गहरा आता है।

 
अरेबियन मेहंदी
अरेबियन स्टाइल में मोटे-मोटे फूल-पत्तियों वाले डिजाइन खूब चलन में हैं। अरेबियन मेहंदी में ब्लैक कैमिकल से आऊटलाइन की जाती है और फिर बीच में हरी मेहंदी से शेडिंग कर दी जाती है या उसे पूरा भर दिया जाता है। इससे डिजाइन उभर कर तो आता ही है मेहंदी भी खूब अच्छी तरह रचती है। काले और सुर्ख लाल रंग लिए इस मेहंदी पर भी आप अपनी ड्रैस के रंग व डिजाइन से मैच करते रंग-बिरंगे स्टोंस और कुंदन लगवा सकते हैं। इन दिनों अरेबियन मेहंदी को अलग रंग से आऊटलाइन करके अलग स्टाइल भी दिया जा रहा है। इसके अलावा अरेबियन विदाऊट लाइन भी ट्रैंड में है।
जरदोजी मेहंदी
जरदोजी मेहंदी आपके हाथों की खूबसूरती निखारने के साथ आपको एक अलग ही लुक देगी। किसी विशेष पार्टी, फैस्टिवल या शादी के मौके पर लड़कियां हाथों और पैरों के अलावा पीठ, बाजू और यहां तक कि नाभि पर जरदोजी मेहंदी का डिजाइन बनवाती हैं। जरदोजी मेहंदी सिल्वर या गोल्डन शेड लिए होती है। मेहंदी रचे हाथों में सिल्वर या गोल्डन ग्लिटर से डिजाइन बनाया जाता है। इससे मेहंदी की सुंदरता और भी कई गुणा बढ़ जाती है और उसमें चमक भी आ जाती है। इसके बाद ब्लैक और रैड कलर लिए इस मेहंदी पर आप रंग-बिरंगे स्टोन या कुंदन भी लगवा सकती हैं। आप मोर, फूल-पत्तियां, ट्राइबल, कराची या अफगानी डिजाइन भी बनवा सकती हैं। जितनी बढिय़ा आर्टिस्ट की कल्पना होगी, उतना ही सुंदर आपके हाथ पर मेहंदी का डिजाइन उभरेगा। 
टैटू मेहंदी
परमानैंट टैटू धीरे-धीरे फैशन से आऊट होने लगे हैं और युवा यूज एंड थ्रो टैटूज पसंद करने लगे हैं। आजकल लड़कियों में ड्रैस के अनुसार मेहंदी टैटू का क्रेज बहुत ज्यादा है। लड़कियों में बाजुओं, पेट और पीठ पर स्माल फिगर्स जैसे कलरफुल बटरफ्लाई, एंजिल फेस, डंक मारते बिच्छु, ड्रैगन आदि टैटू बनवाने का चलन काफी है। ये टैटू सोबर और स्मार्ट लुक तो देते ही हैं, साथ ही आपको स्टाइलिश लोगों की कैटेगरी में भी ला देते हैं। लड़कियां ज्यूल्ड मेहंदी को टैटू की तरह लगवाना पसंद कर रही हैं और इसमें ड्रैस के अनुसार रेड, मैरून, ग्रीन, ब्लू जैसे ब्राइट कलर अपना जादू चला रहे हैं।
मारवाड़ी मेहंदी
दुनियाभर में राजस्थानी मारवाड़ी मेहंदी को बेहद पसंद किया जाता है। इसमें मेहंदी के डिजाइन को बहुत खूबसूरती से उकेरा जाता है। ये डिजाइंस बहुत महीन और घने होते हैं। यही वजह है ब्राइड्स में यह मेहंदी बेहद पसंद की जाती है। परंपरागत मेहंदी पसंद करने वालों को मारवाड़ी मेहंदी के डिजाइन बहुत पसंद आते हैं। राजस्थानी मेहंदी की खासियत यह है कि दोनों हाथों की मेहंदी हू-ब-हू एक जैसी होती है। यही कारण है कि इसे लगाना आसान नहीं होता। इसके विभिन्न प्रकार की डिजाइंस में शहनाई, ढोलक, बैंडबाजे, मोर आदि मंगल-सूचक पक्षी, आसमान में घिरे बादलों जैसी कलाकृतियां शामिल हैं, जो राजस्थान की संस्कृति, सभ्यता और खूबसूरती को दर्शाती हैं। इनमें मेहंदी में बाजुओं पर कड़े के स्टाइल में डिजाइन बनाया जाता है।
कलरफुल फैंटेसी मेहंदी 
कलरफुल मेहंदी के लोकप्रिय होने का एक प्रमुख कारण है इसका आम मेहंदी के मुकाबले ज्यादा स्टाइलिश व कलरफुल होना। अगर आप अपने हाथों पर एक ही मेहंदी का डिजाइन बनवा-बनवा कर बोर हो गई हैं, तो कलरफुल मेहंदी को आजमा सकती हैं। आज कल मैचिंग का जमाना है। ज्यूलरी, फुटवियर, एक्सैसरीज सब ड्रैस से मैच करके खरीदे जाते हैं, ऐसे में मेहंदी कैसे पीछे रह सकती है। अब तो मेहंदी भी ड्रैस की मैचिंग के हिसाब से ही लगाई जाने लगी है। आप भी अपनी ड्रैस और ज्यूलरी के अनुसार अपने हाथों पर मैच करते कलर्स से मेहंदी का डिजाइन बनवा सकती हैं। यह मेहंदी देखने में काफी खूबसूरत लगती है। आजकल मार्कीट में कलरफुल मेहंदी के कोन्स भी मिलने लगे हैं। इसमें डिजाइन के ऊपर शेडिंग का चलन भी जोरों पर है।
ज्यूल्ड मेहंदी
मेहंदी का एक नया रूप है ज्यूल्ड मेहंदी। इसमें मेहंदी के साथ क्रिस्टल, कुंदन, स्वरोस्की, नग, स्पार्कल डस्ट, कलर्स, सितारे, मोतियों और फर आदि ज्यूलरी का इस्तेमाल किया जाता है। ज्यूल्ड मेहंदी के डिजाइन ऐसे लगते हैं जैसे वाकई आपने ज्यूलरी पहनी हुई हो। लड़कियां हैवी ज्यूलरी की जगह ज्यूल्ड मेहंदी के नैकलेस और बाजूबंद पसंद करने लगी हैं। आप हाथों पर खूबसूरत चूडिय़ां व कड़े डिजाइन करवा सकती हैं। इन दिनों ज्यूल्ड मेहंदी में हाथ फूल, करघनी, ब्रेसलैट व पाजेब डिजाइन करवाना भी ट्रैंड में है।


रंग निखरेगा मेहंदी का
  • आपके हाथों में मेहंदी कितने बेहतर तरीके से रचेगी यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि आपके शरीर का सामान्य तापमान कितना है। जिन लड़कियों का सामान्य तापमान ज्यादा होता है, उनकी मेहंदी ज्यादा रचती है।
  • मेहंदी लगाने से पहले हाथों को अच्छी तरह धो लें और हथेलियों में मेहंदी के तेल की कुछ बूंदें लगा लें।
  • मेहंदी लगाते समय कोन को हल्के हाथों से दबाएं न कि जोर से। मेहंदी का प्रयोग नाखूनों पर नहीं करें।
  • मेहंदी लगानी न आती हो तो पहले पैंसिल से हाथ पर डिजाइन बना लें।
  • कटोरी में नींबू के रस में चीनी मिलाकर रखें। जब मेहंदी सूखने लगे, तो रूई के फाहे से यह मिश्रण मेहंदी पर लगाएं। इससे मेहंदी ज्यादा देर तक टिकेगी और मेहंदी का रंग त्वचा में और बेहतर तरीके से जाएगा।
  • मेहंदी को 3-4 घंटे तक हाथों पर लगी रहने दें।
  • मेहंदी उतारने के लिए क्रैडिट कार्ड या बिना धार वाले चाकू का इस्तेमाल कर सकती हैं।
  • मेहंदी उखाडऩे के बाद हाथों में सरसों का तेल लगा लें और कोशिश करें कि 12 से 13 घंटे तक मेहंदी वाले स्थान पर पानी न लगे।
  • मेहंदी लगाने के बाद उस पर पॉलिथीन न लपेटें। ऐसा करने से हाथ या पैर से ज्यादा पसीना निकलने लगेगा और मेहंदी का डिजाइन बिगड़ जाएगा।
  • कई लोग काली मेहंदी का भी इस्तेमाल हाथों पर कर लेते हैं, पर ऐसा करना आपकी त्वचा के लिए नुक्सानदेह साबित हो सकता है। काली मेहंदी में पी.पी.डी. नामक कैमिकल होता है, जिसकी वजह से त्वचा में खुजली आदि हो सकती है।   

खूबसूरती की दुश्मन ‘गलतियां’

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खूबसूरती की दुश्मन ‘गलतियां’

सुंदर दिखना सबका हक है, पर खूबसूरती को बढ़ाने और खुद को स्टाइलिश लुक देने के चक्कर में कई बार हम कुछ ऐसी गलतियां कर जाते हैं जो खूबसूरत चेहरे पर बदनुमा धब्बा बन कर सुंदरता को हर लेती हैं। सही जानकारी के अभाव में गलतियां किसी से भी हो सकती हैं। आपसे ऐसी कोई गलती न हो, इसलिए हम आपको स्मार्ट तराके बता रहे हैं खूबसूरती को कायम रखने के...

टैटूज : टैटू पर्सनल स्टेटमेंट बन चुके हैं। यही वजह है कि यंगस्टर्स के बीच टैटू गुदवाने का क्रेज बढ़ गया है। टैटूज को यदि सही सामग्री तथा हाईजीन से न गुदवाया जाए तो इससे गंभीर संक्रमण तथा एलॢजक रिएक्शन हो सकता है। इसका कारण यह है कि टैटू बनाने के लिए उपयोग में लाए जाने वाले ज्यादातर रसायन औद्योगिक रसायन होते हैं जिनका उपयोग वाहनों के पेंट या फिर स्याही बनाने में होता है। इन रासायनों का उपयोग शरीर के किसी भी हिस्से में करना कतई सुरक्षित नहीं है। समुद्र तटों पर किए जाने वाले अस्थायी हिना टैटूज में पैरा-फिनाइलेने डायामाइन (पी.पी.डी.) हो सकती है। यह एक प्रकार की स्थायी डाई है जो आसानी से एलॢजक रिएक्शन कर सकती है और इससे सूजन पैदा हो सकती है। शोध रिपोर्ट में कहा गया है कि जो लोग बिना हाईजीन का ध्यान रखे टैटू गुदवा रहे हैं उन्हें हैपेटाइटिस, एचआईवी, त्वचा के संक्रमण और यहां तक कि त्वचा के कैंसर का खतरा भी हो सकता है। इसलिए इस बात को यकीनी बनाएं कि टैटू किसी मान्यता प्राप्त कलाकार से ही गुदवाएं।

बॉडी पियरसिंग : युवाओं का नया फैशन स्टेटमेंट हैं बॉडी पियरसिंग। पियरसिंग से युवतियां खुद को थोड़ा सैक्सी लुक देना चाहती हैं। वहीं युवा अपने आप को रॉक-स्टार जैसा महसूस करते हैं। अब युवा न सिर्फ कान, नाक बल्कि होंठ ,जीभ और यहां तक नाभि पर भी छेद करवाकर बालियां या छोटी सी कील डालने लगे हैं। आइब्रो पर छेद करवाना तो आम बात हो गई है। पियरसिंग यदि हाईजीनिक तरीके से नहीं हुई तो तो इससे लोकल इंफैक्शन तथा कैलोइड्स इत्यादि हो सकते हैं। ऐसे संक्रमणों से बचने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि पियरसिंग के बाद साफ-सफाई का हमेशा पूरा ध्यान रखा जाए। किसी अच्छे प्रोफैशनल से ही बॉडी पियरसिंग कराएं। सुरक्षित और बिना इस्तेमाल की हुई सुई का प्रयोग करने के लिए कहें। अगर आप अपनी जीभ पर छेद करवा रहे हैं तो उस दिन सिर्फ तरल पदार्थ का ही सेवन करें। यह भी सलाह दी जाती है कि किसी भी अंग की पियरसिंग कराने के 2 से 3 हफ्ते के बाद तक कच्चे फल और सब्जियां न खाएं। शरीर के पियर्स किए गए हिस्सों में कृत्रिम ज्यूलरी पहनना भी सही नहीं है। जख्म होने की स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। इसमें लापरवाही न बरतें।

हैवी मेकअप : सुंदर या प्रेजेंटेबल दिखना किसी के भी व्यक्तित्व का प्लस पॉइंट हो सकता है, बशर्ते उसने मेकअप को सही तरीके से अप्लाई किया हो। खूबसूरती निखारने के लिए यह जरूरी नहीं कि बहुत सारे मेकअप प्रोडक्ड्स को यूज किया जाए। आप चाहें तो कम मेकअप से भी अपनी खूबसूरती में दुगुना निखार ला सकती हैं। हमेशा नैचुरल लुक को ही तवज्जो दें यानी ब्राइट मेकअप की जगह लाइट मेकअप को अपनाएं। दिन के समय आप एकदम हल्का मेकअप रखें और केवल आंख, होंठ आदि फीचर्स को हाईलाइट करने पर ध्यान दें। मेकअप के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले समान में लेड यानी सीसा की मात्रा होती है जो सीधा आपके मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा सकती है। कई महिलाएं अक्सर चेहरे पर से डार्क स्पाट्स  पिगमैंटेशन को छुपाने के लिए ढेर सारा मेकअप थोप लेती हैं। हैवी मेकअप त्वचा के रोम छिद्रों को बाधित कर देता है जिस कारण मुहांसे पैदा होते हैं। इसके साथ ही इससे त्वचा समय से पहले ही झुर्रीदार हो जाती है। रात को सोते समय चेहरे के रोम छिद्रों को खुला छोड़ देना चाहिए, ताकि वे भी खुलकर सांस ले सकें। रातभर चेहरे पर मेकअप लगा रहने से भी त्वचा को भारी नुकसान पहुंच सकता है। रात को सोने से पहले त्वचा को सही ढंग से साफ करना बहुत जरूरी है, इससे चेहरे का मेकअप तो हटता ही है साथ ही धूल, प्रदूषण, चिपचिपापन आदि भी दूर होता है।

एक्सपायर्ड सौंदर्य उत्पाद : महिलाएं अक्सर महंगे सौंदर्य उत्पादों को खरीद तो लेती हैं लेकिन फिर उन्हें कीमती खजाने की तरह संभाल कर रखने की इच्छुक रहती हैं। इस तरह कई बार मेकअप के कई सामान बिना इस्तेमाल के ही खराब हो जाते हैं। इन उत्पादों में कुछ ऐसी सामग्री तथा प्रिजर्वेटिव मौजूद होते हैं जो एक्सपायरी डेट के बाद आपकी त्वचा तथा सेहत के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। एक्सपायर होने पर मेकअप के सामान में हानिकारक पदार्थ और बैक्टीरिया उत्पन्न हो जाते हैं, जिससे पिग्मेंटेशन और रैशेज होने की आशंका बढ़ जाती है।  कट या चोट लगी जगह पर एक्सपायर्ड सौंदर्य उत्पादों का इस्तेमाल आपकी त्वचा के लिए हानिकारक हो जाता है। अगर आप एक्सपायर्ड आईलाइनर का इस्तेमाल करती हैं तो इससे आपकी आंखों में संक्रमण हो सकता है। एक्सपायर्ड कॉम्पैक्ट पाऊडर के प्रयोग से चेहरे पर दाग-धब्बे पड़ जाते हैं। इसके अलावा चेहरे पर दाने निकलना, त्वचा का लाल हो जाना और एलर्जी की समस्या भी हो सकती है। तथ्य यह है कि आपको हमेशा सौंदर्य उत्पादों की शैल्फ लाइफ के बारे में जानकारी होना आवश्यक है।

कलर्ड लैंसिंज : यूथ के बीच स्टाइलिश लुक के लिए कलरफुल लैंसिज का चलन आजकल खूब देखा जा रहा है। खासतौर पर गल्र्स तो इसकी दीवानी हैं। लेकिन अपनी स्टाइलिश आंखों से दूसरों को दीवाना बनाने के चक्कर में अक्सर वे अपनी आइ सेफ्टी का ध्यान रखना भूल जाती हैं। फैशन के साथ आंखों की सेफ्टी का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है, क्योंकि आंखें आपकी बॉडी के सबसे इम्पोर्टेंट पाट्र्स में से एक हैं। लैंस पहनने से पहले यह महत्वपूर्ण है कि उन्हें स्टरलाइज कर लिया जाए क्योंकि  कम गुणवत्ता वाले कांटैक्ट लैंसिंज आंखों को प्रभावित कर सकते हैं। इसके साथ ही इस बात को भी यकीनी बनाएं कि लैंस का  आकार या डायामीटर कोॢनया को कवर करता हो। आपको किसी भी तरह का आई इंफेक्शन हो, कंजंक्टिवाइटिस, आई रेडनेस, अल्सर, ड्राईनेस, वॉटरी आईज या फिर हाल ही में कोई आई सर्जरी हुई हो, तो लैंस हरगिज न पहनें। बेहतर होगा कि आप लगातार छह घंटे से ज्यादा कलर्ड लैंंस न पहनें। अगर इससे ज्यादा पहनने की जरूरत हो, तो इन्हें निकालकर क्लीन कर लें। फिर उन्हें 20 मिनट तक रिहाइड्रेट करें। इसके बाद वापस इन्हें छह घंटे के लिए पहना जा सकता है। जिन लोगों को किसी तरह की आई एलर्जी है, वे किसी भी कंडीशन में छह घंटे से ज्यादा लैंस न पहनें। अगर आप डस्टी या स्मोकी एरिया में जा रहे हैं, तो आपको और भी ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। अगर आप डायबिटीक हैं, तो भी केयरफुल रहें। अगर आपकी आंखों में वाइट स्पॉट अपीयर होता है, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। यह विजन के लिए खतरनाक हो सकता है। लैंस पहनकर कभी न सोएं। किसी के साथ लैंस शेयर न करें। इससे माइक्रो ऑर्गनिज्म इंफैक्शन हो सकता है।

मेकअप शेयरिंग : महिलाएं अक्सर अपने मेकअप प्रोडक्ट्स अपनी सहेलियों के साथ शेयर कर लेती हैं। माना कि दोस्ती के नाते शेयरिंग की आदत बहुत अच्छी है लेकिन कभी-कभार यही अच्छी आदत आपकी सेहत के साथ खिलवाड़ भी कर सकती है। अगर आप अपना आई लाइनर, मस्कारा, फेस क्रीम या लिपस्टिक शेयर करती हैं तो सामने वाले की स्किन के बैक्टीरिया व जम्र्स आपके प्रोडक्ट के जरिए आप तक पहुंच कर आपको भी संक्रमित कर सकते हैं। लिपस्टिक, आई मेकअप इत्यादि की शेयरिंग से हर्पीज वायरस फैलने का खतरा अधिक होता है। लिपस्टिक शेयर करने का मतलब है किसी दूसरे की बीमारी को अपने पास बुलाना। किसी दूसरे की कंघी का इस्तेमाल न करें। इससे डैंड्रफ और बाल गिरने जैसी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। आई लाइनर, काजल, मस्कारा इत्यादि शेयर करने से आंखों में कई तरह की इंफैक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है, जैसे-आंखों से पानी आना, लाल होना। सबसे ज्यादा जोखिम कंजक्टिवाइटिस का होता है। कीटाणुओं से भरे हाथों से कॉस्मैटिक का इस्तेमाल करने से संक्रामक रोगों के फैलने की संभावना बहुत बढ़ जाती है। मेकअप करने से पहले साबुन-पानी या हैंड सैनीटाइजर से अपने हाथ जरूर धो लें।

Friday, March 22, 2013

होली एक रंग अनेक

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होली एक रंग अनेक
फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला रंगों का त्यौहार होली पारंपरिक रूप से दो दिन मनाया जाता है। होली के एक दिन पहले लोग रात को होलिका जलाते हैं जिसमें वैर और उत्पीडऩ की प्रतीक होलिका जलती है। उसके अगले दिन दुलेंडी मनाई जाती है। दुलेंडी पर सभी एक-दूसरे पर गुलाल बरसाते हैं तथा पिचकारियों से गीले रंग लगाते हैं।  होली पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है हालांकि इसको मनाने के तरीके हर जगह अलग होते हैं, परन्तु उल्लास और मस्ती की मूल भावना एक समान ही है। भारत की इस सम्मोहक परम्परा को अन्य देशों ने भी अपने-अपने ढंग से सहेजने की कोशिश की है। वहां या तो होली से मिलता-जुलता कोई त्यौहार मनाया जाता है या किसी अन्य अवसर पर रंग या सादे पानी से खेलने की परंपरा है। होली एक ही है, लेकिन उसके रूप अवश्य अनेक हैं...

वृंदावन में ‘फूलों की होली’

वृंदावन में एकादशी के साथ ही होली का त्यौहार शुरू हो जाता है। एकादशी के दूसरे दिन से ही कृष्ण और राधा से जुड़े सभी मंदिरों में फूलों की होली खेली जाती है। फूलों की होली में ढेर सारे फूल एकत्रित कर एक-दूसरे पर फैंके जाते हैं। राधे-राधे की गूंज के बीच आसमान से होली पर बरसते पुष्पों का नजारा द्वापर युग की याद दिला देता है। वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर की होली की छटा अनोखी होती है। बांके बिहारी जी की मूर्ति को मंदिर से बाहर रख दिया जाता है, मानो बिहारी जी स्वयं ही होली खेलने आ रहे हों। यहां होली सात दिनों तक चलती है। सबसे पहले फूलों से, इसके बाद गुलाल, सूखे रंगों और गीले रंगों से होली खेली जाती है। अपने आराध्य के साथ होली खेलने के लिए लोग कई घंटों तक लाईन में लगे रहते हैं।

बरसाने की ‘लट्ठमार होली’

ब्रज के बरसाना गांव की ‘‘लट्ठमार होली’ विश्व भर में प्रसिद्ध है। यह होली से कुछ दिन पहले खेली जाती है। यहां होली को श्री कृष्ण और राधा के प्रेम से जोड़ कर देखा जाता है। कहा जाता है कि श्री कृष्ण और उनके दोस्त राधा और उनकी सहेलियों को तंग करते थे जिस पर उन्हें मार पड़ती थी। इसीलिए यहां होली पर मुख्यत: नंद गांव के पुरुष और बरसाने की महिलाएं भाग लेती हैं, क्योंकि कृष्ण नंद गांव के थे और राधा बरसाने की थीं। नंद गांव की टोलियां जब पिचकारियां लिए बरसाना पहुंचती हैं तो ढोल की थाप पर बरसाने की महिलाएं पुरुषों को लाठियों से पीटती हैं। पुरुषों को इन लाठियों से बचना होता है और साथ ही महिलाओं को रंगों से भिगोना होता है। इस दौरान हजारों की संख्या में लोग उन पर रंग फैंकते हैं।

पंजाब का ‘होला महल्ला’
सिखों के पवित्र धर्मस्थान श्री आनन्दपुर साहिब में होली के अगले दिन से लगने वाले मेले को होला महल्ला कहते हैं। दशम गुरु गोबिन्द सिंह जी ने स्वयं इस मेले की परम्परा शुरू की थी। पंज प्यारे जुलूस का नेतृत्व करते हुए रंगों की बरसात करते हैं और निहंगों के अखाड़े नंगी तलवारों के करतब दिखा कर साहस, पौरुष और उल्लास का प्रदर्शन करते हैं। यह जुलूस हिमाचल प्रदेश की सीमा पर बहती एक छोटी नदी चरण गंगा के तट पर समाप्त होता है। होला महल्ला के पीछे ऐतिहासिक कहानी यह है कि मुगलों का सामना करने के लिए गुरु गोबिंद सिंह ने अपने लाडलों को युद्ध का प्रशिक्षण दिया था जिसमें वे बनावटी युद्ध कर हल्ला मचाते थे। इस प्रशिक्षण की शुरूआत होली के दिन ही हुई थी, इसलिए इसे होला महल्ला नाम दिया गया है।

हरियाणा की ‘धुलेंडी’
भारतीय संस्कृति में रिश्तों और कुदरत के बीच सामंजस्य का अनोखा मिश्रण हरियाणा की होली में देखने को मिलता है। हरियाणा में इसे अलग अंदाज में मनाया जाता है। यहां होली धुलेंडी के रूप में मनाई जाती है। वैसे तो हरियाणा की होली भी बरसाने की ल_मार होली जैसी ही होती है, लेकिन इसमें कुछ अंतर भी है। यहां इस दिन भाभियों को अपने देवरों को पीटने की पूरी छूट रहती है। इसी का फायदा उठाते हुए भाभियां अपने देवरों द्वारा उनके साथ की गई शरारतों का बदला लेती हैं। भाभियां देवरों को तरह-तरह से सताती हैं और देवर बेचारे चुपचाप झेलते हैं, क्योंकि यह दिन भाभियों के नाम जो रहता है। शाम को देवर अपनी प्यारी भाभी को मनाने और खुश करने के लिए उपहार लाता है और भाभी उसे आशीर्वाद देती है।

बिहार की ‘फागु पूर्णिमा’
फागु मतलब लाल रंग और पूर्णिमा यानी पूरा चांद। बिहार में होली के मौके पर गाए जाने वाले फगुआ की अपनी गायन शैली की अलग पहचान है। इसीलिए यहां होली को फगुआ नाम से भी जानते हैं। बिहार और इससे लगे उत्तरप्रदेश के कुछ हिस्सों में इसे हिंदी नववर्ष के उत्सव के रूप में मनाते हैं। यहां होली का त्यौहार तीन दिन तक मनाया जाता है। पहले दिन रात में होलिका दहन होता है। अगले दिन इससे निकली राख से होली खेली जाती है, जो धुलेठी कहलाती है और तीसरा दिन रंगों का होता है। होली के दिन लोग ढोलक की धुन पर नृत्य करते, लोकगीत गाते हुए एक-दूसरे को रंग से सराबोर करते हैं। राज्य में कई स्थानों पर कीचड़ से होली खेली जाती है तो कई स्थानों पर ‘कपड़ा फाड़’ होली खेलने की भी परंपरा है।

महाराष्ट्र की ‘रंग पंचमी’
महाराष्ट्र में होली को रंगपंचमी के नाम से भी जाना जाता है। होली में यहां लोग पांच दिन तक रंगों में सराबोर रहते हैं और पंचमी के दिन भी जमकर होली खेलते हैं। लोग होली पर एक-दूसरे से मिलने उनके घर जाते हैं और काफी समय मस्ती में बीतता है। गुजरात व महाराष्ट्र में इस मौके पर जगह-जगह पर दही-हांडी फोडऩे का कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। ऊंची-ऊंची इमारतों के बीच दही की मटकियां लगाई जाती हैं। यह भगवान कृष्ण के गोपियों की मटकी फोडऩे से प्रेरित है। चारों ओर ‘गोविन्दा आला रे आला, जरा मटकी संभाल ब्रिज बाला’ की गूंज सुनाई देती है। मटकी नहीं फूटे इसलिए लड़कियां इन टोलियों पर रंगों की बौछार करती रहती हैं। जो युवक मटकी को फोड़ देता है, वह होली राजा बन जाता है। 

मध्य प्रदेश में 'भगौरिया'
मध्य प्रदेश के भील होली को भगौरिया कहते हैं। यहां के भील युवकों के लिए होली अपने लिए प्रेमिका को चुनकर भगा ले जाने का त्योहार है। होली से पहले हाट के अवसर पर हाथों में गुलाल लिए भील युवक ‘मांदल’ की थाप पर सामूहिक नृत्य करते हैं। नृत्य करते-करते जब युवक किसी युवती के मुंह पर गुलाल लगाता है और वह भी बदले में गुलाल लगा देती है तो मान लिया जाता है कि दोनों विवाह सूत्र में बंधने के लिए सहमत हैं। युवती द्वारा प्रत्युत्तर न देने पर युवक दूसरी लड़की की तलाश में जुट जाता है।
 
राजस्थान की होली
राजस्थान में होली के अवसर पर तमाशे की परंपरा है। इसमें किसी नुक्कड़ नाटक की शैली में मंच सज्जा के साथ कलाकार आते हैं और नृत्य और अभिनय से परिपूर्ण अपने पारंपरिक हुनर का प्रदर्शन करते हैं। तमाशा की विषय वस्तु पौराणिक कहानियों और चरित्रों के इर्दगिर्द घूमती हुई इन चरित्रों के माध्यम से सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था पर भी व्यंग्य करती है।

कैलिफोर्निया का ‘ग्रेप स्टैम्प फैस्टिवल’

अमेरिका के कैलिफोर्निया प्रांत में अंगूर की अच्छी पैदावार की खुशी मनाने के लिए ‘ग्रेप स्टैम्प फैस्टिवल’ मनाया जाता है। यह हर साल सितम्बर माह के तीसरे वीकएंड में मनाया जाता है। इस त्यौहार के दौरान यहां पारिवारिक माहौल रहता है। यही कारण है कि सभी आयुवर्ग के लोग इसमें पूरी मस्ती से भाग लेते हैं। हंसते-गाते हुए बच्चे अपने पैरों से अंगूरों को मसलते हैं और उसका जूस निकालते हैं। इस जूस को बड़े-बड़े बर्तनों में इकट्ठा किया जाता है, यकीनन इस जूस को बाद में पिया नहीं जाता है। ऐसा सिर्फ फन और मस्ती के लिए ही किया जाता है। इस मौके पर इटैलियन म्यूजिक बजाया जाता है, डांस पार्टी होती है, प्ले कम्प्टीशन करवाए जाते हैं और कई प्रकार के व्यंजनों की भी व्यवस्था होती है।

अमरीका का ‘मेडफो’, ‘हैलोइन’ व ‘होबो’
अमरीका में ‘मेडफो’ नामक त्यौहार मनाने के लिए लोग नदी के किनारे एकत्र होते हैं और गोबर तथा कीचड़ से बने गोलों से एक-दूसरे पर आक्रमण करते हैं। अमेरिका में होली जैसा ही एक और मस्ती भरा त्यौहार मनाया जाता है, जिसका नाम है होबो। इस अवसर पर लोग मस्ती में झूमते हुए पागलों-सा व्यवहार करते हैं। जो सबसे ज्यादा बेहूदगी करता है, उसे विजेता मान कर ताज पहनाया जाता है। इस अवसर पर लोग अजब-गजब पोशाकें पहन कर आते हैं। चेहरे पर इस तरह रंग पोता जाता है कि घर वाले भी पहचान नहीं पाते। 31 अक्तूबर को रंगों का त्यौहार ‘हैलोइन’ मनाया जाता है। बच्चे और बड़े भूतहा वेशभूषा में नजर आते हैं तथा हर ओर दिखती है हाहाकारी भूतहा सजावट।

स्पेन का ‘ला टोमेटिना’
स्पेन में भी लाखों टन टमाटर एक-दूसरे को मार कर होली खेली जाती है। वेलेंसियन के कस्बे बुनोल में 1940 से यह त्यौहार हर साल अगस्त के अंतिम बुधवार को मनाया जाता है। कई ट्रक यहां टमाटर फैंकते हैं और फिर शुरू होता है टमाटर उत्सव।  इस दौरान लोग खूब नाचते-गाते हैं। लोग घरों की छतों से पानी फैंकते हैं। इस त्यौहार को मनाने के कुछ नियम भी हैं-टमाटर से किसी को चोट न लगे इसलिए टमाटर को फैंकने से पहले मसलना या कुचलना जरूरी है। आप टमाटर के अलावा कुछ और नहीं फैंक सकते। आप अपनी शर्ट नहीं उतार सकते यानी कपड़ों समेत ही आपको टमाटरों की लड़ाई का मकाा लेना है। उत्सव खत्म होने के बाद आप टमाटर नहीं उछाल सकते। आपके हाथ में पकड़ा हुआ टमाटर भी आपको फैंकना पड़ता है।

थाईलैंड का ‘सॉनाक्रन’
थाईलैंड में हर साल 13 अप्रैल को ‘सॉनाक्रन’ मनाया जाता है। यह उत्सव तीन दिन तक चलता है। ‘सॉनाक्रन’ का मतलब स्थान बदलना होता है। दरअसल इसी दिन सूर्य अपनी स्थिति बदलता है। यह वाटर फैस्टिवल भी कहलाता है, क्योंकि यहां मान्यता है कि पानी बैड लक को धो देता है। इस दिन परिवार के सभी लोग एक जगह इकट्ठे होते हैं। माता-पिता व घर के बुजुर्गों के हाथों पर सुगंधित पानी छिड़का जाता है और उन्हें उपहार और नए वस्त्र दिए जाते हैं। बड़े-बुजुर्ग छोटों को आशीर्वाद देते हैं। दोपहर में लोग मठ में भगवान बुद्ध की मूॢत को स्नान करवाते हैं, भिक्षुओं को दान देते हैं और फिर सभी एक-दूसरे पर सुगंधित पानी फैंक कर खुशियां मनाते हैं। परस्पर हंसी-मजाक, चुहलबाजियां इस त्यौहार को एकदम होली की भांति संवार देती हैं।

घाना का ‘होमोवो’
अफ्रीकी देश घाना में होली की तरह होमोवो का त्यौहार मनाया जाता है।  अन्यायी राजा को लोगों ने जिंदा जला डाला था। इस दिन उसका पुतला जला कर ड्रम की तेज आवाज पर रात में लोग खूब नाचते-गाते हैं। घाना की महत्वपूर्ण फसल शकरकंद और उबले अंडों से एक खास डिश तैयार की जाती है, जिसे लोग बड़े चाव से खाते हैं। इस दिन गांव के मुखिया से आशीर्वाद लिया जाता है। लोग चमकीले रंग का खास परिधान भी पहनते हैं।  अफ्रीकी महाद्वीप के कुछ देशों में ‘ओमेना बोंगा’ नाम से उत्सव मनाया जाता है। इसमें हमारे देश की होली के समान ही एक जंगली देवता को जलाया जाता है। इस देवता को ‘प्रिन बोंगा’ कहते हैं। इसे जला कर नाच-गाकर नई फसल के स्वागत में खुशियां मनाई जाती हैं।

चीन में ‘मून फैस्टिवल’
चाइनीज कैलेंडर के अनुसार, आठवें महीने के 15वें दिन चीन में मून फैस्टिवल मनाया जाता है। चावल और गेहूं की अच्छी फसल होने की खुशी में यह त्यौहार मनाया जाता है। इस समय पूरा चंद्रमा दिखाई देता है। चीनी किंवदंती के अनुसार इस दिन चंद्रमा का जन्मदिन होता है। कथा के अनुसार चांग ओ नामक महिला उड़कर चंद्रमा तक पहुंच गई थी। वह आज भी वहीं है और पूरे चांद में दिखाई देती है। माना जाता है कि मून फैस्टिवल के दौरान आप उसे चंद्रमा पर नाचते हुए देख सकते हैं। इस दिन लोग पूरे परिवार के साथ फुल मून देखते हैं, जो अच्छे भाग्य और मधुर संबंधों का प्रतीक माना जाता है। परिवार के सभी लोग मिलकर केक खाते हैं और चंद्रमा की कविताएं सुनाते हैं।

पोलैंड का आर्सिना
पोलैंड के लोग होली की तरह आर्सिना नामक त्योहार मनाते हैं। इसमें लोग टोलियां बनाकर एक-दूसरे पर रंग और गुलाल मलते हैं और गले मिलते हैं। ये रंग फूलों से निर्मित होने के कारण काफी सुगंधित होता है। पुरानी दुश्मनी भुलाकर नए सिरे से दोस्ती स्थापित करने के लिए यह त्योहार मनाया जाता है। 

चेकोस्लोवाकिया का बलिया कनौसे
चेकोस्लोवाकिया में ‘बलिया कनौसे’ नाम से एक त्योहार बिल्कुल की ही होली तरह मनाया जाता है। इस अवसर पर लोग एक-दूसरे पर रंग डालते है और नाचते-गाते हुए खुशियां मनाते हैं।
 
इटली का बेलियाकोनोन्स
अन्न की देवी को खुश करने और खेती की उन्नति के लिए इटली के लोग होली की ही तरह बेलियाकोनोन्स नामक त्योहार मनाते हैं। लोग शाम को ऊंचे स्थान पर लकडिय़ां जलाते हैं, अग्नि के आगे नाचते-गाते हैं और खुशियां मनाते हैं। इस अवसर पर आतिशबाजी भी की जाती है। यह उत्सव माह अप्रैल में पूरे सात दिनों तक मनाया जाता है। इस दिन छोटे-बड़े सभी एक-दूसरे पर सुगंधित जल छिड़कते हैं, एक दूसरे को गुलाल भी लगाते हैं और घास केबने आभूषण भेंट करते हैं।
 
यूनान का मेपोल
यूनान में मेपोल नामक त्योहार में एक खंभा गाड़कर उसके आसपास लकडिय़ां रख दी जाती हैं और उसमें आग लगा दी जाती है। लोग अपने देवता डायनोसिस की पूजा करते हैं और झूम-झूमकर नाचते-गाते हैं। 

मिस्र का फालिका
मिस्र में भी होली की तरह ही नई फसल के स्वागत में खुशियां मनाई जाती हैं। इस त्योहार का नाम ‘फालिका’ है। इस अवसर पर पारस्परिक हंसी-मजाक के अलावा आकर्षक नृत्य एवं नाटक भी खेले जाते हैं।
 
बर्मा का तिजान
अपने पड़ोसी देश बर्मा यानी म्यांमार मे इस त्योहार को ‘तिजान’ नाम से जाना जाता है। यह चार दिन तक मनाया जाता है। यहां भी भारतीय होली की ही तरह पानी के बड़े-बड़े ड्रम भर लिए जाते है और उसमें रंग तथा सुगंध घोलकर एक-दूसरे पर डालते है।
 
कोरिया का चू सुक
कोरिया में नई फसल को सैलिब्रेट करने के लिए चू सुक मनाया जाता है। यह आठवें महीने के 15वें दिन मनाया जाता है। इस दिन लोग एक-दूसरे को मुबारकबाद देने के लिए विशेष भोज का आयोजन करते हैं। जिसमें परिजनों को चावल, तिल और अखरोट से बना केक परोसा जाता है। औरतें घेरा बनाकर नाचती-गाती हैं।

कैरिबियाई देशों में फगुआ
कैरिबियाई देशों में बड़ी धूमधाम और मौज-मस्ती के साथ होली का त्योहार मनाया जाता है। यहां होली को फगुआ के नाम से जाना जाता है और लोग परंपरागत तरीके से इसे मनाते हैं। 19वीं सदी के अंत में और 20वीं सदी के शुरू में बड़ी संख्या में भारतीय लोग मजदूरी करने के लिए कैरिबियाई देशों (गुआना, सूरीनाम व ट्रिनीडाड) में जा बसे। भारतीयों के साथ उनके त्योहार और रस्मों-रिवाज भी इन देशों में पहुंचे। धीरे-धीरे फगुआ गुआना और सूरीनाम के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में एक हो गया। गुआना में होली के दिन राष्ट्रीय अवकाश रहता है। इस देश की कुल आबादी में हिंदू करीब 33 फीसदी हैं। यहाँ लोग रंगीन पाउडर और पानी के साथ होली खेलते हैं। गुआना में इस अवसर पर विशेष समारोहों का आयोजन किया जाता है। नृत्य, संगीत और सांस्कृतिक उत्सवों के जरिए फगुआ मनाया जाता है। ट्रिनीडाड एंड टोबैगो में होली का उत्सव लगभग भारत जैसा ही मनाया जाता है। विदेशी विश्वविद्यालयों में भी होली का आयोजन होता रहा है।  

अन्य देशों में होली
सूर्योदय के देश जापान में भी होली के रंगों की छटा देखते ही बनती है। नई फसल के स्वागत में यह त्योहार मनाया जाता है। मार्च के महीने में मनाए जाने वाले इस त्योहार में यहां के निवासी उत्साह से भाग लेते हैं और अपने नाच-गाने एवं आमोद-प्रमोद से वातावरण को खुशनुमा और मादक बना देते हैं। श्रीलंका में तो होली का त्योहार बिल्कुल अपने देश की तरह ही मनाया जाता है। आपसी मित्रता एवं हंसी-खुशी का यह त्योहार श्रीलंका मे अपनी गरिमा बनाए हुए है। यहां भी रंग-गुलाल और पिचकारियां सजती हैं। हवा में अबीर उडता है। लोग गिले-शिकवे भूलकर एक-दूसरे के गले मिलते हैं।  जर्मनी में रैनलैंड नामक स्थान पर होली जैसा त्योहार पूरे सात दिन तक मनाया जाता है। इस अवसर पर यहां के निवासी ऊटपटांग पोषाक पहनते हैं और अटपटा सा व्यवहार करते हैं और एक दूसरे का मजाक उड़ाते हैं। मजाक और मस्ती में इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई व्यक्ति छोटा है या बड़ा और न ही कोई इसे बुरा मानता है। बैल्जियम में भी होली जैसा त्योहार मनाए जाने का रिवाज है। लोग इसे मूर्ख दिवस के रूप में मनाते हैं। इस अवसर पर पुराने जूतों की होली जलाई जाती है और लोग आपस में हंसी-मजाक करते हैं। इस अवसर पर जुलूस भी निकालते हैं। जो व्यक्ति इस जुलूस में शामिल नहीं होता उसे गधा बनाकर उसका मुंह रंग दिया जाता है। साईबेरिया में घास-फूस और लकड़ी से होलिका दहन जैसी परिपाटी देखने में आती है। नार्वे और स्वीडन में सेंट जान का पवित्र दिन होली की तरह से मनाया जाता है। शाम को किसी पहाड़ी पर होलिका दहन की भांति लकड़ी जलाई जाती है और लोग आग के चारों ओर नाचते गाते परिक्रमा करते हैं। इंग्लैंड में मार्च के अंतिम दिनों में लोग अपने मित्रों और संबंधियों को रंग भेंट करते हैं ताकि उनके जीवन में रंगों की बहार आए।

Thursday, March 21, 2013

रंगों की गीतमाला

 रंगों की गीतमाला

बिना रंग और भांग के तो होली होती ही नहीं और जब होली के जोश, उमंग, हुड़दंग और अबीर-गुलाल में फिल्मी गानों का रस घुल जाता है  तो यह और भी रंगीन हो जाती है। हिन्दी फिल्मों में होली गानों की भरमार है। याद करते जाएं तो खूब सारे गाने याद आ जाएंगे। आज भी कुछ ऐसे गीत हैं जो होली पर जरूर बजते हैं, जिनकी ताल पर लाल-पीले-हरे-नीले-गुलाबी रंगों में रंगे लोग जब नाचते हैं तो होली का मजा कई गुना बढ़ जाता है। रूपहले पर्दे पर रंग और उमंग के त्योहार होली के गीतों ने सिने प्रेमियों के दिलों पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। आईए, याद करते हैं होली के अवसर पर उन गानों को।

1. होली के गीतों में लीजेंड ऑफ हिंदी सिनेमा शोले के गीत ‘होली के दिन दिल खिल जाते हैं रंगों में रंग मिल जाते हैं ..’ के बिना कोई होली पूरी नहीं होती। जिसमे धर्मेंद्र-हेमा समेत पूरा गांव मस्ती में झूमते हुए गाते हैं। इस गाने की धुन और बोल आज भी लोगों को काफी लोकप्रिय हैं।

होली के दिन दिल खिल जाते हैं रंगों में रंग मिल जाते हैं
गिले शिकवे भूल के दोस्तो दुश्मन भी गले मिल जाते हैं।
गोरी तेरे रंग जैसा थोड़ा सा रंग मिला लूं
आ तेरे गुलाबी गालों से थोड़ा सा गुलाल चुरा लूं
जा रे जा दीवाने तू होली के बहाने तू छेड़ न मुझे बेशरम
पूछ ले जमाने से ऐसे ही बहाने से लिए और दिए दिल जाते हैं
होली के दिन दिल ...

फिल्म: शोले (1975)

2. 
फिल्मों में होली का रंग बिखेरने वाले अभिनेताओं में बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन का नाम कोई कैसे भूल सकता है। अमिताभ बच्चन और रेखा पर फिल्माए फिल्म ‘सिलसिला’ के गीत ‘रंग बरसे भीगे चुनरवाली रंग बरसे...’ के बगैर होली के त्यौहार का मजा पूरा नहीं हो पाता। इसमें अमिताभ ने भांग का इतना नशा भरा कि लोग आज भी इसे बड़े चाव से सुनते हैं।

रंग बरसे भीगे चुनरवाली, रंग बरसे
अरे कैने मारी पिचकारी तोरी भीगी अंगिया
ओ रंगरसिया रंगरसिया, हो
रंग बरसे भीगे चुनरवाली, रंग बरसे ...
सोने की थाली में जोना परोसा
अरे, सोने की थाली में, जोना परोसा
हाँ, सोने की थाली में जोना परोसा
अरे खाए गोरी का यार, बलम तरसे रंग बरसे
होली है!
ओ रंग बरसे भीगे चुनरवाली, रंग बरसे ...

फिल्म: सिलसिला (1981)

3 . अमिताभ बच्चन और हेमा मालिनी पर फिल्म ‘बागवान’ में फिल्माया गीत ‘होली खेलें रघुवीरा अवध में...’ होली गीतों में अपना विशिष्ट मुकाम रखता है।

ताल से ताल मिले मोरे बबुआ, बाजे ढोल मृदंग
मन से मन का मेल जो हो तो, रंग से मिल जाए रंग
हो ओ ओ ओ.... होली खेलें रघुवीरा
होली खेलें रघुवीरा अवध में होली खेलें रघुवीरा
होली खेलें रघुवीरा अवध में होली खेलें रघुवीरा
अरे, होली खेलें रघुवीरा अवध में होली खेलें रघुवीरा
होली खेलें रघुवीरा अवध में होली खेलें रघुवीरा

फिल्म: बागवान (2003)

4.
फिल्मी पर्दे पर छेड़-छाड़ वाली होली को लोग खासा पसंद करते हैं। फिल्म ‘डर’ का गीत जिसमें शाहरुख खान होली के रंगों से चेहरा छिपाए ढोल बजाते हुए होली समारोह में बिन बुलाए चले आते हैं, आज भी लोगों को गुदगुदाता है। इस गाने के बोल हैं ‘अंग से अंग लगाना पिया हमें ऐसे रंग लगाना’।

अरे जो जी में आए, तुम आज कर लो
चाहो जिसे इन बांहों में भर लो
अंग से अंग लगाना सजन हमें ऐसे रंग लगाना
गालों से ये गाल लगा के, नैनों से ये नैन मिला के
होली आज मनाना सजन हमें ऐसे रंग लगाना
अंग से अंग लगाना...

फिल्म: डर (1993)

5.
होली पर एक गाना जो हर चौराहे, गली-मोहल्ले में बजता सुनाई है वह है फिल्म ‘कटी पतंग’  में राजेश खन्ना और आशा पारेख पर फिल्माया गीत ‘आज ना छोड़ेंगे बस हमजोली, खेलेंगे हम होली...’। यह गीत लोगों को प्रेमरस में डूबने को मजबूर कर देता है।

हे...
आज न छोड़ेंगे...
आज न छोड़ेंगे बस हमजोल...
खेलेंगे हम होली...खेलेंगे हम होली...
चाहे भीगे रे तेरी चुनरिया चाहे भीगे रे चोली...
खेलेंगे हम होली...
होली है...

फिल्म: कटी पतंग (1970)

6.
फिल्म ‘फाल्गुन’ का गीत ‘फागुन आयो रे...’ ने जिस कलात्मकता से होली को पेश किया, वह बेजोड़ है। यह एक ऐसा गीत है, जिसने कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं।  यह गीत आज भी होली की मस्ती में चार चांद लगा देता है।

पिया संग खेलूं होली
पिया संग खेलूं होली ,फागुन आयो रे
चुनरिया भिगो रे गोरी
फागुन आयो रे
हो फागुन आयो रे

फिल्म: फाल्गुन (1973)


7. होली का किाक्र हो और महबूब खान की फिल्म ‘मदर इंडिया’ के गीत ‘होली आई रे कन्हाई रंग छलके सुना दे बांसुरी’ की बात ना हो, ऐसा कभी नहीं हो सकता। सुनील दत्त, नरगिस, राजकुमार, हीरालाल और अन्य कलाकारों के साथ फिल्माया गया था। इस गाने की धुन और बोल आज भी लोगों को अच्छे लगते हैं।

होली आई रे कन्हाई,रंग छलके सुना दे बासुरी
होली आई रे होली आई रे..
बरसे गुलाल,रंग मोरे अंगनावा
अपने ही रंग में रंग दे मोहे साजनवा
हो देखो नाचे मोरा मनवा
होली आई रे कन्हाई,रंग छलके सुना दे बासुरी

फिल्म: मदर इंडिया (1957)

8. वी शांताराम की फिल्म ‘नवरंग’ में भी होली का एक बेहद खूबसूरत गीत था, ‘जा रे नटखट ना खोल मेरा घूंघट पलट के दूंगी आज तुझे गाली रे, मोहे समझो ना तुम भोली भाली रे’। इसमें संध्या ने पर्दे पर नायक और नायिका दोनों का किरदार इतनी खूबसूरती से निभाया था कि आज भी यह गीत जब भी बजता है तो सारा नकाारा आंखों के सामने आ जाता है।

अरे जा रे हट नटखट,ना खोल मेरा घूंघट,पलट के दूंगी आज तुझे गाली रे।
मुझे समझो ना तुम भोली-भाली रे।
सारा रा रा...
आया होली का त्योहार,उड़े रंग की बौछार
तू है नार नखरेदार मतवाली रे
आज मीठी लगे है तेरी गाली रे...

फिल्म: नवरंग (1959)

9. फिल्म ‘कोहिनूर’ में ट्रेजिडी किंग दिलीप कुमार और मीना कुमारी ने जब ‘तन रंग लो जी आज मन रंग लो’ गाया तो लगा होली को एक नयी अभिव्यक्ति मिली। इस गीत के बिना होली गीत की कल्पना ही नहीं की जा सकती है।

तन रंग लो जी अजी मन रंग लो तन रंग लो...
तन रंग लो जी अजी मन रंग लो तन रंग लो...
खेलो खेलो उमंग भरे रंग प्यार के ले लो...
खेलो खेलो उमंग भरे रंग प्यार के ले लो...
रंग लो रंग लो जी अजी मन रंग लो तन रंग लो...
तन रंग लो जी अजी मन रंग लो तन रंग लो...

फिल्म: कोहिनूर (1960)

10. विपुल शाह की फिल्म ‘वक्त’ में अक्षय कमार व प्रियंका चोपड़ा के चुलबुले अभिनय और अमिताभ बच्चन के धमाल से ‘डू मी ए फेवर, लेट्स प्ले होली’ गीत यादगार बन गया। यह गीत होली पर युवाओं की खास पसंद रहता है और इसकी धुन पर होली पर वे खूब नाचते हैं।

डू मी ए फेवर लेट्स प्ले होली,
रंगों में है प्यार की बोली
हो मेरे पीछे-पीछे क्यों आये,
मेरा जिया-जिया क्यों धड़काये
जा रे जा रे डॉन्ट टच माई चोली
उफ ये होली,आई ये होली
डू मी ए फेवर लेट्स प्ले होली...

फिल्म: वक्त (रेस अगेंस्ट टाइम) (2005)

होली के रंग न कर दें बदरंग

http://epaper.punjabkesari.in/magazine/news/22032013/page/3$

होली के रंग न कर दें बदरंग

होली त्यौहार है रंगों का। बिना रंगों के होली का पर्व अधूरा है, लेकिन कैमिकल वाले रंगों से कई लोगों को स्किन एलर्जी हो जाती है जिसके चलते वे रंग खेलना पसंद नहीं करते, पर मस्ती में अगर कुछ एहतियात बरत ली जाए तो रंग से दूर नहीं रहना पड़ेगा...

होली  त्यौहार है मस्ती का, हुड़दंग का, उल्लास का और रंगों का। हर कोई इस दिन रंगों में रंग कर खूब मस्ती करना चाहता है लेकिन होली पर खेले जाने वाले रंग आपकी स्किन, बालों और आंखों को नुक्सान भी पहुंचा सकते हैं जिससे त्यौहार का उल्लास और उमंग फीके पड़ जाते हैं। दरअसल, होली के रंगों में कैमिकल मिले होते हैं, जिनसे आपकी स्किन, आंखें व बाल खराब हो सकते हैं लेकिन होली का मजा रंगों और गुलाल के बिना फीका है। यदि आप चाहते हैं कि होली में किसी भी तरह का खलल न पड़े और रंगों में रंग कर भी आप अपनी कुदरती रंगत को बरकरार रख सकें तो कुछ सावधानियां बरतनी जरूरी हैं:

ऐसे करें रंगों का चुनाव

प्राचीन काल में लोग हल्दी, चंदन, गुलाब और टेसू के फूलों से बने रंगों से होली खेलते थे, जबकि आजकल रासायनिक रंगों का ही बोलबाला है। होली के रंगों या गुलाल में कई तरह के कार्बनिक पदार्थ होते हैं, जैसे ऑक्साइड ग्लास पार्टिकल्स, अभ्रक चूर्ण वगैरह। यहां तक कि एनीलिन भी मौजूद होते हैं, जो कपड़ों को रंगने में यूज किए जाते हैं। रासायनिक रंगों में मिले विषैले पदार्थ त्वचा, नाखूनों व मुंह से शरीर में प्रवेश कर अंदरूनी हिस्सों को नुक्सान पहुंचा सकते हैं। ऐसे में सावधानी बरतना और भी जरूरी हो जाता है।

* होली का असली रंग तो अबीर-गुलाल ही है। इसलिए जब भी आप रंग खरीदने जाएं, तो हमेशा लाल या गुलाबी रंग ही लें क्योंकि हरे, बैंगनी, पीले और नारंगी जैसे गहरे रंगों में ज्यादा रसायन मिले होते हैं।

* परमानैंट रंगों से दूर रहें क्योंकि इनमें डाई होती है।

* कोशिश करें कि होली पर हर्बल व नैचुरल कलर्स का ही इस्तेमाल किया जाए।

* आप जिन रंगों का प्रयोग कर रहे हैं वे पाऊडर जैसे होने चाहिएं। दानेदार या खुरदरे पाऊडर में कैमिकल्स ज्यादा होते हैं।

...ताकि स्किन न खोए रंगत

*होली के रंगों में प्रयुक्त कैमिकल्स स्किन को नुक्सान पहुंचा सकते हैं और खुजली, जलन, खरोंच, एलर्जी, फुंसी जैसी प्रॉब्लम्स हो सकती हैं। रंग लगने से स्किन बदरंग हो जाती है व उसमें रूखापन आ जाता है।

*इस होली पर यदि आप अपने चेहरे की चमक बरकरार रखना चाहते हैं और स्किन एलर्जी से बचना चाहते हैं तो हर्बल व ऑर्गैनिक कलर्स का ही उपयोग करें।

*पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें। जहां तक हो सके कपड़े मोटे हों ताकि स्किन पर कलर न लगे।

*होली खेलने जाने से 15-20 मिनट पहले अपने शरीर पर खूब सारा मॉइश्चराइकार लगा लें, फिर ऑलिव ऑयल, कैस्टर ऑयल व ग्लिसरीन को मिलाएं और इससे बॉडी की मसाज करें। इससे बॉडी पर ऑयल की एक हैवी लेयर बन जाएगी। इसके बाद वाटरप्रूफ सनस्क्रीन लगाएं। इससे आपकी स्किन पर रंग नहीं चढ़ेगा और स्किन को कोई नुक्सान नहीं पहुंचेगा।

*होली खेलने के बाद माइल्ड सोप लगाकर ताजेे पानी से नहा लें। नहाने के तुरंत बाद कैलामाइन लोशन लगा लें, इससे स्किन एलर्जी से बच जाएंगे।

*स्किन रूखी और बेजान लगे, तो नहाने के बाद पूरे शरीर की आलमंड ऑयल या ऑलिव ऑयल से अच्छी तरह मसाज कर लें।

*होली के बाद कुछ दिनों तक नियमित रूप से शरीर पर मलाई या बेसन का पेस्ट लगा कर भी आप स्किन को सॉफ्ट बनाए रख सकती हैं।

*होली खेलने के बाद आप फेशियल, मैनीक्योर और पैडीक्योर आदि भी करवा सकते हैं।

*होंठों को हानिकारक रंगों के दुष्प्रभाव से बचाने के लिए उन पर लिप बाम लगाना न भूलें।

*नाखूनों पर जब रंग चढ़ जाता है तो यह आसानी से साफ नहीं होता, इसलिए नाखूनों और उनके भीतर भी वैसलीन की एक मोटी परत लगाएं। इससे नाखूनों पर और उनके अंदर रंग नहीं चढ़ेगा। आप वैसलीन की बजाय नेल पॉलिश का भी इस्तेमाल कर सकती हैं।
 
ऐसे छुड़ाएं जिद्दी रंग 

 *अगर स्किन से कैमिकल कलर नहीं छूट रहा है, तो टमाटर व खीरे को अच्छी तरह मैश करें और उसमें कुछ बूंदें नींबू के जूस की डालें। इसे बॉडी पर लगाने से कलर आसानी से निकल जाएगा।

*जौ का आटा और बादाम का तेल मिक्स कर लें। इससे धीरे-धीरे स्किन से रंग को छुड़ाएं। तेज रगडऩे से स्किन में जलन होगी और स्किन छिलने का भी खतरा रहता है।

*होली के रंगों को छुड़ाने के लिए आप बेसन, दही या आटे का प्रयोग भी कर सकती हैं। इससे आपको एलर्जी भी नहीं होगी और आपकी स्किन भी मॉयश्चराइज हो जाएगी।

आंखों की सुरक्षा

*चूंकि आंखें बेहद नाजुक होती हैं लिहाजा होली के दिन इन पर चोट लगने की संभावना अधिक रहती है। होली के दौरान आंखों की एलर्जी, अस्थायी या स्थायी अंधापन, दृष्टि दोष, आंखों की रोशनी कम होना, कंजक्टिवाइटिस, कॉर्निया में जामुनी रंग और आंख में सूजन वगैरह की समस्या हो सकती है।  होली के रंगों में मौजूद  कांच का चूरा, अभ्रक चूर्ण, पत्थर का चूरा और पोटेशियम हाईक्रोमेट नामक हानिकारक तत्व रेटिना, कॉॢनया और आंखों के अन्य संवेदनशील हिस्सों को काफी नुक्सान पहुंचा सकते हैं। इसलिए होली में आपको अपनी आंखों का खास ध्यान रखना होगा।

*यदि गलती से कुछ रंग आंख में चला जाए, तो  आंखों को तब तक साफ पानी से धोएं जब तक रंग ठीक से निकल न जाए और आंख में जलन बंद न हो जाए।

*होली के समय बैलून लगने से भी आंख में चोट लग सकती है, जो कई बार बहुत गंभीर हो सकती है। इसलिए जहां तक हो सके, चेहरे पर बैलून फैंकने से बचें।

*आंखों के आसपास आई प्रोटैक्शन क्रीम लगा लें। इससे आपकी आंखों के आसपास की स्किन व पलकों को नुक्सान नहीं पहुंचेगा।
 
बाल न हों ड्राई 

 *होली के रंगों में मिले कैमिकल से बालों को सबसे ज्यादा नुक्सान पहुंचता है। बालों से रंग निकालना थोड़ा मुश्किल होता है। अगर आपके बालों में रंग चला गया है तो उसे जल्द से जल्द निकालने की कोशिश करें क्योंकि अगर होली के रंग देर तक बालों में लगे रह जाएं, तो इससे बाल बहुत ज्यादा ड्राई हो जाते हैं। हालांकि बालों की जड़ या सिर की स्किन को इससे कोई खास नुक्सान नहीं पहुंचता है, मगर बालों का टूटना शुरू हो जाता है। रंगों में मौजूद कैमिकल से एलर्जी भी हो सकती है।

*होली खेलने से पहले किसी अच्छे शैंपू से एक बार बाल जरूर धो लें। दरअसल, बालों में जो पहले से गंदगी या फिर रूसी है उसका साफ होना जरूरी है, नहीं तो रंगों के साथ वह भी बालों में चिपक जाएगी जिससे फंगल इंफैक्शन या फिर बालों के कमजोर होने का खतरा हो सकता है।

*होली खेलने से एक दिन पहले आप अपने बालों पर बादाम, कोकोनट या जैतून के बढिय़ा तेल से अच्छी तरह मसाज कर लें। इससे बालों पर रंग नहीं चढ़ेगा और बालों को धोते समय रंग आसानी से धुल भी जाएगा। तेल लगाते समय ध्यान रहे कि तेल बालों की जड़ों में न लगाएं। तेल यदि जड़ों में लगेगा तो कलर उतनी ही गहराई से जड़ों तक चिपका रहेगा जो बालों के लिए बहुत नुक्सानदायक है।

*बालों को रंगों से बचाने का सबसे अच्छा तरीका है कि होली खेलते समय आप टोपी, दुपट्टे या स्कार्फ से अपने सिर को पूरी तरह ढंक लें।

*अगर आपके बाल लंबे हैं उन्हें बांध कर ही होली खेलें। बाल बांधने से बालों की जड़ें छिप जाएंगी। इससे बालों की जड़ों में रंग नहीं जा पाएगा और बालों को नुक्सान भी नहीं पहुंचेगा।

*आप जब होली खेल कर आएं, तो तुरंत हल्के गुनगुने पानी से बाल धो लें। शैंपू करने के बाद बढिय़ा क्वालिटी का कंडीशनर जरूर लगाएं।

*बालों से कलर हटाने का सबसे अच्छा तरीका इन्हें दही से धोना है।

*बाल धोने के बाद बालों में तेल जरूर लगा लें। इससे आपके बालों को नुक्सान नहीं होगा।

*रंगों के कारण अगर, आपके बाल रूखे और बेजान हो रहे हैं तो आधा कप जैतून के तेल में एक अंडे की जर्दी मिलाएं और उसमें 4 छोटे चम्मच शहद मिलाएं। अपने बालों पर इस मिश्रण को लगाएं और आधे घंटे बाद धो डालें।