Monday, November 30, 2015

विश्व एड्स दिवस : जानकारी ही बचाव है

विश्व एड्स दिवस :  सावधानी ही बचाव का एकमात्र उपाय

आज विश्व एड्स दिवस है। एड्स का पूरा नाम है 'एक्वायर्ड इम्यूनो डिफिशिएंसी सिंड्रोम।'  ए यानी एक्वायर्ड यानी यह रोग किसी दूसरे व्यक्ति से लगता है। आईडी यानी इम्यूनो डिफिशिएंसी यानी यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता समाप्त कर देता है। एस यानी सिण्ड्रोम यानी यह बीमारी कई तरह के लक्षणों से पहचानी जाती है।

न्यूयॉर्क में 1981 में इसके बारे में पहली बार पता चला, जब कुछ ''समलिंगी यौन क्रिया'' के शौकीन अपना इलाज कराने डॉक्टर के पास गए। इलाज के बाद भी रोग ज्यों का त्यों रहा और रोगी बच नहीं पाए, तो डॉक्टरों ने परीक्षण कर देखा कि इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता खत्म हो चुकी थी। फिर इसके ऊपर शोध हुए, तब तक यह कई देशों में जबरदस्त रूप से फैल चुकी थी।

हर साल इस बीमारी से करीब 2 करोड़ लोग जिंदगी की जंग हार जाते हैं। करोड़ों अभी इसके प्रभाव में हैं। अफ्रीका पहले नम्बर पर है, जहां एड्स रोगी सबसे ज्यादा हैं। भारत दूसरे स्थान पर है और प्रतिदिन इनकी संख्या बढ़ती जा रही है। भारत में पहला एड्स मरीज 1986 में मद्रास में पाया गया। यदि कहीं पता चलता है कि फलाँ व्यक्ति एड्स रोगी है तो उससे परहेज करते हैं, भेदभाव करते हैं।

भारत में यह बीमारी असुरक्षित यौन संबंधों के कारण फैल रही है। भारत में गाड़ियों के ड्राइवर इसे तेजी से फैलाने का काम कर रहे हैं। अमेरिका में समलैंगिकता के कारण यह तेजी से फैली।

कई लोगों को इसकी जानकारी नहीं है कि यह किस तरह फैलती है और इससे बचने के लिए क्या उपाय करना चाहिए। पुरुष की अपेक्षा स्त्री में 20 गुना ज्यादा संक्रमण होने की आशंका होती है। योनि मैथुन की बनिस्बत गुदा मैथुन इसे फैलाने में ज्यादा सहायक होता है। इसका कारण यह है कि गुदा की म्यूकोजा यानी झिल्ली अत्यंत नाजुक होती है और झिल्ली क्षतिग्रस्त होने पर वायरस खून में शीघ्र पहुँच जाते हैं।

क्या है एड्स


* यह रेट्रो वायरस ग्रुप का एक विचित्र वायरस है, यह आरएनए के दो स्टैंडों से युक्त होता है, जो रिवर्स टासक्रिपटेज की सहायता है डबल स्टैंड डीएनए में परिवर्तित हो जाता है और फिर कोशिकाओं के डीएनए में हमेशा के लिए सुप्तावस्था में पड़ा रहता है।

* एचआईवी वायरस के शरीर में प्रवेश करने, शरीर में सुप्तावस्था में रहने की क्रिया, एचआईवी संक्रमण कहलाती है, इस अवस्था में इंफेक्शन तो होता है, किन्तु बीमारी के लक्षण नहीं होते। संक्रमण को बीमारी की अवस्था में पहुंचने में 15 से 20 वर्ष लगते हैं।

* कई वर्षों तक यह मानव शरीर में पड़ा रहता है और अपनी संख्या बढ़ाता रहता है, दूसरी ओर मावन शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति खत्म करता जाता है।

* जब रोग प्रतिरोधक शक्ति खत्म हो जाती है तो फिर यह जागता है और अपना आक्रमण शुरू करता है। साथ ही शुरू होता है वह समय, जब मरीज धीरे-धीरे मौत की ओर जाने लगता है। मरीज की मौत के साथ ही यह संबंधित के शरीर से समाप्त होता है।

एड्स फैलने के कारण 


* असुरक्षित यौन संबंध इसका सबसे प्रमुख कारण है, इससे एड्स के वायरस एड्स ग्रस्त व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति में तुरंत प्रवेश कर जाते हैं।

* बिना जांच का खून मरीज को देना भी एड्स फैलाने का माध्य होता है। खून के द्वारा इसके वायरस सीधे खून में पहुंच जाते हैं और बीमारी जल्दी घेर लेती है।

* नशीले पदार्थ लेने वाले लोग भी एड्स ग्रस्त होते हैं, वे एक-दूसरे की सिरींज-निडिल इस्तेमाल करते हैं, उनमें कई एड्स पीड़ित होते हैं और बीमारी फैलाते हैं।

* यदि मां एड्स से संक्रमित है, तो होने वाला शिशु भी संक्रमित ही पैदा होता है। इस प्रकार ट्रांसप्लांटेशन संक्रमण से भी एड्स लगभग 60 प्रतिशत तक फैलता है। बाकी बचा 40 प्रतिशत मां के दूध से शिशु में पहुंच जाता है।

एड्स के लक्षण 


एड्स के कोई खास लक्षण नहीं होते, सामान्यतः अन्य बीमारियों में होने वाले लक्षण ही होते हैं, जैसे- वजन में कमी होना, 30-35 दिन से ज्यादा डायरिया रहना, लगातार बुखार बना रहना।

एचआईवी नामक विषाणु सीधे श्वेत कोशिकाओं पर आक्रमण कर शरीर के अंतस्थ में उपस्थित आनुवंशिक तत्व डीएनए में प्रवेश कर जाता है, जहाँ इनमें गुणात्मक वृद्धि होती है। इन विषाणुओं की बढ़ी हुई संख्या दूसरी श्वेत कणिकाओं पर आक्रमण करती है। इससे धीरे-धीरे इन श्वेत कोशिकाओं की संख्या घटती जाती है। इसके फलस्वरूप शरीर का प्रतिरोधी तंत्र नष्ट हो जाता है और दूसरे संक्रामक रोगों से बचाव की क्षमता भी क्षीण हो जाती है।

एड्स की जांच

* एलीसा टेस्ट
* वेस्टर्न ब्लॉट टेस्ट
* एचआईवी पी-24 ऐंटीजेन (पी.सी.आर.)
* सीडी-4 काउंट

एड्स का उपचार

* एचआईवी संक्रमित लोगों के लिए आशावान होना अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे भी लोग हैं जो एचआईवी/एड्स से पीड़ित होने के बावजूद पिछले 10 सालों से जी रहे हैं। अपने डॉक्टरों के निर्देशों पर पूरा अमल करें। दवाओं को सही तरीके से लेते रहना और एक स्वस्थ जीवनचर्या बनाए रखने से आप इस रोग को नियंत्रित कर सकते हैं।
* एच.ए.ए.आर.टी. (हाइली एक्टिव ऐंटी रेट्रो वायरस थेरैपी) एड्स सेंटर पर नि:शुल्क उपलब्ध है। यह एक नया साधारण व सुरक्षित उपचार है।

एड्स को लेकर भ्रम

कई लोग सोचते हैं कि एड्स रोगी के साथ उठने बैठने से यह रोग फैलता है तो यह गलत है। यह बीमारी छुआछूत की नहीं है। एड्स का फैलाव छूने, हाथ से हाथ का स्पर्श, साथ-साथ खाने, उठने और बैठने, एक-दूसरे का कपड़ा इस्तेमाल करने से नहीं होता है। एड्स एक रोग नहीं बल्कि एक अवस्था है। इस बीमारी को लेकर समाज में कई भ्रम हैं जिन्हें दूर करना बहुत जरूरी है. जैसे:

एड्स इन सब कारणों से नहीं फैलता

* घर या ऑफिस में साथ-साथ रहने से.
* हाथ मिलाने से.
* कमोड, फोन या किसी के कपड़े से.
* मच्छर के काटने से.

एड्स पीड़ित व्यक्ति के साथ नम्र व्यवहार जरुरी है ताकि वह आम आदमी का जीवन जी सके। कल एड्स का मतलब था जिंदगी का अंत, पर आज इसे एक स्थाई संक्रमण समझा जाता है, जिसे नियंत्रित किया जा सकता है। भविष्य में हो सकता है एड्स का इलाज संभव हो जाए। फिलहाल सावधानी ही इस रोग से बचाव का एकमात्र उपाय है।

Tuesday, November 24, 2015

ऐसे बनाएं अपनी सर्दियों को हॉट

स्टाइल और पर्सनैलिटी का परफेक्ट तालमेल बनाए सर्दियों को हॉट

मौसम के करवट लेने के साथ ही लोगों के ड्रैसिंग स्टाइल में भी चेंज दिखना शुरू हो गया है। बदलते मौसम के साथ ही फैशन के अनुसार चलने वाले लोगों को यह जानने की इच्छा जरूर होगी कि इस बार सर्दियों का फैशन क्या होगा। भीड़ से अलग खुद की पहचान बनाने के लिए स्टाइल और पर्सनैलिटी का बढि़या तालमेल बेहद जरूरी है। अगर आप सिर्फ स्टाइल के पीछे भागेंगी और फैशन काॅपी करती रहेंगी, तो जरुरी नहीं कि आप दूसरों को इंप्रेस कर पाएं। स्टाइल और पर्सनैलिटी का परफेक्ट तालमेल बनाने के लिए और सर्दियों को स्टाइलिश तरीके से बिताने के लिए आपकी वाॅर्डरोब में कौन-सी ड्रैसिस होनी जरूरी हैं, यह आज हम आपको बता रहे हैं।

स्वेटशर्ट्सः 

अपनी वॉर्डरोब में स्वेटशर्ट्स को जरूर शामिल करें। स्वेटशर्ट में आपको कई स्टाइलिश ऑप्शंस मिल जाएंगे। इस बार कुछ नया स्टाइल और ट्रेंड फॉलो करें। डिजिटल प्रिंट्स और पैटर्न ट्राई करें। स्पोर्टी लुक काफी ट्रेंड में है। यह लुक सद्रियों में  आपकी फैशन स्पिरिट को भी बरकरार रखेगा। 


कार्डिगनः 

ढीले पुलोवर और ओवरसाइज़ वाले स्वेटर को बाय बोलें। इसकी बजाय फिटेड कार्डिगन पहनें जो आपके कर्व्स को हाई लाइट करें। कार्डिगन की सबसे अच्छी बात यह है कि यह बेहद वर्सटाइल होता है। यह आपके लुक को स्पेशल और यूनिक बनाता है। काफी हल्के होने के कारण ये पहनने में भी बेहद आरामदायक हैं और इन्हें पहनने के बाद खुद को ज्यादा कपड़ों में पैक करने की जरूरत नहीं है।


स्टोलः 

फैशन ट्रेंड बन चुका स्टोल ईज़ी टू कैरी है और साथ ही यह एथनिक, वेस्टर्न और फ्यूज़न ड्रेसिस के साथ बखूबी मैच हो जाता है, इसलिए सलवार सूट हो, साड़ी या जींस, सबके साथ आप इसे कैरी कर सकती हैं। सर्दी में भी कम बल्की लेयर्स ज्यादा अच्छी लगती हैं और स्टोल इसके लिए बेहतरीन अॉप्शन है। 


क्रॉप्ड जैकेट्स:

एक और स्टाइलिश ऑप्शन जिसे इन सर्दियों में आपके वॉर्डरोब का हिस्सा बनना चाहिए वो हैं क्रॉप जैकट। इनसे आप अपना स्टाइल स्टेटमेंट बरकरार रख सकती हैं। बोल्ड स्टेटमेंट लुक के लिए हाफ-स्लीव्स वाले क्राप जैकेट पहनें। ये टी-शर्ट और ड्रेसेज़, दोनों के साथ बेहद कमाल का लगेगा।

 

केप्सः 

जैकेट या ब्लेज़र पहन कर बोर हो गई हैं तो केप्स ट्राई करें। इसके बिना सर्दियों का आपका वॉर्डरोब अधूरा है। इसमें आप स्टाइलिश तो दिखती ही हैं साथ ही आपकी फेमेनिटी, ग्रेस और एलिगेंस साफ-साफ नज़र आती है।  इन्हें स्किन-टाइट जींस या स्किनी के साथ टाईअप करिए। इसके साथ हाई-हील्स या स्टिलेटोज़ बहुत सुंदर दिखेंगे।   


स्कार्फः 

स्कार्फ एक ज़रूरी फैशन एक्सेसरी बन चुका है। इसकी मदद से आप कई अलग-अलग लुक्स पा सकती हैं। इसलिए अपने वॉर्डरोब में ढेर सारे बुने हुए और प्रिंटेड स्कार्फ शामिल करें। इन्हें अलग अंदाज में वियर करके आप बेहद स्टाइलिश दिख सकती हैं। 


एंकल बूट्सः 

सर्द मौसम में लॉन्ग बूट्स पैरों को सुरक्षा देने के साथ-साथ पर्सनैलिटी को एक स्टाइल स्टेटमेंट भी देते हैं। इसीलिए अगर आपके पास अब तक एंकल बूट्स का कोई भी पेयर नहीं है तो आज इन्हें खरीदने जाएं। स्वेड लेदर से बने क्लासिक लुक वाले एंकल बूट्स से आपको स्पोर्टी और क्लासिक लुक मिलेगा। 

-मीनाक्षी गांधी

स्टाइल स्टेटमेंट देते लॉन्ग बूट्स

सर्दियों में लॉन्ग बूट्स ट्रेंड में 

सर्दियों के मौसम में कपड़ों के पहनने-ओढ़ने का ही नहीं, फुटवियर्स का भी अंदाज बदल जाता है। सर्दियों के बदलते फैशन में लॉन्ग बूट्स ट्रेंड में हैं। सर्द मौसम में ये पैरों को सुरक्षा देने के साथ-साथ पर्सनैलिटी को एक स्टाइल स्टेटमेंट भी देते हैं। इसीलिए लड़कियों का रुझान लॉन्ग बूट्स की तरफ ज्यादा है। 

कॉलेज हो या पार्टी, हर जगह ग‌र्ल्स इन्हीं फुटवियर्स में दिख रही हैं। ये सभी तरह की ड्रेसिस के साथ फबते हैंं। यही वजह है कि हर अवसर पर ग‌र्ल्स लॉन्ग बूट्स में खुद को कन्फर्टेबल फील करती हैं। इन दिनों लॉन्ग बूट्स में साइड और बैक साइड जिप से लेकर साइड चेन, फैदर, पोल्का डॉट्स, बेल्ट स्टाइल, एनीमल प्रिंट जैसी कई वेरायटी भी इनमें उपलब्ध हैं। इनमें आकर्षक बटनों और लेस आदि का चलन भी है, जो देखने में काफी सुंदर लगते हैं। 

जामुनी, नीले, सुर्ख लाल, हरे आदि कई रंगों के बूट्स बाजार में देखने को मिल रहे हैं।डिजाइनर बूट्स में हाई हील, कैजुअल, एनिमल प्रिंट, मिड काफ, लेंथ बूट्स जैसी ढेरों वैरायटीज है, लेकिन हाई हील डिमांड में अधिक है। इसका कारण यह है कि हाई हील बूट्स हर तरह की ड्रेस के साथ अच्छे लगते हैं। यदि आपकी लंबाई कम है तो इन्हे जरूर कैरी करे। जींस और स्क‌र्ट्स में यह खास लुक देते है।

लॉन्ग बूट्स लेदर, रैग्जीन, वेलवेट, डेनिम आदि कई तरह के फैब्रिक में उपलब्ध हैं। आप अपनी पसंद और कंफर्ट के मुताबिक इन्हें ले सकती हैं। अगर आप पहली बार बूट्स खरीद रही हैं तो शुरुआत एंकल लेंथ बूट्स से करें। बूट्स खरीदते वक्त अपनी लंबाई का भी ध्यान रखें। अगर आपकी लंबाई कम है तो आप नी लेंथ बूट्स न खरीदें, आपको एंकल लेंथ बूट्स ही सूट करेंगे, वहीं अगर आप लंबी हैं तो नी लेंथ या फिर थाई लेंथ बूट्स भी आप पर खूब फबेंगे।

अगर आप नी-हाई बूट्स के साथ शॉर्ट स्कर्ट पहन रही हों तो स्टाइलिश लुक के लिए ओवर द नी सॉक्स पहनें और सॉक्स का कुछ हिस्सा एक्सपोज होने दें। स्कर्ट्स, बूट्स और ओवर द नी सॉक्स को आउटर लेयर में रखें। आप अपनी स्किन फिट जींस या लेगिंग को इनर लेयर में रखें। जेगिंग्स को बूट्स में भी टक कर सकती हैं ये आपको स्टाइलिश दिखाता है।

ऐसा नहीं है कि लॉन्ग बूट्स खरीदने के लिए आपको अधिक पैसे खर्च करने पड़ेंगे। आप ब्रांडेड बूट्स की बजाय नॉन ब्रांडेड खरीद सकती है। देसी कंपनियों ने भी लॉन्ग बूट्स के इंटरनेशल डिजाइन पेश किए हैं, जो आपके बजट और पसंद के अनुसार आसानी से मिल जाएंगे।
-मीनाक्षी गांधी

डबल डेनिम में स्टाइल का सफर

डबल डेनिम से पाएं सिंपल लेकिन स्टाइलिश लुक

आजकल डेनिम पर डेनिम पहनने का ट्रेंड छाया हुआ है। डबल डेनिम आपको दोगुना खूबसूरत लुक देता है। अगर आप भी ट्रेंड्स को फॉलो करना पसंद करती हैं और फैशन के अनुसार चलना चाहती हैं तो इस स्टाइल को जरूर ट्राई करें। अगर आप यह नहीं जानतीं कि डबल डेनिम कैसे वियर करें तो हम आपको बता रहे हैं कुछ टिप्स जिनसे आप एक्सपेरिमेंट करके नया लुक पा सकती हैं…

डबल ब्ल्यू की बजाय आप डेनिम के अलग-अलग शेड्स में एक्सपेरिमेंट कर सकती हैं। एक रंग की डेनिम जैकेट को किसी दूसरे रंग की जींस के साथ टीम करें। जैसे व्हाइट जींस के साथ ब्ल्यू डेनिम जैकेट या ब्लैक जींस के साथ chambray शर्ट। ब्लैक जींस लाइट-वॉश डेनिम जैकेट के साथ बेहद स्टाइलिश दिखती है। बस इसके साथ प्लेन व्हाइट टीशर्ट एड कर लें और ब्लैक हील्स के फुटवियर। क्यों है न यह सिंपल लेकिन स्टाइलिश लुक।

प्रिंटिड जींस प्लेन डेनिम जैकेट के साथ टीम करें और पाएं एक खूबसूरत अंदाज। अपनी distressed denim यानी रिप्ड या पुरानी डेनिम को फेमिनीन लुक वाली लेस या एम्ब्रॉयडिड डेनिम जैकेट के साथ वियर करें। इस लुक को आप गर्ली टॉप और स्नीकर से पूरा करें। आप डेनिम जैकेट के साथ फेमिनीन टॉप और जींस पहन सकती हैं। साथ में पहनें हाई हील्स। है ना आपका कैजुअल रफ-टफ गर्ली लुक।
 
डेनिम शेड्स को अपने बॉडी पार्ट्स को फ्लैटर करने या छुपाने के लिए यूज़ करें। जनरल रूल है कि डेनिम के लाइट शेड्स देखने वाले का ध्यान उन बॉडी पार्ट्स की ओर आकर्षित करते हैं जिन्हें इन्होंने कवर किया होता है, जबकि डार्कर शेड्स स्लिमिंग इफैक्ट क्रिएट करते हैं। इसका मतलब यह हुआ कि अधिकतर महिलाओं को डार्क कलर की डेनिम जींस और लाइटर डेनिम टॉप या जैकेट पहनना चाहिए। इस तरह डबल डेनिम आपको ज्यादा अट्रैक्टिव लुक देगा।

डबल डेनिम में सेम वेट और वॉश के डेनिम पहनें। मैचिंग इसमें अच्छी नहीं लगती। क्यूट लेकिन स्मार्ट लुक को पाने के लिए luxe-looking items जैसे स्टेटमेंट हील्स, tuxedo blazer और फैबुलस रेड लिपस्टिक को बिंदास अपनी अाउटफिट में शामिल करें। बस एक बढ़िया हील्स से लुक पूरा करें। ये स्टाइल्स आप पर खूब जंचेगा। घुटनों तक लंबी डेनिम स्कर्ट और tucked-in डेनिम शर्ट परफैक्ट है। खूबसूरत लुक एड करने के लिए इसके साथ न्यूड या ब्लैक हील्स पहनें।

स्ट्रेट लेग जींस के साथ शर्ट या क्रॉप्ड डेनिम जैकेट आपको क्लासिक लुक देगी। सर्दियों में अपनी डेनिम शर्ट के नीचे ब्लैक पोलो टीशर्ट पहनें और कंधे पर लहराएं क्लासिक ब्राउन लैदर बैग। आपका स्टाइलिश डबल डेनिम लुक कमाल का दिखेगा। याद रखें डबल डेनिम के साथ कभी डेनिम शूज़, डेनिम हैट, डेनिम हैंडबैग या कोई और डेनिम एक्सेसरी कैरी न करें। यह आपके लुक को खराब कर देंगे।
-मीनाक्षी गांधी

स्टोलः सर्दी में भी बना रहेगा आपका टशन

वर्सेटाइल स्टोल से पाएं डिसेंट और चिक लुक

सर्दियों के दस्तक देते ही फैशन का फंडा बदल जाता है। युवाओं के पसंदीदा स्टोल का फैब्रिक और पैटर्न दोनों ही बदल जाते हैं। वूलन से बने डार्क और ब्राइट शेड्स के स्टोल फैशनेबल होने के साथ बहुत गर्म भी होते हैं। ये खूबसूरत स्टोल सर्दी से आपको सेफ तो रखते ही हैं, साथ ही डिसेंट और चिक लुक भी देते हैं। ये वर्सेटाइल हैं इसलिए स्कर्ट या जींस-केपरी जैसी वेस्टर्न ड्रेसिस पर भी उतना ही सुंदर दिखते हैं जितना कि सलवार सूट और साड़ी जैसी एथनिक वियर्स पर। यही वजह है कि बाजार में इनकी बड़ी रेंज है, जो हर एज ग्रुप को अपनी ओर आकर्षित कर रही है।

स्टोल की एक खासियत यह भी है कि यह यूनिसेक्स फैशन में आता है। मेन और वुमन दोनों पर स्टोल बेहद खूबसूरत दिखता है। कलरफुल, बोल्ड प्रिंट्स या सिंपल मोनोक्रोम स्ट्राइप्स या चैक्स, आप अपनी पसंद और अवसर के अनुसार किसी भी स्टोल का चुनाव कर सकते हैं। स्टोल आपका लुक पूरी तरह बदल सकता है। सिंपल कुर्ता-पाजामा के साथ अगर ब्राइट कलर के स्टोल को कैरी किया जाए तो यह आपकी आउटफिट को और भी खूबसूरत बना देगा। अल्ट्रा माचो लुक के लिए अपने स्मार्ट स्टोल को डेनिम जैकेट के साथ पेयर करें। फ्रिंज्ड स्टोल को अगर सही तरीके से न पहना जाए तो यह अॉड दिख सकता है। इसलिए सही ढंग से इसे पहनें।

शादी के समय में चाहे वह मेहंदी समारोह हो या संगीत का पुरूष एथनिक वियर के साथ स्टोल को वेस्टर्न अंदाज में पहनें तो और भी ज्यादा अच्छे लग सकते हैं। यकीन मानें सिर्फ एक स्टोल के साथ आपकी ट्रैडिशनल आउटफिट सुपर कूल दिख सकती है। यह स्टाइल आपको इंडो-वेस्टर्न लुक देगा। लड़कों पर लंबे अंगरखा के साथ ट्राउजर और छोटे अंगरखे के साथ जोधपुरी दोनों ही खूब जचेंगे। सिल्क की धोती और कुर्ते के साथ स्टोल का कांबिनेशन खासतौर पर शादी की रस्म के दौरान पहने जाना वाला बेहतरीन विकल्प है। अचकन और चूड़ीदार पैजामे के साथ स्टोल आपको बेहद रॉयल लुक देगा। साथ में पंजाबी जूती जरूर ट्राइ करें। खास ट्रैडिशनल शेरवानी के साथ प्रिंटिड सिल्क या पश्मीना स्टोल अॉप्ट करें। 

कूल और स्मार्ट लुक को ध्यान में रखते हुए मार्केट में कई रंगों और डिजाइन के वूलेन स्टोल कम कीमत और ढेरों वेरायटी में उपलब्ध हैं, जिनको आप अपनी मैचिंग और च्वाइस के हिसाब से खरीद सकते हैं। कश्मीरी स्टोल को कॉटन व वूल को मिलाकर बनाया जाता है। पशमीना स्टोल सबसे सॉफ्ट व हल्की होती है। लाइट वेट होने की वजह से इसे यंगस्टर्स पसंद करते हैं। रॉ सिल्क स्टोल हाथ से बनाए हुए होते हैं। ये स्टोल लड़कियों को बेहद पसंद है क्योंकि ये पहनने में मुलायम और दिखने में बेहद खूबसूरत होते हैं। फेदर स्टोल बेहद फैंसी होती हैं। हैंडलूम स्टोल हाथ से बनी होती हैं, जो आपके विंटर लुक को एक अलग अंदाज देती हैं। ऑक फॉरेस्ट सिल्क स्टोल में सिल्क की सॉफ्टनेस और वूल की गर्माहट का मिश्रण होता है। 

स्टोल को आप अलग-अलग स्टाइल में पहन सकते हैं। स्टाइलिश लुक के लिए ओवरकोट के साथ स्टोल को गले में डालें। इन्हें गांठ बांधकर या फिर पिनअप करके भी पहना जा सकता है। जींस और शर्ट के साथ सिंपल पोल्का डॉट्स वाले स्टोल को गले में बांध सकते हैं। कैजुअल दिखने के लिए आप स्टोल को गले में बिना गांठ बांधे भी डाल सकती हैं। इसे आप नेक में राउंड पैटर्न और टॉप पर क्रॉस स्टाइल में वियर कर सकते हैं। अच्छी क्वालिटी के स्टोल आप इंटरनेशनल ब्रांडस से भी ले सकती हैं। यदि आप स्टोल पर बहुत ज्यादा इंवेस्ट नहीं करना चाहती तो लोकल मार्किट से आपको 100 रुपए से लेकर 500 रुपए तक में स्टोल मिले जाएंगे। इसलिए ऐसा स्टोल खरीदें जो आपकी पर्सनैलिटी और ड्रेस से मैच करता हो।
-मीनाक्षी गांधी

Tuesday, November 3, 2015

सेट पैटर्न में क्रिएटिविटी एड करके दिखें गॉर्जियस एंड ट्रेंडी

तोड़ें पुराने फैशन ‘रूल्स’   
बनें खुद अपनी ‘स्टाइलिस्ट’


सेट ट्रेंड्स को फॉलो करना ही सिर्फ फैशन नहीं है। कहीं आप भी तो ट्रेंड्स के अकॉर्डिंग खुद को स्टाइल नहीं करती हैं। अगर ऐसा है तो जान लें कि जो ट्रेंड में है उसे बिल्कुल डिटो कॉपी करना जरूरी नहीं है। आप खुद ट्रेंड सैटर बन सकती है और अपना स्टाइल खुद बना सकती हैं। स्टाइलिस्ट और स्टाइल आइकॉन बनने के लिए जरूरी है कि आपमें क्रिएटिविटी हो, लेकिन फैशन की दुनिया पर निगाह रखना भी जरूरी है। सेट पैटर्न में अपनी क्रिएटिविटी एड करके आप गॉर्जियस और ट्रेंडी दिख सकती हैं।

1. ब्राइट कलर्स को एक-साथ न पहनें


दो चटख रंगों को एक साथ कैरी करना न तो हमेशा सही होता है और न ही गलत।  ब्राइट कलर्स आई कैचिंग होते हैं, इसलिए जो चीज़ मैटर करती है वो यह है कि आप कलर-ब्लॉकिंग को कितने बेहतर ढंग से अप्लाई कर पाती हैं। कभी-कभी सेम कलर टोन में पेयर कर सकती हैं तो कभी कॉम्लीमेंट्री कलर्स चुनना बेहतर अॉप्शन रहता है। लेकिन दो ब्राइट शेड्स को अगर परफेक्ट डिटेलिंग के साथ पहना जाए तो कोई भी आउटफिट आपकी लुक्स को कॉम्पलीमेंट करेगी। ब्राइट कलर की ड्रेस पहन रही  हैं, तो एक्सेसरीज़ और फुटवियर में कॉम्प्लीमेंट्री कलर चूज़ करें।

 2. लंबी हैं तो हील्स जरूरी नहीं


हील्स आपके लुक का स्पार्क बढ़ाने का काम करती हैं। हाई हील्स स्टाइलिश आउटफिट्स के स्मार्ट लुक को ग्लैमरस लुक में तब्दील करती है। इसलिए अगर आपकी हाईट बढ़िया है तो ऐसा सोचना कतई सही नहीं है कि हील्स आपके लिए नहीं हैं। ट्यूनिक्स, स्कर्ट और वनपीस जैसी कूल स्टाइलिश आउटफिट्स के साथ हाई हील्स परफैक्ट कांबिनेशन हैं। हील्स न सिर्फ आपके लुक में कुछ इंच एड करती हैं,  आपके पैरों की खूबसूरती को बढ़ाती हैं, बल्कि आपको स्टाइलिश लुक भी देती हैं। इसलिए सुनी-सुनाई बातों पर ध्यान न दें, अपने लुक्स पर फोकस करें।
  

3. हॉरीज़ॉन्टल स्ट्राइप्स और बड़े प्रिंट्स फैटी लुक देते हैं


फालतू बातों पर ध्यान न दें, फैटी लुक से बचने के लिए जरूरी है इन्हें ग्रेसफुली कैरी करने का सही तरीका जानना। फैशन फंडा यह है कि एक स्टाइल को स्पार्कलिंग बनाने के लिए दूसरे स्टाइल के साथ बेहतर मैचिंग करने के तरीके जानें। अगर बॉटम में स्ट्राइप्स कैरी कर रहे हों तो अपर पार्ट प्लेन रखें। यही रूल तब फॉलो करें जब स्ट्राइप्स अपर पार्ट में पहन रही हों। प्लेन  जैकेट और ब्लेज़र प्रिंटेड और स्ट्राइप वियर्स को बैलेंस लुक देते हैं। आप भी बोल्ड लुक के लिए ब्राइट कलर्स की स्ट्राइप्स और बोल्ड प्रिंट्स के कॉम्बीनेशन चुन सकती हैं।  

4. 30 की हैं तो मिनी स्कर्ट न पहनें


लोगों की फालतू बातों पर ध्यान देना बंद करें, आप हर वह आउटफिट कैरी कर सकती हैं, जो आपको पसंद है और जो आपकी बॉडी पर फबता है। उम्र तो सिर्फ नंबर गेम है। इसको अपनी स्टाइल पर हावी न होने दें। ब़़ॉलीवुड डीवाज़ इस मामले में आपकी रोल मॉडल्स हो सकती हैं। उन्होंने फिटनेस और स्टाइल से उम्र के असर को दूर रखा है। आप भी अपनी बॉडी की केयर करें, एक्सट्रा फैट को खतम करें और बिंदास मिनी स्कर्ट और दूसरी शॉर्ट ड्रैसिस पहनें, फिर देखना लोगों के मुंह खुले के खुले ही रह जाएंगे और वे कुछ बोल नहीं पाएंगे और अगर बोलेंगे भी तो सिर्फ आपकी तारीफ में ही।

5. शूज़ और क्लच की मैचिंग


क्लच और फुटवियर न सिर्फ आपकी लुक में ग्लैम एड करते हैं बल्कि इनसे आउटफिट में भी वॉल्यूम एड होती है। इनकी मैचिंग कूल रहती है, पर क्या जरूरी है इसी सेट पैटर्न को ही हमेशा फॉलो किया जाए। मिक्स एंड मैच का थोड़ा सा डेयर कीजिए। आप बेल्ट से मिलता-जुलता या ड्रेस के कन्ट्रास्ट लेकिन कॉम्लपीमेंटिंग कलर चुन सकती हैं। लैपर्ड प्रिंट और रेड एक बेहतरीन चिक कॉम्बो है। सिल्वर क्लच और गोल्ड हील्स देखने वालों की आंखों को चौंधिया देंगी। सॉफिस्टिकेटिड लुक बनाए रखने के लिए टैक्सचर पर ध्यान देना जरूरी है। शूज़ और क्लच का आपका सही चुनाव आपके लुक को वाओ बना देगा।
                                                                         -मीनाक्षी गांधी

वेट लॉसः जानें, मिथक और सच्चाई

वेट लॉस से जुड़े मिथ और उनसे जुड़ी सच्चाई

बढ़ते वजन से परेशान होकर लोग वेट लॉस करने के लिए कई तरह के प्रयास करते हैं। इसके लिए लोग एक्सरसाइज से लेकर खुद को भूखा मारने तक से परहेज नहीं करते। लेकिन इसका नतीजा वेट लॉस न होकर कुछ और ही निकलता है। दरअसल जानकारी और तथ्यों के अभाव में लोग सुनी सुनाई बातों पर अमल करते हैं और वज़न कम करने के अपने टार्गेट को अचीव नहीं कर पाते हैं। वेट लॉस से जुड़े कुछ ऐसे ही मिथ्स और उनसे जुड़ी सच्चाईयों के बारे में आपको बता रहे हैं।


1. मिथकः भूखे रहना वजन कम करने का अच्छा तरीका

सच्चाईः दिन में एक बार खाने से हमारी बॉडी स्टारवेशन मोड (भुखमरी) में चली जाती है। ऐसे में जब हम कुछ खाते हैं तो वो तुरंत बॉडी फैट में तब्दील होकर चर्बी के रूप में स्टोर हो जाता है। यह भोजन हमारे मेटाबोलिज्म को भी धीमा कर देता है और हमारा वजन कम होने की बजाय बढ़ जाता है। हमें दिन में कम-से-कम 5 मील्स (तीन फुल मील्स और दो स्नैक्स) जरूर खाने चाहिए। स्टडी बताती हैं कि जो लोग ब्रेकफास्ट नहीं करते या कम बार खाते हैं, वे उन लोगों से ज्यादा मोटे होते हैं, जो कई बार थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खाते हैं।

2. मिथकः केवल फल खाने से कम होगा वजन

सच्चाईः दिन भर सिर्फ फल खाने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है जिससे देखने में वजन कम लगता है। अगर आप सिर्फ फल ही खा रहे हैं तो इसका अर्थ है कि आपके शरीर में कार्बोहाइड्रेड की अधिकता हो रही है। एक स्तर के बाद यह कार्बोहाइड्रेड भी शरीर में जमा होने लगेगा और आपका वजन बढ़ेगा। इसके अलावा कुछ फल जैसे सेब में फ्रुकटोज (शुगर) ज्यादा होता है, इन्हें ज्यादा खाने से आपका वजन घटने की बजाय बढ़ जाएगा। 

3. मिथकः कम कैलोरी वाला भोजन कितना भी खा सकते हैं

सच्चाईः कम कैलोरी के भोजन में भी कैलोरी तो होती ही है और इसकी अधिक मात्रा लेने से आपका कैलोरी इनटेक ज्यादा हो जाएगा और वज़न पर आप कंट्रोल नहीं रख पाएंगी। दरअसल, कैलोरी को बर्न करना भी जरूरी होता है, चाहे हम जो भी खाएं।

4. मिथकः हाई प्रोटीन, लो कार्बोहाइड्रेट डाइट लेना हेल्दी

सच्चाईः वजन घटाने के लिए कई बार लोग हाई प्रोटीन और लो कार्ब डाइट लेने लगते हैं, जबकि हमें हमेशा बैलेंस्ड डाइट लेनी चाहिए, जिसमें कार्ब, प्रोटीन, फैट, मिनरल्स आदि सही मात्रा में हों। इस तरह की डाइट से फैट लॉस के बजाय मसल लॉस होता है, जिससे फौरी तौर पर वजन कम होता है, जो बाद में वापस आ जाता है। विभिन्न फूड्स से अलग-अलग तरह के हैल्थ बैनेफिट्स मिलते हैं, इसलिए डाइट में सभी हैल्दी फूड्स को शामिल करना जरूरी है।

5. मिथक- ग्रीन टी कैलोरी और फैट को बर्न करता है

सच्चाई: वेट लूज़ करने में ग्रीन टी सहायक तो है, लेकिन एक हद तक। यह तब तक फायदेमंद है जब तक कि आप दिन में तीन कप से अधिक और खाली पेट इसे नहीं पीते। ग्रीन टी में ज्यादा मात्रा में कैफीन नहीं होता लेकिन जब आप इसे तीन कप से अधिक पीने लगते हैं तो इसमें मिली कैफीन की छोटी सी मात्रा आपके शरीर को नुकसान पहुंचाने लगती है। इसकी अति से अनिद्रा, चिंता, चिड़चिड़ापन और शरीर में आयरन की कमी हो जाती है।

6. मिथकः मिल्क और मिल्क प्रॉडक्ट से बचना चाहिए

सच्चाईः वजन कम करने के लिए डेयरी प्रॉडक्ट्स छोड़ देने की धारणा गलत है। कुछ लोग सोचते हैं कि मलाईयुक्त दूध में पानी मिलाने से फैट कम हो सकता है, लेकिन यह भी गलत है। याद रखें पानी मिला देने से अन्य पोषक तत्व भी घुल जाते हैं। लिहाजा सबसे अच्छा तरीका यही है कि दूध से मलाई निकाल लें और फुल क्रीम की बजाय स्किम्ड या फैट फ्री दूध पिएं। स्किम्ड मिल्क में अन्य पोषक तत्व बने रहते हैं। 

7. मिथकः पानी पीने से वज़न कम करने में मदद मिलती है

सच्चाईः पानी से वेट लूज़ नहीं होता लेकिन इससे आप हाइड्रेटिड रहते हैं और कम खाते हैं। अच्छी हैल्थ के लिए पानी बेहद जरूरी है। कई बार प्यास लगी होती है और हम भूख समझ लेते हैं और स्नैक ज्यादा खा लेते हैं। पानी पीने से भोजन का इनटेक कम हो जाता है। रोज़ाना करीब 1.2 लीटर तरल की हमें जरूरत होती है।

8. मिथकः कठोर एक्सरसाइज़ वेट लॉस का एकमात्र तरीका है

सच्चाईः कठोर एक्सरसाइज़ से ही वेट लूज़ हो, यह जरूरी नहीं है क्योंकि वेट लॉस के लिए रूटीन में रैगुलर फिज़िकल एक्टीविटी जरूरी है जिसका आप लंबे समय तक पालन कर सके। 19 से 64 साल के व्यस्कों को हर हफ्ते कम से कम 150 मिनट फिजिकल एक्टिविटी में लगाने चाहिए। इस दौरान वे फास्ट वॉक या साइक्लिंग कर सकते हैं। वेट लूज़ करने के लिए जितनी कैलोरी आप कंज़्यूम करते हैं उससे ज्यादा बर्न करने की जरूरत होती है। 

9. मिथकःनॉनवेज खाने से तेजी से घटेगा वजन

सच्चाईः नॉनवेज में खास पोषक तत्व नहीं होते और सेचुरेटेड फैट भी भारी मात्रा में होता है, इससे वज़न तेजी से बढ़ता है। एक सर्च के मुताबिक वेज खाने वाले नॉनवेज खाने वालों की तुलना में 30 फीसदी ज्यादा वेट लॉस करते हैं। यही नहीं शाकाहारी लोगों के शरीर में बेड कोलेस्ट्रॉल कम होता है और गुड कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है जबकि नॉनवेज के संबंध में ऐसा नहीं होता। 

10. मिथकः वजन कम करने वाले प्रॉडक्ट्स असरदार

सच्चाईः वजन घटाने का कोई शार्ट कट नहीं है। वजन कम करने वाले प्रॉडक्ट्स जैसे कि बेल्ट, सोना बाथ, पिल्स आदि वजन कम करने में असरदार नहीं हैं। बाजार में मिलने वाली दवाइयों से वजन घटाना सेहत को मंहगा पड़ सकता है। अगर इनकी मदद से वजन कम होता भी है तो बाद में लौट आता है। ज्यादातर प्रोग्राम और प्रॉडक्ट फैट की बजाय मसल्स और वॉटर लॉस करते हैं।

11. मिथकः वेट मशीन दिखा रही है तो कम हो रहा है वजन

सच्चाईः बार-बार वजन मापने की मशीन पर चढ़कर वजन देखने से वजन की सही तस्वीर पता नहीं चलती। शरीर से पानी, मसल्स या फैट का लॉस होने से भी वजन कम नजर आ सकता है। वजन कम होने की असली पहचान फैट लॉस होना है, न कि वेट लॉस। इसके लिए बॉडी कंपोजिशन एनालिसिस कराना चाहिए।

12. मिथकः कुछ भोजन खाने से कैलोरी बर्न होती है

सच्चाईः इस बारे में परस्पर विरोधी जानकारी है कि कुछ फूड्स के सेवन से मैटाबॉलिक रेट बढ़ता है जिससे ज्यादा कैलोरी बर्न होती है। अगर कुछ फूड्स के सेवन से मैटाबॉलिक रेट बढ़ता भी है तो भी इसकी मात्रा इतनी कम होती है कि ये कोई चमत्कार नहीं कर सकते। इससे बेहतर है, वेट लिफ्टिंग जिससे मसल्स बनते हैं जिनसे आपकी कैलोरी तब भी बर्न होती रहती है जब आप आराम करते हैं। फाइबर का इनटेक बढ़ाना बढ़िया अॉप्शन है क्योंकि यह सिस्टम में ज्यादा समय तक रहता है और एकस्ट्रा पाउंड्स भी कम करता है। 
-मीनाक्षी गांधी