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Tuesday, July 30, 2013

स्टाइल स्टेटमेंट बनते बोल्ड लुक वाले चश्मे

स्टाइल स्टेटमेंट बनते
बोल्ड लुक वाले चश्मे

पहले कहा जाता था कि आंखों पर चश्मा चढ़ गया तो लुक्स की तो बैंड बज गई, लेकिन अब सोच बदल चुकी है। अब तो वे लोग भी चश्मा लगाते नज़र आते हैं जिनकी आई साइट बिलकुल सही होती है। इसका कारण है कि अब लोग चश्मे को भी स्टाइल स्टेटमेंट की तरह लेने लगे हैं...

एक ज़माना था जब चश्मे को खूबसूरती पर ग्रहण माना जाता था। लोग सोचते थे कि चश्मा लगाने से चेहरा सुंदर नहीं दिखता। लड़कियां तो चश्मा लगाने के नाम से ही घबरा जाती थीं। जब कोई आदमी भी चश्मा लगाता था तो आस पड़ोस या घर-दफ्तर में इस पर दुख जताया जाता था कि अच्छे-भले आदमी की नज़र कमज़ोर हो गई है। बेचारे को चश्मा पहनना पड़ रहा है। चश्मा पहनने वाले औरों से अलग दिखते थे और इस बात का उन्हें अहसास भी होता था। लेकिन वक्त के साथ लोगों के एटीट्यूड में भी बदलाव आया है।
पहले चश्मा लगाना बेशक मजबूरी रही हो, पर अब यह खास तौर से युवाओं में फैशन का हिस्सा बनते जा रहे हैं। अब खुद को स्टाइलिश दिखाने की चाहत में युवा चश्मा पहनने लगे हैं। कोई आंखों की कमजोरी के कारण चश्मा पहनता है तो कोई यूं ही स्टाइल स्टेटमेंट के लिए। अब कारण चाहे जो भी हो यूथ में चश्मों को लेकर भी काफी क्रेज़ है। ज्यादातर युवा स्टाइलिश फ्रेम वाले चश्मे पहने दिखते हैं।
लेकिन कुछ लोग आज भी यही सोच रखते हैं कि  चश्मा पहनना बहुत बोरिंग है। अगर आप भी ऐसा ही सोचती हैं तो इस गफलत से बाहर निकलें। हकीकत में ऐसा नहीं है। अगर आप थोड़ी सूझबूझ के साथ अपने रंग-रूप, चेहरे के आकार आदि को ध्यान में रखकर अपने लिए चश्मे का फ्रेम चुनेंगी तो आपकी खूबसूरती और भी निखर कर सामने आएगी। आपको न सिर्फ पूरा कंफर्ट मिलेगा बल्कि आप और भी अधिक स्टाइलिश और स्मार्ट लगेंगी। आपके चश्मे का खूबसूरत आपके लुक्स को और भी बेहतर बना देगा। कई किस्म के स्टाइलिश पॉवर स्पेक्ट्स मार्किट में उपलब्ध हैं जिन्हें लगाने से आपकी खूबसूरत आंखों की सुरक्षा तो होती ही है साथ ही आपका व्यक्तित्व भी आकर्षक लगता है। यही कारण है कि जिन्हें चश्मे की जरूरत नहीं होती, वे भी नए स्टाइल के चश्मे देख कर उसे खरीदने को मचल उठते है।
पहले जो चश्मे मार्किट में अवेलेबल होते थे उन्हें देखकर निराशा होती थी। वे ठीक वैसे ही थे कि उन्हें पहनने के बाद खुद की लुक्स के लिए नैगेटिव सोच आ जाती थी, पर अब ऐसा नहीं है। चश्मे के प्रति लोगों के ेबढ़ते क्रेका के चलते कई देसी विदेशी ब्रांड के चश्मे बनाने वाली कई कंपनियां बाजार में उतर आई हैं। लोगों के सामने ढेरों विकल्प हैं।
अब बोल्ड लुक वाले और रंगीन फ्रेम के चश्मे भी लोकप्रिय हो रहे हैं। सेलिब्रिटीज में तो ये आम हैं। मोटे फ्रेम वाले चश्मे जिन्हें लोग पसंद नहीं करते थे, वे अब फिर से लोकप्रिय होने लगे हैं। अब तो लोग अलग-अलग रंगों के कई-कई जोड़ी चश्मे भी रखने लगे हैं। ताकि कपड़ों के रंग के हिसाब से मैच करते फ्रेम वाले चश्मे पहने जा सके।

फ्रेम चुनते वक्त

जब कोई आपको देखता है, तो सबसे पहले उसकी नज़र चश्मे पर ही जाती है। ज़ाहिर सी बात है कि यह आपके मेकअप, ज्यूलरी और यहां तक कि कपड़ों से भी कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। आप बेशक साधारण कपड़े पहनें, ज्यूलरी न पहनें या मेकअप न करें मगर आपके चश्मे का फ्रेम शानदार होना चाहिए। तभी तो आपका चेहरा ही नहीं व्यक्तित्व भी सुंदर लगेगा।
चश्मे का फ्रेम पसंद करते समय सबसे पहले देखिए कि आपको कैसा फ्रेम चाहिए। याद रखें, चश्मा आपके व्यक्तित्व का हिस्सा भी है। जो भी फ्रेम खरीदें, वह आपके चेहरे पर फिट होने के साथ व्यक्तित्व के अनुरूप हो।
फ्रेम पसंद करते समय अपनी जरूरत पर भी ध्यान दें। आपने इसे लगातार पहनना है या पढ़ते समय या आफिस के काम के लिए चाहिए, या फिर फैशन के लिए है।
अगर आप पहले से चश्मा पहन रही हैं तो इस बार कुछ अलग स्टाइल का फ्रेम चुनें और फिर देखिए आपका व्यक्तित्व कितना बदलता है।
चश्मे के फ्रेम की फिटिंग आपकी नाक के मध्य में ठीक होनी चाहिए। यदि आपकी नाक मोटी है तो यह फ्रेम हल्के रंग का होना चाहिए और यदि आपकी नाक लंबी है तो इसे नाक के मध्य में सैट करके पहनें। यदि आपकी दोनों आंखें बहुत पास-पास हैं तो ट्रांसपेरेंट फ्रेम बढिय़ा दिखेगा।
फ्रेम का साइज़: फ्रेम चुनते वक्त कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। फ्रेम इतना बड़ा न हो कि आपकी भौंहों के समानांतर हो। बहुत बड़े फ्रेम के चश्मों से बचें। चश्मे के फ्रेम का साइज आपके चेहरे के अनुसार ही होना चाहिए।
फ्रेम का कलर: चश्मे के फ्रेम का रंग अगर आपकी आंखों की पुतली के रंग को कॉम्प्लीमेंट करता है तो आप यकीनन स्टाइलिश लगेंगी। यदि आप अपनी आंखों की पुतली के रंग से मिलता फ्रेम चुनती हैं तो यह आप पर और भी ज्यादा जंचेगा। बालों का रंग भी महत्वपूर्ण बन जाता है जब बात होती है आपके फ्रेम के कलर के चुनाव की। अगर आपके बाल काले या गहरे भूरे हैं तो आप डार्क शेड्स, बोल्ड कलर्स और एक से अधिक शेड्स के कॉम्बीनेशन वाले फ्रेम ट्राई कर सकती हैं। अगर आपके बालों का रंग लाइट ब्राउन है तो मैटल या पेस्टल शेड्स के लाइट फ्रेम आप पर अधिक फबेंगे।
फ्रेम की शेप: चेहरे की बनावट के अनुसार ही चश्मे का फ्रेम चुना जाना चाहिए, तभी यह आप पर फबता है, अन्यथा खूबसूरती पर भारी पड़ जाता है। फ्रेम की शेप चेहरे की शेप के कंट्रास्ट में होनी चाहिए। ओवल शेप फेस पर  हर तरह के चश्मे सूट करते हैं। लेकिन ध्यान रखें कि यह बहुत पतला भी न हो और बहुत मोटा भी नहीं। आयताकार चेहरे पर थोड़े वर्क डिजाइन और कंट्रास्ट वाले चश्मे अच्छे लगते हैं। कोशिश करें कि चश्मे का ब्रिज अधिक लंबा न हो। तिकोनाकार चेहरे पर ऐसे चश्मे फबते हैं जिनका निचला हिस्सा चौड़ा हो। ऐसे चेहरे पर रिमलैस चश्मे भी अच्छे लगेंगे। चौकोर चेहरे के लिए ओवल और गोल फ्रेम के चश्मे बढिय़ा च्वाइस हैं। आप अपने लिए कार्नर से मोटी स्टिक वाला फ्रेम चुनें। संकरे फ्रेम आमतौर पर छोटे चेहरे पर अच्छे लगते हैं, जबकि लंबे चेहरे पर गहरे फ्रेम अच्छे लगते हैं।

ग्लासिस का सलैक्शन

जब बात आंखों की हो, तो ग्लास सबसे बढिय़ा खरीदें। ये हल्का होने के साथ टिकाऊ भी होने चाहिए। ग्लास भी कई क्वालिटी के आते हैं, यह जितना बेहतर होगा, उतना ही मंहगा होता जाएगा। बिलकुल सही नंबर वाले बढिय़ा ग्लास का चयन करें ताकि आपकी आंखों को भी राहत मिले। शेड वाले ग्लास भी आप यूका कर सकत हैं, जो धूप के कान्टैक्ट में आते ही डार्क हो जाते हैं। इसमें भी अलग-अलग क्वालिटी के ग्लास उपलब्ध है। लैंस वाले प्लास्टिक के शीशे भी उपलब्ध हैं जो आसानी से नहीं टूटते। इससे चश्मा भी भारी नहीं लगता। जो लोग लगातार चश्मा पहने रहते हैं उन्हें लैंस वाले हल्के शीशे ही खरीदने चाहिए।

Saturday, May 11, 2013

डायमंड इज फॉरएवर

 डायमंड इज फॉरएवर


हीरे को महिलाओं का बेस्ट फ्रेंड कहा जाता है। डायमंड ज्यूलरी इन्वेस्टमेंट के साथ-साथ स्टाइल स्टेटमेंट भी है। डायमंड्स पहनते ही युवतियों का हुस्न दमक उठता है...



पिछले कुछ अर्से से ज्यूलरी  के ट्रेंड में तेजी से बदलाव आया है। प्रेशियस ज्यूलरी में गोल्ड का एकाधिकार कम होता जा रहा है। अब लोग डायमंड ज्यूलरी को भी तवज्जो देने लगे हैं। ‘जौहरी ही जानता है हीरे की कद्र’ या ‘आदमी क्या है, बस यह समझो हीरा है हीरा’ आदि हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में बोले जाने वाले कुछ ऐसे वाक्य हैं, जिनसे आप हीरे की अहमियत का अनुमान लगा सकती हैं। तभी तो कहते हैं कि डायमंड इका फॉरएवर।

कलिनन, कोहिनूर, आरलाफ, अकबर शाह, ग्रेट मुगल, रीजेंट, डडले, स्टार ऑफ द साऊथ आदि हीरे के कुछ ऐसे नाम हैं जिन्होंने संसार भर में प्रसिद्धि हासिल की है। भारत, दक्षिण अमेरिका और दक्षिण अफ्रीका हीरे के सबसे बड़े उत्पादक देश हैं। संसार भर में हीरे के उत्पादन का 97 प्रतिशत भाग यहीं से प्राप्त होता है। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में भुजगावन क्षेत्र से हीरे की सर्वाधिक मात्रा में प्राप्ति होती है, जो भारत में प्राप्त होने वाली इसकी मात्रा का 95 प्रतिशत है।

इटालियन डिजाइंस
मार्कीट में विभिन्न ब्रांड्स की डायमंड ज्यूलरी की हैवी और सिम्पल दोनों लुक में बड़ी रेंज मौजूद है। आजकल अनकट डायमंड, जिसे पोलकिया कहते हैं, चलन में है। इसे 24 कैरेट सोने या कुंदन में बनाया जाता है। यह आपके एक अलग ही अंदाज को बयां करेगी। राऊंड, पीयर, स्कवेयर, ओवल और एमेराल्ड के अलावा हार्ट शेप्ड डायमंड ज्यूलरी ने भी महिलाओं में अपनी धाक बनाई हुई है। कुछ इटालियन डिजाइंस भी ट्रेंड में हैं जिन्हें 18 कैरेट सोने और डायमंड में बनाया जाता है। इनमें  ज्योमेट्रिकल शेप में डायमंड जड़े होते हैं। व्हाइट गोल्ड के अलावा, येलो, पिंक और लाइम ग्रीन गोल्ड में भी शानदार ज्यूलरी बन रही है।

अफोर्डेबल रेंज
ऐसा माना जाता है कि अपनी जिंदगी में हीरे के आभूषण पहनना लगभग हर स्त्री की चाहत होती है। इसी को मद्देनजर रखते हुए नाजुक-सी दिखने वाली डायमंड ज्यूलरी अफोर्डेबल रेंज में भी उपलब्ध है। आप 3,000-5,000 रुपए में डायमंड नोज़ पिन या पेंडेंट खरीद सकती हैं। डायमंड ब्रेसलेट की कीमत 30,000 हजार रुपए और डायमंड  सेट की कीमत 50,000 रुपए से शुरू होती है। कॉलेज गोइंग गर्ल्स डायमंड ज्यूलरी की इस अफोर्डेबल रेंज को खरीदने को बेताब नजर आती हैं, हालांकि जो लोग महंगी ज्यूलरी खरीद सकते हैं वे बड़े हीरों से जड़े गहने पसंद करते हैं।

माइक्रो डायमंड ज्यूलरी
आजकल कई धातुओं को मिला कर ज्यूलरी बनाने का चलन है, जिसमें सफेद सोना, गुलाबी सोना यहां तक कि तांबे को मिला कर बनाई गई ज्यूलरी भी चलन में है। सोना, प्लेटिनम और चांदी तीनों के साथ ही डायमंड खूब जंचता है। डायमंड  के साथ अन्य धातुओं को मिलाकर बनाए गए गहने भी पसंद किए जा रहे हैं। आजकल माइक्रो सेटिंग ज्यूलरी भी खूब चलन में है। इसमें चूरा अर्थात् बारीक हीरे जड़े जाते हैं। यह इकोनॉमी वर्ग की खास पसंद है। जाहिर है कि इनकी तुलना कीमती हीरों से तो नहीं हो सकती लेकिन इनके जरिए आप हीरा पहनने का सपना तो पूरा कर ही सकती हैं।

बेस्ट गिफ्ट
डायमंड में तरमनियां सेट, नेकलेस सेट, पेंडेंट सेट व लांग सेट सहित कई तरह के सेट ट्रेंड में हैं। बड़े पेंडेंट सेट्स का क्रेज़ अभी भी कायम है। विभिन्न टी.वी. सीरियलों में पहनी जाने वाली डायमंड ज्यूलरी के डिज़ाइन भी महिलाओं को आकर्षित करते हैं। अवार्ड फंक्शंस में जानी-मानी हस्तियों द्वारा पहनी गई डायमंड ज्यूलरी से भी महिलाएं खूब प्रभावित होती हैं। गिफ्ट में लोग हीरे की अंगूठी देना सबसे  ज्यादा पसंद करते हैं। डायमंड की ज्यूलरी में 80 प्रतिशत वापसी की गारंटी होने के कारण भी इन्वेंस्टमेंट को ध्यान में रख कर ज्यूलरी खरीदने वाली महिलाओं में इसका रुझान बढ़ा है।

स्टाइल स्टेटमेंट
डायमंड ज्यूलरी सुंदरता के साथ-साथ आपकी पर्सनेलिटी को भी निखारती है। इसे इंडियन या फैशनेबल वेस्टर्न किसी भी तरह की ड्रेस के साथ पहना जा सकता है। डायमंड ज्यूलरी खास मौकों पर भी आपको नोटिसेबल बनाती है और डेली यूज में भी कूल लुक देती है।

पुरुष भी हुए क्रेजी
हीरे के लिए महिलाओं की ललक तो जगजाहिर रही है लेकिन अब पुरुषों में भी इसका क्रे़ज़ बढ़ता जा रहा है। पहले ज्यादातर पुरुष जहां सोने की अंगूठी, चेन आदि ही पहनते थे, पर अब बदलते दौर में वे घडिय़ों, कफलिंक्स, टाई पिंस, कुर्ता बटन, ईयररिंग्स, मोबाइल, कोट के बटनों और पेन में भी हीरे का प्रयोग धड़ल्ले से कर रहे हैं। हालांकि इसकी मांग अभी भी महिलाओं के हीरे के आभूषणों के मुकाबले बेहद कम है।

खुद बनें डिजाइनर
आजकल महिलाएं ऐसी ज्यूलरी पसंद कर रही हैं, जो उनके बजट में तो फिट बैठे ही, डिजाइनर भी हो। इसके लिए वे खुद ही अपनी क्रिएटिविटी का इस्तेमाल करके ज्यूलरी डिजाइन कर रही हैं। अगर आपको भी मार्कीट में उपलब्ध ज्यूलरी पसंद न आ रही हो, तो अपने मनमाफिक डिजाइन बनवाने के लिए आप ज्यूलर के स्टॉक में मौजूद ज्यूलरी आइटमों में फेरबदल करवा कर अपनी पसंद की ज्यूलरी पहन कर चहक सकती हैं। आप मैगजीन में छपी तस्वीर को दिखा कर भी वैसा ही डिजाइन बनवा सकती हैं। जरूरत और पसंद के अनुसार  ज्यूलरी डिजाइन करवाना और बनवाना अपनेपन का अहसास जगाता है और जब लोग इसकी तारीफ करते हैं, तो आपका मन भी खुश हो जाता है।

तभी बनता है बेशकीमती

खान से पत्थर के रूप में निकले हीरे को नग का रूप प्राप्त करने तक चार प्रमुख क्रियाओं से गुजरना पड़ता है, वे हैं क्लीवेज, कटिंग, पॉलिशिंग और सेटिंग। इस सबके लिए इसे कुशल कारीगरों के हाथों में से गुजरना पड़ता है, जो काट-तराश कर इसको बेशकीमती बना देते हैं। हीरे को कैरेट में मापा जाता है, एक कैरेट की माप 0.200 ग्राम यानी 200 मिलीग्राम के बराबर मानी गई है। हीरे की चार प्रमुख किस्में हैं- विशिष्ट, बोर्ट, बेल्स और कार्बनेडो। इनमें सिर्फ विशिष्ट ही उत्तम, पूर्ण स्फटिक, पारदर्शी और बेशकीमती होता है, जो आभूषणों में जड़ने के काम आती है। शेष का उपयोग उद्योग-धंधों में ही होता है।

हीरे की परख
हीरे की परख उसकी चमक पर निर्भर होती है। देश में सोने की तरह हीरे की ज्यूलरी के लिए शुद्धता के मानक नहीं हैं और खरीदारों को भी हीरे की परख नहीं है, जिसके चलते अधिकतर डायमंड ज्यूलरी अमानक स्तर की है। हालांकि लैब में हीरे की क्वालिटी को आसानी से परखा जा सकता है। हमें इसका पता तब चलता है जब हम इसे बेचने के लिए दूसरी जगह जाते हैं। दुनिया में हीरे की ज्यूलरी की शुद्धता के दो ही प्रमाण पत्र सर्वमान्य हैं। ये जैमोलॉजिकल इंस्टीच्यूट ऑफ अमेरिका (जी.आई.ए.) और इंटरनेशनल जैमोलॉजिकल इंस्टीच्यूट (आई.जी.आई.) द्वारा जारी होते हैं।

ऐसा नहीं होता
आपने फिल्मों या धारावाहिकों में सुना होगा कि हीरे को चाटने पर इंसान की मृत्यु हो जाती है लेकिन यह महज एक  भ्रांति है। इसका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है।

—मीनाक्षी गांधी