Tuesday, September 29, 2015

महिलाओं का दिल कमजोर होता है

महिलाओं में बढ़ती हार्ट प्रॉब्लम

29 सितंबर को पूरे विश्व में वर्ल्ड हार्ट डे के रूप में मनाया जाता है। वैसे तो इसे मनाने का उद्देश्य केवल हार्ट प्रॉब्लम्स से बचाव और लोगों में अवेयरनेस फैलाना है, मगर हर साल वर्ल्ड हार्ट डे पर हार्ट पेशेंट्स की तादात पहले से ज्यादा बढ़ जाती है। अभी तक यह सिर्फ कहावतों में कहा जाता था कि महिलाओं का दिल कमजोर होता है, मगर अब यह साबित हो रहा है... 


भारतीय महिलाओं में हार्ट डिसीज एक बड़े किलर के रूप में सामने आ रही हैं। भारत में महिलाएं कैंसर, एड्स और मलेरिया से ज्यादा कार्डियोवास्कुलर डिजीजेस की शिकार हैं। युवा महिलाएं भी अब दिल से संबंधित बीमारियों से सुरक्षित नही हैं। 20 से 40 साल की उम्र में महिलाओं को एस्ट्रोजन हार्मोन की वजह से दिल की बीमारियों से सेफ माना जाता था लेकिन इसी उम्र में दिल के रोग बढ़ रहे हैं।

यंगस्टर में कार्डियो वास्कुलर डिजीजेस के लिए काम से रिलेटिड स्ट्रेस बड़ा फैक्टर है। जरूरत से ज्यादा तनाव के कारण शरीर में कोलेस्ट्रॉल डिपॉजिट होने लगता है जिससे कॉरोनरी आर्टरीज में ब्लॉकेज हो जाता है और कार्डियो वास्कुलर डिजीजेस होने का खतरा बढ़ जाता है। पुरूषों की अपेक्षा महिलाओं की आर्टरीज छोटी होती हैं इसलिए इनकी जान जाने का खतरा भी ज्यादा होता है। पिछली कुछ समय में भारत में नशा करने वाली महिलाएं दोगुना हो गई हैं, इसका कारण कहीं न कहीं स्ट्रेस है।

सिडेंटरी लाइफ स्टाइल और एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी इसका मुख्य कारण माना जाता है। दूसरा, महिलाएं दिल संबंधी बीमारियों को नजरअंदाज करती हैं। भारतीय महिलाएं वैसे भी अपनी सेहत से ज्यादा अपने पति, बच्चे, मां-बाप की सेहत का ख्याल रखती हैं और इस सबके बीच वो यह भूल जाती हैं कि उनकी सेहत का ख्याल रखना भी उनके लिए बहुत जरूरी है। न तो वो कोई लाइफ स्टाइल फॉलो करती हैं न ही अपने खाने पीने का ध्यान रखती हैं, जिससे उनका वजन भी बढ़ जाता है और इनकी मृत्यु का कारण बनता है अस्पताल में देर से आना। पिछले कुछ साल से साइलेंट हार्ट अटैक का मामला बढ़ा है।

ये हैं कारण


  • लाइफ में बढ़ती टेंशन
  • समय से पहले पीरियड बंद होना
  • एंड्रोजनल हार्मोन का लेवल कम होना
  • किसी कारणवश ओवरी सर्जरी से निकाल देना
  • हाइजेनिक के बजाए स्ट्रीट फूड ज्यादा खाना
  • वेट का लगातार बढऩा
  • एक्सरसाइज न करना
  • ब्लडप्रेशर की प्रॉब्लम
  • भोजन में अधिक नमक, वसा और मीठा का यूज

ऐसे करें पहचान


  • बेचैनी, सीने के बीच में या बाई ओर हल्का तेज दर्द
  • सीने में चुभन और सांस फूलना
  • दर्द के साथ पसीना आना
  • शरीर का ठंडा पडऩा
  • बोलने में जुबान लडख़ड़ाना
  • पेट में गैस, उल्टी महसूस होने के साथ चक्कर आना

इन्हें है खतरा


  • मोटापे के कारण हार्ट डिसीज़ का खतरा बढ़ जाता है।
  • नाइट शिफ्ट में काम करने वालों में हार्ट डिसीज़ का खतरा अधिक
  • हाई ब्लड प्रेशर को इसका शुरुआती लक्षण माना जा सकता है। 
  • बिजी और सिडेंटरी लाइफ स्टाइल दिल के रोग देती है।

इन बातों का करें ध्यान

डाक्टर्स भी मानते हैं कि हार्ट प्रॉब्लम से बचाव सिर्फ लाइफ स्टाइल सुधार कर ही किया जा सकता है और हार्ट प्रॉब्लम को कम करने में जहां 50 प्रतिशत रोल दवाएं निभाती  हैं, वही 50 प्रतिशत क्रेडिट आपके हेल्दी लाइफ स्टाइल को भी जाता है।

  • हाइट के हिसाब से वेट हमेशा कंट्रोल रहना चाहिए।
  • 40 साल की उम्र पार करते ही चीनी, चिकनाई और नमक कम कर देना चाहिए.
  • हर रोज तेज कदमों से आधा घंटे की वॉक जरूर करनी चाहिए।
  • लाइफ स्टाइल को एक्टिव बनाएं। एक्सरसाइज या योगा को जरूर करना चाहिए।
  • बहुत ज्यादा जंक फूड नहीं खाना चाहिए।
  • स्मोकिंग कम करनी चाहिए।
  • शुगर के मरीज को अपनी शुगर कंट्रोल रखनी चाहिए।
  • ऐसे लोगों को सबसे ज्यादा केयर करनी चाहिए, जिनकी फैमिली हिस्ट्री में हार्ट प्रॉब्लम्स होती है।
  • बीपी मॉनिटर करते रहना चाहिए और कॉलेस्ट्रोल भी बैलेंस रहना चाहिए.
  • किसी भी परेशानी से बचने के लिए एल्कोहल, सिगरेट या जंक फूड का सहारा लेने की बजाय फल और सब्जियां खाएं।
  • स्ट्रेस को दूर रखने के लिए लाइट म्यूजिक सुनें।

Sunday, September 27, 2015

मॉडर्न और कंटेम्परेरी का ट्विस्ट रहेगा फेस्टिव सीज़न में

Florals set to rule Navratri 2015

अगर आपने अभी तक अपना गरबा के लिए अपनी आउटफिट रेडी नहीं की है तो अब भी समय है। फटाफट लेटेस्ट ट्रेंड्स स्कैन करो और अपनी ड्रेस से सबको अपने स्टाइल का मुरीद बना लो। फैशन वर्ल्ड में इस बार फेस्टिव सीज़न में विभिन्न रंगों के फ्लोरल प्रिंट्स ट्रेंड में रहेंगे। इसलिए ब्राइट फ्लोरल प्रिंट में ड्रेस डिज़ाइन करवाएं...


मॉडर्न और कंटैम्परेरी का ट्विस्ट
फ्लोई फुल लेंग्थ स्कर्ट्स फैशन इंडस्ट्री में छाई हुई हैं। इंडियन फैशन ने भी अपने कुछ बेसिक ट्रेडिशनल आउटफिट्स को रीडिफाइन किया है और इसे मॉडर्न और कंटेम्परेरी ट्विस्ट दिया है। वेडिंग लहंगा से लेकर चनिया चोली तक में क्रॉप टॉप्स ट्रेंड में हैं। फ्लोरल प्रिंट्स विंटेज इंग्लिश एरा की याद दिलाते हैं और नवरात्रि जैसे कलरफुल फेस्टिवल के साथ इसे टीम अप करके आप अद्भुत ड्रामेटिक इफेक्ट क्रिएट कर सकती हैं। इस साल फ्लोरल्स दुपट्टे और चनिया में ट्रेंड में है। हालांकि पुरुष बड़े और बोल्ड फ्लोरल प्रिंट्स में नहीं इठला सकते। उन्हें छोटे, छोटी पत्ती और फूलों वाले प्रिंट्स फबेंगे। इसलिए इस साल गरबा ग्राउंड्स में फूल खिलेंगे।

ऐसे दें खुद को स्टाइलिश लुक
कॉलेज गर्ल्स लेटेस्ट फैशन ट्रैंड्स फॉलो करना पसंद करती हैं। खुद को स्टाइलिश लुक देने के लिए कपड़ों से उन्हें खासा प्यार होता है। इसलिए वो वह सब खरीद लेती हैं जो ट्रैंड में होता है और जो उनके कम्फर्ट ज़ोन में फिट हो जाए। इस साल फैशन की दुनिया में फ्लोरल्स का ही राज रहा है। फ्लोरल प्रिंट की चनिया और रंगीन प्लेन क्रॉप टॉप के साथ कंट्रास्ट दुपट्टा और कंटैम्परेरी ज्यूलरी पहन कर जब आप गरबा ग्राउंड जाएंगी तो यकीन मानिए आप सबकी नज़रों में छा जाएंगी। चूंकि प्रिंट बोल्ड और बड़ा है, इसलिए मेकअप कम ही करें। आप फ्लोरल क्रॉप टॉप या ब्लाउज़ पहनना चाहती हैं, तो इसके साथ आप जो चनिया पहनें उस पर कुछ फ्लोरल मोटिव्स अच्छे लगेंगे। 

स्टेटमेंट एक्सेसरी से दिखें ग्लैमरस
नवरात्रि पर आउटफिट का स्टाइल और फैशन तो हर साल बदल जाता है लेकिन अॉक्सीडाइज़्ड ज्यूलरी हमेशा से ट्रैंड में रहती है। इस साल अपने फ्लोरल लुक को पीप अप करने के लिए कुछ कलरफुल जंक ज्यूलरी के साथ एक्सपैरिमेंट करने की कोशिश करें। आर्टिस्टिक पैंडेट वाले स्टेटमेंट नेकलैस और बड़े-बड़े फ्लोरल स्टड्स आपके लुक और स्टाइल को ग्लैमरस बना देंगे। फ्लोरल आउटफिट् चूंकि बहुत कलरफुल होती है, इसलिए आप अपनी ड्रैस के रंगों के साथ अपनी चूढ़ियां मैच करके अपने स्टाइल को फैस्टिव कर सकती हैं। अपने फ्लोरिएटिड लुक को पूरा करने के लिए बहुत बारीक हैड चेन या छोटे-से फ्लोरल जैम के साथ माथा पट्टी कैरी करें।

मज़ा लें रोमांटिक शाम का
आमतौर पर नवरात्रि की आउटफिट्स सारा साल अलमारी के एक कोने में पड़ी रहती हैं, जब तक आप उसे अगले साल के नवरात्रों के लिए कुछ तैयारी के साथ दोबारा फाइनल नहीं करतीं। हालांकि ऐसा अक्सर हो नहीं पाता है क्योंकि हर साल ट्रैंड बदल जाता है। पिछले साल की चनिया इस साल पुरानी हो जाती है और रैग लुक देती है। हालांकि फ्लोरल ट्विस्ट के साथ आप नवरात्रि के कपड़ों को रोज़मर्रा के कपड़ों की तरह भी पहन सकती हैं। आपकी चनिया को आप कैजुअल क्रॉप टॉप्स के साथ स्कर्ट के तौर पर कभी भी पहन सकती हैं। तो फिर देर किस बात की फ्लोरल चनिया को बूट या गलैडिएटर्स के साथ पहनें और साथ में कैरी करें एक स्मार्ट सा बैग और आप एक रोमांटिक शाम का मज़ा लेने के लिए तैयार हैं।

परम्पराओं के संग फैशन के नए रंग

मॉर्डन दुल्हन का स्टाइल स्टेटमेंट बना मंगलसूत्र
सुहाग की निशानी मंगलसूत्र नई स्टाइल स्टेटमेंट और फैशन एक्सेसरी के तौर पर उभर रहा है और काफी डिमांड में है। मंगलसूत्र के प्रति महिलाओं के बढ़ते क्रेज़ की एक बड़ी वजह इनका ग्लैमरस रूप में लौटना है। टीवी सीरियल्स ने भी इन्हें पॉप्युलर करवाने में एक अहम भूमिका निभाई है। काले मोतियों की माला से निकल कर मंगलसूत्र अब स्टाइलिश लुक में नजर आ रहा है। महिलाएं अपने स्टाइल व पसंद, लुक्स व पर्सनैलिटी के हिसाब से इसे कैरी कर रही हैं...

भारी भरकम मंगलसूत्र की जगह क्लासिक, ट्रैंडी और हल्के ग्लैमरस मंगलसूत्र ने ले ली है। अब मंगलसूत्र के पैंडेट में कलरफुल नग इस्तेमाल हो रहे हैं, ताकि इन्हें ड्रैस के कलर से मैच करके पहना जा सके। मॉर्डन दुलहनों ने बेहद खूबसूरत अंदाज में इसे अपने स्टाइल स्टेटमेंट का हिस्सा बनाया है। अब वे एक नहीं, तीन-चार मंगलसूत्र एक साथ खरीदने लगी हैं। वे शादी के मंगलसूत्र को घर से जुड़े खास मौकों पर पहनने के लिए रख लेती हैं और रुटीन के लिए कलरफुल नगों वाले मंगलसूत्र, जिन्हें ड्रैस से मैच करके कैरी करती हैं। 

हिंदू परिवारों में ज्यूलरी शॉपिंग लिस्ट में होने वाली दुल्हन के लिए वैडिंग मंगलसूत्र सबसे महत्वपूर्ण होता है। मंगलसूत्र की तुलना किसी अन्‍य आभूषण से नहीं की जा सकती। यह विवाह का प्रतीक चिन्ह और सुहाग की निशानी माना जाता है। विवाह के अवसर पर वधू के गले में वर मंगलसूत्र पहनाता है। अनेक दक्षिण राज्यों में तो मंगलसूत्र पहनाए बिना विवाह की रस्म अधूरी मानी जाती है। वहां सप्तपदी से भी अधिक मंगलसूत्र का महत्व है।

मंगलसूत्र एक एेसा आभूषण है जो हर महिला को आकर्षित करता है। कंटंपररी लुक के साथ यह स्टाइलिश महिलाओं को अट्रैक्ट करता है। यह माना जाता रहा है कि मंगलसूत्र दुल्हन के लिए काफी शुभ होता है और उसे बुरी नज़र से बचाते हुए उसे भाग्यशाली बनाता है, इसलिए विवाह के बाद सुहागन स्त्रियां हमेशा इसे पहनती हैं और जीवन भर अपनी एक अनमोल धरोहर के रूप में इसे सहेज कर रखती हैं। 

मंगलसूत्र पति के प्रति प्रेम और आदर का चिह्न होता है। मान्यता है कि इससे पति पर आने वाली विपत्तियां दूर होती है। मंगलसूत्र सोने का बना हुआ होता है, सोना माता पार्वती को दर्शाता है और उसमें लगे काले मोती भगवान शिव को दर्शाते हैं। मान्यता है कि सोना महिला में तेज व ऊर्जा का प्रवाह करता है और काले मोती उसे बुरी नजर से बचाते हैं।

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार सोना गुरु के प्रभाव में होता है। वैवाहिक जीवन में खुशहाली, संपत्ति एवं ज्ञान का कारक माना जाता है गुरु ग्रह को। काला रंग शनि का प्रतीक माना जाता है। शनि स्थायित्व एवं निष्ठा का कारक ग्रह होता है। गुरु और शनि के बीच सम संबंध होने के कारण मंगलसूत्र वैवाहिक जीवन में सुख एवं स्थायित्व लाने वाला माना जाता है।

आधुनिकता और पाश्चात्य संस्कृति के बढते प्रभाव के कारण मंगलसूत्र के स्वरुप में काफी बदलाव आया है। विवाहित महिलाओं द्वारा मंगलसूत्र पहनने की अनिवार्यता धीरे-धीरे कम होने लगी है। मंगलसूत्र पहनना कई महिलाओं को फैशन से ज्यादा कुछ नहीं लगता। इसीलिए वे इन्हें मांगलिक आभूषण की बजाय एक ज्यूलरी के तौर पर ही सिर्फ पार्टी वगैरह में पहन कर जाना पसंद करती हैं, लेकिन अधिकतर हिंदू परिवारों में मंगलसूत्र हमेशा पहनना जरूरी होता है।

वेट

लॉन्ग मंगलसूत्र में हैवी कुंदन एवं पोलकी का जड़ाऊ पैंडेट इन दिनों हॉट ट्रैंड है। यह आपके लुक को आर्कषक बना देगा। यदि सिल्क की प्लेन साड़ी पहनने का मन बना रही हैं, तो उसके साथ हैवी मंगलसूत्र ही प्रैफर करें। यकीन मानिए सबकी नज़रें सिर्फ आप पर ही टिकी रहेंगी। जो मंगलसूत्र आपको हर समय पहनना है, उसका वज़न हल्का होना चाहिए। ऐसा इसलिए भी जरूरी है क्योंकि आजकल ज्यादातर महिलाएं नौकरी करती हैं और लाइट वेट मंगलसूत्र डीसेंट लुक देता है। 

यूनीक पैडेंट 

पैडेंट का डिज़ाइन यूनीक होना चाहिए क्योंकि यही आपके मंगलसूत्र को दूसरों से अलग और सुंदर दिखाता है। आप एक ऐसा पैडेंट चूज़ करें जिसका डिज़ाइन पेचीदा हो और देखने में बेहद स्टाइलिश हो। अगर आपको पसंद हो तो आप हैंगिंग पैंडेट भी खरीद सकते हैं। हर महिला को हीरों से प्यार होता है, हीरों का जड़ाऊ मंगलसूत्र आपकी सुंदरता में चार चांद लगा देगा। हीरों के अलावा आप इसमें दूसरे रंगों के प्रैशियस स्टोंस भी लगवा सकती हैं।

लैंग्थ

पार्टी या किसी घरेलू समारोह में जा रही हैं तो लॉन्ग लैंग्थ वाला मंगलसूत्र आपके ट्रैडिशलन लुक को मॉडर्न टच देगा और आपको बना देगा स्टाइलिश। ध्यान रखें लंबे मंगलसूत्र के साथ हैवी पैंडेट ही खूबूरत लगता है। काले मोतियों से बना और सोने की कड़ियों से जुड़ा शॉर्ट लैंग्थ मंगलसूत्र इन दिनों वर्किंग वूमेन में ट्रैंड में हैं। इसकी खास बात यह है कि यह सिर्फ एथनिक वियर के साथ ही नहीं बल्कि वेस्टर्न आउटफिट्स के साथ भी बढ़िया लगता है।

स्टाइल का तड़का

वक्त है अपनी लुक्स के साथ एक्सपैरिमेंट करने का। आपके पास यकीनन कई अॉप्शंस उपलब्ध हैं। पारम्परिक मंगलसूत्र में बहुत सारे काले मोती होते हैं, लेकिन आप कम काले मोतियों वाला मंगलसूत्र बनवा कर इसे अपना स्टाइल स्टेटमेंट बना सकती हैं। आप एक से ज्यादा मैटल्स यूज़ करके इसे यूनीक स्टाइल दे सकती हैं। शिल्पा शैट्टी कुंद्रा गले की बजाय हाथ में मंगलसूत्र कैरी करती है और यह उनका स्टाइल स्टेटमेंट बन चुका है।

Thursday, September 24, 2015

बच्चे के जन्म के बाद बढ़े वज़न से निज़ात कैसे पाएं?

पोस्ट-प्रेग्नेंसी वेट लॉस

मां बनना बड़ा ही सुखद एहसास होता है। प्रेगनेंसी के नौ महीने किसी भी महिला के लिए बेहद संवेदनशील होते हैं। इस दौरान उसके स्वास्थ्य, व्यवहार आदि से जुड़े कई बदलाव होते हैं। वजन का बढ़ जाना इनमें से एक है। पोस्ट-प्रेग्नेंसी वेट लॉस इस बात पर भी डिपेंड करता है कि प्रेग्नेंसी के दौरान आपने अपनी केयर कैसे की है। अगर प्रेग्नेंसी के दौरान आप हेल्दी डाइट लेंगी, तो आपका वजन इतना बढ़ेगा भी नहीं... 


मलाइका अरोड़ा खान, लारा दत्ता, शिल्पा शेट्टी, सोनाली बेंद्रे, ट्विंकल, करिश्मा कपूर ये कुछ ऐसी यमी ममीज हैं, जो बेबी होने के कुछ दिनों बाद ही ओरिजनल बॉडी शेप में लौट आईं। इन्होंने प्रूव कर दिया है कि अगर महिलाएं चाहें तो डिलिवरी के बाद भी सेक्सी फिगर मेनटेन रख सकती हैं। यही वजह है कि अब बाकी महिलाएं भी उनकी तरह बनना चाहती हैं। 

ब्रैस्‍टफीडिंग की अवधि के दौरान डाइटिंग की सलाह नहीं दी जाती। बेबी बर्थ के दौरान बॉडी से कैल्शियम और न्यूट्रिशंस निकल जाते हैं, इसलिए इस समय आपको अपनी स्ट्रेंथ को रीगेन करने पर भी ध्यान देना होगा, जिसके लिए आपको हैल्दी डाइट लेनी होगी।

डिलिवरी के शुरू के तीन महीनों में महिला की बॉडी का बेसल मेटाबॉलिक रेट (बीएमआर) हाई रहता है, जिस वजह से उस दौरान वेट घटाना सबसे आसान होता है। इसलिए अगर इन दिनों का फायदा उठा लिया जाए, तो बाद में इसे मेनटेन करना मुश्किल नहीं होता।

  • ब्रैस्‍टफीडिंग करवाने से 500 कैलोरी रोजाना बर्न होती है। इसलिए अगर आप अपने शिशु को ज्‍यादा देर तक स्‍तनपान करवाएंगी, आपकी कैलोरी उतनी ही ज्‍यादा बर्न होगी। 
  • सुबह नींबू-पानी पिएं। इससे बॉडी का डिटॉक्सिफिकेशन होता है। इसमें आप शहद भी मिला सकती हैं। 
  • जब आप ब्रैस्टफीड कराती हैं, तो आपकी तरल पदार्थों की आवश्‍यकता बढ़ जाती है। रोजाना 10 से 12 गलास पानी पिएं। पानी अवांछित विषैले तत्वों को निकालता है, जिससे वज़न कम होना आसान हो जाता है। 
  • हर्बल और ग्रीन टी पीने की आदत डालें। सुबह उठते ही यदि आप चाय पीने की आदी हैं तो ग्रीन टी पिएं। इसमें एंटी ऑक्सीडैंट होते हैं, जो दिल के लिए फायदेमंद हैं और वजन कम करने में भी मदद करते हैं।
  • वजन घटाने के लिए सही वक्त पर सही खाना बेहद जरूरी है। कोई भी खाना छोड़ें नहीं। तीन प्रॉपर मील और बीच में दो स्नैक्स जरूर लें। नाश्ता हैवी करें और दोपहर में कम कैलोरी और रात में बहुत हल्का भोजन करें। स्‍नैक में हमेशा पौष्‍टिक चीज़ें खाएं जैसे, ड्राई फ्रूट्स, पॉपकार्न, वीट बिस्‍कुट इत्यादि। ड्राई फ्रूट्स में ओमेगा थ्री फैटी एसिड होता है, जिससे वजन  काबू में रहता है। फास्‍ट फूड और सड़क किनारे का भोजन खाने से बचें।
  • भोजन में गेहूं के आटे की चपाती लेना बंद करके जौ-चने के आटे की चपाती लेना शुरू कर दें। 10 किलो चना व 2 किलो जौ मिलाकर पिसवा लें और इसी आटे की चपाती खाएं। इससे सिर्फ पेट और कमर ही नहीं सारे शरीर का मोटापा कम हो जाएगा।
  • खाने में ऊपर से नमक न मिलाएं। नमक शरीर में पानी को रोकता है, इसलिए ज्यादा नमक से बचना चाहिए। दिन भर में पांच ग्राम ( करीब एक चम्मच ) नमक काफी होता है। इसमें सब्जी आदि में डाला गया नमक भी शामिल है। 
  • यदि आप डिनर की शुरुआत सूप से करते हैं तो यह आपका मोटापा कम करने में कारगर सिद्ध होगा। सूप की खासियत यह होती है कि यह आपको भूख से तृप्ति दिलाता है और भोजन की चाहत को कम करता है। डिनर रात में 8 बजे तक कर लेना चाहिए। राजमा-चावल जैसी चीजें रात में नहीं खानी चाहिए क्योंकि ये आसानी से पचती नहीं हैं। 
  • खाना खाने के तुरंत बाद पानी न पिएं, बल्कि  एक घंटे का अंतराल जरूर रखें। खाने के बाद गुनगुना पानी ही पिएं। इससे पाचन तंत्र ठीक तरह काम करता है और शरीर में मौजूद अतिरिक्त फैट कम होती है। 
  • भोजन में फाइबर को शामिल करें। फाइबर की अधिक मात्रा वाले मौसमी फल व सब्जियां खाएं, इससे वजन कम होता है। सब्ज़ियां और फल विटामिन और मिनरल्स का अच्छा स्रोत हैं। पत्‍तेदार सब्ज़ियां फ़ॉलिक एसिड से भरपूर होती हैं। संतरा और कीवी जैसे सिट्रिक फ्रूट्स में पाया जाने वाला विटामिन सी फैट को खत्म करता है।
  • कोई भी वर्कआउट बिना डॉक्टर की इजाजत के न करें। डिलवरी के बाद हमेशा लाइट एक्‍सरसाइज से शुरुआत करनी चाहिए। अपने बच्‍चे को रोजाना 10 मिनट की वॉक पर ले कर जाएं और धीरे-धीरे वॉक को 10 मिनट से 20 मिनट की करें। 
  • अगर आपने ऑफिस जाना शुरू कर दिया है तो अपनी कार या स्‍कूटी को पार्किंग वाली जगह से कुछ दूर पर खड़ा करें और वर्क प्लेस तक पैदल जाएं। लिफ्ट की बजाय सीढ़ियों का प्रयोग करें।

Wednesday, September 23, 2015

प्रेग्नेंट महिलाओं में बहुत कॉमन हैं क्रेविंग्स

प्रेग्नेंट औरतें क्या खाना पसंद करती हैं




एक औरत अपने को तभी पूर्ण मानती है जब वह अपनी कोख से बच्चे को जन्म देती है। लेकिन शिशु को जन्म देने के लिए नौ माह का लम्बा सफ़र तय करना पडता है। इस दौरान उनके खान-पान पर ही शिशु की सेहत निर्भर करती है। प्रेग्नेंसी में महिला जो भी खाती है उस का सीधा असर बच्चे पर होता है। हैल्दी खाना उनके लिए जरूरी है लेकिन प्रेग्नेंट महिलाओं में क्रेविंग्स बहुत कॉमन हैं और वे अक्सर क्रेविंग को हैल्दी फूड पर तरजीह देती हैं। एक नए सर्वे रिज़ल्ट के अनुसार 84 फीसदी प्रेगनेंट महिलाएं आइसक्रीम, चिप्स, चॉकलेट्स, कुकीज़ और कैंडी खाती हैं। दस में से आठ महिलाओं ने यह भी स्वीकार किया कि वे ऐसा भाजन भी खा लेती हैं जो उनके लिए हानिकारक हो सकता है।

अमेरिकन बेबी मैग्जीन द्वारा जारी एक सर्वे के रिजल्ट में बताया गया कि 70 फीसदी मांओं ने बताया है कि जब वे प्रेगनेंट हुई तो उन्होंने हैल्दी खाना खाना शुरू कर दिया, हालांकि 63 फीसदी ने उनके लिए रेकमेंड की गई सब्जियों और फलों की 5 से 9 सर्विंग्स को नहीं खाया।

सर्वे में चौंकाने वाली बात यह थी कि 12 फीसदी ने दिन में एक या उससे भी कम बार खाना खाया। इनमें से ज्यादातर को प्रेग्नेंसी के कारण भोजन में अरूचि हो गई थी।

सर्वे में 2300 प्रेग्नेंट और न्यू मॉम शामिल थीं। सर्वे का टाइटल था- प्रेग्नेंट महिला वास्तव में क्या खाती हैं। अमेरिकन बेबी के अक्तूबर 2015 के इश्यू में यह सर्वे प्रकाशित होगा।

10 में से 8 महिलाओं ने इस दौरान रिस्की फूड खाना भी स्वीकार किया। स्टडी में पाया गया कि 48 फीसदीने कोल्ड डेली मीट, 32 फीसदी ने अधपके अंडे, मीट या मछली, 20 फीसदी ने प्रीमेड डेली सलाद और 7 फीसदी ने अनपेस्टूराइज़्ड चीज़ खाया। प्रेग्नेंसी में इन सब चीज़ों को खाने की मनाही होती है क्योंकि इससे कॉम्पलीकेशंस आ सकती हैं।

सर्वे में कुछ अच्छी बातें भी सामने आई। 92 फीसदी महिलाओं ने स्वीकार किया कि प्रेग्नेंसी के बाद उन्होंने अल्कोहल का सेवन नहीं किया, 77 फीसदी रोज़ाना ब्रेकफास्ट करती हैं और 84 फीसदी कैफीन के लिए दी गई गाइडलाइंस का पूरी तरह पालन करती हैं।

सर्वे में यह भी पाया गया कि 61 फीसदी मांओं को प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाले वेट गेन की भी चिंता रहती है और करीब एक-तिहाई इस दौरान ओबीस या ओवरवेट हो जाती हैं।

प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए फायदेमंद 7 टिप्स

1. समूदी बनाओ। जब आपके पास खुद की केयर करने का ज्यादा टाइम न हो तो डाइट में ज्यादा फल और सब्जियां शामिल करने का यह सबसे बढ़िया तरीका है।
2. खुद को प्रेरण दो। जब आपकी इच्छा कुकीज़ खाने की हो तब फल और सब्जियां खाओ।
3. ब्रेकफास्ट खाओ। यह दिन का सबसे महत्वपूर्ण मील है।
4. दिन में तीन बार डेयरी प्रॉडक्ट्स जैसे दही, दूध और पनीर खाओ।
5. मछली पसंद हो तो श्रृंप, सालमन या स्कैल्प खा सकती हैं।
6. मछली खाना पसंद न हो तो ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर अंडे, अखरोट या आवाकाडो खाएं।
7. खाने में उन पदार्थों का सेवन करना चाहिए जिनमें लौह पदार्थ अधिक मात्रा में पाए जाते हों जैसे पालक, सरसों, बंद गोभी, गांठगोभी, धनियां, पुदीना, गुड़ किशमिश आदि।

सुंदर मुस्कान के लिए जरूरी मोती जैसे सफेद दांत

KISS से पाएं मोती जैसे सफेद दांत  

सुंदर मुस्कान के लिए मोती जैसे सफेद दांतों की जरूरत होती है, लेकिन पानी में मौजूद कैमिकल्स, कलर्ड फूड्स और तंबाकू के इस्तेमाल की वजह से दांत पीले हो जाते हैं। इन्हें साफ-सफेद बनाए रखने के लिए हम मार्केट में मिलने वाले प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करते हैं, लेकिन उनमें मौजूद कैमिकल्स दांतों और मसूड़ों को नकसान ही पहुंचाते हैं। अगर आप अभी तक दांतो को चमकाने और मोती जैसे सफेद बनाने में  सफल नहीं हुए हैं, तो चिंता करने की कोई बात नहीं है। हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बताने जा रहे हैं, जिन्हें अपनाने के बाद आपके दांत न सिर्फ मजबूत और स्वस्थ रहेंगे, बल्कि सफेद भी हो जाएंगे। याद रखें  दांतो की सफाई बहुत जरूरी है लेकिन उटपटांग तरीकों से साफ करने में आपको ही नुकसान हो सकता है। 

1. खान-पान हो सही

दांतों की सफेदी को बनाए रखने के लिए ऐसे फल और सब्जी खाएं जिन्हें चबाने की ज़रूरत पड़े। डेरी मिल्क प्रॉडक्ट्स का सेवन ज्यादा करें क्योंकि इनमें कैल्शियम होता है, जो दांतों की सेहत के लिए जरूरी है। दांतों के पीलेपन से बचने के लिए स्मोकिंग छोड़ दें और मीठी चीज़ें खानी कम कर दें। चाय-कॉफी कम पिएं और कोशिश करें कि स्ट्रॉ से ही पिएं। दिन में दो बार ब्रश करना न भूलें।

2 सेब

रोज़ाना एक सेब खाएं। सेब में एसिड्स होते हैं जो दांतों से नैचुरली दाग हटाते हैं और उन्हें सफेद रखते हैं। इसलिए अब जब कुछ मीठा खाने की क्रेविंग हो तो चॉकलेट चिप्स की बजाय सेब खाएं।

3. स्ट्रॉबेरी 

स्ट्रॉबेरीज़ में मैलिक एसिड मौजूद होता है, जो एक नैचुरल व्हाइटनिंग एजेंट है और बॉडी में स्लाइवा के प्रॉडक्शन को बढ़ाकर दांतों को सफेद बनाता है। एक स्ट्रॉबेरी को मैश कर लें। अब इसे टूथब्रश की मदद से दांतों पर लगाएं और 5 मिनट बाद अच्छी तरह धो लें। इसे आप हफ्ते में एक बार करें।
4. एप्पल साइडर विनेगर
सेब की ही तरह यह दांतों से दाग और पीलेपन को खत्म करता है। ब्रश करने से पहले इससे कुल्ला करें। लेकिन इसका इस्तेमाल  सावधानी से करें क्योंकि यह आपके दांतों के एनैमल को नुकसान पहुंचा सकता है। 

5. चारकोल 

यह एक और ऐसा नैचुरल व्हाइटनिंग एजेंट है जो आपकी दांतों पर जादू की तरह काम करता है। एक्टिवेटेड चारकोल, दांतों का पीलापन खत्म कर उन्हें मोतियों की तरह सफेद बनाता है। एक कप में एक्टिवेटेड चारकोल के दो कैप्सूल्स लें और इसमें थोड़ा सा पानी मिलाकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को उंगुली या टूथब्रश की मदद से दांतों पर लगाएं। इसे रगड़ें नहीं, इससे आपके एनैमल को नुकसान पहुंच सकता है। तीन मिनट बाद इसे धो लें।

6. कोयला

थोड़ा सा कोयला पाउडर लेकर दांतों को साफ करें। कोयले से दांत साफ करते समय आपको चाहे ये काले या भद्दे दिखें लेकिन पानी से कुल्ला करने के बाद ये साफ और सफेद हो जाएंगे। ध्यान रहे कोयला पाउडर को रगड़ें नहीं, इससे आपके एनैमल को नुकसान पहुंच सकता है।

7. नारियल तेल

हर सुबह करीब 20 मिनट नारियल, तिल या जैतून के तेल से दांत साफ करना 3,000 साल पुराना आयुर्वेदिक तरीका है। एक चम्मच में नारियल तेल लेकर इसे मुंह व दांतों में लगाएं। आप ब्रश में कुछ बूंद तेल लगाकर ब्रश भी कर सकते हैं।

8.बेकिंग सोडा

एक चम्मच बेकिंग सोडा में चुटकी भर नमक और थोड़ा सा पानी मिलाएं। इस पेस्ट से अपने दांतों को एक-दो मिनट तक साफ करें। हफ्ते में दो-तीन बार ऐसा करने से आपके दांत सफेद हो जाएंगे।

9. हाइड्रोजन पैराक्साइड

हाइड्रोजन पैराक्साइड एक एंटी-बैक्टिरिअल एजेंट है। यह सांसों की बदबू और बैक्टिरिआ को खत्म करता है और दांतों के पीलेपन से भी बचाता है। थोड़े से हाइड्रोजन पैराक्साइड को इससे आधे पानी के साथ मिलाएं और ब्रश करने के पहले, कुछ मिनटों तक इससे गरारा करें। इसके बाद अपने रैगुलर टूथपेस्ट से ब्रश कर लें।

10. किस करें

ज्यादा किस करें। रिसर्च से साबित हुआ है कि जो लोग ज्यादा किस करते हैं उनके दांत ज्यादा चमकदार होते हैं क्योंकि किसिंग के दौरान स्लाइवा ज्यादा बनता है जो दांतों को कुदरती तौर पर सफेद बनाता है।

टशन दिखाना हो तो स्टाइलिश टैटूज़ का है जलवा

स्टाइल स्टेटमेंट का प्रतीक टैटू

शरीर पर टैटू बनवाने का चलन हजारों साल से है। प्राचीन काल में कबीलों में रहने वाले लोग टैटू का प्रयोग इसलिए करते थे ताकि आसानी से यह पता चल सके कि कौन-सा व्यक्ति किस कबीले से संबंध रखता है। अब इस कला ने फैशन का रूप धारण कर लिया है। जब मौका टशन दिखाने का हो तो स्टाइलिश टैटूज़ का अपना ही जलवा है। ग्लैमर वर्ल्ड में भी टैटू गुदवाना इन दिनों ट्रैंड में है। हॉलीवुड सैलिब्रिटी एंजेलीना जोली से लेकर डेविड बेखम तक टैटू के दीवाने हैं। उनके टैटू देखकर कॉलेज स्टूडैंट्स में भी शो अॉफ करने की होड़ लगी हुई है... 


आज का युवा टैटू को फैशन स्टेटमेंट मानता है, कुछ लोगों के लिए टैटू है अपनों की यादों को संजोने का तरीका. तो कुछ अध्यात्म से जुड़ कर, कोई अपनी श्रद्धा से तो कोई अपने प्यार का इजहार करने के लिए टैटू बनवा रहे हैं। अमेरिका में टैटू का सबसे अधिक क्रेज है। यहां वर्ष 2012 में ही 21 फीसदी लोगों ने टैटू बनवाया था। खास बात यह है कि अमेरिका में पुरुषों से ज्यादा महिलाएं टैटू बनवाती हैं। लड़कियों को लगता है कि टैटू से वे हॉट और अपीलिंग नज़र आएंगी। बिंदास लड़कियां  ब्रैस्ट, नाभि और जांघ पर टैटू बनवाकर प्रदर्शन का शौक पूरा कर रही हैं। 

भीड़ में सबसे अलग अपनी पहचान बनाने की ख्वाहिश रखने वाले युवाओं के 'स्टाइल स्टेटमेंट' का प्रतीक बन गया है थ्री-डी टैटू। थ्री-डी इफैक्ट के साथ ब्लैक, ग्रीन, ब्लू, रैड, यैलो जैसे ब्राइट कलर के टैटू और उनमें डिजाइन को स्टाइल आइकन माना जा रहा है। थ्री-डी टैटू की खासियत यह है कि इसका लुक बहुत हद तक ऑरिजनल लगता है। टैटू को मशीन की मदद से बनाया जाता है, जिसमें बहुत दर्द होता है। लेकिन टैटू गुदवाने के शौकीन युवाओं को गुदवाने पर उतना दर्द नहीं होता, जितनी खुशी इन्हें इसके बाद होती है। 

कवरअप टैटू

यंगस्टर्स इन दिनों कवरअप टैटू करा रहे हैं। यानी नया टैटू बनवाने की बजाय पुराने टैटू को ही कलर्स या डिज़ाइन में बदलाव कर उनका लुक चेंज कर रहे हैं। ये कमर, पीठ, कूल्हे, पेट, बाजू और एड़ी पर भी टैटू गुदवा रहे हैं। बिंदास लड़कियां  ब्रैस्ट, नाभि और जांघ पर टैटू बनवाकर प्रदर्शन का शौक पूरा कर रही हैं। इस तरह के टैटू पर करीब पांच हजार रुपये का खर्च होता है।

रियलिस्टिक टैटू

यंगस्टर्स में फोटो रियलिस्टिक टैटू का क्रेज़ सिर चढ़कर बोल रहा है। इसमें आप अपनी पसंद की किसी भी तस्वीर को हूबहू आप के शरीर के किसी भी हिस्से पर डिजाइन कर करवा सकते हैं। इसका लुक थ्री-डी इफैक्ट से भी ज्यादा अच्छा और रियल नजर आता है। ये चित्र बेहद भव्य होते हैं और इन्हें बनाने में काफ़ी समय लगता है। छोटे साइज के रियलिस्टिक टैटू को बनाने में करीब दो से चार दिन का समय लगता है और बड़े टैटू को बनाने में करीब डेढ़ से 6 महीने तक का समय लग जाता है। इनकी कीमत 35 हजार रुपए से शुरू होकर 2 लाख रुपए तक होती है।

डॉटेड टैटू 

डॉटेड टैटू ज्यॉमैट्रिकल पैटर्न बेस्ड है। इंटेलेक्चुअल लोग इसके साथ खूब एक्सपेरिमेंट कर रहे हैं। यूथ इसका टशन इनोवेटिव डिजाइंस के साथ दिखा रहा है।इन्हें किसी भी शेप में डिजाइन किया जा सकता है। शेडिंग में थोडा डिफरेंस लाते हुए इन्हें थ्री-डी अपीयरेंस भी दी जा सकती है और इस पैटर्न में क्यूबिकल शेप सबसे ज्यादा डिमांड में है। ये ज्यादातर ब्लैक इंक से बनाए जाते हैं, कलर्स का यूज कम होता है। छोटे साइज़ का टैटू दो से तीन हज़ार रुपये में बन जाता है।