Thursday, March 21, 2013

प्यार भरे मस्ती के रंग

प्यार भरे मस्ती के रंग

बच्चों के पास ऐसे ढेरों आइडियाज होते हैं जिनसे वे अपनी होली में मस्ती के रंग भर सकते हैं, तो क्यों न इस बार आप भी होली कुछ इस तरह से खेलें कि वह यादगार बन जाए और आप अपने बचपन को एक बार फिर से जी लें। लोगों को रंगने के नए-नए आइडियाज ट्राई करने में हर्ज भी क्या है, लेकिन बच्चों की तरह होली पर हंसी-ठिठोली और मौज-मस्ती करने के लिए आपको सबसे पहले अपनी झिझक को दूर करना होगा। बेझिझक हो कर ही आप खेल सकते हैं मस्ती भरी होली। होली के दिन आप रंग के बहाने दूसरों पर अपना प्यार बरसा सकते हैं। हम होली पर आपको कुछ इंट्रस्टिंग आइडियाज दे रहे हैं जो फंकी होने के साथ-साथ क्रिएटिव भी हैं। आप जम कर पार्टी करें और हुड़दंग मचाएं लेकिन ध्यान रखें हुड़दंग जैसे भी मचाएं पर उसमें परंपरा का पालन करने की गुंजाइश जरूर हो।

* होली का त्यौहार दोस्तों और घरवालों के साथ मस्ती करने के लिए होता है। दोस्तों के साथ होली खेलने से पहले घर वालों के साथ ही खेलनी चाहिए। तड़के उठकर घर के बड़े-बुजुर्गों को तिलक लगाकर होली विश करने के बाद देखें कि कौन है जो सो रहा है। इस दिन जो भी सुबह देर तक सोता हुआ मिले, उसे रावण का रूप देने से जरा भी परहेज न करें। उठाएं ब्लैक मार्कर और बना दें दाढ़ी-मूंछ। साथ ही खूब सारे रंग भर कर पूरा कार्टून बनाने में भी कोई कोर-कसर नहीं छोडऩी चाहिए।

*होली की जान हैं रंग और गुलाल। रंगों के त्यौहार का रंगों के बगैर कोई मतलब ही नहीं है। अब सवाल उठता है कि किसे रंग लगाया जाए और कैसे। हम हरेक को तो पकड़-पकड़ कर रंग लगा नहीं सकते। इसलिए आप अलग-अलग साइज की पिचकारियां खरीदें और इनमें भरें हर्बल कलर्स। रंगों में विविधता जरूर रखें, जैसे सुर्ख गुलाबी, चटखीला पीला और गहरा हरा। आपकी ड्रैस ऐसी हो कि उसमें होली के पैकेट्स आप आसानी से छिपा सकें। तो जब भी कोई सामने आए, आप दिखाएं अपना जादू और ‘बुरा न मानो होली है’, बोलते हुए अपनी जेबें ढीली कर दें।

*जिन दोस्तों को होली खेलना पसंद न हो उन्हें तो रंगने में मजा ही बहुत आता है। ध्यान रखना आज कोई भी ऐसा व्यक्ति न हो जिसको रंग न लगा हो। आखिरकार ऐसा कैसे हो सकता है कि होली के दिन कोई रंगों से न नहाए। आप सीधे उनके घर पहुंच जाएं और डोरबैल बजा दें। दरवाजा न खुले तो दीवार फांद कर अंदर आने की धमकी दें। अब तो दरवाजा खुल ही जाएगा। घर में घुसने के बाद दोस्त को प्यार से गले मिलें और फिर अचानक रंग बरसा दें। अब गले लगाने की बारी आपके दोस्त की है। ध्यान रखना अब वह भी आपको छोड़ेगा नहीं। पर आपको भी बुरा नहीं मानना चाहिए, बुरा न मानो होली है।

*अगर किसी को आप सामने से रंगने की हिम्मत न जुटा पाएं, तो छोटी पिचकारी आपके काम आने वाली है। बड़ी पिचकारी आपके हाथ में देखकर तो लोग संभल जाएंगे, सावधान हो जाएंगे, पर छोटी पिचकारी आपके मिशन को सफल बनाएगी। जिसे आपने रंगना है उसे आप पीछे से या पास से गुजरते हुए मनचाहे निशाने पर दे मारो पिचकारी और फिर देखो नजारा। अगर उसकी नजर आप पर पड़ ही गई तो वहां से गुजर रहे किसी और शख्स पर रंग डालने का आरोप लगाते हुए वहां से सटक लेने में ही अक्लमंदी है।

*पिचकारी से थोड़ा-सा रंग डाल कर दिल को तसल्ली नहीं होती। होली की खुशी तभी होती है जब सामने वाले को पकड़ कर अच्छी तरह रंगों से सराबोर कर दिया जाए। आप पीछे से उनके चेहरे पर रंग मल दें पर ध्यान रखें रंग आंखों में न जाए। आप दोस्तों को सामने से मुस्कुराते हुए होली विश करें और गले लगाएं, जैसे ही अलग होने लगें, अचानक से रंगों का हमला बोल दें। ध्यान रहे दोस्त को संभलने का मौका नहीं मिलना चाहिए।

*छिप कर वार करने के लिए गुब्बारा बढिय़ा हथियार रहेगा। इसमें भरें कीचड़ (जिसे आटे या मैदे में आंवले का पानी डाल कर बनाया है) और सफेद कपड़ों को बना दें ब्लैक एंड व्हाइट। गुब्बारा जरा ध्यान से फैंकें क्योंकि इसमें आपको सैकंड चांस मिलने वाला नहीं है। अगर आपका निशाना चूक गया और यह रास्ते में ही फट गया तो सामने वाला सावधान हो जाएगा।

*वैसे तो होली पर अंडे फैंकना अच्छा नहीं माना जाता लेकिन अगर आप इन्हें दोस्तों पर ट्राई करना चाहते हैं तो जरूर कर सकते हैं। पर ध्यान रखें आपका निशाना पक्का होना चाहिए और अंडा सीधा सिर पर ही फूटना चाहिए। अगर आपका निशाना सही नहीं है तो आप होली से पहले गुलेल के साथ अंडा फैंकने की प्रैक्टिस कर सकते हैं क्योंकि ‘प्रैक्टिस मेक्स ए मैन परफैक्ट’। अब देखते हैं आपके अंडों से कौन बच पाता है।

कुदरती रंगों से खेलें सेहतमंद होली

कुदरती रंगों से खेलें सेहतमंद होली
पहले लोग फूलों और सब्जियों का प्रयोग करके होली के रंग बनाते थे। पर समय के साथ पक्के कलर्स के लिए कैमिकल का प्रयोग किया जाने लगा, परन्तु इन कलर्स के साइड इफैक्ट्स को देखते हुए लोग पुराने ट्रेंड को फॉलो करने लगे हैं...

चारों तरफ होली की धूम मची है। युवा होली पर हुड़दंग मचाने के लिए बेहद रोमांचित हैं, पर रंगों में छिपे केमिकल्स के कारण कई लोग होली से दूर हो रहे हैं। साथ ही ये पर्यावरण के लिए भी नुकसानदायक होते हैं। हम अपने पारम्परिक त्योहार पूरी मस्ती और उल्लास से मना सकें इसलिए पलाश, जासौन, चंदन, गुलाब आदि से तैयार कई तरह के हर्बल कलर्स भी मार्किट में उपलब्ध हैं। इन कलर्स से होली खेलने पर स्किन पर कोई साइड इफेक्ट नहीं होते, साथ ही जब ये पानी या हवा के साथ पर्यावरण में मिलते हैं तो नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।

लाल रंग: लाल गुलाब की सूखी पत्तियां पीस व छान कर इस लाल पानी में मिला कर लाल रंग तैयार कर सकते हैं। खुशबू के लिए आप इसमें रोज़ एसेंस भी डाल सकते हैं। रतनजोत को पानी में उबाल कर ठंडा कर लें। फिर उसमें पानी मिलाने से गीला लाल रंग तैयार होता है। जब हल्दी के ऊपर नींबू का रस गिराया जाता है तो उसका रंग लाल हो जाता है। इसे पानी के साथ मिलाकर गीले लाल रंग के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। टमाटर या गाजर के पेस्ट को पानी के साथ मिलाकर भी लाल रंग तैयार किया जा सकता है। सूखे लाल चंदन को आप लाल गुलाल की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं। यह सुर्ख लाल रंग का पाउडर होता है और स्किन के लिए भी अच्छा होता है। लाल चंदन पाउडर को पानी के साथ उबाल लें। इसके बाद इसमें और पानी डाल लें। होली के लिए लाल रंग तैयार है। गुलमोहर की सूखी पत्तिायों को पीस कर लाल गुलाल बनाया जा सकता है। अनार के छिलकों को पानी में उबालकर भी लाल रंग बनाया जा सकता है। सिन्दूरिया के बीज लाल रंग के होते हैं, इनसे आप सूखा व गीला लाल रंग बना सकते हैं। बुरांस के फूलों को रातभर पानी में भिगो कर भी लाल रंग बनाया जा सकता है, लेकिन यह फूल सिर्फ पहाड़ी इलाकों में ही पाया जाता है।

नारंगी रंग: टेसू (पलाश) के फूलों को रातभर पानी में भिगो कर बहुत ही खूबसूरत नारंगी रंग बनाया जा सकता है। कहते हैं भगवान श्रीकृष्ण भी टेसू के फूलों से ही होली खेलते थे। टेसू के फूलों के रंग को होली का पारम्परिक रंग माना जाता है। पलाश के फूलों से बने रंगों से होली खेलने से शरीर में गर्मी सहन करने की शक्ति बढ़ती है और रक्त संचार सुचारू रहता है। एक चुटकी चंदन पाउडर को करीब एक लीटर पानी में भिगो देने से नारंगी रंग बन जाता है। हरसिंगार और सेमल के फूलों को पानी में भिगो कर भी नारंगी रंग बनाया जा सकता है। सूखा नारंगी रंग बनाने के लिए टेसू या ढाक के फूलों को सूखा कर पाउडर बना लें और फिर इसमें टेलकम पाउडर मिला दें।

गुलाबी रंग: चुकंदर को कद्दूकस कर लें और इसे रात भर पानी में भिगो दें। बहुत ही सुंदर गुलाबी रंग तैयार हो जाएगा। गहरे गुलाबी रंग के लिए आपको कसे हुए चुकंदर को एक लीटर पानी में उबाल कर ठंडा करना होगा। गुलाबी कचनार के फूलों को पानी में उबालने या रात भर ऐसे ही छोड़ देने से भी गुलाबी रंग तैयार होता है।

पीला रंग: हल्दी को पानी में अच्छी तरह मिला लें। अगर आपको गाढ़ा पीला रंग चाहिए तो थोड़े से पानी के साथ हल्दी को आप उबाल भी सकते हैं। पीले रंग में गोल्डन टच देने के लिए आप इसमें एक चम्मच नारियल का तेल भी मिला सकते हैं। मिठाइयों में पडऩे वाले पीले रंग का भी उपयोग कर सकते हैं। गेंदे के फूलों को पानी में मिलाकर उबालें और रातभर भीगा रहने दें। सुबह तक बेहद खूबसूरत पीला रंग तैयार हो जाएगा। अमलतास, गेंदा व पीले सेवंती के फूलों से भी पीला रंग बनाया जा सकता है। फूलों की पंखुडिय़ों को छाया में सुखाकर महीन पीस लें। इसमें आप बेसन भी मिला सकते हैं या सिर्फ फूलों का पाउडर ही इस्तेमाल कर सकते हैं। टेलकम पाउडर और हल्दी पाउडर मिलाकर भी सूखा पीला रंग बना सकते हैं। मुल्तानी मिट्टी को बारीक पीसकर शानदार पीला रंग बना सकते हैं।

हरा रंग: सूखे मेहंदी पाउडर को आप हरे रंग की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर आप सूखी मेहंदी लगाते हैं तो इसे यूं ही झाड़ कर साफ किया जा सकता है, पर गीली मेहंदी से स्किन पर रंग चढऩे का खतरा रहता है। इसलिए आप बेझिझक इसे दोस्तों के बालों पर लगा सकते हैं। धनिया, पालक, मेथी, पुदीना, बथुआ, टमाटर की हरी पत्तियां आदि हरी सब्जियों की पत्तियों को सूखाकर पीस लें या इनकी पत्तियों का पेस्ट पानी में घोलकर गीला हरा रंग बना सकते हैं। गुलमोहर की पत्तियों को सुखाकर महीन पाउडर कर लें, इसे आप हरे रंग की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं।

नीला रंग: नीले जासवंती के फूलों से आप नीला रंग बना सकते हैं। जासवंती के फूलों को सुखाकर उसका पाउडर बना लें और इसकी मात्रा बढ़ाने के लिए आटा मिला लें। जामुन को बारीक पीस लें और इसमें पानी मिला लें। इससे बहुत ही खूबसूरत नीला रंग तैयार हो जाएगा। नील पेड़ के फूल या जकारांडा के सूखे फूलों को पीस कर पानी में घोल कर नीला रंग तैयार कर सकते हैं। पांच चम्मच नील को एक बाल्टी पानी में घोल कर आप ढेर सारा नीला रंग तैयार कर सकते हैं।

भूरा रंग: पान के साथ खाए जाने वाले कत्थे में पानी मिलाने से भूरा रंग तैयार होता है। चाय या कॉफी को पानी में उबाले। फिर इसे ठंडा कर भूरे रंग के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं।

काला रंग: सूखे आंवले को किसी लोहे के बर्तन में उबाल कर उसे रात भर वैसे ही छोड़ दें। सुबह उसमें पानी मिलाकर उसे काले रंग के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। काले अंगूर का जूस निकाल कर उसमें पानी मिलाने से भी काला रंग तैयार होता है।

सफेद पर खिलते होली के रंग

सफेद पर खिलते होली के रंग
होली रंगों का त्योहार है, लेकिन इस दिन सबसे अधिक मांग होती है सफेद कपड़ों की। इस दिन सबसे अधिक बिक्री सफेद कुर्तों की ही होती है। सफेद कपड़ों पर होली के रंग ज्यादा अच्छी तरह खिलते हैं, इसीलिए इनकी मांग सबसे अधिक होती है। होली के लिहाज से स्टाइलिस्ट और परफेक्ट ड्रेस पहनकर होली मनाने मजा ही कुछ और है...
 

होली के दिन जो भी  ड्रेस पहनो वो आप दोबारा शायद ही कभी पहन पाएं, पर इसके बावजूद भी होली के नज़दीक आते ही युवाओं और बच्चों में कपड़ों की खरीदारी का खासा उत्साह रहता है। आजकल आम लोगों में भी बॉलीवुड की तरह खास परिधानों में होली खेलने का चलन बढ़ रहा है। लोगों की इस बदली सोच के चलते अब होली पर भी स्पेशल ड्रेस पहनने का चलन बढ़ रहा है।

अगर आप होली के दिन सबसे जुदा नजर आना चाहती हैं तो कैरी कीजिए व्हाइट ड्रेस। सफेद कपड़ों में होली खेलना पारंपरिक भी माना जाता है। सफेद रंग शानदार लगता है, गरिमामय लगता है। सफेद रंग सबको भाता है, सब पर फबता है चाहे सैलिब्रिटीज पहन लें या फिर कोई आम आदमी। सफेद रंग सबको आकर्षित करता है और सब पर यह रंग आकर्षक लगता है।

कोशिश करें कि आप जो भी पहनें वह ट्रांसपेरेंट न हों। आपकी ड्रेस का मेटिरियल थोड़ा मोटा होना चाहिए ताकि रंगों से भीगने के बाद आप चीप न लगें। होली खेलने का मजा सफेद रंग के सूती वस्त्रों में ही है। हर साल होली के अवसर पर युवाओं को टार्गेट करके मार्किट में विशेषरूप से सफेद रंग का पायजामा-कुर्ता, सलवार-कुर्ता, शेरवानी इत्यादि लॉन्च की जाती हैं, जिन्हें युवा खूब पसंद करते हैं। होली से पहले सफेद कुर्तों की मांग में वृद्धि हो जाती है। महिलाएं आमतौर पर होली के दिन एक बार पहनने के लिए सफेद कुर्तों की मांग करती हैं, जबकि पुरुषों में इसकी मांग सबसे अधिक होती है।

सफेद रंग प्रतीक है शांति का, सद्भाव का, पवित्रता का और प्रेम का। होली भी प्रतीक है दोस्ती की, खुशियों की, प्रेम-प्यार बढ़ाने की। तभी तो सफेद रंग और होली का रिश्ता बहुत गहरा है। सफेद, ऐसा रंग जिस पर जो भी रंग चढ़ाओ चढ़ जाता है। उसे सजाता है, संवारता है, सुंदर बनता है। होली के रंग भी सफेद पर ही खिलते हैं, जबकि रंगीन कपड़ों पर रंग नहीं दिखते। सफेद कपड़ों में होली खेलने से कपड़ों पर कई प्रकार के रंग लग जाने से सफेद कपड़े रंगीन हो जाते हैं। ऐसे में सफेद कपड़ों का क्रेज़ और भी बढ़ जाता है। यही कारण है कि लड़कियां अपने लिए सफेद रंग का पार परिक सूट और लड़के सफेद कुर्ता पाजामा या पठानी सूट खासतौर पर खरीदते हैं।

होली के मौके पर पारंपरिक परिधान ही पहने जाएं तो बढिय़ा लगता है। लड़कियों के लिए सलवार कमीज या पजामी सूट एक अच्छा विकल्प हो सकता है। सफेद ग्राउंड पर प्रिंटेड कुर्ता भी क्लासिक लुक देगा। अगर आप थोड़ा मॉर्डन लुक चाहती हैं तो लैगिग्स के साथ लॉन्ग कुर्ती ट्राई कर सकती हैं या अनारकली स्टाइल में कॉटन का सूट पहन सकती हैं। होली पर भांग पीकर कुछ लोग गलत हरकतें भी करने लगते हैं इसलिए बढिय़ा रहेगा यदि आप नेहरु कॉलर या हाई नैक का टॉप पहनें। आप सिंपल सूट पर जैकेट भी ट्राई कर सकती हैं। अगर आप भारतीय और पश्चिमी दोनों लुक चाहती हैं, तो मिक्स एंड मैच करके पहन सकती हैं। कलरफुल और प्रिंटेड पैंट्स अब भी फैशन में हैं। लड़कियां और लड़के दोनों इस लुक को ट्राई कर सकते हैं। किसी भी ब्राइट कलर की पैंट के साथ ढीली सी सफेद शर्ट या टी शर्ट पहन सकते हैं।

सफेद रंग के सूट के साथ आप हाथों में कलरफुल चूडिय़ां पहन सकती हैं। अपने बालों की चोटी बनाकर आप स्टाइलिश भी दिख सकती हैं और बालों को रंगों से होने वाले नुकसान से भी बचा सकती हैं। आप चाहें तो बालों को बांधने के लिए स्टोंस से सुसज्जित खूबसूरत क्लिप या रबरबैंड का भी इस्तेमाल कर सकती हैं। सफेद रंग की ड्रेस के साथ हर तरह की एक्सेसरीज आसानी से मैच करती है। लेकिन होली पर एक्सेसरीज हल्की ही पहनें। ज्यादा भारी ज्यूलरी होली पर अच्छी नहीं लगती। लंबी बीड्स वाली माला गले में पहन सकती हैं और साथ में मैचिंग हैंगिंग इयररिंग्स आपकी लुक्स को कॉम्पलीमेंट करेंगे। सफेद के साथ सिल्वर या ऑक्सीडाइज्ड सिल्वर ज्यूलरी भी बढिय़ा दिखती है।

पुरुषों के लिए धोती कुर्ता, कुर्ता-पायजामा से अच्छा विकल्प कोई दूसरा नहीं है। लड़के सफेद कुर्ते के साथ काले रंग की जैकेट को ट्राई करें, ये पारंपरिक के साथ ही स्मार्ट सेंस भी दिखाता है। आप भी अपने बालों को कवर करने के लिए कैप कैरी कर सकते हैं। इससे आपकी लुक भी अच्छी लगेगी और आप रंगों से होने वाले नुकसान से भी बच जाएंगे।

Friday, March 8, 2013

फैशन स्टेटमैंट बन रही हैं गलत आदतें


फैशन स्टेटमैंट बन रही हैं गलत आदतें

टीन एजर लड़कियों को अगर किसी बात के लिए मना किया जाता है तो उन्हें ऐसा लगता है जैसे उनसे उनकी आजादी छिन रही है। इस पर वे चिढ़ कर अक्सर दी गई हिदायत के उलट ही करती हैं। इस विद्रोही स्वभाव के कारण शराब व नशीले पदार्थों का सेवन करना, अश्लील हरकतें करना और अनैतिक सैक्स ये सब उनकी आदत और शौक बन जाते हैं।

किशोरावस्था उम्र का ऐसा पड़ाव होता है जिसमें आगामी जीवन की नींव तो पड़ती ही है, साथ ही इस आयु वर्ग के बच्चे बहुत जल्दी भटक भी जाते हैं। यही वह उम्र होती है जब बच्चे गलत आदतों का शिकार हो जाते हैं। किशोरियों को अपने परिवार से ज्यादा दोस्त अच्छे लगने लगते हैं, क्योंकि परिवार से उन्हें बंधन का अहसास होता है और दोस्त उन्हें आजादी महसूस करवाते हैं। इसलिए इन एज ग्रुप्स के बच्चों के पेरैंट्स का यह दायित्व बन जाता है कि वे उनकी हर छोटी बात, उनके व्यवहार पर पूरी तरह से नजर रखें, ताकि उनका बच्चा गलत आदतों का शिकार न  हो जाए। संतान के बेहतर भविष्य के लिए उसके चरित्र और आचरण की पूरी जिम्मेदारी पेरैंट्स की ही होती है। देखा गया है कि जिन किशोरों और बच्चों के अपने पेरैंट्स से अच्छे संबंध होते हैं उनका व्यवहार भी अच्छा होता है और उनका मानसिक और सामाजिक विकास भी बेहतर होता है, लेकिन ऐसा न होने पर इसके गलत परिणाम देखने को मिलते हैं।

स्मोकिंग
‘दम मारो दम, मिट जाए गम’। लड़कियों में अब स्मोकिंग का चस्का बढ़ रहा है। कई लड़कियां अपना गम मिटाने के लिए स्मोकिंग करती हैं लेकिन एक समय के बाद धुएं में गम नहीं सेहत भी उडऩे लग जाती है। कुछ लड़कियों को स्मोकिंग की एडिक्शन हो जाती है तो कुछ स्टेटस ङ्क्षसबल के चलते इसे अपनी ङ्क्षजदगी में शामिल कर लेती हैं। तंबाकू का कोई भी रूप ब्रैस्ट कैंसर, सर्वाइकल कैंसर और गर्भावस्था से संबंधित जटिलताएं पैदा कर सकता है।

एल्कोहल   
एल्कोहल का सेवन यूथ कल्चर का अहम हिस्सा बन चुका है। महिलाओं में एल्कोहल का सेवन आम हो गया है। नैटवर्क बनाने के लिए, डेट पर या किसी पार्टी में महिलाएं भी अक्सर पुरुषों की तरह ड्रिंक्स लेती हैं। इतना ही नहीं हाई स्कूल की किशोर लड़कियों में शराब का इस्तेमाल कभी इतनी सहजता से नहीं हुआ था जितना कि आज है। घर से दूर रहने वाली लड़कियां ज्यादा आजाद हो जाती हैं और नशे अपनाने लगती हैं। शरीर में मौजूद पानी की मात्रा ही एल्कोहल को डायल्यूट करती है। महिलाओं के शरीर में पुरुषों की अपेक्षा पानी की मात्रा कम पानी होने के कारण उन पर एल्कोहल का असर जल्दी और कयादा होता है।

ड्रग्स
किशोरियों में ड्रग्स का सेवन बढ़ता जा रहा है। युवा लड़कियों में नशे की आदत पूरे समाज के लिए खतरनाक साबित हो रही है। यूनिवर्सिटी में पढऩे वाली लड़कियों में तो यह फैशन स्टेटमैंट बन चुका है। खुद को हाई-फाई दिखाने के लिए लड़कियां इसकी गिरफ्त में आ रही हैं। यह ऐसी आदत है जिसे अपनाना जितना आसान है इससे छुटकारा पाना उतना ही मुश्किल है। ड्रग्स लेने पर किशोर बच्चों में डिप्रैशन, शिजोफ्रेनिया जैसी मानसिक बीमारियों और सांस, दिल व फेफड़े से जुड़े रोगों की संभावना बढ़ जाती है।

शॉर्ट ड्रैसेज
लड़कियां सुंदर और स्मार्ट दिखने के लिए काफी शॉर्ट ड्रैसेज पहनती हैं। इन कपड़ों में शरीर जितना ढकता नहीं है, उतना उघड़ता है, जो देखने में शालीन नहीं लगता। फिल्मों की हीरोइनों और मॉडल्स को कॉपी करते वक्त वे यह भूल जाती हैं कि वे भी इन कपड़ों को अपनी रियल लाइफ में नहीं पहनती हैं, सिर्फ रैंप पर या शूटिंग के दौरान ही पहनती हैं। कपड़े ऐसे होने चाहिएं जो आपकी पर्सनैलिटी को एनहांस करें न कि आपको दूसरों के सामने शर्मिंदा करें। आप अपनी पर्सनैलिटी के अनुसार इंडियन, वैस्टर्न या फ्यूजन किसी भी तरह की ड्रैसेज पहन सकती हैं।

ग्रुप सैक्स
उचित आयु से पहले ही किशोरियां शारीरिक संबंधों और अनैतिक चीजों के विषय में जिज्ञासा रखने लगी हैं और इनका अनुभव करने का वे कोई भी मौका गंवाना नहीं चाहतीं। कम उम्र की लड़कियों की एक बड़ी संख्या ग्रुप सैक्स कर रही है। ग्रुप सैक्स करने वाली अधिकतर लड़कियां सेहत संबंधी समस्याओं से जूझ रही हैं क्योंकि ग्रुप सैक्स करते समय वे अपनी सुरक्षा का ध्यान नहीं रखती जिसके चलते अपने किसी पार्टनर के द्वारा संक्रमित हो
जाती हैं।

सोशल नैटवर्किंग
कंप्यूटर और सोशल नैटवर्किंग साइट्स के कारण किशोरियों और युवाओं में भटकाव की स्थिति देखी जा रही है। वर्तमान में युवा वर्ग ड्रग एडिक्शन के बाद दूसरे नंबर पर इंटरनैट एडिक्शन का शिकार हो रहा है। यह सब सही मार्गदर्शन न मिलने के कारण ही होता है। सोशल नैटवर्किंग साइट्स और यंगस्टर्स की गलत आदतों का गहरा कनैक्शन है। नैटवर्किंग साइट या इंटरनैट पर जब किशोर कुछ आपत्तिजनक देखते हैं, तो उन्हें वह बेहद कूल लगता है और इसके चलते वे छोटी उम्र में ही गलत आदतों के शिकार हो जाते हैं।

Thursday, March 7, 2013

सफलता की नई इबारत लिखती महिलाएं

http://epaper.punjabkesari.in/magazine/news/08032013/page/3$

सफलता की नई इबारत लिखती महिलाएं

नारी की तुलना कच्ची मिट्टी से की जाती है, जो जिस सांचे में ढलती है वैसा ही रूप ले लेती है। ठीक वैसे ही नारी को परिवार और समाज में जैसा वातावरण मिलता है वह वैसी ही बन जाती है। सकारात्मक माहौल मिलने पर उसका हर रूप परिपक्व और पूर्णता लिए होता है। महिलाओं के लिए समाज के बदलते दृष्टिकोण के चलते आज की नारी ने संकीर्ण विचारधारा को त्याग कर अपने अंदर आत्मविश्वास पैदा कर लिया है और यही आत्मविश्वास उसकी सफलता की नित नई इबारतें लिख रहा है। प्रगति का ऐसा कोई ही शिखर बचा होगा, जहां आज की नारी न पहुंची हो। हर क्षेत्र में उसने बेहतरीन मुकाम हासिल किया है और समाज के सामने एक मिसाल कायम की है।

आज नारी हर क्षेत्र में अपनी कामयाबी का परचम लहरा रही है। उसने समाज के सामने अपनी एक खास पहचान पेश की है, जिसमें वह साहसी, परिपक्व, सहिष्णु और मजबूत इरादे वाली महिला के रूप में उभर कर सामने आई है। आज की नारी को अगर ‘सुपर वुमन’ भी कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी, क्योंकि आज समाज का कोई भी ऐसा क्षेत्र नहीं जिसमें उसका विशेष योगदान न हो या जिसमें वह सर्वोच्च पदों पर आसीन न हो। हर क्षेत्र पुरुषों से मिल रही प्रतिस्पर्धा के बावजूद नारी का दबदबा देखने लायक है। समाज के लगभग हर क्षेत्र में नारी पुरुषों से कहीं बढ़ कर चुनौतियां पेश कर रही है। शिक्षा के क्षेत्र में तो लड़कियां अपनी बौद्धिक योग्यता का लोहा मनवा ही चुकी हैं। आप किसी भी कक्षा का रिकाल्ट देख लें, लड़कियां टॉप कर रही हैं। इसी आत्मविश्वास और प्रतिभा के चलते परिवार और समाज उसके बेटी, बहन, बहू, पत्नी के रूप पर गर्व महसूस करता है।

अब वह मिथक भी टूट रहा है जिसमें महिलाओं का चौखट से पैर बाहर निकालना हेय समझा जाता था। आज कामकाजी महिला के रूप में भी नारी ने अपने करियर को एक नई दिशा दी है। 1987 में कामकाजी महिलाओं का प्रतिशत 13 था जो 2001 में बढ़ कर 25 फीसदी हो गया है। कामकाजी भारतीय महिलाओं का यह प्रतिशत बहुत से देशों में कामकाजी महिलाओं की तादाद से काफी ज्यादा है। दुनिया में कुल सी.ई.ओ. का 11 फीसदी भारतीय महिलाएं हैं। ये आंकड़े पश्चिमी दुनिया के लोगों को भी चौंकाते हैं।

बाहर एक नौकरीपेशा औरत के रूप में तथा घर में गृहिणी की भूमिका में आज की कामयाब नारी अपनी उत्कृष्टता व उत्तरदायित्व दोनों को बखूबी निभा रही है। पत्नी, बहू और मां की जिम्मेदारियों को बखूबी निभाते हुए वह अपने पति के कंधे से कंधा मिला कर गृहस्थी की गाड़ी खींचने में भी मदद करती हैं। आई.सी.आई. सी.आई. बैंक की सी.ई.ओ. एवं एम.डी. चंदा कोचर, एक्सिस बैंक की सी.ई.ओ. एवं मैनेजिंग डायरैक्टर शिखा शर्मा, पेप्सीको की सी.ई.ओ. इंदिरा नूई, अपोलो हॉस्पिटल की मैनेजिंग डायरैक्टर प्रीथा रैड्डी तो मात्र कुछ उदाहरण हैं।

नौकरी के अलावा व्यावसायिक क्षेत्र में भी महिलाओं ने सफलता का परचम लहराया है तथा साथ ही कई लोगों को रोजी देने का भी काम किया है। आज कई बड़े बिजनैस घरानों में सर्वोच्च पदों पर महिलाएं आसीन हैं। बायोकॉन की संस्थापक किरण मजूमदार शॉ, ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज की प्रबंध निदेशक विनीता बाली, एच.टी. मीडिया की चेयरमैन एवं एडिटोरियल डायरैक्टर शोभना भरतिया, एजेडबी एंड पार्टनर्स की संस्थापक एवं सीनियर पार्टनर जिया मोदी, ट्रैक्टर्स एंड फार्म इक्विपमैंट की चेयरमैन मल्लिका श्रीनिवास सफल उद्योगपतियों की श्रेणी में हैं।

आज कई महिलाएं ऐसी भी हैं जिन्होंने अपनी मेहनत, लगन और दृढ़-निश्चय से पुरुष वर्चस्व वाले क्षेत्र में सफलता के नए मानक तय किए हैं। मिसाइल मैन डा. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की शिष्या रही डॉ. टेसी थॉमस उनमें से एक हैं। डॉ. टेसी थॉमस ने अपनी प्रतिभा व मेहनत के बूते वह मुकाम हासिल किया कि उन्हें मिसाइल-वूमन का खिताब दिया जाने लगा है। परमाणु अस्त्र ले जाने में सक्षम ‘अग्नि-4’ के सफल प्रक्षेपण के उपरांत तो उन्हें ‘अग्नि-पुत्री’ तक की संज्ञा दी जाने लगी है। उन्होंने एक हजार कि.ग्रा. भार के परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम अग्नि-शृंखला की चौथी मिसाइल के सफल प्रक्षेपण करने वाली टीम को कुशल नेतृत्व प्रदान किया और मर्दों के दबदबे वाले शोध क्षेत्र में महिलाओं के एक बड़े समूह को राष्ट्र की सुरक्षा से जुड़े अभियान में भागीदारी दिलाई। रक्षा अनुसंधान के इस अभियान में करीब दो सौ महिलाएं सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

केवल नौकरीपेशा ही नहीं बल्कि हर वह गृहिणी भी एक सफल नारी के खिताब की हकदार है जो अपनी मिठास से रिश्तों को सहेजते हुए परायों को भी अपना बना रही है, अपने परिवार की बगिया को प्यार के फूल से महका रही है और अपनी आने वाली पौध को संस्कारों व मर्यादा की खाद से पोषित करती हुई जीने की राह दिखा रही है।

अपने अधिकारों को पहचानें

http://epaper.punjabkesari.in/magazine/fullstory/124995732_305884

अपने अधिकारों को पहचानें

मनदीप कौर चढ्डा से बातचीत करती मीनाक्षी गांधी
सभी महिलाओं को निश्चित तौर पर कानूनों को अवश्य जानना चाहिए। कानून सामाजिक तौर पर महिलाओं को अधिकार देते हैं। भारतीय संविधान में महिलाओं को भी पुरुषों के बराबर के अधिकार दिए गए हैं और कुछ क्षेत्रों में तो उन्हें विशेषाधिकार भी हासिल हैं। महिलाओं के अधिकारों को सुनिश्चित करने हेतु हमारे संविधान में अलग से कानून बनाए गए हैं। समय-समय पर इनमें संशोधन भी किया गया है। लेकिन समस्या यह है कि अधिकतर महिलाएं अपने अधिकारों से अनजान हैं और उन्हें पता ही नहीं होता कि उनके साथ हो रही घटनाएं हिंसा हैं और इससे बचाव के लिए कोई कानून भी है। कई बार तो वे जानकारी होते हुए भी इन कानूनों का उपयोग नहीं कर पाती हैं। यही कारण है कि जब उनके साथ कुछ गलत होता है तो वे चुपचाप उसे सहती रहती हैं। हम महिलाओं से जुड़े अधिकारों की जानकारी दे रहे हैं ताकि अगर उन्हें कभी कोई समस्या हो,तो वे पूरी हिम्मत से उसका मुकाबला कर सकें।

घरेलू हिंसा अधिनियम
घरेलू हिंसा अधिनियम का निर्माण 2005 में किया गया और 26 अक्टूबर 2006 से इसे लागू किया गया। यह अधिनियम महिला बाल विकास द्वारा संचालित किया जाता है। शहर में महिला बाल विकास द्वारा संरक्षण अधिकारी नियुक्त किए जाते हैं जो घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं की शिकायत सुनते हैं और पूरी जांच पड़ताल करने के बाद प्रकरण को न्यायालय भेजा जाता है। घरेलू हिंसा अधिनियम ऐसी महिलाओं के लिए है जो परिवार के भीतर होने वाली किसी भी तरह की हिंसा से पीड़ित हैं। इसमें अपशब्द कहे जाना, किसी प्रकार की रोक-टोक करना, मारपीट करना आदि को भी प्रताडऩा की कैटेगरी में ही शामिल किया गया है। इस अधिनियम के तहत पीड़ित महिला किसी भी वयस्क पुरुष के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकती है।

  • अगर किसी महिला की मौत जलने से हुई हो या उसके शरीर पर कोई निशान हों या शादी के सात साल के भीतर असामान्य परिस्थितियों में मौत हुई हो तो भारतीय संविधान की धारा 304 ख के तहत दहेज हत्या की शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है, जिसके तहत आजीवन कारावास का प्रावधान है। 
  • किसी भी महिला को शिकायत दर्ज करवाने का अधिकार है यदि उसके साथ सार्वजनिक स्थानों जैसे बस, ट्रेन या सड़क पर छेड़छाड़ की जाती है या भद्दी टिप्पणी करके या अश्लील गीत गाकर उसे परेशान किया जाता है। भारतीय दंड संहिता की धारा 294 के तहत तीन माह कैद या जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
  • यदि किसी महिला का अपहरण कर लिया जाता है या उसकी मर्जी के खिलाफ उसे किसी से शादी के लिए मजबूर किया जाता है या उसके साथ बलात्कार किया जाता है, तो वह भारतीय दंड संहिता की धारा 366 के तहत शिकायत कर सकती है, जिसमें 10 वर्ष की सज़ा का प्रावधान है।
  • भारतीय दंड संहिता की धारा 498 ए के तहत ससुराल पक्ष के लोगों द्वारा की गई शारीरिक व मानसिक क्रूरता (मारपीट करना, कैद में रखना, भोजन न देना, दहेज के लिए प्रताडि़त करना इत्यादि) के खिलाफ अपराधियों को तीन वर्ष तक की सजा दी जा सकती है।
  • महिला की सहमति के बगैर जर्बदस्ती उसका गर्भपात करवाने पर भारतीय दंड संहिता की धारा 313 के तहत आजीवन कारावास या 10 वर्ष कैद/जुर्माना का प्रावधान है।
  • प्रत्येक महिला को किसी भी ऐसे व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का अधिकार है जो जानबूझ कर इशारे करके या शारीरिक बल से उसका शील भंग करने की अश्लील हरकत करता है। भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के तहत दो वर्ष की सजा हो सकती है। 
  • पहली पत्नी के जीवित रहते यदि पति दूसरा विवाह कर लेता है तो भारतीय दंड संहिता की धारा 494 के तहत आप शिकायत दर्ज करवा सकत हैं। इसके तहत 7 वर्ष की सजा का प्रावधान है।
  • प्रत्येक महिला को पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाने का अधिकार है, जिससे उसकी इच्छा के बगैर जर्बदस्ती बलात्कार किया जाता है। भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के तहत आरोपी को 10 वर्ष तक की सजा या उम्रकैद का प्रावधान है।
  • मानसिक व शारीरिक अत्याचार करके किसी भी महिला पर अगर आत्महत्या के लिए दबाव बनाया जाता है तो वह भारतीय दंड संहिता की धारा 306 के तहत शिकायत दर्ज करवा सकती है, जिसके तहत 10 वर्ष की सजा का प्रावधान है।
  • महिला के साथ अश्लील हरकत करना या अपशब्द कहने पर वह भारतीय संविधान की धारा 509 के तहत शिकायत दर्ज करवा सकती है। इसके तहत आरोपी को एक वर्ष की सजा हो सकती है।
  • भारतीय दंड संहिता की धारा 125 के तहत विवाहित महिलाओं को भरण-पोषण का अधिकार मिलता है।
  • अगर कोई महिला गवाह है तो उसे सी.आर.पी.सी. की धारा 160 के तहत अपने ही घर पर अपने रिश्तेदारों की उपस्थिति में सवालों के जवाब देने का  अधिकार है।
  • किसी भी महिला को तब तक एफआईआर पर हस्ताक्षर नहीं करने चाहिए जब तक कि वह पूरी तरह से संतुष्ट न हो कि उसमें जो भी लिखा है वो बिलकुल ठीक है। (नैशनल कमीशन ऑफ वूमेन)
  • यदि संबंधित अधिकारी आपकी एफआईआर रजिस्टर करने से इनकार करता है, तो आपको शिकायत की एक कॉपी तुरंत एसपी को भेज देनी चाहिए। (नैशनल कमीशन ऑफ वूमेन)
  • अगर संबंधित प्रभारी अधिकारी आपकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं करता है तो किसी भी महिला को अदालत का दरवाजा खटखटाने का कानूनी अधिकार है। (नैशनल कमीशन ऑफ वूमेन)


नारी गरिमा का गौरव दिवस

http://epaper.punjabkesari.in/magazine/news/08032013/page/1$


नारी गरिमा का गौरव दिवस

हम सभी की ज़िंदगी में कम से कम एक महिला ऐसी ज़रूर है जिसके हम शुक्रगुज़ार होते हैं, जिसने हमारी ज़िंदगी को आकार देने में मदद की होती है। महिला दिवस के अवसर पर आप उन्हें स्पैशल फील करवा सकते हैं और अपने मन की भावनाओं को उन तक पहुंचा सकते हैं...

8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आप अपनी ज़िंदगी की खास महिला को बेहद खास महसूस करवा सकते हैं। आप उन्हें यह बता सकते हैं कि आपकी ज़िंदगी में वो आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण हैं और इसके लिए एक बढिय़ा सा सैलिब्रेशन तो बनता ही है। आप चाहें तो उनके लिए उनका मनपसंद भोजन बना सकते हैं, बाग में उनके पसंदीदा फूल लगवा सकते हैं और उनकी फेवरिट चैरिटी में चेक भिजवा सकते हैं। आप चाहें तो पार्टी भी दे सकते हैं और उसमें उन सभी महिलाओं को आमंत्रित करें जिनके साथ आपको कभी पर्याप्त समय बिताने का अवसर नहीं मिला।
बच्चों को अच्छी बातें आप ही बताएंगे। ये संस्कारों की वो विरासत है जो आपके जरिए आपके बच्चों तक पहुंचती है। उन्हें भी महिला दिवस के बारे में जानकारी दें और उन्हें उस औरत के बारे में ज़रूर बताएं जिसे आप एडमायर करते हैं। यह महिला आपकी जानकार भी हो सकती है और कोई ऐसी भी जिसके बारे में आपने कहीं पढ़ा हो और उसके बाद आप उनके मुरीद बन गए हों।

दिन बनाएं स्पैशल
पत्नी या गर्ल फ्रैंड के लिए किसी बढिय़ा से रेस्तरां में स्पैशल लंच या डिनर प्लान करें। आप किसी ऐसे रेस्तरां में भी उनके लिए लंच या डिनर की प्लानिंग कर सकते हैं जो उनका फेवरिट हो या जिसके साथ उनकी कुछ मीठी यादें जुड़ी हुई हों। खाने का ऑर्डर खुद न दें, बल्कि अपनी खास महिला मेहमान को ही आप दोनों के लिए ऑर्डर देने दें। खाने के वक्त माहौल को खुशनुमा बना दें ताकि आप जो भी खाएं उसे इंजॉय भी करें। यहां आप एक-दूसरे के साथ अकेले में समय भी बिता पाएंगे, जबकि घर के रूटीन में आपको ज़्यादा समय साथ बिताने को नहीं मिल पाता है। खाने के तुरंत बाद घर न जाकर कुछ समय किसी पार्क में या सड़क पर टहलकदमी करते हुए बातें करें ताकि एक खूबसूरत याद के साथ आपका स्पैशल दिन पूरा हो।

गिफ्ट हो बेहद खास
महिलाओं को तोहफा पाना बेहद पसंद होता है। वैसे तो आप उन्हें हर त्योहार और मौके पर कुछ न कुछ गिफ्ट देते ही हैं, पर आज का दिन खास है तो आपको उनके लिए कुछ खास सोचना पड़ेगा। अगर आप लेखक हैं तो आप अपनी फेवरिट फीमेल के लिए कविता भी लिख सकते हैं। आप कविता के माध्यम से उन्हें यह बता सकते हैं कि वो आपके लिए कितनी खास हैं। अगर आप लेखक या आर्टिस्ट नहीं हैं, तो क्या हुआ, आप रंगीन कागज़ पर अपने दिल की बातें लिख कर भी दे देंगे, तो भी आपकी फेवरिट फीमेल की आंखों में खुशी की चमक ही देखेंगे। आपका लिखने का अंदाज़ चाहे शायराना न हो, पर शब्दों की सच्चाई आपको उनके करीब ज़रूर ले जाएगी।


फूलों से बिखेरें खुशबू
फूल अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का प्रतीक हैं और कई देशों में महिला दिवस के अवसर पर फूलों से ही सजावट भी की जाती है और तोहफे के तौर पर भी फूल दिए जाते हैं। इटली में पीले मिमोसा फूल प्रसिद्ध हैं तो रूस में लाल गुलाब समेत कई फूल महिलाओं को दिए जाते हैं। हेनोई और वियतनाम जैसे देशों में सिर्फ ब्वॉय फ्रैंड या पति ही नहीं बल्कि बॉस और सहकर्मी भी महिलाओं को तोहफे में फूल देते हैं। आप भी अपनी फेवरिट फीमेल को फूलों का तोहफा देकर उनके चेहरे पर खिलखिलाती मुस्कान देख सकते हैं।

सरप्राइज़ हो डिनर
अगर आपकी पत्नी कामकाजी है तो आप उन्हें बताए बगैर छुट्टी ले लें, घर की अच्छी तरह साफ-सफाई करवा कर सजा दें और फिर तैयार करें डिनर। अपनी पत्नी की दोस्तों और उनके परिवार के सदस्यों को भी डिनर के लिए आमंत्रित करें। शाम को घर आकर जब आपकी पत्नी आपका सरप्राइज़ डिनर प्लान देखेंगी तो यकीनन आपकी इज़्ज़त उनकी और उनकी दोस्तों की नज़रों में और भी बढ़ जाएगी। आज आप दूसरों को भी यह बता ही दें कि आप अपनी पत्नी की कितनी केयर करते हैं।

कार्ड करें मेल
आपकी ज़िंदगी में जो महिलाएं खास जगह रखती हैं, उन्हें ग्रीटिंग कार्ड भी भेज सकते हैं। यह खास महिला आपकी मां व बहन भी हो सकती है और आपकी दोस्त भी। वो कोई ऐसी महिला भी हो सकती है जिसकी प्रेरणा से आज आप किसी ऊंचे मुकाम पर हैं। इस दिन आपको उन्हें यह बताने का मौका भी मिलेगा कि वे आपके लिए कितनी खास हैं। यकीन मानिए आपका कार्ड पाकर वो बेहद खुश होंगी। ऐसा अनएक्सपैक्टिड तोहफा किसी भी महिला को खास होने का अहसास करवा सकता है।

चैरिटी को करें दान
कैलेंडर में 8 मार्च को मार्क कर लें और महिलाओं के उत्थान में लगे एनजीओ को यथा शक्ति दान दें। अगर आपके पास थोड़ा अतिरिक्त समय हो, तो आप किसी संगठन के साथ जुड़ भी सकते हैं, जो युवा महिलाओं को स्पोर्ट और इन्सपायर करती हों। आप ब्रैस्ट अवेयरनैस ग्रुप भी ज्वाइन कर सकते हैं। किसी बच्ची की पढ़ाई का खर्चा भी उठा सकते हैं। कहा भी जाता है कि एक लड़की के साक्षर होने से एक पूरा परिवार साक्षर हो जाता है। अगर आप क्रिएटिव हैं तो चैरिटी के लिए पैम्फलेट्स डिज़ाइन कर सकते हैं  या कोई इवेंट आयोजित करवा कर भी मदद कर सकते हैं। इसके अलावा आपकी ज़िंदगी से जुड़ी महिलाओं के भविष्य के लिए कोई इनवैस्टमेंट कर सकते हैं।